विकास और अधिगम की परिभाषा
- विकास: यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जिसमें शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और संवेगात्मक परिवर्तन शामिल हैं। यह परिपक्वता (Maturation) और अनुभव का परिणाम है।
- अधिगम: अभ्यास और अनुभव के माध्यम से व्यवहार में आने वाले अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन को अधिगम कहते हैं।
2. दोनों के बीच मुख्य संबंध (Key Relationships)
- एक-दूसरे के पूरक: विकास और अधिगम एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं। बिना विकास के अधिगम कठिन है और बिना अधिगम के विकास अधूरा है।
- अन्तःसंबंधित (Interrelated): बालक का जिस गति से विकास होता है, उसके सीखने की क्षमता भी उसी के अनुसार बदलती है। उदाहरण के लिए, जब तक बच्चे की उंगलियों का शारीरिक विकास (Fine Motor Skills) नहीं होगा, वह लिखना (अधिगम) नहीं सीख पाएगा।
- परिपक्वता की भूमिका: विकास की एक निश्चित अवस्था (परिपक्वता) पर पहुँचने के बाद ही प्रभावी अधिगम संभव है। यदि बच्चा मानसिक रूप से परिपक्व नहीं है, तो आप उसे कठिन अवधारणाएँ नहीं सिखा सकते।
- विकास अधिगम को सुसाध्य बनाता है: जैसे-जैसे बालक का संज्ञानात्मक विकास होता है, उसका अधिगम अधिक जटिल और तार्किक होता जाता है।
3. मनोवैज्ञानिकों के विचार:
- जीन पियाजे (Jean Piaget): पियाजे का मानना था कि “विकास, अधिगम से पहले आता है” (Development precedes learning)। उनके अनुसार, पहले बच्चा एक निश्चित जैविक परिपक्वता प्राप्त करता है, उसके बाद ही वह कुछ सीख सकता है।
- लेव वायगोत्स्की (Lev Vygotsky): इनका मानना था कि “अधिगम, विकास से आगे चलता है” (Learning precedes development)। उनके अनुसार, सामाजिक अंतःक्रिया और अधिगम के माध्यम से ही बालक का विकास होता है (ZPD का सिद्धांत इसी पर आधारित है)।
विकास और अधिगम में सम्बन्ध
1. निचली कक्षाओं में शिक्षण की खेल विधि जिस पर आधारित है, वह है—
(a) शारीरिक शिक्षा कार्यक्रम
(b) शिक्षण की विधियों के सिद्धांत
(c) विकास और वृद्धि के मनोवैज्ञानिक सिद्धांत
(d) शिक्षण के समाजशास्त्रीय सिद्धांत
Haryana TET Paper-I (Class I-V) 2015
Ans:
Ans: (c) विकास और वृद्धि के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों के आधार पर निचली कक्षाओं में शिक्षण की खेल विधि का प्रयोग किया जाता है क्योंकि बच्चों में सामाजिक एवं शारीरिक क्षमता का संतुलित विकास होता है।
2. जिन कक्षाओं में शिक्षण की खेल विधि पर आधारित है—
(a) शारीरिक शिक्षा कार्यक्रम
(b) शिक्षण की विधियों के सिद्धांत पर
(c) विकास एवं वृद्धि के मनोवैज्ञानिक सिद्धांत पर
(d) शिक्षण के समाजशास्त्रीय सिद्धांत
UP TET Paper-I (Class I-V) 13 Nov 2011
Ans:
Ans: (c) निम्न कक्षाओं में बालक को सीखने का अवसर खेल के माध्यम से देना आवश्यक होता है। इसके द्वारा शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास संभव होता है। इसलिए खेल विधि वृद्धि एवं विकास के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित होती है।
सही उत्तर का कारण:
तनाव मुक्त अधिगम: मनोवैज्ञानिक रूप से, खेल विधि बच्चे को दबाव मुक्त वातावरण प्रदान करती है, जिससे उसकी सीखने की गति (Learning Pace) बढ़ जाती है।
स्वाभाविक प्रवृत्ति: खेल बच्चों की एक स्वाभाविक और जन्मजात प्रवृत्ति है। मनोवैज्ञानिक सिद्धांत मानते हैं कि बच्चा खेल के माध्यम से सबसे प्रभावी ढंग से सीखता है क्योंकि इसमें उसकी रुचि (Interest) और सक्रियता (Activity) उच्चतम स्तर पर होती है।
सर्वांगीण विकास: खेल विधि केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि संज्ञानात्मक (Cognitive), सामाजिक (Social) और संवेगात्मक (Emotional) विकास में भी मदद करती है। यह वृद्धि और विकास के विभिन्न चरणों की आवश्यकताओं को पूरा करती है।
3. निचली कक्षाओं में शिक्षण की खेल-पद्धति मूल रूप से आधारित है—
(a) शिक्षण-पद्धति के सिद्धांतों पर
(b) विकास एवं वृद्धि के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर
(c) शिक्षण के समाजशास्त्रीय सिद्धांत पर
(d) शारीरिक शिक्षा कार्यक्रम पर
CTET Paper-I (Class I-V) 26 June 2011
Ans:
Ans: (b) निचली कक्षाओं में शिक्षण की खेल-पद्धति मूल रूप से विकास एवं वृद्धि के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित होती है क्योंकि बाल्यावस्था में बच्चे खेल-खेल में अधिक सीखते हैं। खेल विधि से बच्चों में पढ़ने के लिए प्रेरणा उत्पन्न होती है।
4. एक बच्चा अपनी मातृभाषा सीख रहा है व दूसरा बच्चा वही भाषा दूसरे माध्यम से सीख रहा है। दोनों निम्नलिखित में से कौन-से प्रकार के सीखने को दर्शाते हैं?
(a) अधिगमात्मक समाजीकरण
(b) प्रायोगिक
(c) संज्ञानात्मक
(d) अनुक्रियात्मक अनुकूलन
DSSSB PRT
Ans:
Ans: (c) एक बच्चा अपनी मातृभाषा सीख रहा है व दूसरा बच्चा दूसरी भाषा के माध्यम से सीख रहा है। दोनों ही बच्चे अपने विकास के संज्ञानात्मक पक्ष में हैं। यह भाषा अधिगम का उदाहरण है। दोनों के सीखने की प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है।
5. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा विकास एवं अधिगम के बीच सम्बन्ध को सही तरीके से प्रस्तुत करता है?
(a) अधिगम विकास पर ध्यान दिए बिना होता है।
(b) विकास एवं अधिगम असम्बद्ध और असंबंधित होते हैं।
(c) विकास एवं अधिगम में अन्तर्सम्बन्ध और अन्तःनिर्भरता होती है।
(d) अधिगम के विकास की तुलना में अधिक महत्व होता है।
CTET (VI-VIII) 7 Jul. 2019
Ans:
Ans: (c) विकास और अधिगम के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथन सत्य है—
• विकास एवं अधिगम अन्तर्सम्बन्ध और अन्तःनिर्भर होते हैं।
• विकास एवं अधिगम के अन्तर्गत सीखने की स्वाभाविक क्षमता विकसित होती है।
• विकास एवं अधिगम के बीच एक संतुलन पाया जाता है।
• विकास का अधिगम पर प्रभाव पड़ता है और अधिगम के परिणाम स्वरूप व्यवहार में परिवर्तन होता है।
6. 6–11 वर्ष आयु वर्ग के छात्रों की आवश्यकता है—
(a) कक्षा-कक्ष में प्रजातांत्रिक वातावरण की
(b) सीखने में स्वतंत्रता की
(c) शिक्षक सहायता, मार्गदर्शन एवं अभिप्रेरणा की
(d) उपर्युक्त सभी
DSSSB PRT
UKTET-2014 (I-V)
CTET-2012 (I-V)
Haryana TET Paper-I (Class I-V) 2011
Ans:
Ans: (d) 6–11 वर्ष की आयु वर्ग के लिए उपर्युक्त सभी आवश्यकताएँ होती हैं क्योंकि इस आयु वर्ग में बालक बाल्यावस्था एवं सामाजिक विकास की ओर अग्रसर होता है। इस अवस्था में शिक्षण-अधिगम वातावरण का प्रभाव होना चाहिए। उनके सभी आवश्यकताओं की पूर्ति होनी चाहिए—
- कक्षा-कक्ष का वातावरण लोकतांत्रिक होना चाहिए।
- बच्चों को सीखने एवं खोजने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
- शिक्षकों द्वारा शिक्षा एवं जीवन में मार्गदर्शन मिलना चाहिए।
7. यदि एक अभिभावक बच्चे के हाथों से कंघी, तौलिया आदि छीन लेता है, तो—
(a) शारीरिक वृद्धि करती है
(b) मानसिक वृद्धि करती है
(c) परिश्रम करने की भावना जागृत होती है
(d) आत्मनिर्भरता घटती है
Bihar TET Paper-I (Class I-V) 2011
Ans:
Ans: (d) यदि अभिभावक नियम के अनुसार बच्चे को स्वयं करने के उचित अवसर नहीं देता है, तो बच्चे में आत्मनिर्भरता की भावना कम हो जाती है।
8. मिश्रित आयु-वर्ग वाले विद्यार्थियों को कक्षा में व्यवस्थित करने वाले शिक्षक के लिए …… का ज्ञान आवश्यक माना जाता है—
(a) सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि
(b) सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
(c) विकासात्मक अवस्थाओं
(d) उनकी अभिरुचियों व व्यवहार
DSSSB PRT
CTET 2012 (VI-VIII)
Ans:
Ans: (c) मिश्रित आयु-वर्ग वाले विद्यार्थियों में विभिन्न अवस्थाओं के बालक सम्मिलित होते हैं। कक्षा का वातावरण, शिक्षण-विधियाँ एवं व्यवहार विकासात्मक अवस्थाओं के ज्ञान पर आधारित होना चाहिए क्योंकि तभी शिक्षक बालकों की आयु के अनुसार अधिगम को प्रभावी बना सकता है।
9. निचली कक्षा में सहभागिता करने के लिए कौन-सा विकल्प सबसे अच्छा है?
(a) मेरा परिवार
(b) मेरा मित्र-मंडल
(c) मेरा पड़ोस
(d) मेरा विद्यालय
Ans:
Ans: (a) मेरा परिवार (My Family)
- बच्चे का प्रथम सामाजिककरण (Primary Socialization): परिवार बच्चे की ‘प्रथम पाठशाला’ होती है। बच्चा स्कूल आने से पहले अपने परिवार से ही सबसे अधिक जुड़ा होता है और उसके बारे में सबसे अधिक जानकारी रखता है।
- ज्ञात से अज्ञात की ओर (Known to Unknown): शिक्षण का एक मुख्य सूत्र है कि बच्चे को पहले वह सिखाया जाए जिसे वह जानता है। बच्चा अपने माता-पिता, भाई-बहन के बारे में अच्छी तरह जानता है, इसलिए वह इस विषय पर आसानी से सहभागिता (Participation) कर सकता है।
- सहज अनुभव: निचली कक्षा का बच्चा (खासकर कक्षा 1 या 2) अपने परिवार के अनुभवों को साझा करने में सबसे अधिक सहज महसूस करता है, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है।
10. बाल्यावस्था का सामाजिक दृष्टिकोण का मानदण्ड है—
(a) बच्चे सीखते हैं, बच्चे भावात्मक के व्यवहार में आते हैं
(b) बच्चा भावनात्मक के व्यवहार में अपने अनुभव लाता है
(c) बच्चा सामाजिक रूप से स्वतंत्र अनुभव करता है
(d) बच्चा समूह एवं परिवर्तनों का अनुकरण करता है
UP TET Paper-I (Class I-V) 13 Nov 2011
Ans:
Ans: (d) बच्चा समूह एवं परिवर्तनों का अनुकरण करता है।
11. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन विकास और अधिगम के बीच सम्बन्ध को सही ढंग से प्रस्तुत करता है?
(a) विकास अधिगम से पहले होता है
(b) अधिगम विकास के पीछे रहता है
(c) अधिगम और विकास परस्पर निर्भर हैं
(d) अधिगम के विकास एक दूसरे तरीके से आत्म-निर्भर हैं
CTET Paper-II (Class VI-VIII) 20 Sep 2015
DSSSB PRT
Ans:
Ans: (c) अधिगम और विकास परस्पर निर्भर होते हैं।
12. शिक्षक का विकासात्मक पृष्ठभूमि शिक्षण में यह मांग करता है कि वह—
(a) कठोर अनुशासन लागू करे क्योंकि बच्चे अवसर मांगते हैं
(b) विकासात्मक कारकों के ज्ञान के अनुसार अनुशासनात्मक पद्धति अपनाए
(c) विभिन्न विकासात्मक अवस्थाओं वाले बच्चों के साथ समान रूप से व्यवहार करे
(d) इस प्रकार का अधिगम उत्पन्न करे जिसका परिणाम केवल ज्ञान के विकास में हो
CTET Paper-II (Class VI-VIII) 21 Sep 2014
Ans:
Ans: (b) शिक्षक का विकासात्मक पृष्ठभूमि शिक्षण में यह मांग करता है कि वह विकासात्मक कारकों के ज्ञान के अनुसार अनुशासनात्मक पद्धति अपनाए।




