शब्दों के उच्चारण में समय के साथ होने वाले बदलाव को ध्वनि परिवर्तन (Sound Change) कहा जाता है। भाषा स्थिर नहीं होती, वह बहते नीर के समान है। सदियों की यात्रा में शब्दों के स्वन (Sounds) अपनी सुविधा और परिवेश के अनुसार बदल जाते हैं।
इसके मुख्य कारणों को दो भागों में बाँटा जा सकता है:
1. आभ्यंतर (Internal) कारण
ये कारण वक्ता की शारीरिक या मानसिक स्थिति से जुड़े होते हैं।
- मुख-सुख (Ease of Articulation): मनुष्य का स्वभाव है कि वह कम मेहनत में अधिक बोलना चाहता है। कठिन वर्णों को सरल कर देना ही मुख-सुख है।
- उदाहरण: ‘अभ्यंतर’ से ‘भीतर’, ‘उपाध्याय’ से ‘झा’।
- प्रयत्न लाघव (Economy of Effort): शब्दों को छोटा कर देना।
- उदाहरण: ‘साइकिल’ के स्थान पर ‘कल’ या ‘डॉक्टर’ के लिए ‘डाकसाब’।
- अज्ञान या अशुद्ध उच्चारण: शब्द का सही रूप न जानने के कारण गलत बोलना।
- उदाहरण: ‘विवाह’ को ‘बिआह’ या ‘स्कूल’ को ‘इसकूल’ कहना।
- सादृश्य (Analogy): एक जैसे शब्दों के प्रभाव में आकर दूसरे को बदल देना।
- उदाहरण: ‘द्वादश’ के प्रभाव से ‘एकादश’ का ‘इग्यारह’ (ग्यारह) हो जाना।
2. बाह्य (External) कारण
ये कारण सामाजिक, भौगोलिक या ऐतिहासिक स्थितियों से जुड़े होते हैं।
- भौगोलिक प्रभाव: जलवायु का प्रभाव बोलने के ढंग पर पड़ता है। ठंडे प्रदेशों के लोग मुँह कम खोलते हैं, जिससे ध्वनियाँ बदल जाती हैं।
- सामाजिक/सांस्कृतिक संपर्क: जब दो भाषाएँ बोलने वाले लोग मिलते हैं, तो वे एक-दूसरे के शब्दों को अपने ढंग से ढाल लेते हैं।
- उदाहरण: ‘Station’ का ‘स्टेशन’ या ‘इस्टेशन’ होना।
- लिपि का दोष: जैसा कि आपने पहले बताया था, यदि लिपि में एक ही ध्वनि के लिए कई वर्ण हों, तो लेखन के प्रभाव से उच्चारण बदल जाता है।
ध्वनि परिवर्तन की दिशाएँ (Processes)
परिवर्तन किस रूप में होता है, इसके कुछ प्रमुख नियम हैं:
- लोप (Elision): किसी ध्वनि का गायब हो जाना।
- उदाहरण: ‘अंगुष्ठिका’ में ‘अ’ का लोप होकर ‘अंगूठी’ और फिर ‘अँगूठी’ बनना।
- आगम (Addition): नई ध्वनि का जुड़ जाना।
- उदाहरण: ‘स्नान’ के पहले ‘इ’ जुड़कर ‘इस्नान’ हो जाना।
- विपर्यय (Metathesis): वर्णों का स्थान आपस में बदल जाना।
- उदाहरण: ‘मतलब’ को ‘मतबल’ या ‘लखनऊ’ को ‘नखलऊ’ बोलना।
- समीकरण (Assimilation): दो अलग ध्वनियों का एक जैसा हो जाना।
- उदाहरण: ‘अग्नि’ $\rightarrow$ ‘अग्गि’ $\rightarrow$ ‘आग’।
ऐतिहासिक उदाहरण (तत्सम से तद्भव)
| संस्कृत (मूल) | मध्यकालीन (प्राकृत) | आधुनिक (हिंदी) | परिवर्तन का कारण |
| संध्या | संझा | साँझ | नासिक्यीकरण |
| दुग्ध | दुद्ध | दूध | समीकरण और दीर्घीकरण |
| कर्पूर | कप्पुर | कपूर | मुख-सुख |
| हस्त | हत्थ | हाथ | सरलीकरण |
मनीलाल पटेल, जिन्हें सभी प्रेम से मनीभाई नवरत्न के नाम से जानते हैं, शिक्षा के क्षेत्र में एक समर्पित और प्रेरणादायक शिक्षक हैं। वे M.Sc., B.Ed., NET योग्यताधारी हैं तथा NCC एवं HWB प्रमाणन भी रखते हैं।
मनी सर वर्तमान में जवाहर नवोदय विद्यालय (NVS) तथा प्रयास विद्यालय के प्रवेश परीक्षा हेतु छात्रों को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। और साथ में Edudepart में वरिष्ठ मुख्य संपादक के रूप में अपनी निशुल्क सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
हिंदी माध्यम से जुड़े मनी सर एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं —वे व्यंग्य कवि, गीतकार, गायक, यूट्यूबर, ब्लॉगर और लेखक भी हैं।
शिक्षा और साहित्य—दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहते हुए मनी सर निरंतर विद्यार्थियों एवं पाठकों को प्रेरित करते रहते हैं।


