1. परिचय
- जीन पियाजे (Jean Piaget) — स्विट्ज़रलैंड के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक थे।
- इन्होंने बच्चों के सोचने, तर्क करने और समझने की प्रक्रिया का अध्ययन किया।
- उन्होंने यह बताया कि बच्चे अपने अनुभवों से ज्ञान का निर्माण (Construct Knowledge) करते हैं।
- उनके सिद्धांत को “संज्ञानात्मक निर्माणवाद (Cognitive Constructivism)” कहा जाता है।
| बिंदु | विवरण |
| पूरा नाम | जीन विलियम फ्रिट्ज़ पियाजे |
| देश | स्विट्ज़रलैंड |
| जन्म | 9 अगस्त 1896 |
| मृत्यु | 16 सितंबर 1980 |
| प्रमुख क्षेत्र | संज्ञानात्मक विकास, बाल मनोविज्ञान |
| प्रसिद्ध सिद्धांत | संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत |
| प्रसिद्ध कथन | “बच्चा एक छोटा वैज्ञानिक होता है।” |
| मुख्य अवधारणा | स्कीमा, आत्मसात्करण, समायोजन, साम्यीकरण |
| विकास का क्रम | संवेदी-गामक → पूर्व-संक्रियात्मक → मूर्त संक्रियात्मक → औपचारिक संक्रियात्मक |
कहानी से समझिए
एक 5 वर्ष का बच्चा दो गिलासों में बराबर पानी भरता है। फिर एक गिलास का पानी लंबे-पतले गिलास में डाल देता है।
वह कहता है— “अब इसमें ज़्यादा पानी है!”
ऐसा क्यों?
क्योंकि 5 वर्ष का बच्चा अभी संरक्षण (Conservation) की अवधारणा तक नहीं पहुँचा है।
यही बात पियाजे हमें समझाते हैं—बच्चों की सोच वयस्कों से गुणात्मक रूप से भिन्न होती है।
सिद्धांत की मूल मान्यताएँ
- बच्चा निष्क्रिय नहीं, सक्रिय खोजकर्ता है।
- बच्चा अपने वातावरण से अंतःक्रिया करके स्वयं ज्ञान का निर्माण करता है।
- विकास, सीखने से पहले होता है—पहले बच्चा मानसिक रूप से तैयार होता है, तब सीखता है।
- सभी बच्चे चारों अवस्थाओं से एक ही क्रम में गुजरते हैं।
- आयु में थोड़ा अंतर हो सकता है, परंतु क्रम कभी नहीं बदलता।
- बच्चों की सोच वयस्कों की सोच से केवल मात्रा में नहीं, गुणवत्ता में भिन्न होती है।
प्रमुख अवधारणाएँ (Key Concepts)
4.1 स्कीमा (Schema)
- स्कीमा एक मानसिक ढाँचा या विचारों का संगठन है।
- यह दुनिया को समझने का तरीका है।
- उदाहरण: बच्चे के मन में ‘कुत्ता’ नाम की स्कीमा है—चार पैर, पूँछ, भौंकना।
4.2 आत्मसात्करण (Assimilation)
- नई जानकारी को पुरानी स्कीमा में समाहित करना।
- उदाहरण: बच्चा घोड़ा देखकर कहता है— “कुत्ता!” क्योंकि उसकी स्कीमा में चार पैर वाला जानवर = कुत्ता।
4.3 समायोजन (Accommodation)
- नई जानकारी के अनुसार पुरानी स्कीमा को बदलना या नई स्कीमा बनाना।
- उदाहरण: बच्चा जानता है कि घोड़ा कुत्ता नहीं है, इसलिए अब ‘घोड़ा’ नाम की नई स्कीमा बनाता है।
4.4 साम्यीकरण / संतुलन (Equilibration)
- आत्मसात्करण और समायोजन के बीच संतुलन बनाने की प्रक्रिया।
- जब संतुलन बिगड़ता है, बच्चा असंतुलन (Disequilibrium) महसूस करता है और नया ज्ञान बनाता है।
4.5 अनुकूलन (Adaptation)
- अनुकूलन = आत्मसात्करण + समायोजन
- यही बुद्धि का आधार है।
पियाजे के अनुसार सीखना कैसे होता है
- बच्चा केवल जानकारी प्राप्त नहीं करता, बल्कि वह सक्रिय रूप से ज्ञान का निर्माण (Active Construction) करता है।
- यह निर्माण उसकी परिपक्वता, अनुभव, सामाजिक अंतःक्रिया और असंतुलन (Disequilibrium) से प्रभावित होता है।
- पियाजे ने तीन प्रमुख संज्ञानात्मक प्रक्रियाएँ बताईं —
- Assimilation (आत्मसात): नई जानकारी को पहले से मौजूद ज्ञान-संरचना में समाहित करना।
- Accommodation (समायोजन): नई जानकारी के अनुसार पुराने ज्ञान-संरचना में परिवर्तन करना।
- Equilibration (संतुलन): आत्मसात और समायोजन के बीच संतुलन बनाना।
3. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के चार चरण (Stages of Cognitive Development)
| चरण | आयु | प्रमुख विशेषताएँ | प्रमुख संज्ञानात्मक उपलब्धियाँ |
|---|---|---|---|
| 1. संवेदी-गत्यात्मक चरण (Sensori-Motor Stage) | जन्म से 2 वर्ष | बच्चा इंद्रियों और गति द्वारा संसार को समझता है। | Object Permanence (वस्तु स्थायित्व): वस्तु दिखाई न देने पर भी उसके अस्तित्व का ज्ञान। |
| 2. पूर्व-संक्रियात्मक चरण (Pre-Operational Stage) | 2 से 7 वर्ष | प्रतीकों (Symbols) का प्रयोग, भाषा विकास। | Egocentrism (आत्मकेंद्रिता), Animism (निर्जीव वस्तुओं को जीव मानना)। |
| 3. ठोस संक्रियात्मक चरण (Concrete Operational Stage) | 7 से 11 वर्ष | तर्कशक्ति का विकास, ठोस वस्तुओं पर सोचने की क्षमता। | Conservation (संरक्षण की अवधारणा), वर्गीकरण, क्रमबद्धता। |
| 4. औपचारिक संक्रियात्मक चरण (Formal Operational Stage) | 11 वर्ष से आगे | अमूर्त और परिकल्पनात्मक सोच का विकास। | Hypothetical-Deductive Reasoning (परिकल्पना पर आधारित तर्क)। |
अवस्थाएँ विस्तार से
अवस्था 1: संवेदी-गामक अवस्था (0–2 वर्ष)
- बच्चा इंद्रियों और शारीरिक गतियों से सीखता है।
- शुरू में केवल प्रतिवर्त क्रियाएँ होती हैं—चूसना, पकड़ना, रोना।
- धीरे-धीरे उद्देश्यपूर्ण क्रियाएँ विकसित होती हैं।
मुख्य उपलब्धियाँ
- वस्तु स्थायित्व (Object Permanence):
- यह समझ कि वस्तु आँखों से ओझल होने पर भी मौजूद रहती है।
- लगभग 8–12 माह में आरंभ, 18–24 माह में पूर्ण विकास।
- लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार (Goal-Directed Behavior):
- बच्चा किसी लक्ष्य को पाने के लिए योजना बनाने लगता है।
- स्थगित अनुकरण (Deferred Imitation):
- किसी क्रिया को बाद में याद करके दोहराना।
- मानसिक प्रतिनिधित्व (Mental Representation):
- अवस्था के अंत में बच्चा वस्तुओं की मानसिक छवि बनाने लगता है।
उदाहरण
- 6 माह का बच्चा खिलौना छिपाने पर उसे खोजना छोड़ देता है।
- 12 माह का बच्चा छिपा खिलौना खोजने लगता है—क्योंकि उसे वस्तु स्थायित्व की समझ है।
अवस्था 2: पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (2–7 वर्ष)
दो उप-अवस्थाएँ
- पूर्व-संप्रत्ययात्मक (Preconceptual): 2–4 वर्ष
- सहज-ज्ञानात्मक (Intuitive): 4–7 वर्ष
मुख्य विशेषताएँ
- प्रतीकात्मक चिंतन (Symbolic Thinking):
- बच्चा शब्दों, चित्रों, खेल-खिलौनों को प्रतीक के रूप में प्रयोग करता है।
- कल्पना और नाटकीय खेल बढ़ता है।
- अहंकेंद्रितता (Egocentrism):
- बच्चा केवल अपना दृष्टिकोण देखता है, दूसरे का नहीं।
- तीन पर्वत प्रयोग (Three Mountain Task) से प्रमाणित।
- जीववाद / सजीववाद (Animism):
- बच्चा निर्जीव वस्तुओं में भी जीवन मानता है।
- जैसे— “सूरज दादा सो रहे हैं।”
- कृत्रिमवाद (Artificialism):
- प्राकृतिक वस्तुएँ मनुष्य द्वारा बनाई गई मानना।
- जैसे— “पहाड़ किसी ने बनाया है।”
- प्रतिवर्तनीयता का अभाव (Irreversibility):
- बच्चा किसी क्रिया को मानसिक रूप से उल्टा नहीं सोच पाता।
- जैसे—पानी को वापस उसी गिलास में डालने पर भी वह नहीं समझता कि मात्रा वही है।
- केंद्रीकरण (Centration):
- बच्चा वस्तु के केवल एक ही पहलू पर ध्यान देता है।
- जैसे—लंबे गिलास की ऊँचाई देखता है, चौड़ाई नहीं।
- संरक्षण का अभाव (Lack of Conservation):
- बच्चा यह नहीं समझ पाता कि आकार बदलने पर भी मात्रा, संख्या, द्रव्यमान समान रहते हैं।
संरक्षण प्रयोग (Conservation Task)
- दो समान गिलासों में बराबर पानी।
- एक गिलास का पानी लंबे-पतले गिलास में डालो।
- बच्चा कहता है— “लंबे गिलास में ज़्यादा पानी है।”
- यह संरक्षण की कमी दर्शाता है।
अवस्था 3: मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (7–11 वर्ष)
- बच्चा अब ठोस (मूर्त) वस्तुओं पर तार्किक चिंतन कर सकता है।
- परंतु अमूर्त विचारों पर तर्क करना कठिन होता है।
मुख्य उपलब्धियाँ
- संरक्षण (Conservation):
- अब बच्चा समझता है कि आकार बदलने पर भी मात्रा, संख्या, भार समान रहते हैं।
- वर्गीकरण (Classification):
- वस्तुओं को उनके गुणों के आधार पर समूहों में बाँटना।
- उदाहरण: फूलों में गुलाब और गेंदा का वर्गीकरण।
- क्रमबद्धता (Seriation):
- वस्तुओं को लंबाई, भार, आकार आदि के क्रम में लगाना।
- संक्रामक तर्क (Transitive Inference):
- यदि A > B और B > C, तो A > C समझना।
- प्रतिवर्तनीयता (Reversibility):
- क्रिया को मानसिक रूप से उल्टा कर सकना।
- विकेंद्रीकरण (Decentration):
- एक साथ कई पहलुओं पर ध्यान दे पाना।
- अहंकेंद्रितता में कमी:
- बच्चा अब दूसरे का दृष्टिकोण समझने लगता है।
सीमाएँ
- अमूर्त, काल्पनिक या भविष्य की समस्याओं पर तर्क नहीं कर पाता।
- वैज्ञानिक परिकल्पना बनाना अभी कठिन होता है।
अवस्था 4: औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (11 वर्ष से आगे)
- बच्चा अमूर्त और काल्पनिक चिंतन करने लगता है।
- वयस्कों जैसी तार्किक सोच विकसित होती है।
मुख्य विशेषताएँ
- काल्पनिक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-Deductive Reasoning):
- बच्चा “यदि ऐसा हो तो…” सोचकर परिकल्पना बनाता है और परीक्षण करता है।
- अमूर्त चिंतन:
- न्याय, स्वतंत्रता, प्रेम, सत्य जैसे अमूर्त विषयों पर सोचना।
- प्रतिज्ञप्तिक चिंतन (Propositional Thought):
- केवल भाषा के आधार पर भी तर्क कर सकना।
- संयोजनात्मक चिंतन (Combinatorial Thinking):
- किसी समस्या के सभी संभव हलों पर विचार करना।
- पेंडुलम समस्या (Pendulum Task) इसका प्रसिद्ध प्रयोग है।
- अधि-संज्ञान (Metacognition):
- अपनी सोच के बारे में सोचना।
सीमाएँ
- सभी लोग इस अवस्था तक पूर्ण रूप से नहीं पहुँचते।
- संस्कृति, शिक्षा और अभ्यास का बड़ा प्रभाव पड़ता है।
पियाजे के प्रमुख प्रयोग (Experiments)
| प्रयोग | आयु | संबंधित अवधारणा |
| छिपा खिलौना खोजना | 0–2 वर्ष | वस्तु स्थायित्व |
| तीन पर्वत प्रयोग | 2–7 वर्ष | अहंकेंद्रितता |
| द्रव संरक्षण प्रयोग | 4–7 वर्ष | संरक्षण की कमी |
| वर्ग समावेशन | 7–11 वर्ष | वर्गीकरण |
| पेंडुलम समस्या | 11+ वर्ष | काल्पनिक-निगमनात्मक तर्क |
पियाजे के सिद्धांत की प्रमुख विशेषताएँ
- विकास क्रमिक (Sequential) और सार्वभौमिक (Universal) होता है।
- बच्चा स्वयं ज्ञान का निर्माता (Active Learner) है।
- सोचने की प्रक्रिया में भ्रम और गलतियाँ स्वाभाविक हैं।
- सीखने की तैयारी (Readiness to Learn) प्रत्येक अवस्था के अनुसार होती है।
- शिक्षण को बच्चे की संज्ञानात्मक अवस्था (Cognitive Stage) के अनुसार होना चाहिए।
शिक्षा में पियाजे सिद्धांत का निहितार्थ (Educational Implications)
- तत्परता (Readiness):
- बच्चे को उसके विकास स्तर से आगे की चीज़ें जबरदस्ती न सिखाएँ।
- खोजपूर्ण अधिगम (Discovery Learning):
- बच्चों को स्वयं प्रयोग, खोज और गलतियों से सीखने का मौका दें।
- शिक्षक एक सुविधादाता (Facilitator) है:
- शिक्षक का कार्य उत्तर रटाना नहीं, बल्कि प्रश्न पूछकर सोचने को प्रेरित करना है।
- पाठ्यक्रम विकास स्तर के अनुसार:
- 2–7 वर्ष के बच्चों को खेल, चित्र, कहानी से पढ़ाएँ।
- 7–11 वर्ष के बच्चों को ठोस वस्तुओं से पढ़ाएँ।
- 11+ के बच्चों को अमूर्त और वैज्ञानिक विषय दें।
- व्यक्तिगत भिन्नता का सम्मान:
- सभी बच्चे एक ही गति से नहीं सीखते।
- मूल्यांकन में सोच को महत्व:
- केवल सही उत्तर नहीं, बल्कि बच्चे की तर्क प्रक्रिया देखें।
- सामाजिक अंतःक्रिया:
- बच्चों के बीच चर्चा से संतुलन बिगड़ता है और नया ज्ञान बनता है।
शिक्षण-शिक्षण प्रक्रिया में उपयोग
- बच्चा केंद्र में हो: शिक्षण को Child-Centred बनाना चाहिए।
- अनुभव आधारित अधिगम: बच्चे को पर्यावरण से प्रत्यक्ष अनुभव लेने के अवसर देने चाहिए।
- सक्रिय अधिगम (Active Learning): बच्चों को प्रयोग, खोज और समस्या समाधान के कार्य करने देना चाहिए।
- गलतियों को सीखने का अवसर समझना: गलती सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
- अधिगम का निर्माणात्मक दृष्टिकोण (Constructivist Approach): शिक्षक मार्गदर्शक और सहयोगी के रूप में कार्य करे।
- अवस्था के अनुरूप शिक्षण:
- संवेदी-गत्यात्मक: खेल, वस्तुएँ छूने के अनुभव।
- पूर्व-संक्रियात्मक: चित्र, कहानी, अभिनय।
- ठोस संक्रियात्मक: प्रयोगात्मक कार्य, वर्गीकरण।
- औपचारिक संक्रियात्मक: तर्क, परियोजना कार्य, बहस आदि।
- सहयोगात्मक अधिगम (Collaborative Learning): समूह में चर्चा और विचार-विनिमय से समझ का निर्माण होता है।
आलोचनाएँ (Criticisms)
- बच्चों की योग्यता को कम आँका:
- शोधों में पाया गया कि सरल कार्यों से बच्चे पहले भी संरक्षण समझ सकते हैं।
- किशोरों की योग्यता को अधिक आँका:
- सभी किशोर औपचारिक संक्रियात्मक स्तर तक नहीं पहुँचते।
- अवस्थाएँ अति कठोर:
- विकास इतनी साफ-साफ सीढ़ियों में नहीं होता, बल्कि निरंतर भी हो सकता है।
- संस्कृति और समाज की उपेक्षा:
- वायगोत्स्की ने कहा कि समाज और भाषा की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण है।
- सीमित नमूना (Sample):
- पियाजे ने अधिकांश अध्ययन अपने बच्चों पर किए, इसलिए निष्कर्ष सार्वभौमिक नहीं हो सकते।
पियाजे सिद्धांत की सीमाएँ
- चरणों की आयु सीमा सभी पर समान नहीं होती।
- बच्चों की क्षमता को कम करके आँका गया।
- सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभावों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया (जिसे वायगोत्सकी ने आगे बढ़ाया)।
- बच्चों के व्यक्तिगत अंतर (Individual Differences) पर कम ध्यान।
एक-लाइनर रिवीजन
- वस्तु स्थायित्व → 0–2 वर्ष (संवेदी-गामक अवस्था)
- अहंकेंद्रितता → 2–7 वर्ष (पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था)
- तीन पर्वत प्रयोग → अहंकेंद्रितता
- संरक्षण की समझ → 7–11 वर्ष (मूर्त संक्रियात्मक अवस्था)
- अमूर्त चिंतन → 11+ वर्ष (औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था)
- “बच्चा छोटा वैज्ञानिक” → पियाजे
- विकास सीखने से पहले होता है → पियाजे
- स्कीमा, आत्मसात्करण, समायोजन, साम्यीकरण → पियाजे
- पियाजे का देश → स्विट्ज़रलैंड
- पियाजे का उपनाम → जेनेटिक एपिस्टेमोलॉजिस्ट (ज्ञान की उत्पत्ति का अध्ययनकर्ता)
सारांश (Summary)
| तत्व | पियाजे का दृष्टिकोण |
|---|---|
| अधिगम की प्रकृति | सक्रिय और निर्माणात्मक |
| शिक्षक की भूमिका | मार्गदर्शक व सहयोगी |
| बच्चा | ज्ञान का निर्माता |
| गलती | सीखने का अवसर |
| अधिगम का स्रोत | अनुभव व अंतःक्रिया |
| शिक्षा का लक्ष्य | संज्ञानात्मक परिपक्वता और तर्कशक्ति का विकास |
🟩 20 MCQs on Piaget’s Theory (with Answers & Explanation)
1. जीन पियाजे किसके लिए प्रसिद्ध हैं?
(A) भाषा विकास सिद्धांत
(B) संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत
(C) व्यवहारवादी सिद्धांत
(D) सामाजिक अधिगम सिद्धांत
उत्तर
✅ उत्तर: (B) संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत
व्याख्या: पियाजे ने बच्चे की सोचने और समझने की प्रक्रिया को समझाया।
2. पियाजे के अनुसार बच्चा —
(A) निष्क्रिय ग्रहणकर्ता है
(B) ज्ञान का सक्रिय निर्माता है
(C) केवल अनुकरण करता है
(D) केवल रटंत करता है
उत्तर
✅ उत्तर: (B) ज्ञान का सक्रिय निर्माता है
व्याख्या: बच्चे को Constructivist कहा गया है।
3. ‘Object Permanence’ किस चरण में विकसित होती है?
(A) संवेदी-गत्यात्मक
(B) पूर्व-संक्रियात्मक
(C) ठोस संक्रियात्मक
(D) औपचारिक संक्रियात्मक
उत्तर
✅ उत्तर: (A) संवेदी-गत्यात्मक
व्याख्या: बच्चा सीखता है कि वस्तु दिखे नहीं तो भी उसका अस्तित्व है।
4. ‘Egocentrism’ की विशेषता है —
(A) दूसरों के दृष्टिकोण को समझना
(B) केवल अपने दृष्टिकोण से देखना
(C) अमूर्त तर्क
(D) प्रयोगात्मक सोच
उत्तर
✅ उत्तर: (B) केवल अपने दृष्टिकोण से देखना
व्याख्या: पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था की मुख्य विशेषता है आत्मकेंद्रिता।
5. ‘Conservation’ की अवधारणा किस चरण में विकसित होती है?
(A) पूर्व-संक्रियात्मक
(B) ठोस संक्रियात्मक
(C) औपचारिक संक्रियात्मक
(D) संवेदी-गत्यात्मक
उत्तर
✅ उत्तर: (B) ठोस संक्रियात्मक
व्याख्या: बच्चा मात्रा और आकार में भेद समझने लगता है।
6. “Hypothetical Reasoning” विकसित होती है —
(A) ठोस संक्रियात्मक चरण में
(B) औपचारिक संक्रियात्मक चरण में
(C) पूर्व-संक्रियात्मक चरण में
(D) संवेदी चरण में
उत्तर
✅ उत्तर: (B) औपचारिक संक्रियात्मक
व्याख्या: इस अवस्था में बच्चा अमूर्त और परिकल्पनात्मक रूप से सोचता है।
7. Assimilation का अर्थ है —
(A) पुराने ज्ञान को त्यागना
(B) नई जानकारी को पुराने ज्ञान में समाहित करना
(C) सीखना रोक देना
(D) संतुलन बनाना
उत्तर
✅ उत्तर: (B) नई जानकारी को पुराने ज्ञान में समाहित करना।
8. Accommodation का अर्थ है —
(A) नए ज्ञान के अनुसार पुराना ढाँचा बदलना
(B) याद करना
(C) अनुकरण करना
(D) भूल जाना
उत्तर
✅ उत्तर: (A) नए ज्ञान के अनुसार पुराना ढाँचा बदलना।
9. Equilibration का अर्थ है —
(A) सीखने की गति
(B) आत्मसात और समायोजन के बीच संतुलन
(C) अनुभव का त्याग
(D) अधिगम की समाप्ति
उत्तर
✅ उत्तर: (B) आत्मसात और समायोजन के बीच संतुलन।
10. पियाजे के अनुसार सीखना कब संभव है?
(A) जब बच्चा परिपक्व हो
(B) जब बच्चा सक्रिय रूप से भाग ले
(C) जब शिक्षक बोले
(D) जब परीक्षा हो
उत्तर
✅ उत्तर: (B) जब बच्चा सक्रिय रूप से भाग ले।
11. पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में बच्चा —
(A) अमूर्त तर्क कर सकता है
(B) प्रतीकों का प्रयोग करता है
(C) तर्कसंगत सोच करता है
(D) परिकल्पना बनाता है
उत्तर
✅ उत्तर: (B) प्रतीकों का प्रयोग करता है।
12. ठोस संक्रियात्मक अवस्था की पहचान है —
(A) संरक्षण की समझ
(B) आत्मकेंद्रिता
(C) कल्पनाशीलता
(D) असंतुलन
उत्तर
✅ उत्तर: (A) संरक्षण की समझ।
13. औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था में बच्चा —
(A) केवल ठोस वस्तुओं पर सोच सकता है
(B) अमूर्त विचार कर सकता है
(C) भाषा नहीं समझता
(D) समस्या हल नहीं करता
उत्तर
✅ उत्तर: (B) अमूर्त विचार कर सकता है।
14. पियाजे ने शिक्षा में गलती को क्या माना?
(A) असफलता
(B) दंड का कारण
(C) सीखने का अवसर
(D) अनुशासन भंग
उत्तर
✅ उत्तर: (C) सीखने का अवसर।
15. शिक्षक की भूमिका पियाजे के अनुसार —
(A) अनुशासक
(B) ज्ञान देने वाला
(C) मार्गदर्शक और सुविधाकर्ता
(D) नियंत्रक
उत्तर
✅ उत्तर: (C) मार्गदर्शक और सुविधाकर्ता।
16. पियाजे के अनुसार बच्चा कब सीख सकता है?
(A) जब वह विकास की उपयुक्त अवस्था में हो
(B) जब शिक्षक निर्देश दे
(C) जब परीक्षा हो
(D) जब अनुकरण करे
उत्तर
✅ उत्तर: (A) जब वह विकास की उपयुक्त अवस्था में हो।
17. पियाजे के अनुसार “अधिगम का निर्माण” किससे होता है?
(A) अभ्यास से
(B) सक्रिय अनुभव से
(C) रटंत से
(D) अनुकरण से
उत्तर
✅ उत्तर: (B) सक्रिय अनुभव से।
18. किसने कहा — “बच्चा एक छोटा वैज्ञानिक है”?
(A) पियाजे
(B) व्यगोत्सकी
(C) ब्रूनर
(D) स्किनर
उत्तर
✅ उत्तर: (A) पियाजे।
19. पियाजे सिद्धांत का मुख्य बल किस पर है?
(A) अनुकरण
(B) तर्क और संज्ञानात्मक विकास
(C) सामाजिक सीखना
(D) पुनर्बलन
उत्तर
✅ उत्तर: (B) तर्क और संज्ञानात्मक विकास।
20. पियाजे के सिद्धांत के अनुसार शिक्षण होना चाहिए —
(A) परीक्षा आधारित
(B) बाल-केंद्रित और गतिविधि आधारित
(C) शिक्षक-केंद्रित
(D) व्याख्यान शैली में
उत्तर
✅ उत्तर: (B) बाल-केंद्रित और गतिविधि आधारित।
