मत्स्येन्द्रनाथ का साहित्यिक परिचय
मत्स्येन्द्रनाथ अथवा मचिन्द्रनाथ 84 महासिद्धों (बौद्ध धर्म के वज्रयान शाखा के योगी) में से एक थे। वो गोरखनाथ के गुरु […]
मत्स्येन्द्रनाथ अथवा मचिन्द्रनाथ 84 महासिद्धों (बौद्ध धर्म के वज्रयान शाखा के योगी) में से एक थे। वो गोरखनाथ के गुरु […]
स्वयंभू स्वयंभू, अपभ्रंश भाषा के महाकवि थे। स्वयंभू के पिता का नाम मारुतदेव और माता का पद्मिनी था। कवि ने
पुष्पदंत अपभ्रंश भाषा के महाकवि थे जिनकी तीन रचनाएँ प्रकाश में आ चुकी हैं- ‘महापुराण’, ‘जसहरचरित’ (यशोधरचरित) और ‘णायकुमारचरिअ’ (नागकुमारचरित)।
धनपाल अपभ्रंश कवि धनपाल ने भविसयत्त कहा (भविष्यदत्त कथा) नामक अपभ्रंश काव्य की रचना की है। उन्होंने अपने माता-पिता का
सोमप्रभ सूरि––ये भी एक जैन पंडित् थे। इन्होंने संवत् 1241 में “कुमारपालप्रतिबोध” नामक एक गद्यपद्यमय संस्कृत-प्राकृत-काव्य लिखा जिसमें समय समय
शारंगधर का साहित्यिक परिचय शारंगधर अच्छे कवि और सूत्रकार थे। इन्होंने ‘शारंगधर पद्धति’ के नाम से एक सुभाषित संग्रह भी
अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध का साहित्यिक परिचय अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (15 अप्रैल, 1865-16 मार्च, 1947) हिन्दी के कवि, निबन्धकार तथा
हेमचन्द्र का साहित्यिक परिचय आचार्य हेमचंद्रका जन्म गुजरात में अहमदाबाद से १०० किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम स्थित धंधुका नगर में
परमानन्ददास वल्लभ संप्रदाय (पुष्टिमार्ग) के आठ कवियों (अष्टछाप कवि) में एक कवि जिन्होने भगवान श्री कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का
छीतस्वामी वल्लभ संप्रदाय (पुष्टिमार्ग) के आठ कवियों (अष्टछाप कवि) में एक। जिन्होने भगवान श्री कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का अपने