Skip to content🔹हड़प्पा की खोज
- सन् 1921 में पुरातत्वविदों ने पंजाब प्रांत में हड़प्पा नामक स्थल से एक खंडहर खोजा।
- अवशेषों के अध्ययन से ज्ञात हुआ कि यह एक विकसित नगरीय सभ्यता के अवशेष हैं।

🔹 मोहनजोदड़ो
- इसी प्रकार सिन्ध प्रांत में एक अन्य स्थल मिला जिसे मोहनजोदड़ो कहा गया।
- मोहनजोदड़ो का अर्थ है — “मृतकों का टीला”।
- यहाँ से भी सुनियोजित नगर, पक्की सड़कें, नालियाँ और भवनों के अवशेष मिले।
🔹 सिन्धु घाटी सभ्यता
- ये अवशेष सिन्धु नदी की घाटी में पाए गए, इसलिए इसे सिन्धु नदी घाटी सभ्यता कहा गया।
- चूँकि सबसे पहले अवशेष हड़प्पा से मिले, इसलिए इसे हड़प्पा सभ्यता भी कहते हैं।
- इस सभ्यता के अनेक स्थल आज के पाकिस्तान में स्थित हैं।
🔹 भारत में प्रमुख स्थल
- रोपड़ — पंजाब (भारत)
- कालीबंगा — राजस्थान (भारत)
- लोथल — गुजरात (भारत)
🔹 काल एवं महत्व
- यह एक काँस्य युगीन सभ्यता थी।
- सिन्धु सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है।
- यह भारत की पहली नगरीय सभ्यता मानी जाती है।
🔹 कृषि एवं वस्त्र
- कपास की खेती सबसे पहले सिन्धु सभ्यता के लोगों ने की।
- लोग सूती कपड़ों का प्रयोग करते थे — यह उस समय की उन्नत कृषि व कारीगरी को दर्शाता है।
🔹 लिपि
- सामान्यतः भारतीय लिपियाँ बाएँ से दाएँ लिखी जाती हैं।
- लेकिन हड़प्पा की लिपि दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी (अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी)।
🔹 व्यापार

- लोथल से प्राप्त बंदरगाह (Dockyard) के अवशेष बताते हैं कि
- ये लोग नदी व समुद्र मार्ग से व्यापार करते थे।
- दूर-दराज़ के देशों से संपर्क था।
✍️ संक्षेप में
- खोज: 1921, हड़प्पा
- सभ्यता: नगरीय, काँस्य युगीन
- विशेषताएँ: नगर-योजना, कपास, व्यापार, अलग लिपि
- महत्व: भारत की पहली नगरीय सभ्यता