1. परिचय
- लॉरेन्स कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने नैतिक विकास (Moral Development) पर अध्ययन किया।
- उन्होंने जीन पियाजे (Piaget) के कार्य को आगे बढ़ाया।
- उन्होंने यह अध्ययन किया कि बच्चे सही और गलत का निर्णय कैसे करते हैं।
- उन्होंने “Moral Reasoning” अर्थात् नैतिक तर्कशक्ति के विकास के 6 चरणों (Stages) का वर्णन किया।
2. कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक विकास
- नैतिक विकास का अर्थ है — व्यक्ति का यह समझना कि कौन-सा व्यवहार सही है और कौन-सा गलत।
- यह विकास संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) से जुड़ा है।
- व्यक्ति जैसे-जैसे सोचने और तर्क करने में परिपक्व होता है, उसकी नैतिक समझ भी विकसित होती है।
3. कोहलबर्ग के नैतिक विकास के तीन स्तर (3 Levels) और छह चरण (6 Stages)
| स्तर (Level) | चरण (Stage) | आयु (लगभग) | नैतिक सोच का आधार | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| 1. पूर्व-पारंपरिक स्तर (Pre-Conventional Level) | 1. आज्ञा और दंड उन्मुखता (Obedience & Punishment Orientation) | 4–7 वर्ष | गलत कार्य का दंड मिलने का डर | “अगर मैं पकड़ा गया तो सजा मिलेगी।” |
| 2. स्वार्थ या पारस्परिक लाभ उन्मुखता (Instrumental-Relativist Orientation) | 7–10 वर्ष | व्यक्तिगत लाभ और पुरस्कार | “अगर मैं अच्छा काम करूँगा तो इनाम मिलेगा।” | |
| 2. पारंपरिक स्तर (Conventional Level) | 3. अच्छा बच्चा उन्मुखता (Good Boy–Nice Girl Orientation) | 10–13 वर्ष | दूसरों की स्वीकृति और अपेक्षा | “लोग मुझे अच्छा बच्चा समझेंगे।” |
| 4. विधि और व्यवस्था उन्मुखता (Law and Order Orientation) | किशोरावस्था | सामाजिक नियम और कानून | “कानून का पालन करना चाहिए क्योंकि यह सही है।” | |
| 3. उत्तर-पारंपरिक स्तर (Post-Conventional Level) | 5. सामाजिक अनुबंध उन्मुखता (Social Contract Orientation) | वयस्क अवस्था | समाज के हित में निर्णय, मानव अधिकार | “कानून लोगों के कल्याण के लिए हैं।” |
| 6. सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत उन्मुखता (Universal Ethical Principles Orientation) | परिपक्व अवस्था | नैतिकता का उच्चतम स्तर, आत्मसिद्धांत | “सत्य और न्याय सर्वोपरि हैं।” |
4. मुख्य विशेषताएँ (Key Features)
- नैतिक विकास एक क्रमिक प्रक्रिया है — हर व्यक्ति एक स्तर से अगले स्तर की ओर बढ़ता है।
- संज्ञानात्मक विकास के साथ नैतिक विकास जुड़ा है — सोचने की क्षमता बढ़ने से नैतिक निर्णय भी परिपक्व होते हैं।
- सांस्कृतिक और सामाजिक कारक नैतिक विकास को प्रभावित करते हैं।
- नैतिक व्यवहार नहीं, बल्कि नैतिक तर्कशक्ति (reasoning) को महत्व दिया गया है।
5. कोहलबर्ग के सिद्धांत की शिक्षा में उपयोगिता (Educational Implications)
- मूल्य शिक्षा (Value Education) का समावेश करना चाहिए।
- नैतिक चर्चा (Moral Dilemma Discussions) करानी चाहिए ताकि बच्चे तर्क करना सीखें।
- छात्रों में सामाजिक जिम्मेदारी और सहयोग का भाव विकसित करना चाहिए।
- शिक्षक को केवल अनुशासन नहीं, बल्कि नैतिक तर्क का अवसर देना चाहिए।
- उदाहरणों और जीवन स्थितियों के माध्यम से बच्चों में नैतिक निर्णय क्षमता विकसित करनी चाहिए।
6. सीमाएँ (Limitations)
- कोहलबर्ग ने नैतिक सोच पर जोर दिया, लेकिन नैतिक व्यवहार पर कम ध्यान दिया।
- उनका सिद्धांत पश्चिमी संस्कृति पर आधारित था।
- लिंग और सांस्कृतिक भिन्नताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
- सभी लोग सर्वोच्च (6वें) स्तर तक नहीं पहुँचते।
🟩 सारांश चार्ट (Summary Chart)
| स्तर | नैतिक सोच का आधार | प्रमुख चरण | लक्ष्य |
|---|---|---|---|
| पूर्व-पारंपरिक | दंड और इनाम | आज्ञा पालन, स्वार्थ | आत्म-केंद्रित सोच |
| पारंपरिक | सामाजिक मानदंड | अच्छा बच्चा, कानून पालन | सामाजिक स्वीकृति |
| उत्तर-पारंपरिक | नैतिक सिद्धांत | सामाजिक अनुबंध, सार्वभौमिक सिद्धांत | मानवता और न्याय |
🟩 20 महत्वपूर्ण MCQs (उत्तर व व्याख्या सहित)
1. कोहलबर्ग ने किस विषय पर कार्य किया?
(A) संज्ञानात्मक विकास
(B) नैतिक विकास
(C) भाषा विकास
(D) सामाजिक विकास
उत्तर
✅ उत्तर: (B) नैतिक विकास
व्याख्या: कोहलबर्ग का सिद्धांत नैतिक निर्णय प्रक्रिया से संबंधित है।
2. कोहलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत किसके सिद्धांत पर आधारित है?
(A) वायगोत्सकी
(B) पियाजे
(C) स्किनर
(D) ब्रूनर
उत्तर
✅ उत्तर: (B) पियाजे
व्याख्या: उन्होंने पियाजे के संज्ञानात्मक सिद्धांत को नैतिक क्षेत्र में आगे बढ़ाया।
3. “Obedience and Punishment Orientation” किस स्तर में आता है?
(A) पूर्व-पारंपरिक
(B) पारंपरिक
(C) उत्तर-पारंपरिक
(D) सामाजिक अनुबंध
उत्तर
✅ उत्तर: (A) पूर्व-पारंपरिक
व्याख्या: यह नैतिक विकास का प्रारंभिक चरण है, जहाँ बच्चा दंड के डर से सही काम करता है।
4. “Good Boy – Nice Girl Orientation” किस स्तर में पाया जाता है?
(A) पूर्व-पारंपरिक
(B) पारंपरिक
(C) उत्तर-पारंपरिक
(D) स्वार्थी स्तर
उत्तर
✅ उत्तर: (B) पारंपरिक
व्याख्या: इस स्तर पर बच्चा दूसरों की स्वीकृति चाहता है।
5. “Law and Order Orientation” का अर्थ है —
(A) दंड का भय
(B) कानून का पालन समाज के हित में करना
(C) स्वार्थ के लिए कार्य करना
(D) अनुशासन तोड़ना
उत्तर
✅ उत्तर: (B) कानून का पालन समाज के हित में करना।
6. उत्तर-पारंपरिक स्तर पर व्यक्ति —
(A) कानून से डरता है
(B) अपने नैतिक सिद्धांतों से प्रेरित होता है
(C) दंड से बचना चाहता है
(D) सामाजिक स्वीकृति चाहता है
उत्तर
✅ उत्तर: (B) अपने नैतिक सिद्धांतों से प्रेरित होता है।
7. नैतिक विकास का सर्वोच्च चरण कौन-सा है?
(A) सामाजिक अनुबंध उन्मुखता
(B) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत उन्मुखता
(C) अच्छा बच्चा उन्मुखता
(D) विधि एवं व्यवस्था उन्मुखता
उत्तर
✅उत्तर: (B) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत उन्मुखता।
8. कोहलबर्ग के अनुसार, नैतिक विकास का आधार क्या है?
(A) पुनर्बलन
(B) संज्ञानात्मक तर्क
(C) अनुकरण
(D) भावना
उत्तर
✅ उत्तर: (B) संज्ञानात्मक तर्क।
9. पूर्व-पारंपरिक स्तर में बच्चा किससे प्रेरित होता है?
(A) समाज के नियम
(B) दंड और इनाम
(C) नैतिक सिद्धांत
(D) आत्म-संतुष्टि
उत्तर
✅ उत्तर: (B) दंड और इनाम।
10. पारंपरिक स्तर का मुख्य लक्षण है —
(A) सामाजिक मान्यता प्राप्त करना
(B) व्यक्तिगत लाभ
(C) आत्म-सिद्धांत
(D) सजा से बचना
उत्तर
✅ उत्तर: (A) सामाजिक मान्यता प्राप्त करना।
11. उत्तर-पारंपरिक स्तर का उदाहरण है —
(A) “कानून इसलिए पालन करो क्योंकि सजा मिलेगी।”
(B) “लोग क्या कहेंगे इसलिए सही काम करो।”
(C) “सत्य और न्याय सर्वोपरि हैं।”
(D) “इनाम मिलेगा इसलिए काम करो।”
उत्तर
✅ उत्तर: (C) “सत्य और न्याय सर्वोपरि हैं।”
12. कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक विकास —
(A) रैखिक नहीं होता
(B) क्रमबद्ध चरणों में होता है
(C) आकस्मिक होता है
(D) केवल अनुकरण से होता है
उत्तर
✅ उत्तर: (B) क्रमबद्ध चरणों में होता है।
13. कोहलबर्ग के सिद्धांत का शिक्षण में उपयोग है —
(A) नैतिक तर्क को बढ़ावा देना
(B) रटंत अधिगम को प्रोत्साहन देना
(C) सजा द्वारा अनुशासन करना
(D) शिक्षक केंद्रित शिक्षा
उत्तर
✅ उत्तर: (A) नैतिक तर्क को बढ़ावा देना।
14. नैतिक विकास का संबंध है —
(A) भाषा विकास से
(B) संज्ञानात्मक विकास से
(C) भावनात्मक विकास से
(D) रचनात्मकता से
उत्तर
✅ उत्तर: (B) संज्ञानात्मक विकास से।
15. कोहलबर्ग के अनुसार कौन सभी स्तरों तक नहीं पहुँचता?
(A) सभी बच्चे
(B) केवल शिक्षक
(C) सभी व्यक्ति
(D) सभी वयस्क
उत्तर
✅ उत्तर: (C) सभी व्यक्ति।
16. कोहलबर्ग का दृष्टिकोण किस प्रकार का है?
(A) व्यवहारवादी
(B) रचनावादी
(C) नैतिक-संज्ञानात्मक
(D) जैविक
उत्तर
✅ उत्तर: (C) नैतिक-संज्ञानात्मक।
17. कोहलबर्ग का “Moral Dilemma” प्रयोग प्रसिद्ध है —
(A) हेंज (Heinz) कहानी से
(B) पावलोव के कुत्ते से
(C) स्किनर बॉक्स से
(D) वायगोत्सकी के संवाद से
✅ उत्तर: (A) हेंज (Heinz) कहानी से।
उत्तर
व्याख्या: इसमें नैतिक निर्णय के आधार पर स्तर निर्धारित किए गए।
18. नैतिक शिक्षा का उद्देश्य क्या होना चाहिए?
(A) अनुशासन सिखाना
(B) नैतिक सोच विकसित करना
(C) नियम याद कराना
(D) भय उत्पन्न करना
उत्तर
✅ उत्तर: (B) नैतिक सोच विकसित करना।
19. “Moral reasoning” का अर्थ है —
(A) दूसरों की नकल करना
(B) यह समझना कि क्या सही और क्या गलत है
(C) नियम तोड़ना
(D) अनुशासनहीनता
उत्तर
✅ उत्तर: (B) यह समझना कि क्या सही और क्या गलत है।
20. कोहलबर्ग के अनुसार शिक्षक को —
(A) नैतिक निर्णय थोपने चाहिए
(B) नैतिक चर्चा करवानी चाहिए
(C) केवल नियम बताने चाहिए
(D) दंड देना चाहिए
उत्तर
✅ उत्तर: (B) नैतिक चर्चा करवानी चाहिए।




