जल प्रदूषण और सूक्ष्मजीवी रोग
(Water Pollution and Microbial Diseases)
यह लेख जल प्रदूषण के कारण, प्रकार, प्रभाव तथा सूक्ष्मजीवों से होने वाले जलजनित रोगों को वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टि से समझाता है।
1. जल प्रदूषण (Water Pollution)
परिभाषा
जल में हानिकारक पदार्थों (रासायनिक, जैविक, भौतिक) का मिश्रण जो इसे पीने, सिंचाई या जैव उपयोग के लिए अनुपयुक्त बनाता है।
प्रदूषण के प्रकार
प्रकार स्रोत उदाहरण बिंदु स्रोत (Point Source) निश्चित स्थान कारखाना नाली, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट विसरित स्रोत (Non-Point Source) फैला हुआ कृषि रनऑफ (कीटनाशक), शहरी अपवाह
प्रमुख प्रदूषक
प्रदूषक स्रोत प्रभाव जैविक (Pathogens) मानव/पशु मल कोलेरा, टाइफॉइड रासायनिक (Heavy Metals) उद्योग (Hg, Pb, Cd) कैंसर, न्यूरोटॉक्सिसिटी पोषक तत्व (N, P) उर्वरक, डिटर्जेंट यूट्रोफिकेशन → शैवाल ब्लूम प्लास्टिक/माइक्रोप्लास्टिक कचरा मछली/मानव में जैव संचय थर्मल पावर प्लांट ऑक्सीजन कमी → मछली मृत्यु
2. जलजनित सूक्ष्मजीवी रोग (Waterborne Microbial Diseases)
प्रमुख रोग और रोगजनक
रोग रोगजनक लक्षण संचरण कोलेरा Vibrio cholerae (ग्राम-नेगेटिव)दस्त, निर्जलीकरण दूषित जल/भोजन टाइफॉइड Salmonella typhi बुखार, सिरदर्द मल-मौखिक मार्ग डायरिया (Dysentery) Shigella , Entamoeba histolytica खूनी दस्त दूषित जल हेपेटाइटिस A Hepatitis A वायरस पीलिया, थकान फेको-ओरल लेप्टोस्पायरोसिस Leptospira बुखार, किडनी फेल चूहों का मूत्र-दूषित जल
भारत में आँकड़े (2023):
1.5 लाख+ कोलेरा मामले/वर्ष (WHO)
70% ग्रामीण घरों में असुरक्षित जल (Jal Jeevan Mission)
3. प्रभाव और मापन
जल गुणवत्ता पैरामीटर
पैरामीटर मानक (BIS 10500) अत्यधिक होने पर प्रभाव pH 6.5–8.5 अम्ल/क्षार → पाइप जंग BOD ≤5 mg/L ऑक्सीजन कमी → मछली मृत्यु COD ≤10 mg/L जैव अपघटनीय भार कोलीफॉर्म 0 MPN/100 ml मल प्रदूषण संकेतक आर्सेनिक ≤0.01 mg/L कैंसर, त्वचा रोग
4. निवारण और उपचार (Prevention & Treatment)
जल शुद्धिकरण की विधियाँ
विधि सिद्धांत उपयोग उबालना 100°C → रोगजनक मृत घरेलू क्लोरीनेशन Cl₂ → हाइपोक्लोरस अम्ल नगर निगम UV विकिरण 254 nm → DNA टूटना आधुनिक प्लांट RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) अर्धपारगम्य झिल्ली भारी धातु हटाना सिरेमिक फिल्टर 0.2 μm छिद्र ग्रामीण क्षेत्र
रोकथाम के उपाय
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) → 70%+ शहरों में अनुपस्थित।
जल संचय (Rainwater Harvesting) → भूजल पुनर्भरण।
जैविक खेती → कीटनाशक रनऑफ कम।
स्वच्छ भारत मिशन → 11 करोड़+ शौचालय → मल-जल मिश्रण रोक।
महत्वपूर्ण बिंदु (Key Points)
विषय मुख्य तथ्य प्रदूषण स्रोत उद्योग, कृषि, घरेलू कचरा रोग बैक्टीरिया (कोलेरा), वायरस (हेपेटाइटिस), प्रोटोजोआ मापन BOD, कोलीफॉर्म, pH उपचार उबाल, क्लोरीन, RO, UV
प्रयोगशाला/घरेलू गतिविधियाँ
कोलीफॉर्म परीक्षण (H₂S स्ट्रिप):
जल नमूना + स्ट्रिप → 24 घंटे → काला रंग = दूषित।
BOD मापन (सरल):
2 बोतलें: एक एरेटेड, एक नमूना → 5 दिन बाद DO माप → अंतर = BOD।
क्लोरीन प्रभाव:
दूषित जल + 2 बूँद ब्लीच → 30 मिनट बाद गंध/स्वाद जाँच।
सैंड फिल्टर बनाना:
प्लास्टिक बोतल + रेत + चारकोल → गंदा जल छानें → तुलना।
निष्कर्ष: स्वच्छ जल = स्वस्थ जीवन । जल प्रदूषण और सूक्ष्मजीवी रोग आपस में जुड़े हैं। “जल है तो कल है” — व्यक्तिगत, सामुदायिक और सरकारी स्तर पर शुद्धिकरण अनिवार्य है।