शैशवावस्था की सही समय-सीमा क्या है, और इस अवस्था में विकास की गति सामान्यतः कैसी होती है?
(A) 2 से 6 वर्ष; धीमी
(B) 6 से 12 वर्ष; स्थिर
(C) जन्म से 2 वर्ष; अत्यंत तीव्र
(D) 12 से 18 वर्ष; धीमी
उत्तर: (C)

2. शैशवावस्था (Infancy) विकास के चरण (विवरण)
शैशवावस्था (Infancy) जन्म से लेकर लगभग 2 वर्ष की आयु तक मानी जाती है। यह तीव्र शारीरिक और मानसिक विकास की अवस्था है, जिसे सीखने का आदर्श काल (Ideal Period for Learning) भी कहा जाता है।
| आयाम (Domain) | शैशवावस्था में विकास (Focus) | मुख्य विशेषताएँ |
| शारीरिक (Physical) | जन्म के बाद सबसे तीव्र शारीरिक वृद्धि (Growth)। | तेजी से वज़न और ऊँचाई बढ़ना। प्रारंभिक महीनों में गत्यात्मक विकास (Motor Development) शीर्षगामी (Cephalocaudal) और निकट-दूर (Proximodistal) क्रम में होता है। |
| गत्यात्मक कौशल (Motor Skills) | पलटना, बैठना, घुटनों के बल चलना (Gross Motor) और वस्तुओं को पकड़ना (Fine Motor) सीखना। | 1 वर्ष की आयु के आसपास चलना शुरू करना, जिसके कारण इसे ‘टॉडलरहुड’ भी कहा जाता है। |
| संज्ञानात्मक (Cognitive) | जीन पियाजे के अनुसार संवेदी-गामक अवस्था (Sensorimotor Stage)। | इंद्रियों (Senses) और गतियों (Movements) के माध्यम से दुनिया को समझना। वस्तु स्थायित्व (Object Permanence) (लगभग 18-24 माह) का विकास, और अनुकरण (Imitation) शुरू करना। |
| सामाजिक-संवेगात्मक (Socio-Emotional) | दूसरों पर पूर्ण निर्भरता से स्वतःस्फूर्तता की ओर बढ़ना। | मूल संवेगों (जैसे: डर, क्रोध, खुशी) को व्यक्त करना। अजनबी दुश्चिंता (Stranger Anxiety) (8-9 माह) और पृथक्करण दुश्चिंता (Separation Anxiety) का दिखना। |
| भाषा (Language) | बबलाना (Babbling), एक शब्द (लगभग 12 माह) और दो शब्दों (लगभग 18-24 माह) के वाक्य बनाना। | भाषा अधिग्रहण की गति अत्यंत तीव्र होती है। |
शैशवावस्था की विशेषताएँ (Infancy Stage Notes)
शैशवावस्था (जन्म से 5-6 वर्ष तक) बालक के निर्माण का काल मानी जाती है। इमेज और परीक्षा उपयोगी तथ्यों के आधार पर इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. विकास की गति में तीव्रता
• शारीरिक विकास: इस अवस्था में शरीर के अंगों और मांसपेशियों का विकास बहुत तेजी से होता है।
• मानसिक विकास: शिशु के सीखने की गति अन्य अवस्थाओं की तुलना में बहुत तीव्र होती है।
2. सीखने का आदर्श काल
• वेलेंटाइन के अनुसार, “शैशवावस्था सीखने का आदर्श काल है।”
• अनुकरण द्वारा सीखना: बालक दूसरों के व्यवहार, बातचीत और कार्यों की नकल करके सीखता है ।
3. संवेगात्मक और सामाजिक व्यवहार
• नार्सिसिज्म (Narcissism): शिशु में स्वयं के प्रति प्रेम की भावना प्रबल होती है ।
• मूल प्रवृत्त्यात्मक व्यवहार: शिशु का व्यवहार उसकी मूल प्रवृत्तियों (जैसे भूख लगने पर रोना) पर आधारित होता है ।
• संवेगों का प्रदर्शन: इस काल में शिशु भय, क्रोध और प्रेम जैसे संवेगों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है ।
4. अन्य महत्वपूर्ण विशेषताएँ
- अतार्किक चिंतन: इस अवस्था में बालक के सोचने-समझने में तर्क का अभाव होता है।
- इंद्रियों द्वारा सीखना: शिशु अपनी पांच इंद्रियों (आंख, कान, नाक, जीभ, त्वचा) के माध्यम से अनुभव प्राप्त करता है।
- परनिर्भरता: बालक अपने भोजन, सुरक्षा और अन्य कार्यों के लिए दूसरों पर पूरी तरह निर्भर रहता है।
परीक्षा नोट: ‘खिलौनों की आयु’ (3-6 वर्ष) को पूर्व-बाल्यावस्था कहा जाता है, जो शैशवावस्था के अंत और बाल्यावस्था की शुरुआत का संधि काल है


शैशवावस्था की विशेषताएँ MCQs
1. किस अवस्था में शारीरिक वृद्धि तीव्र होती है
(a) प्रारम्भिक बाल्यावस्था
(b) शैशव अवस्था
(c) बाल्यावस्था
(d) शिक्षा काल
DSSSB ASSISTANT PRIMARY TEACHER (PRT)
Ans:
Ans: (b) जन्म से लेकर 5 वर्ष तक की अवस्था शैशव अवस्था कहलाती है। शैशवावस्था में शारीरिक विकास तीव्र गति से होता है। यह अवस्था वृद्धि की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है।
2. शैशवावस्था की प्रमुख विशेषता क्या नहीं है?
(a) सीखने की प्रक्रिया में तीव्रता
(b) विकास की प्रवृत्ति
(c) अनुकरण द्वारा सीखने की प्रवृत्ति
(d) चिंतन क्षमता
CG TET Paper-I (Class I-V) 2011
Ans:
Ans: (d) शैशवावस्था में चिंतन का विकास नहीं हो पाता है क्योंकि इस अवस्था में बालक का व्यवहार वस्तु-प्रधान होता है। शैशवावस्था में प्रमुख रूप से सीखने की प्रक्रिया में तीव्रता, विकास की प्रवृत्ति तथा अनुकरण (नकल) की प्रवृत्ति पाई जाती है।
3. शैशवावस्था में बच्चों के क्रिया-कलाप …… होते हैं
(a) मध्यमात्मक
(b) संवेगात्मक
(c) संज्ञानात्मक
(d) सामाजिक
UP TET Paper-I (Class I-V) 27 June 2013
UP TET-2016 (I-V)
Ans:
Ans: (a) 0 से 6 वर्ष की अवस्था बालक की शैशवावस्था कहलाती है। इस अवस्था में बालक अपने मूल प्रवृत्तियों के अनुसार व्यवहार करता है। शैशवावस्था में बच्चों के क्रिया-कलाप मध्यमात्मक होते हैं।
4. एक-केंद्रित अवस्था होती है बालक के
(a) जन्म से 2 वर्ष तक
(b) 3 से 6 वर्ष तक
(c) 7 वर्ष से किशोरावस्था तक
(d) शैशवावस्था में
UP TET Paper-I (Class I-V) 27 June 2013
Ans:
Ans: (b) जन्म से 6 वर्ष तक की अवस्था को शैशवावस्था कहा जाता है। शैशवावस्था को आगे 3-6 वर्ष की अवस्था को पूर्व-बाल्यावस्था भी कहा जाता है। इस अवस्था में बालक स्वयं को सुखी करने में अधिक रुचि रखता है इसलिए इसे एक-केंद्रित अवस्था भी कहा जाता है।
5. शिशु …… की उम्र तक अनुकरण से सीखता व सृजनात्मक विकास करता है।
(a) तीन महीने
(b) एक वर्ष
(c) नौ महीने
(d) छह महीने
MP TET (VI-VIII) 21 Feb 2019 (2:30 PM)
Ans:
Ans: (d) शिशु छह महीने की उम्र तक अनुकरण से सीखता है। प्रारम्भिक शैशवावस्था में शिशु अपने आस-पास के लोगों की गतिविधियों की नकल करता है। इससे उसका मानसिक, सामाजिक एवं सृजनात्मक विकास होता है।
6. प्रारम्भिक अवस्था में शिशु ………… होते हैं।
(a) बहिर्मुखी
(b) निष्क्रिय
(c) स्वकेन्द्रित
(d) सहयोगी
MP TET (VI-VIII) 17 Feb 2019 (2:30 PM)
Ans:
Ans: (c) प्रारम्भिक अवस्था में शिशु स्वकेन्द्रित होते हैं। शैशवावस्था में शिशु के व्यवहार में Narcissism अर्थात आत्म-केन्द्रितता पाई जाती है। वह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए रोता है। इस अवस्था में शिशु स्वयं को सबसे अधिक महत्त्व देता है।
3. CTET परीक्षा के लिए 5 कठिन MCQs
प्रश्न 1: एक 18 महीने का बच्चा अपनी आँख से ओझल होने के बाद भी अपनी माँ की तलाश करना जारी रखता है। यह व्यवहार संज्ञानात्मक विकास की किस उपलब्धि को दर्शाता है?
(A) परिकल्पनात्मक निगमन (Hypothetical Deduction)
(B) केंद्रीकरण (Centration)
(C) वस्तु स्थायित्व (Object Permanence)
(D) प्रतीकात्मक विचार (Symbolic Thought)
Ans.
उत्तर: (C)
स्पष्टीकरण: वस्तु स्थायित्व (Object Permanence) वह क्षमता है जिसमें बच्चा यह समझ लेता है कि कोई वस्तु तब भी मौजूद है जब वह दिखाई नहीं दे रही हो। यह संवेदी-गामक अवस्था की प्रमुख उपलब्धि है।
प्रश्न 2: शैशवावस्था में बच्चों में होने वाले गत्यात्मक विकास (Motor Development) का सही क्रम क्या है?
(A) बैठना $\rightarrow$ खड़ा होना $\rightarrow$ चलना $\rightarrow$ पलटना
(B) पलटना $\rightarrow$ बैठना $\rightarrow$ खड़ा होना $\rightarrow$ चलना
(C) खड़ा होना $\rightarrow$ बैठना $\rightarrow$ चलना $\rightarrow$ पलटना
(D) चलना $\rightarrow$ पलटना $\rightarrow$ बैठना $\rightarrow$ खड़ा होना
Ans.
उत्तर: (B)
स्पष्टीकरण: शैशवावस्था में गत्यात्मक कौशल क्रमिक रूप से विकसित होते हैं और यह क्रम शीर्षगामी सिद्धांत का पालन करता है: बच्चा पहले पलटता है (धड़ नियंत्रण), फिर बैठता है, फिर सहारा लेकर खड़ा होता है, और अंत में बिना सहारे के चलता है।
प्रश्न 3: शैशवावस्था को ‘सीखने का आदर्श काल’ कहने का प्राथमिक कारण क्या है?
(A) बच्चा सामाजिक मानदंडों को तेजी से सीखता है।
(B) यह अवस्था कल्पनाशील चिंतन (Imaginary Thought) से भरी होती है।
(C) मस्तिष्क का विकास इस अवधि में अपनी अत्यंत तीव्र गति पर होता है (लगभग 90% तक)।
(D) बच्चा अमूर्त विचारों को समझने में सक्षम हो जाता है।
Ans.
उत्तर: (C)
स्पष्टीकरण: जीवन के पहले दो वर्षों में मस्तिष्क का शारीरिक विकास किसी भी अन्य अवधि की तुलना में अधिक होता है। मस्तिष्क की तीव्र प्लास्टिसिटी (Plasticity) और स्नायु तंत्र का तेजी से विकसित होना ही इस अवस्था को सीखने के लिए सबसे आदर्श बनाता है।
प्रश्न 4: पृथक्करण दुश्चिंता (Separation Anxiety) शैशवावस्था में किस उपलब्धि के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती है?
(A) स्व-अवधारणा (Self-Concept) का विकास
(B) वस्तु स्थायित्व (Object Permanence)
(C) प्रतीकात्मक विचार (Symbolic Thought)
(D) सामाजिक मुस्कान (Social Smile)
Ans.
उत्तर: (B)
स्पष्टीकरण: पृथक्करण दुश्चिंता तब उत्पन्न होती है जब शिशु यह समझ जाता है कि माँ या देखभालकर्ता अलग व्यक्ति है और वह तब भी मौजूद रहता है जब वह दिखाई नहीं देता (अर्थात् वस्तु स्थायित्व)। इस समझ के कारण ही जब देखभालकर्ता दूर जाता है, तो शिशु को यह चिंता होती है कि वे वापस नहीं आएंगे।
प्रश्न 5: एक शैशवावस्था के बच्चे को दूध पिलाने के लिए उसे छूने पर उसके गालों का मुड़ना और चूसना शुरू कर देना किस प्रकार की प्रतिक्रिया (Response) है?
(A) सीखी हुई प्रतिक्रिया
(B) अनुकरण
(C) अनुकूलित प्रतिक्रिया (Conditioned Response)
(D) सहज क्रिया या प्रतिवर्त (Reflexes)
Ans.
उत्तर: (D)
स्पष्टीकरण: चूसना (Sucking), रूटिंग (Rooting) और ग्रास्पिंग (Grasping) जैसी क्रियाएँ नवजात शिशुओं में मौजूद सहज, अनैच्छिक क्रियाएँ (Innate, involuntary actions) हैं। ये प्रतिवर्त (Reflexes) बच्चे के अस्तित्व और पोषण के लिए महत्वपूर्ण होते हैं और शैशवावस्था की शुरुआत में यह विकास की विशेषता होती है।




