विकास (Development) का अर्थ
विकास का संबंध वृद्धि से अवश्य होता है, परन्तु यह केवल आकार या भार तक सीमित नहीं होता।
विकास में शरीर और मन में होने वाले गुणात्मक परिवर्तन भी सम्मिलित होते हैं।
उदाहरण :
हड्डियों के आकार में वृद्धि होना वृद्धि है,
परंतु उनका कठोर हो जाना और स्वरूप में परिवर्तन होना विकास है।
इस प्रकार—
विकास में वृद्धि का भाव सदैव निहित रहता है,
परंतु वृद्धि में विकास का होना आवश्यक नहीं होता।
फिर भी, अनेक लेखक सामान्य बोलचाल में वृद्धि और विकास शब्दों का प्रयोग एक-दूसरे के स्थान पर कर लेते हैं।
हरलॉक के अनुसार विकास
हरलॉक के शब्दों में—
“विकास केवल वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रौढ़ावस्था के लक्ष्य की ओर होने वाले परिवर्तनों का एक प्रगतिशील क्रम निहित रहता है।”
विकास के परिणामस्वरूप—
- व्यक्ति में नई विशेषताएँ उत्पन्न होती हैं
- नई योग्यताएँ और क्षमताएँ विकसित होती हैं
- उसका व्यक्तित्व परिपक्व होता है
विकास का अर्थ एवं विशेषताएँ (CTET/TET Notes)
1. विकास का अर्थ (Meaning of Development)
- सतत प्रक्रिया: विकास एक ऐसी निरंतर प्रक्रिया है जो जीवनपर्यन्त (मृत्यु तक) चलती रहती है.
- स्वरूप: यह मात्रात्मक और गुणात्मक दोनों होता है।
- मात्रात्मक: शरीर के अंगों के आकार और भार में परिवर्तन।
- गुणात्मक: योग्यता, क्षमता, व्यवहार और सीखने में होने वाले परिवर्तन।
- आधार: विकास, अभिवृद्धि (Growth) और अनुभव के फलस्वरूप होने वाले परिवर्तनों की एक उत्तरोत्तर (क्रमिक) श्रृंखला है।
2. विकास के व्यापक आयाम (Domains of Development)
मानव विकास के विभिन्न पक्ष एक-दूसरे से जुड़े और आश्रित होते हैं। इसके चार मुख्य आयाम हैं:
| आयाम | विवरण |
| शारीरिक विकास | ऊँचाई, भार और मांसपेशियों का विकास। |
| मानसिक/संज्ञानात्मक | सोचना, तर्क करना, याद रखना और समस्या समाधान। |
| सामाजिक विकास | समाज के नियमों को सीखना और दूसरों के साथ संबंध बनाना। |
| संवेगात्मक विकास | अपनी भावनाओं (क्रोध, प्रेम, भय) पर नियंत्रण पाना। |

3. विकास की मुख्य विशेषताएँ एवं सिद्धांत
- व्यापकता: विकास और वृद्धि पर्यायवाची नहीं हैं। विकास एक व्यापक शब्द है जिसमें वृद्धि समाहित होती है।
- विभिन्न दर: विकास के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति समान नहीं होती; यह हर क्षेत्र में अलग-अलग गति से हो सकता है।
- सांस्कृतिक प्रभाव: विकास सांस्कृतिक और वातावरणीय परिवर्तनों से प्रभावित होता है।
- अवस्थाओं के लक्षण: विकास की प्रत्येक अवस्था (जैसे शैशवावस्था, बाल्यावस्था) के अपने विशिष्ट लक्षण और लक्ष्य होते हैं।
- क्षमताओं में वृद्धि: विकास का मुख्य उद्देश्य व्यवहार संबंधी कार्य-क्षमता में वृद्धि करना है।
4. विकास के विभिन्न कालों का अनुभव
- प्रथम वर्ष (सुखद काल): जीवन का पहला वर्ष सबसे अधिक खुशी का काल माना जाता है क्योंकि बालक अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहता है।
- बचपन/बाल्यावस्था (तनावपूर्ण): जैसे-जैसे बालक स्वतंत्रता की ओर बढ़ता है, उसमें तनाव और संघर्ष की भावना विकसित होने लगती है, जो इसे तुलनात्मक रूप से कठिन काल बनाता है।
5. महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Points)
- शिक्षा: यह एक ‘लक्ष्य उन्मुख’ प्रक्रिया है।
- सीखना (Learning): यह व्यवहार परिवर्तन की एक प्रक्रिया है जो जीवन भर चलती है।
- वृद्धि (Growth): यह एक जैविक प्रक्रिया है जो निश्चित समय तक चलती है।
- तुलना: जहाँ वृद्धि केवल शारीरिक और मात्रात्मक है, वहीं विकास शारीरिक, मानसिक और गुणात्मक है।
विकास का अर्थ एवं विशेषताएँ MCQs
विकास का अर्थ एवं विशेषताएँ
प्रश्न 1. निम्न में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) सीखना व्यवहार परिवर्तन की एक प्रक्रिया है।
(b) वृद्धि एक जैविक प्रक्रिया है।
(c) विकास एक मात्रात्मक प्रक्रिया है।
(d) शिक्षा एक लक्ष्य-उन्मुख प्रक्रिया है।
Ans.
उत्तर : (c)
व्याख्या :
विकास एक मात्रात्मक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह गुणात्मक परिवर्तनों से संबंधित होता है।
जबकि—
- सीखना व्यवहार परिवर्तन की प्रक्रिया है।
- वृद्धि एक जैविक प्रक्रिया है।
- शिक्षा एक लक्ष्य-उन्मुख प्रक्रिया है।
ये सभी कथन सत्य हैं।
प्रश्न 2. मानव विकास को किन क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है?
(a) शारीरिक, संज्ञानात्मक, संवेगात्मक और सामाजिक
(b) संवेगात्मक, संज्ञानात्मक, आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक
(c) मनोवैज्ञानिक, संज्ञानात्मक, संवेगात्मक और सामाजिक
(d) शारीरिक, आध्यात्मिक, संज्ञानात्मक और सामाजिक
Ans.
उत्तर : (a)
व्याख्या :
मानव का विकास सभी क्षेत्रों में साथ-साथ होता है तथा इनमें आपसी सामंजस्य पाया जाता है।
मानव विकास के प्रमुख क्षेत्र—
- शारीरिक विकास
- संज्ञानात्मक विकास
- संवेगात्मक विकास
- सामाजिक विकास
इनमें शारीरिक विकास सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसके बिना अन्य विकास संभव नहीं है।
प्रश्न 3. मानव जाति में विकास होता है—
(a) किशोरावस्था के अंत तक
(b) बाल्यावस्था के अंत तक
(c) प्रौढ़ावस्था के प्रारम्भ तक
(d) जीवनपर्यन्त
Ans.
उत्तर : (d)
व्याख्या :
विकास एक जीवन-पर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है, जो भ्रूणावस्था से प्रारम्भ होकर मृत्यु तक चलती रहती है।
विकास की अवस्थाएँ—
- भ्रूणावस्था
- शैशवावस्था
- बाल्यावस्था
- किशोरावस्था
- प्रौढ़ावस्था
- वृद्धावस्था
प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन विकास के व्यापक आयामों की सही पहचान करता है?
(a) संवेगात्मक, बौद्धिक, आध्यात्मिक एवं स्व
(b) शारीरिक, व्यक्तित्व, आध्यात्मिक एवं संवेगात्मक
(c) सामाजिक, शारीरिक, व्यक्तित्व, संवेगात्मक
(d) शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक और संवेगात्मक
Ans.
उत्तर : (d)
व्याख्या :
विकास को निम्न प्रमुख आयामों में बाँटा जाता है—
- शारीरिक विकास
- संज्ञानात्मक विकास
- सामाजिक विकास
- संवेगात्मक विकास
- नैतिक विकास
प्रश्न 5. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(a) विकास और वृद्धि एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं।
(b) विकास एक सत्तत प्रक्रिया है।
(c) वृद्धि विकास का एक भाग है।
(d) विकास कार्यक्षमता, कार्यकुशलता एवं व्यवहार में गुणात्मक परिवर्तन को दर्शाता है।
Ans.
उत्तर : (a)
व्याख्या :
विकास और वृद्धि पर्यायवाची नहीं हैं—
- विकास : गुणात्मक परिवर्तन, जीवन-पर्यन्त प्रक्रिया
- वृद्धि : मात्रात्मक परिवर्तन, सीमित अवधि तक
प्रश्न 6. विकास की विशेषताओं के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
Ans.
उत्तर : (b) विकास की विशेषताएँ—
- विकास सांस्कृतिक एवं वातावरणीय परिवर्तनों से प्रभावित होता है।
- विकास की प्रत्येक अवस्था की अपनी विशेषताएँ होती हैं।
- प्रत्येक अवस्था के अपने खतरे होते हैं; सही दिशा न मिलने पर नकारात्मक विकास संभव है।
प्रश्न 7. विकास में वृद्धि से तात्पर्य है—
(a) ज्ञान में वृद्धि
(b) संवेग में वृद्धि
(c) वजन में वृद्धि
(d) आकार, सोच, समझ व कौशलों में वृद्धि
Ans.
उत्तर : (c)
व्याख्या :
वृद्धि मात्रात्मक परिवर्तन है, जैसे—
- वजन
- लंबाई
- आकार
और यह एक निश्चित समय तक ही होती है।
प्रश्न 8. मानव विकास होता है—
(a) मात्रात्मक
(b) गुणात्मक
(c) कुछ सीमा तक अमापनीय
(d) (a) और (b) दोनों
Ans.
उत्तर : (d)
व्याख्या :
मानव विकास मात्रात्मक और गुणात्मक दोनों होता है—
- मात्रात्मक : लंबाई, भार, अंगों का आकार
- गुणात्मक : बुद्धि, क्षमता, व्यक्तित्व, अभिवृत्ति, चिंतन
प्रश्न 9. निम्नलिखित में से बाल विकास में गुणात्मक परिवर्तन की पहचान करें—
(a) वजन
(b) दृष्टि
(c) बाल
(d) दाँत
Ans.
उत्तर : (b)
व्याख्या :
गुणात्मक परिवर्तन : दृष्टि, स्मृति, मानसिक योग्यता, क्षमता
मात्रात्मक परिवर्तन : वजन, बाल, दाँत, लंबाई
प्रश्न 10. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन विकास की विशेषता नहीं है?
(a) विकास एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है।
(b) विकास व्यक्तिगत भिन्नताओं को दर्शाता है।
(c) विकास सभी व्यक्तियों में समान गति से होता है।
(d) विकास वातावरण एवं वंशानुक्रम से प्रभावित होता है।
Ans.
उत्तर : (c)
व्याख्या :
विकास सभी व्यक्तियों में समान गति से नहीं होता।
प्रत्येक व्यक्ति का विकास उसकी—
- वंशानुक्रम (Heredity)
- वातावरण (Environment)
- पोषण
- शिक्षा
- सामाजिक परिस्थितियों
पर निर्भर करता है।
इसलिए विकास में व्यक्तिगत भिन्नताएँ पाई जाती हैं।
विकास की प्रमुख विशेषताएँ—
- विकास एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है।
- विकास जीवन-पर्यन्त चलता है।
- विकास गुणात्मक एवं मात्रात्मक दोनों होता है।
- विकास पर वंशानुक्रम और वातावरण का प्रभाव पड़ता है।






