मानसिक विकास के अंतर्गत केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि कई योग्यताएँ शामिल हैं:
मानसिक विकास के प्रमुख पक्ष (Aspects)
- संवेदनशीलता (Sensation): इंद्रियों के माध्यम से बाहरी ज्ञान प्राप्त करना।
- प्रत्यक्षीकरण (Perception): प्राप्त ज्ञान की व्याख्या करना या उसका अर्थ समझना।
- स्मृति (Memory): सीखी हुई बातों को याद रखना।
- कल्पना (Imagination): अनुपस्थित वस्तुओं के बारे में सोचना।
- तर्क (Reasoning): किसी समस्या पर लॉजिकल तरीके से विचार करना।
- निर्णय लेना (Decision Making): सही और गलत के बीच चुनाव करना।
विभिन्न अवस्थाओं में मानसिक विकास
| अवस्था | मानसिक विकास की मुख्य विशेषताएं |
| शैशवावस्था (0-2 वर्ष) | बच्चा इंद्रियों (Senses) से सीखता है। ‘वस्तु स्थायित्व’ (Object Permanence) का गुण विकसित होता है। |
| पूर्व बाल्यावस्था (2-6 वर्ष) | जिज्ञासा (Curiosity) प्रबल होती है। भाषा का तीव्र विकास होता है। बच्चा ‘सजीवता’ (Animism) में विश्वास करता है। |
| उत्तर बाल्यावस्था (6-12 वर्ष) | मूर्त वस्तुओं पर तर्क करना शुरू करता है। वर्गीकरण (Classification) और संरक्षण (Conservation) की समझ आती है। |
| किशोरावस्था (12-18 वर्ष) | अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking) का विकास। भविष्य की चिंता और करियर के प्रति जागरूकता। |
मानसिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक
शिक्षक के रूप में आपको यह जानना ज़रूरी है कि बच्चे की बुद्धि और सोच किन कारणों से प्रभावित होती है:
- वंशानुक्रम (Heredity): माता-पिता से मिले जींस बुद्धि के आधार का निर्धारण करते हैं।
- वातावरण (Environment): घर, स्कूल और समाज का माहौल सोचने की शक्ति को दिशा देता है।
- शारीरिक स्वास्थ्य: “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है।”
- शिक्षा और शिक्षक: शिक्षक द्वारा दी गई प्रेरणा और शिक्षण विधियाँ मानसिक विकास की गति बढ़ाती हैं।
मानसिक विकास MCQs
1. निम्नलिखित में से कौन-सा मानसिक वृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है?
(a) संवेदना
(b) परिपक्वता
(c) सीखना तथा पर्यावरण दोनों
(d) सामाजिक मानदण्ड
Haryana TET Paper-II (Class VI-VIII) 2015
Ans: (c) सीखना तथा पर्यावरण समन्वय से मानसिक वृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
2. निम्नलिखित में से कौन-सा मानसिक विकास सम्बन्धी विशेषता नहीं है?
(a) विकास की प्रक्रिया एक क्रम में
(b) हर उम्र के स्तर की प्रकृति
(c) संज्ञानात्मक प्रकृति की प्रमुख मात्रा
(d) स्वतंत्रता-आश्रित
Haryana TET Paper-II (Class VI-VIII) 2015
Ans: (d) मानसिक विकास की वृद्धि सम्बन्धी होता है। बच्चों का अधिगम तथा संज्ञानात्मक प्रकृति मानसिक विकास के प्रमुख तत्व होते हैं। विकास की प्रक्रिया, याद करना तथा संज्ञानात्मक प्रकृति विद्यार्थी की मानसिक क्षमता पर निर्भर करती है। स्वतंत्रता की भावना समायोजन की प्रक्रिया का भाग है, न कि मानसिक विकास का।
3. निम्नलिखित में से कौन-सा मानसिकता के सिद्धान्त का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
(a) स्थिर मानसिकता नियम (फिक्स्ड माइंडसेट सोच)
(b) स्थिर मानसिकता (फिक्स्ड माइंडसेट) केवल अवस्थागत है।
(c) बढ़ती मानसिकता, वृद्धि को परिभाषित करती है।
(d) बढ़ती मानसिकता, अभ्यास को एक प्रक्रिया के रूप में देखती है, जहाँ सीखने और विकास होने का अवसर रहता है।
MP TET (VI-VIII) 24 Feb 2019 (2:30 PM)
Ans: (d) ग्रोथ मानसिकता अभ्यास को एक प्रक्रिया के रूप में देखती है, जिसमें सीखने और विकास के अवसर रहते हैं। यह मानसिकता के सिद्धान्त का सबसे अच्छा वर्णन है।
4. एक बालक की संज्ञानात्मक क्रियाएँ जैसे कल्पना-शक्ति, बुद्धि, निर्णय लेने की क्षमता, आदि का संबंध है बालक के—
(a) शारीरिक विकास से
(b) मानसिक विकास से
(c) संवेगात्मक विकास से
(d) सामाजिक विकास से
Haryana TET Paper-I (Class I-V) 2015
Ans: (b) कल्पना-शक्ति, बुद्धि, निर्णय लेने की क्षमता का संबंध बालक के मानसिक विकास से होता है।
5. मानसिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक हैं—
(a) वंशानुक्रम
(b) परिवार व वातावरण
(c) परिवार की सामाजिक स्थिति
(d) उपर्युक्त सभी
CG TET Paper-I (Class I-V) 2011
Ans: (d) मानसिक विकास को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं—
• वंशानुक्रम
• पर्यावरण (वातावरण)
• सामाजिक स्थिति
• शारीरिक स्वास्थ्य
• माता-पिता की शिक्षा
• विद्यालय का वातावरण आदि।
मनीलाल पटेल, जिन्हें सभी प्रेम से मनीभाई नवरत्न के नाम से जानते हैं, शिक्षा के क्षेत्र में एक समर्पित और प्रेरणादायक शिक्षक हैं। वे M.Sc., B.Ed., NET योग्यताधारी हैं तथा NCC एवं HWB प्रमाणन भी रखते हैं।
मनी सर वर्तमान में जवाहर नवोदय विद्यालय (NVS) तथा प्रयास विद्यालय के प्रवेश परीक्षा हेतु छात्रों को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। और साथ में Edudepart में वरिष्ठ मुख्य संपादक के रूप में अपनी निशुल्क सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
हिंदी माध्यम से जुड़े मनी सर एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं —वे व्यंग्य कवि, गीतकार, गायक, यूट्यूबर, ब्लॉगर और लेखक भी हैं।
शिक्षा और साहित्य—दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहते हुए मनी सर निरंतर विद्यार्थियों एवं पाठकों को प्रेरित करते रहते हैं।

