1. भक्तिकाल : परिचय
- हिन्दी साहित्य का स्वर्ण काल कहा जाता है।
- समय : 14वीं से 17वीं शताब्दी
- प्रमुख विशेषता — ईश्वर भक्ति, मानवतावाद, सरल भाषा, लोकधर्मी साहित्य।
2. भक्तिकाल के उदय के कारण
रामचन्द्र शुक्ल का मत (बहुत महत्त्वपूर्ण)
- भारतीय समाज में मुसलमान शासन स्थापित होने से हिंदू जनता में गौरव और उत्साह का ह्रास हुआ।
- मंदिर टूटते, मूर्तियाँ नष्ट की जाती थीं और जनता कुछ भी नहीं कर पाती थी।
- ऐसी स्थिति में जनता को सान्त्वना केवल ईश्वर की शरणागति में प्राप्त हुई।
➡ इसलिए भक्ति का प्रसार तेजी से हुआ — “अपने पौरुष से हताश जाति के लिए भगवान की शरणागति के अलावा दूसरा मार्ग क्या था?” — आचार्य शुक्ल
अन्य विचार
- जार्ज ग्रियर्सन : भक्ति आंदोलन “ईसाइयत की देन”
- ताराचंद : भक्ति आंदोलन का उदय “अरबों की देन”
- रामचन्द्र शुक्ल : दक्षिण से आया भक्ति का सोता, राजनीतिक परिस्थितियों से उत्तर में फैलने को स्थान मिला
- हजारी प्रसाद द्विवेदी : यदि इस्लाम न आता तब भी साहित्य का रूप लगभग वैसा ही होता; संत साहित्य पर बौद्ध तत्ववाद का प्रभाव।
3. भक्ति आंदोलन का विस्तार (दक्षिण से उत्तर)
- आरंभ दक्षिण भारत में – अलवार, नयनार
- दार्शनिक आधार देने वाले –
रामानुज, निम्बार्क, माधवाचार्य, विष्णुस्वामी - 13वीं सदी में महाराष्ट्र – ज्ञानेश्वर, नामदेव, एकनाथ, तुकाराम
- उत्तर भारत – रामानंद
- “भक्ति द्रविड़ उपजी, प्रचलित रामानन्द”
- बंगाल – चैतन्य महाप्रभु
- असम – शंकरदेव (एक-शरण धर्म)
- ओड़िशा – पंचसखा संप्रदाय
(बलरामदास, अनंतदास, यशोवंत दास, जगन्नाथ दास, अच्युतानंद)
4. भक्तिकाल की काव्यधाराएँ
भक्ति काव्य दो धाराएँ—
(A) निर्गुण काव्य-धारा
- ज्ञानाश्रयी शाखा – संत काव्य
- कवि: कबीर, रैदास, दादू, नानक, नामदेव
- प्रेमाश्रयी शाखा – सूफी काव्य
- कवि: जायसी, मलिक मोहम्मद, कुतुबन, मंझन
- रहस्यवाद :
- कबीर – साधनात्मक रहस्यवाद
- जायसी – भावात्मक रहस्यवाद
(B) सगुण काव्य-धारा
- कृष्णाश्रयी शाखा
- सूर, नंददास, कुम्भनदास, छीतस्वामी
- रामाश्रयी शाखा
- तुलसीदास, श्रेष्ठ रामभक्त कवि
5. भक्तिकाव्य पर रामचन्द्र शुक्ल के कथन (बहुत महत्त्वपूर्ण)
- “गोपियों का समाज शेली के उन्मुक्त समाज जैसा।”
- “गोपियों के वियोग में परिस्थितियों का अनुरोध नहीं, समुद्र पार बैठी सीता के विरह जैसी गंभीरता नहीं।”
- “रामचरित गाने वालों में गोस्वामी तुलसीदास सर्वश्रेष्ठ, कृष्णचरित गाने वालों में सूरदास।”
- “हिन्दी काव्य की सभी रचना-शैलियों पर तुलसी का उच्च आसन।”
6. अन्य विद्वानों के कथन
- ग्रियर्सन – “बुद्ध के बाद तुलसी सबसे बड़े समन्वयकारी।”
- हजारी प्रसाद द्विवेदी –
“मानस लोक से शास्त्र का, संस्कृत से भाषा का, सगुण से निर्गुण का, ज्ञान से भक्ति का… समन्वय है।” - श्यामसुन्दर दास –
“भक्तिकाल हिन्दी साहित्य का स्वर्ण युग है।” - हजारी प्रसाद द्विवेदी –
“भक्ति साहित्य अपने ढंग का अकेला साहित्य है, एक नई दुनिया।”
7. महत्वपूर्ण तथ्य
- कबीर का आदर्श राज्य – अमरदेश
- रैदास का आदर्श राज्य – बेगमपुरा
- तुलसी का आदर्श – राम-राज्य
8. महत्त्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
Q1. “गोद लिए हुलसी फिरे तुलसी सो सुत होय” पंक्ति किसकी है?
➡ रहीम (अब्दुल रहमान खां) की
Q2. ‘ज्ञान–भक्ति’ का विस्तृत विवेचन रामचरितमानस के किस कांड में है?
➡ उत्तरकाण्ड में
9. अति महत्वपूर्ण MCQs (भक्तिकाल)
1. भक्ति आंदोलन का प्रारंभ कहाँ हुआ?
A. उत्तर भारत
B. दक्षिण भारत ✔
C. बंगाल
D. गुजरात
2. “भक्ति द्रविड़ उपजी, प्रचलित रामानन्द”— यह किसके उदय को सिद्ध करता है?
A. निर्गुण भक्ति
B. सगुण भक्ति
C. उत्तर भारत में भक्ति प्रसार ✔
D. सूफी भक्ति
3. कबीर के रहस्यवाद को क्या कहा जाता है?
A. भावात्मक
B. साधनात्मक ✔
C. दार्शनिक
D. नैतिक
4. “बुद्ध के बाद तुलसी सबसे बड़े समन्वयकारी” — किसका कथन है?
A. रामचन्द्र शुक्ल
B. ताराचंद
C. जार्ज ग्रियर्सन ✔
D. द्विवेदी
5. “हिन्दी काव्य की सभी रचना-शैलियों पर तुलसी का उच्च आसन” – किसका कथन?
A. शुक्ल ✔
B. ग्रियर्सन
C. आधुनिक
D. मिश्र
10. संक्षेप में भक्तिकाल के मुख्य बिंदु
- लोकभाषा का विकास
- भक्त – जनभाषा के कवि
- सामाजिक समन्वय
- मानवतावादी दृष्टि
- स्त्री-शूद्र को सम्मान
- सभी सम्प्रदायों का मेल
