हिन्दी कहानी: उद्भव और प्रारंभिक विकास (1900-1918 ई.)
1. परिचय एवं कालखंड
- जन्म: हिन्दी कहानी का जन्म सन् 1900 के लगभग माना जाता है।
- प्रतिष्ठा: 1912 से 1918 ई. के बीच हिन्दी कहानी पूर्णतः साहित्य में प्रतिष्ठित हुई।
- प्रमुख माध्यम: ‘सरस्वती’ (1900) और ‘इन्दु’ (1909) पत्रिकाओं ने कहानी के विकास में मुख्य भूमिका निभाई।
2. ‘सरस्वती’ पत्रिका और प्रारंभिक कहानियाँ
‘सरस्वती’ पत्रिका के प्रकाशन के साथ ही हिन्दी कहानी का मौलिक स्वरूप सामने आने लगा:
- इन्दुमती (1900): किशोरीलाल गोस्वामी (इसे शेक्सपियर के ‘टेम्पेस्ट’ के आधार पर लिखा गया)।
- प्लेग की चुड़ैल (1902): मास्टर भगवानदीन बी.ए.।
- ग्यारह वर्ष का समय (1903): आचार्य रामचन्द्र शुक्ल।
- दुलाईवाली (1907): बंगमहिला।
3. अन्य पत्रिकाओं का योगदान
- सुदर्शन पत्रिका: इसमें माधवप्रसाद मिश्र की कहानी ‘मन की चंचलता’ (1900) प्रकाशित हुई।
- इन्दु पत्रिका (1909): काशी से प्रकाशित इस पत्रिका में जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ प्रमुखता से छपीं।
- छाया (1912): जयशंकर प्रसाद की कहानियों का प्रथम संग्रह।
- कानों में कंगना (1913): राधिकारमण प्रसाद सिंह।
4. ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध कहानियाँ
- राखीबन्द भाई (1909): वृन्दावनलाल वर्मा (ऐतिहासिक कहानी लेखन में प्रमुख)।
- उसने कहा था (1915): चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ (यह हिन्दी की सबसे प्रसिद्ध और तकनीक की दृष्टि से बेजोड़ कहानी मानी जाती है)।
5. प्रेमचन्द का आगमन
प्रेमचन्द के आगमन से हिन्दी कहानी को नई दिशा मिली। उनकी प्रारंभिक प्रमुख कहानियाँ:
- सौत (1915)
- पंच परमेश्वर (1916)
- सज्जनता का दण्ड (1916)
- ईश्वरीय न्याय (1917)
- दुर्गा का मन्दिर (1917)
6. अन्य उल्लेखनीय कहानीकार एवं रचनाएँ
- विश्वंभरनाथ शर्मा ‘कौशिक’: ‘रक्षा बन्धन’
- ज्वालादत्त शर्मा: ‘मिलन’
- पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी: ‘झलमला’
निष्कर्ष
सन् 1900 से 1918 तक का कालखंड हिन्दी कहानी के शैशव काल से उसके प्रौढ़ होने तक का समय है। इस अवधि में कहानी ने अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित की और मौलिकता के साथ-साथ विविध विषयों (सामाजिक, ऐतिहासिक, मनोवैज्ञानिक) को आत्मसात किया।
याद रखने योग्य तालिका (Quick Look):
| वर्ष | कहानी | लेखक |
| 1900 | इन्दुमती | किशोरीलाल गोस्वामी |
| 1903 | ग्यारह वर्ष का समय | रामचन्द्र शुक्ल |
| 1907 | दुलाईवाली | बंगमहिला |
| 1915 | उसने कहा था | चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ |
| 1916 | पंच परमेश्वर | प्रेमचन्द |
