⏳ इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत – कक्षा 6 SST अध्याय 4 (नोट्स)
I. ऐतिहासिक समय की गणना
- आधार: ऐतिहासिक समय की गणना ईसा मसीह के जन्म (जिसे लगभग वर्ष 0 माना जाता है) के आधार पर की जाती है।
- ईस्वी/सा.सं. (AD/CE): ईसा मसीह के जन्म के बाद के वर्षों को आगे गिना जाता है (जैसे: 2024 ई./सा.सं.)।
- ईसा पूर्व/सा.सं.पू. (BC/BCE): ईसा मसीह के जन्म के पहले के वर्षों को पीछे की ओर गिना जाता है (जैसे: 323 ईसा पूर्व)।
- नोट: ई.पू. और ई. के बीच वर्षों की गणना के लिए, दोनों संख्याओं को जोड़कर 1 घटाया जाता है (क्योंकि कोई ‘वर्ष 0’ नहीं होता है)।
II. इतिहास के स्रोत (Sources of History)
इतिहासकार अतीत को समझने के लिए विभिन्न सुरागों या स्रोतों का उपयोग करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे एक जासूस करता है।
| स्रोत का प्रकार | उदाहरण और प्राप्त जानकारी |
| भौतिक अवशेष (Material Remains) | कलाकृतियाँ (Artifacts): पुराने सिक्के, हथियार, औजार, आभूषण, बर्तन। इनसे उस युग की सामग्री, कौशल और कला की जानकारी मिलती है। |
| स्थापत्य (Architecture) | इमारतें, गुफाएँ, शैलाश्रय। इनसे उस काल की वास्तुकला और लोगों के रहन-सहन का पता चलता है। |
| लिखित/अभिलेखी स्रोत (Written Sources) | पुरानी पुस्तकें, पांडुलिपियाँ, डायरियों की प्रविष्टियाँ, शिलालेख, अभिलेख। इनसे शासकों, संस्कृति और समाज के बारे में विस्तृत ज्ञान मिलता है। |
| मौखिक परंपराएँ (Oral Traditions) | कहानियाँ, लोकगीत, और पूर्वजों की स्मृतियाँ। इनसे लोगों के दैनिक जीवन और विश्वासों की जानकारी मिलती है। |
III. आदि मानव का जीवन
- निवास: ये समूह गुफाओं, चट्टानी आश्रयों और अस्थायी शिविरों में रहते थे।
- जीवन शैली: वे मुख्य रूप से शिकारी-संग्राहक थे—भोजन के लिए शिकार करते थे और फल-फूल इकट्ठा करते थे।
- प्रगति: बाद में उन्होंने आग का उपयोग करना, खेती करना और जानवरों को पालना सीखा, जिससे वे नदियों के पास स्थायी कृषक समुदाय के रूप में बसने लगे।
IV. प्रमुख शब्दावली
- शैलाश्रय: पत्थर की बड़ी चट्टानों या गुफाओं के नीचे प्राकृतिक रूप से बने आश्रय स्थल, जहाँ आदि मानव रहते थे और चित्रकला करते थे।
- हीरो स्टोन / वीरगल: युद्ध में शहीद हुए या बहादुरी दिखाने वाले नायकों की याद में बनाए गए नक्काशीदार पत्थर।
इतिहास जानने के स्रोत

1️⃣ ऐतिहासिक काल क्या है?
जिस काल (समय) के इतिहास के बारे में हमें लिखित, मुद्रित एवं पढ़ी जा सकने वाली सामग्री से जानकारी मिलती है, उसे ऐतिहासिक काल कहते हैं।
इस काल के प्रमाण हमें लेखों, मुद्राओं, साहित्य, अभिलेखों और विदेशी यात्रियों के विवरणों से प्राप्त होते हैं।
2️⃣ ऐतिहासिक स्रोतों का वर्गीकरण
इतिहास जानने के स्रोतों को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है—
- पुरातात्त्विक (भौतिक) स्रोत
- साहित्यिक स्रोत
3️⃣ पुरातात्त्विक (भौतिक) स्रोत
ये वे स्रोत हैं जो खुदाई या भौतिक रूप में प्राप्त होते हैं।
(क) मुद्राएँ (Coins)
- मुद्राओं से हमें:
- तत्कालीन शासक का नाम
- शासन काल
- धातु (सोना, चाँदी, ताँबा)
- कला एवं आर्थिक स्थिति
- से संबंधित जानकारी मिलती है।
(ख) लेखन सामग्री
- वृक्षों के चौड़े पत्ते
- भोजपत्र – एक विशेष वृक्ष की छाल
- ताड़पत्र – दक्षिण भारत में अधिक प्रचलित
- ताम्रपत्र (Copper Plate) – ताँबे के टुकड़े जिन पर लेख लिखे जाते थे
(ग) अभिलेख (Inscriptions)
- स्तम्भ लेख – पत्थर के खम्भों पर लिखे लेख
- शिलालेख – पत्थर की बड़ी चट्टानों पर लिखे लेख
🔹 उदाहरण:
अशोक का रुम्मिनदेई अभिलेख, जो लुम्बिनी (नेपाल) से प्राप्त हुआ।
इसमें अशोक ने घोषणा की कि लुम्बिनी में उपज का आठवाँ भाग कर के रूप में लिया जाएगा।
4️⃣ साहित्यिक स्रोत
लिखित ग्रंथों के माध्यम से प्राप्त जानकारी को साहित्यिक स्रोत कहते हैं।
(क) धार्मिक साहित्य
| ग्रंथ | रचयिता | जानकारी |
|---|---|---|
| वेद | ऋषि-मुनि | आर्यों, समाज, धर्म |
| रामायण | वाल्मीकि | आदर्श जीवन, समाज |
| महाभारत | वेदव्यास | राजनीति, समाज, धर्म |
🔸 महाभारत विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य है।
(ख) जातक कथाएँ
- बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाएँ
- तत्कालीन समाज, नैतिकता और जीवन-शैली की जानकारी
5️⃣ धर्मेतर (Secular) साहित्य
धर्म से अलग विषयों पर लिखे ग्रंथ।
| ग्रंथ | लेखक | विषय |
|---|---|---|
| अर्थशास्त्र | चाणक्य (कौटिल्य) | राजनीति, प्रशासन, अर्थव्यवस्था |
| राजतरंगिणी | कल्हण | कश्मीर का इतिहास |
6️⃣ विदेशी यात्रियों के वृत्तांत
विदेशी यात्रियों द्वारा लिखे गए विवरण भी इतिहास के महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं।
| यात्री | देश | ग्रंथ/विवरण | जानकारी |
|---|---|---|---|
| मेगस्थनीज | यूनान | इण्डिका | चन्द्रगुप्त मौर्य कालीन समाज |
| फाहयान | चीन | यात्रा विवरण | गुप्त कालीन समाज |
| हवेनसांग | चीन | यात्रा विवरण | शिक्षा, धर्म, समाज |
7️⃣ अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य
- British Museum (लंदन) विश्व का सबसे बड़ा संग्रहालय है।
- मानव के विकास, नस्लीय विभेद आदि का अध्ययन करने वाले विद्वानों को मानव-शास्त्री (Anthropologists) कहते हैं।
- चन्द्रगुप्त मौर्य काल – सुदृढ़ प्रशासन, आर्थिक समृद्धि
- गुप्त काल – स्वर्ण युग, कला, विज्ञान और शिक्षा का उत्कर्ष
✍️ निष्कर्ष
इतिहास जानने के स्रोत हमें राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक जीवन की स्पष्ट जानकारी देते हैं।
इन स्रोतों के बिना हम प्राचीन भारत के गौरवशाली अतीत को समझ ही नहीं सकते।
