
1️⃣ सिद्धान्त का प्रतिपादक
- इवान पावलॉव
- रूसी शरीर-क्रिया विज्ञानी (Physiologist)
- नोबेल पुरस्कार (1904) से सम्मानित
2️⃣ पावलॉव के अधिगम सिद्धान्त का अर्थ
- पावलॉव के अनुसार अधिगम दो उद्दीपनों (Stimuli) के साहचर्य से होता है।
- जब एक तटस्थ उद्दीपन किसी प्राकृतिक उद्दीपन के साथ बार-बार प्रस्तुत किया जाता है,
तो वह भी उसी प्रकार की प्रतिक्रिया उत्पन्न करने लगता है। - इसे ही शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning) कहते हैं।
👉 मुख्य सूत्र
Learning is the result of forming associations between stimuli.
3️⃣ पावलॉव का प्रसिद्ध प्रयोग
🔹 कुत्ता और घंटी का प्रयोग (Dog–Bell Experiment)
(A) प्रयोग की प्रारम्भिक अवस्था
- भोजन (Meat powder) → लार आना
- यह एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी।
| तत्त्व | नाम |
|---|---|
| भोजन | प्राकृतिक उद्दीपन (UCS) |
| लार | प्राकृतिक प्रतिक्रिया (UCR) |
(B) अनुबंधन की अवस्था
- घंटी बजाना + भोजन देना → लार आना
- घंटी को बार-बार भोजन के साथ जोड़ा गया।
(C) अनुबंधन के बाद की अवस्था
- केवल घंटी बजाना → लार आना
| तत्त्व | नाम |
|---|---|
| घंटी | सशर्त उद्दीपन (CS) |
| लार | सशर्त प्रतिक्रिया (CR) |
4️⃣ शास्त्रीय अनुबंधन के प्रमुख पद (Key Terms)
- UCS (Unconditioned Stimulus) – प्राकृतिक उद्दीपन
- UCR (Unconditioned Response) – प्राकृतिक प्रतिक्रिया
- CS (Conditioned Stimulus) – सशर्त उद्दीपन
- CR (Conditioned Response) – सशर्त प्रतिक्रिया
5️⃣ शास्त्रीय अनुबंधन की विशेषताएँ
- अधिगम अनैच्छिक (Involuntary) प्रतिक्रियाओं से जुड़ा होता है।
- अधिगम क्रमिक प्रक्रिया है।
- उद्दीपन–उद्दीपन (S–S) संबंध पर आधारित।
- भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के निर्माण में सहायक।
6️⃣ शास्त्रीय अनुबंधन से संबंधित प्रक्रियाएँ
🔹 1. सामान्यीकरण (Generalization)
- समान उद्दीपन पर समान प्रतिक्रिया।
🔹 2. विभेदन (Discrimination)
- विभिन्न उद्दीपनों में अंतर करना।
🔹 3. लोप (Extinction)
- सशर्त उद्दीपन को बिना UCS के प्रस्तुत करने पर प्रतिक्रिया का समाप्त होना।
🔹 4. पुनरुत्थान (Spontaneous Recovery)
- कुछ समय बाद प्रतिक्रिया का पुनः प्रकट होना।
7️⃣ शैक्षिक महत्व (Educational Implications)
विद्यालय में उपयोग
- भय एवं चिंता को दूर करना
- सकारात्मक रुचि का निर्माण
- अनुशासन विकास
- भावनात्मक व्यवहार में सुधार
शिक्षक के लिए
- दण्ड से बचना
- सकारात्मक वातावरण बनाना
- प्रशंसा एवं प्रोत्साहन का प्रयोग
📌 CTET Point
गलत अनुबंधन से परीक्षा-भय उत्पन्न हो सकता है।
8️⃣ पावलॉव सिद्धान्त की सीमाएँ
- स्वैच्छिक व्यवहार की व्याख्या नहीं
- केवल अनैच्छिक प्रतिक्रियाओं तक सीमित
- मानव अधिगम की जटिलता को पूर्ण रूप से नहीं समझा सकता
9️⃣ व्यवहारवादी सिद्धान्तों में पावलॉव का स्थान
| आधार | पावलॉव |
|---|---|
| अधिगम का प्रकार | शास्त्रीय अनुबंधन |
| संबंध | उद्दीपन–उद्दीपन |
| प्रतिक्रिया | अनैच्छिक |
| प्रयोग | कुत्ता–घंटी |
🔟 परीक्षा हेतु 2–3 पंक्ति का उत्तर
पावलॉव के अनुसार अधिगम दो उद्दीपनों के साहचर्य से होता है, जिसमें तटस्थ उद्दीपन प्राकृतिक उद्दीपन के साथ जुड़कर वही प्रतिक्रिया उत्पन्न करने लगता है।
1️⃣1️⃣ CTET / TET में बार-बार पूछे जाने वाले बिंदु
- पावलॉव → Classical Conditioning
- प्रयोग → कुत्ता और घंटी
- CS, CR, UCS, UCR
- भावनात्मक अधिगम
🔚 निष्कर्ष
- पावलॉव का सिद्धान्त
भावनात्मक अधिगम और आदत निर्माण को समझने में अत्यंत उपयोगी है। - शिक्षा में
सकारात्मक अनुबंधन द्वारा
रुचि, अनुशासन और भय-नियंत्रण संभव है।




