🧠 सम्प्रत्यय प्रविधि (Concept Teaching / Concept Formation Method)
📖 1. सम्प्रत्यय की परिभाषाएँ
- बोरिंग, लैंगफील्ड एवं वील्ड के अनुसार – “सम्प्रत्यय किसी देखी हुई वस्तु की मानसिक प्रतिमा है।”
- रॉस के अनुसार – “सम्प्रत्यय क्रियाशील ज्ञानात्मक मनोवृत्ति है। सम्प्रत्यय किसी देखी हुई वस्तु या मन में बने नमूने का प्रतिमान है।”
- क्रो एंड क्रो के अनुसार – “सम्प्रत्यय किसी वस्तु का सामान्य अर्थ होता है, जिसे शब्द या शब्द-समूहों द्वारा व्यक्त किया जा सकता है। सम्प्रत्यय का आधार अनुभव होता है।”
🧩 2. व्यवहार में सम्प्रत्यय की भूमिका
- सम्प्रत्यय बालक के व्यवहार को निर्धारित करते हैं।
- उदाहरण: यदि बालक के मस्तिष्क में परिवार का सम्प्रत्यय (मानसिक प्रतिमा) सकारात्मक और सुव्यवस्थित है, तो वह—
- परिवार के सदस्यों के साथ अच्छा व्यवहार करेगा,
- दायित्वों का निर्वहन करेगा,
- सम्मान और समायोजन प्रदर्शित करेगा।
🪜 3. सम्प्रत्यय निर्माण प्रविधि (पाँच स्तर)
सम्प्रत्यय के निर्माण में बालक निम्न पाँच चरणों से गुजरता है—
- निरीक्षण (Observation):
- वस्तुओं/घटनाओं को देखकर प्रारम्भिक प्रतिमाएँ बनती हैं।
- तुलना (Comparison):
- विभिन्न प्रतिमाओं/सम्प्रत्ययों में समानता–भिन्नता की तुलना।
- पृथक्करण (Differentiation):
- आवश्यक गुणों को अलग करना, अनावश्यक को छोड़ना।
- सामान्यीकरण (Generalization):
- स्पष्ट और स्थिर प्रतिमा का निर्माण।
- परिभाषा निर्माण (Definition Formation):
- उपर्युक्त चरणों के बाद वास्तविक सम्प्रत्यय का गठन।
⚙️ 4. सम्प्रत्यय निर्माण को प्रभावित करने वाले कारक
- ज्ञानेन्द्रियाँ
- बौद्धिक क्षमताएँ
- परिपक्वता
- सीखने के अवसर
- समायोजन
- अन्य कारक – अनुभवों के प्रकार, लिंग, समय आदि
📌 परीक्षा हेतु एक नज़र में (One-Liners)
- मानसिक प्रतिमा → सम्प्रत्यय
- अनुभव पर आधारित → सम्प्रत्यय निर्माण
- पाँच चरण → निरीक्षण, तुलना, पृथक्करण, सामान्यीकरण, परिभाषा
- व्यवहार निर्धारण → सम्प्रत्यय की भूमिका




