परिचय
| बिंदु | विवरण |
| पूरा नाम | लॉरेंस कोहलबर्ग |
| देश | अमेरिका |
| जन्म | 25 अक्टूबर 1927 |
| मृत्यु | 19 जनवरी 1987 |
| प्रमुख क्षेत्र | नैतिक मनोविज्ञान |
| प्रसिद्ध सिद्धांत | नैतिक विकास सिद्धांत |
| प्रमुख प्रयोग | नैतिक दुविधा (हाइन्ज़ दुविधा) |
| मुख्य अवधारणा | नैतिक तर्क के तीन स्तर और छह अवस्थाएँ |
| प्रभावित | पियाजे के नैतिक विकास सिद्धांत से |
- लॉरेन्स कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने नैतिक विकास (Moral Development) पर अध्ययन किया।
- उन्होंने जीन पियाजे (Piaget) के कार्य को आगे बढ़ाया।
- उन्होंने यह अध्ययन किया कि बच्चे सही और गलत का निर्णय कैसे करते हैं।
- उन्होंने “Moral Reasoning” अर्थात् नैतिक तर्कशक्ति के विकास के 6 चरणों (Stages) का वर्णन किया।
कहानी से समझिए
कोहलबर्ग ने बच्चों और किशोरों को कहानियाँ सुनाईं, जिनमें नैतिक दुविधा होती थी। सबसे प्रसिद्ध कहानी है—
हाइन्ज़ की दुविधा (Heinz Dilemma)
हाइन्ज़ की पत्नी गंभीर रूप से बीमार है।
डॉक्टर कहता है कि एक विशेष दवा ही उसे बचा सकती है।
उस दवा का आविष्कार एक दवा विक्रेता ने किया है।
दवा की लागत 200 डॉलर है, पर विक्रेता 2000 डॉलर माँगता है।
हाइन्ज़ के पास केवल 1000 डॉलर हैं।
विक्रेता उधार देने या कम कीमत लेने से मना कर देता है।
विवश होकर हाइन्ज़ दुकान में सेंध लगाकर दवा चुरा लेता है।
प्रश्न: क्या हाइन्ज़ को दवा चुरानी चाहिए थी? क्यों?
कोहलबर्ग के अनुसार, यह नहीं मायने रखता कि बच्चा हाँ बोलता है या ना, बल्कि यह मायने रखता है कि वह अपने उत्तर के पीछे कौन-सा तर्क देता है।
वही तर्क उसकी नैतिक विकास अवस्था को दर्शाता है।
2. कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक विकास
- नैतिक विकास का अर्थ है — व्यक्ति का यह समझना कि कौन-सा व्यवहार सही है और कौन-सा गलत।
- यह विकास संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) से जुड़ा है।
- व्यक्ति जैसे-जैसे सोचने और तर्क करने में परिपक्व होता है, उसकी नैतिक समझ भी विकसित होती है।
सिद्धांत की मूल मान्यताएँ
- नैतिक तर्क का विकास उम्र और अनुभव के साथ होता है।
- बच्चे का नैतिक विकास एक निश्चित क्रम में होता है—स्तर 1 से स्तर 3 तक।
- कोई व्यक्ति किसी अवस्था को छोड़ नहीं सकता; सभी को क्रम से गुजरना होता है।
- सभी लोग उच्चतम अवस्था तक नहीं पहुँचते।
- नैतिक विकास का आधार नैतिक तर्क है, न कि केवल बाहरी व्यवहार।
- समाज और संस्कृति नैतिक तर्क की गति और उच्चतम स्तर को प्रभावित करते हैं।
- कोहलबर्ग का सिद्धांत पियाजे के नैतिक विकास के विचारों का विस्तार है।
कोहलबर्ग के नैतिक विकास के तीन स्तर (3 Levels) और छह चरण (6 Stages)
| स्तर (Level) | चरण (Stage) | आयु (लगभग) | नैतिक सोच का आधार | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| 1. पूर्व-पारंपरिक स्तर (Pre-Conventional Level) | 1. आज्ञा और दंड उन्मुखता (Obedience & Punishment Orientation) | 4–7 वर्ष | गलत कार्य का दंड मिलने का डर | “अगर मैं पकड़ा गया तो सजा मिलेगी।” |
| 2. स्वार्थ या पारस्परिक लाभ उन्मुखता (Instrumental-Relativist Orientation) | 7–10 वर्ष | व्यक्तिगत लाभ और पुरस्कार | “अगर मैं अच्छा काम करूँगा तो इनाम मिलेगा।” | |
| 2. पारंपरिक स्तर (Conventional Level) | 3. अच्छा बच्चा उन्मुखता (Good Boy–Nice Girl Orientation) | 10–13 वर्ष | दूसरों की स्वीकृति और अपेक्षा | “लोग मुझे अच्छा बच्चा समझेंगे।” |
| 4. विधि और व्यवस्था उन्मुखता (Law and Order Orientation) | किशोरावस्था | सामाजिक नियम और कानून | “कानून का पालन करना चाहिए क्योंकि यह सही है।” | |
| 3. उत्तर-पारंपरिक स्तर (Post-Conventional Level) | 5. सामाजिक अनुबंध उन्मुखता (Social Contract Orientation) | वयस्क अवस्था | समाज के हित में निर्णय, मानव अधिकार | “कानून लोगों के कल्याण के लिए हैं।” |
| 6. सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत उन्मुखता (Universal Ethical Principles Orientation) | परिपक्व अवस्था | नैतिकता का उच्चतम स्तर, आत्मसिद्धांत | “सत्य और न्याय सर्वोपरि हैं।” |
अवस्थाएँ विस्तार से
स्तर 1: पूर्व-परंपरागत स्तर (Pre-conventional Level)
आयु: प्रायः 4–10 वर्ष
केंद्र: स्वयं का हित और दंड से बचाव
मुख्य प्रश्न: “इससे मुझे क्या मिलेगा?”
अवस्था 1: दंड और आज्ञापालन अभिविन्यास
- सही = वह जो दंड से बचाए।
- बच्चा केवल इसलिए नियम मानता है कि सज़ा न मिले।
- उदाहरण:
- “हाइन्ज़ को दवा नहीं चुरानी चाहिए क्योंकि पुलिस पकड़ लेगी और जेल हो जाएगी।”
- नैतिक आधार: भय और सत्ता का आज्ञापालन।
अवस्था 2: साधन-विनिमय / व्यक्तिगत लाभ अभिविन्यास
- सही = वह जो मेरी आवश्यकता पूरी करे।
- बच्चा “तुम मेरी मदद करो, मैं तुम्हारी करूँगा” की सोच रखता है।
- उदाहरण:
- “हाइन्ज़ को दवा चुरानी चाहिए क्योंकि इससे उसकी पत्नी बच जाएगी, जो उसके काम आती है।”
- नैतिक आधार: स्वार्थ और विनिमय।
स्तर 2: परंपरागत स्तर (Conventional Level)
आयु: प्रायः 10–20 वर्ष
केंद्र: परिवार, समाज और कानून की अपेक्षाएँ
मुख्य प्रश्न: “समाज मुझे कैसे देखेगा?”
अवस्था 3: अच्छा लड़का / अच्छी लड़की अभिविन्यास
- सही = वह जो दूसरों को अच्छा लगे।
- बच्चा माता-पिता, शिक्षक और साथियों की स्वीकृति चाहता है।
- उदाहरण:
- “हाइन्ज़ को दवा चुरानी चाहिए क्योंकि एक अच्छा पति वही होता है जो पत्नी की जान बचाए।”
- नैतिक आधार: सामाजिक भूमिका और संबंध।
अवस्था 4: कानून और व्यवस्था अभिविन्यास
- सही = वह जो नियम और कानून के अनुसार हो।
- व्यक्ति मानता है कि कानून समाज की व्यवस्था के लिए अनिवार्य है।
- उदाहरण:
- “हाइन्ज़ को दवा नहीं चुरानी चाहिए क्योंकि चोरी करना कानून का उल्लंघन है और इससे समाज में अराजकता फैलेगी।”
- नैतिक आधार: कर्तव्य, कानून, सामाजिक व्यवस्था।
स्तर 3: उत्तर-परंपरागत स्तर (Post-conventional Level)
आयु: प्रायः 20 वर्ष के बाद; कुछ लोग ही पहुँचते हैं
केंद्र: सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत
मुख्य प्रश्न: “क्या यह न्यायपूर्ण और मानवीय है?”
अवस्था 5: सामाजिक अनुबंध अभिविन्यास
- कानून महत्वपूर्ण हैं, परंतु बदले जा सकते हैं।
- व्यक्ति मानता है कि कानून सामाजिक सहमति से बनते हैं और मानवाधिकारों के विरुद्ध हों तो बदले जा सकते हैं।
- उदाहरण:
- “हाइन्ज़ को दवा चुरानी चाहिए क्योंकि जीवन का अधिकार संपत्ति के कानून से बड़ा है। कानून भ्रष्ट व्यापारी का समर्थन कर रहा है।”
- नैतिक आधार: सामाजिक हित और मानवाधिकार।
अवस्था 6: सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास
- निर्णय का आधार अंतरात्मा और सार्वभौमिक सिद्धांत हैं।
- न्याय, समानता, मानवीय गरिमा, सत्य—इन्हें कानून से ऊपर रखा जाता है।
- उदाहरण:
- “हाइन्ज़ को दवा चुरानी चाहिए क्योंकि किसी इंसान की जान बचाना सबसे बड़ा नैतिक कर्तव्य है, भले ही कानून कुछ भी कहे।”
- नैतिक आधार: सार्वभौमिक नैतिकता और अंतरात्मा।
6. हाइन्ज़ दुविधा पर अलग-अलग अवस्थाओं के उत्तर
| अवस्था | उत्तर | कारण |
| 1. दंड-आज्ञापालन | नहीं चुरानी चाहिए | जेल जाने का डर |
| 2. साधन-विनिमय | चुरानी चाहिए | पत्नी की मदद से हाइन्ज़ का भी भला |
| 3. अच्छा लड़का | चुरानी चाहिए | अच्छा पति बनने की समाज से स्वीकृति |
| 4. कानून-व्यवस्था | नहीं चुरानी चाहिए | कानून तोड़ना समाज के लिए खतरा |
| 5. सामाजिक अनुबंध | चुरानी चाहिए | जीवन का अधिकार संपत्ति से बड़ा |
| 6. सार्वभौमिक सिद्धांत | चुरानी चाहिए | मानव जीवन की रक्षा सर्वोच्च नैतिक सिद्धांत |
मुख्य विशेषताएँ (Key Features)
- नैतिक विकास एक क्रमिक प्रक्रिया है — हर व्यक्ति एक स्तर से अगले स्तर की ओर बढ़ता है।
- संज्ञानात्मक विकास के साथ नैतिक विकास जुड़ा है — सोचने की क्षमता बढ़ने से नैतिक निर्णय भी परिपक्व होते हैं।
- सांस्कृतिक और सामाजिक कारक नैतिक विकास को प्रभावित करते हैं।
- नैतिक व्यवहार नहीं, बल्कि नैतिक तर्कशक्ति (reasoning) को महत्व दिया गया है।
कोहलबर्ग के सिद्धांत की शिक्षा में उपयोगिता (Educational Implications)
- मूल्य शिक्षा (Value Education) का समावेश करना चाहिए।
- नैतिक चर्चा (Moral Dilemma Discussions) करानी चाहिए ताकि बच्चे तर्क करना सीखें।
- छात्रों में सामाजिक जिम्मेदारी और सहयोग का भाव विकसित करना चाहिए।
- शिक्षक को केवल अनुशासन नहीं, बल्कि नैतिक तर्क का अवसर देना चाहिए।
- उदाहरणों और जीवन स्थितियों के माध्यम से बच्चों में नैतिक निर्णय क्षमता विकसित करनी चाहिए।
शैक्षिक निहितार्थ
- नैतिक शिक्षा में केवल उपदेश नहीं:
- बच्चों से केवल यह न कहें कि “चोरी करना गलत है”, बल्कि पूछें— “क्यों गलत है?”
- नैतिक दुविधा चर्चा कराएँ:
- कक्षा में ऐसी स्थितियाँ दें जहाँ दो मूल्यों में टकराव हो।
- बच्चों को तर्क करने और दूसरों का दृष्टिकोण समझने का अभ्यास कराएँ।
- भूमिका निर्वहन (Role Playing):
- बच्चों को दूसरों की भूमिका में डालें ताकि उनकी सहानुभूति बढ़े और वे उच्च नैतिक तर्क सीखें।
- उच्च स्तर का मॉडल प्रस्तुत करें:
- शिक्षक और बड़े विद्यार्थी यदि उच्च नैतिक तर्क का उदाहरण दें, तो बच्चे उससे प्रभावित होते हैं।
- व्यक्तिगत भिन्नता का सम्मान:
- सभी बच्चे एक ही नैतिक अवस्था में नहीं होंगे।
- मूल्यांकन करते समय बच्चे के तर्क का स्तर देखें।
- कक्षा में लोकतांत्रिक वातावरण:
- नियम बनाने में बच्चों की भागीदारी हो, जिससे नियमों के प्रति जिम्मेदारी बढ़े।
- सामाजिक विज्ञान और साहित्य पढ़ाते समय:
- ऐतिहासिक घटनाओं, कहानियों, आंदोलनों में नैतिक तर्क ढूँढ़ने के लिए चर्चा करें।
आलोचनाएँ (Criticisms)
- लिंग भेद (Gender Bias):
- कैरोल गिलिगन ने कहा कि कोहलबर्ग ने केवल पुरुषों पर अध्ययन किया।
- स्त्रियाँ अधिक देखभाल और संबंध-केंद्रित नैतिकता रखती हैं, जिसे कोहलबर्ग ने निम्न स्तर का मान लिया।
- सांस्कृतिक पूर्वाग्रह:
- पश्चिमी व्यक्तिवादी समाज में न्याय और अधिकार को सर्वोच्च माना गया।
- पूर्वी सामूहिक संस्कृतियों में कर्तव्य और संबंध अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
- केवल तर्क पर बल:
- नैतिक आचरण और नैतिक तर्क में अंतर हो सकता है।
- व्यक्ति उच्च तर्क देकर भी गलत आचरण कर सकता है।
- अवस्थाएँ अति कठोर:
- कुछ लोग अवस्थाओं के बीच मिश्रित तर्क प्रयोग करते हैं।
- छठी अवस्था पर प्रश्न:
- कोहलबर्ग ने बाद में माना कि छठी अवस्था तक बहुत कम लोग पहुँचते हैं, इसलिए इसे मापना कठिन है।
एक-लाइनर रिवीजन
- “सज़ा से बचने के लिए सही काम करना” → अवस्था 1
- “तुम मेरी मदद करो, मैं तुम्हारी” → अवस्था 2
- “अच्छा लड़का / अच्छी लड़की” → अवस्था 3
- “कानून और व्यवस्था बनाए रखना” → अवस्था 4
- “सामाजिक अनुबंध / मानवाधिकार” → अवस्था 5
- “सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत” → अवस्था 6
- हाइन्ज़ दुविधा → कोहलबर्ग
- नैतिक तर्क के तीन स्तर → पूर्व-परंपरागत, परंपरागत, उत्तर-परंपरागत
- कोहलबर्ग का देश → अमेरिका
- कोहलबर्ग का प्रभावित स्रोत → पियाजे का नैतिक विकास
सीमाएँ (Limitations)
- कोहलबर्ग ने नैतिक सोच पर जोर दिया, लेकिन नैतिक व्यवहार पर कम ध्यान दिया।
- उनका सिद्धांत पश्चिमी संस्कृति पर आधारित था।
- लिंग और सांस्कृतिक भिन्नताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
- सभी लोग सर्वोच्च (6वें) स्तर तक नहीं पहुँचते।
🟩 सारांश चार्ट (Summary Chart)
| स्तर | नैतिक सोच का आधार | प्रमुख चरण | लक्ष्य |
|---|---|---|---|
| पूर्व-पारंपरिक | दंड और इनाम | आज्ञा पालन, स्वार्थ | आत्म-केंद्रित सोच |
| पारंपरिक | सामाजिक मानदंड | अच्छा बच्चा, कानून पालन | सामाजिक स्वीकृति |
| उत्तर-पारंपरिक | नैतिक सिद्धांत | सामाजिक अनुबंध, सार्वभौमिक सिद्धांत | मानवता और न्याय |
🟩 20 महत्वपूर्ण MCQs (उत्तर व व्याख्या सहित)
1. कोहलबर्ग ने किस विषय पर कार्य किया?
(A) संज्ञानात्मक विकास
(B) नैतिक विकास
(C) भाषा विकास
(D) सामाजिक विकास
उत्तर
✅ उत्तर: (B) नैतिक विकास
व्याख्या: कोहलबर्ग का सिद्धांत नैतिक निर्णय प्रक्रिया से संबंधित है।
2. कोहलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत किसके सिद्धांत पर आधारित है?
(A) वायगोत्सकी
(B) पियाजे
(C) स्किनर
(D) ब्रूनर
उत्तर
✅ उत्तर: (B) पियाजे
व्याख्या: उन्होंने पियाजे के संज्ञानात्मक सिद्धांत को नैतिक क्षेत्र में आगे बढ़ाया।
3. “Obedience and Punishment Orientation” किस स्तर में आता है?
(A) पूर्व-पारंपरिक
(B) पारंपरिक
(C) उत्तर-पारंपरिक
(D) सामाजिक अनुबंध
उत्तर
✅ उत्तर: (A) पूर्व-पारंपरिक
व्याख्या: यह नैतिक विकास का प्रारंभिक चरण है, जहाँ बच्चा दंड के डर से सही काम करता है।
4. “Good Boy – Nice Girl Orientation” किस स्तर में पाया जाता है?
(A) पूर्व-पारंपरिक
(B) पारंपरिक
(C) उत्तर-पारंपरिक
(D) स्वार्थी स्तर
उत्तर
✅ उत्तर: (B) पारंपरिक
व्याख्या: इस स्तर पर बच्चा दूसरों की स्वीकृति चाहता है।
5. “Law and Order Orientation” का अर्थ है —
(A) दंड का भय
(B) कानून का पालन समाज के हित में करना
(C) स्वार्थ के लिए कार्य करना
(D) अनुशासन तोड़ना
उत्तर
✅ उत्तर: (B) कानून का पालन समाज के हित में करना।
6. उत्तर-पारंपरिक स्तर पर व्यक्ति —
(A) कानून से डरता है
(B) अपने नैतिक सिद्धांतों से प्रेरित होता है
(C) दंड से बचना चाहता है
(D) सामाजिक स्वीकृति चाहता है
उत्तर
✅ उत्तर: (B) अपने नैतिक सिद्धांतों से प्रेरित होता है।
7. नैतिक विकास का सर्वोच्च चरण कौन-सा है?
(A) सामाजिक अनुबंध उन्मुखता
(B) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत उन्मुखता
(C) अच्छा बच्चा उन्मुखता
(D) विधि एवं व्यवस्था उन्मुखता
उत्तर
✅उत्तर: (B) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत उन्मुखता।
8. कोहलबर्ग के अनुसार, नैतिक विकास का आधार क्या है?
(A) पुनर्बलन
(B) संज्ञानात्मक तर्क
(C) अनुकरण
(D) भावना
उत्तर
✅ उत्तर: (B) संज्ञानात्मक तर्क।
9. पूर्व-पारंपरिक स्तर में बच्चा किससे प्रेरित होता है?
(A) समाज के नियम
(B) दंड और इनाम
(C) नैतिक सिद्धांत
(D) आत्म-संतुष्टि
उत्तर
✅ उत्तर: (B) दंड और इनाम।
10. पारंपरिक स्तर का मुख्य लक्षण है —
(A) सामाजिक मान्यता प्राप्त करना
(B) व्यक्तिगत लाभ
(C) आत्म-सिद्धांत
(D) सजा से बचना
उत्तर
✅ उत्तर: (A) सामाजिक मान्यता प्राप्त करना।
11. उत्तर-पारंपरिक स्तर का उदाहरण है —
(A) “कानून इसलिए पालन करो क्योंकि सजा मिलेगी।”
(B) “लोग क्या कहेंगे इसलिए सही काम करो।”
(C) “सत्य और न्याय सर्वोपरि हैं।”
(D) “इनाम मिलेगा इसलिए काम करो।”
उत्तर
✅ उत्तर: (C) “सत्य और न्याय सर्वोपरि हैं।”
12. कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक विकास —
(A) रैखिक नहीं होता
(B) क्रमबद्ध चरणों में होता है
(C) आकस्मिक होता है
(D) केवल अनुकरण से होता है
उत्तर
✅ उत्तर: (B) क्रमबद्ध चरणों में होता है।
13. कोहलबर्ग के सिद्धांत का शिक्षण में उपयोग है —
(A) नैतिक तर्क को बढ़ावा देना
(B) रटंत अधिगम को प्रोत्साहन देना
(C) सजा द्वारा अनुशासन करना
(D) शिक्षक केंद्रित शिक्षा
उत्तर
✅ उत्तर: (A) नैतिक तर्क को बढ़ावा देना।
14. नैतिक विकास का संबंध है —
(A) भाषा विकास से
(B) संज्ञानात्मक विकास से
(C) भावनात्मक विकास से
(D) रचनात्मकता से
उत्तर
✅ उत्तर: (B) संज्ञानात्मक विकास से।
15. कोहलबर्ग के अनुसार कौन सभी स्तरों तक नहीं पहुँचता?
(A) सभी बच्चे
(B) केवल शिक्षक
(C) सभी व्यक्ति
(D) सभी वयस्क
उत्तर
✅ उत्तर: (C) सभी व्यक्ति।
16. कोहलबर्ग का दृष्टिकोण किस प्रकार का है?
(A) व्यवहारवादी
(B) रचनावादी
(C) नैतिक-संज्ञानात्मक
(D) जैविक
उत्तर
✅ उत्तर: (C) नैतिक-संज्ञानात्मक।
17. कोहलबर्ग का “Moral Dilemma” प्रयोग प्रसिद्ध है —
(A) हेंज (Heinz) कहानी से
(B) पावलोव के कुत्ते से
(C) स्किनर बॉक्स से
(D) वायगोत्सकी के संवाद से
✅ उत्तर: (A) हेंज (Heinz) कहानी से।
उत्तर
व्याख्या: इसमें नैतिक निर्णय के आधार पर स्तर निर्धारित किए गए।
18. नैतिक शिक्षा का उद्देश्य क्या होना चाहिए?
(A) अनुशासन सिखाना
(B) नैतिक सोच विकसित करना
(C) नियम याद कराना
(D) भय उत्पन्न करना
उत्तर
✅ उत्तर: (B) नैतिक सोच विकसित करना।
19. “Moral reasoning” का अर्थ है —
(A) दूसरों की नकल करना
(B) यह समझना कि क्या सही और क्या गलत है
(C) नियम तोड़ना
(D) अनुशासनहीनता
उत्तर
✅ उत्तर: (B) यह समझना कि क्या सही और क्या गलत है।
20. कोहलबर्ग के अनुसार शिक्षक को —
(A) नैतिक निर्णय थोपने चाहिए
(B) नैतिक चर्चा करवानी चाहिए
(C) केवल नियम बताने चाहिए
(D) दंड देना चाहिए
उत्तर
✅ उत्तर: (B) नैतिक चर्चा करवानी चाहिए।
बोनस: परीक्षा में छात्रों के साथ चर्चा हेतु प्रश्न
- एक बच्चा कहता है— “मैं पढ़ाई करता हूँ क्योंकि नहीं तो माँ डाँटेगी।” यह किस अवस्था का तर्क है?
→ अवस्था 1 (दंड-आज्ञापालन) - एक छात्र कहता है— “मैं परीक्षा में नकल नहीं करूँगा क्योंकि इससे स्कूल के नियम टूटते हैं।”
→ अवस्था 4 (कानून और व्यवस्था) - एक युवक कहता है— “आंदोलन करना सही है, क्योंकि यह अन्यायपूर्ण कानून बदलने के लिए है।”
→ अवस्था 5 (सामाजिक अनुबंध) - एक व्यक्ति कहता है— “मैं भ्रष्टाचार नहीं करूँगा, भले ही पूरा विभाग करता हो, क्योंकि ईमानदारी मेरे लिए सार्वभौमिक मूल्य है।”
→ अवस्था 6 (सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत)
12. अंतिम सारांश
कोहलबर्ग ने बताया कि नैतिक विकास केवल अच्छे-बुरे का ज्ञान नहीं है, बल्कि नैतिक तर्क का विकास है।
बच्चा पहले स्वयं के हित से, फिर समाज और कानून से, और अंततः सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों से निर्णय लेता है।
एक शिक्षक के लिए यह समझना आवश्यक है कि बच्चे का नैतिक तर्क किस स्तर पर है, तभी वह नैतिक शिक्षा को सही ढंग से आगे बढ़ा सकता है।
