कक्षा 6 SST अध्याय 1: पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति – नोट्स

📝 कक्षा 6 SST अध्याय 1: पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति – नोट्स

I. मानचित्र और निर्देशांक

  • मानचित्र: यह किसी क्षेत्र का चित्रण/रेखांकन होता है, जिसका उपयोग स्थान की दूरी, दिशा, सीमाएँ, मार्ग, आकार और आकृति जानने के लिए किया जाता है।
  • मानचित्र के मुख्य घटक:
    1. दूरी
    2. दिशा
    3. प्रतीक चिह्न
  • निर्देशांक: ये अक्षांश (Latitude) और देशांतर (Longitude) हैं, जिनकी सहायता से पृथ्वी पर किसी भी स्थान को सटीक रूप से परिभाषित किया जाता है।

II. समय की अवधारणा

  • स्थानीय समय (Local Time): यह किसी विशिष्ट स्थान पर सूर्य की स्थिति के आधार पर निर्धारित होता है।
    • नियम: देशांतर में प्रत्येक $15^\circ$ पर समय में 1 घंटे का बदलाव आता है।
  • मानक समय (Standard Time): यह एक देश या क्षेत्र के भीतर समय को स्थिर रखने के लिए एक केंद्रीय मध्याह्न रेखा (याम्योत्तर) के आधार पर तय किया जाता है।
  • उदाहरण: भारतीय मानक समय (IST) लंदन के ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।

III. अक्षांश और देशांतर की विशेषताएँ

अक्षांश (Latitude)देशांतर (Longitude)
ये भूमध्य रेखा ($0^\circ$) के समानांतर वृत्त होते हैं।ये ध्रुव से ध्रुव तक चलने वाली अर्धवृत्ताकार रेखाएँ (याम्योत्तर) हैं।
भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ने पर इनकी लंबाई घटती जाती है।एक याम्योत्तर की लंबाई भूमध्य रेखा की आधी होती है।
दक्षिण ध्रुव का अक्षांश $90^\circ$ दक्षिण है।समय क्षेत्र याम्योत्तर के बजाय देश की सीमाओं का सम्मान करते हैं।

IV. मानचित्र में प्रतीक और रंग

  • प्रतीक चिह्न: ये छोटी जगह में विभिन्न विशेषताओं (सड़क, रेलवे, मंदिर) को आसानी से और स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
  • रंग: इनका उपयोग विभिन्न भौतिक (जैसे- नीला: जल, हरा: मैदान) और राजनीतिक विशेषताओं के बीच अंतर करने के लिए किया जाता है।
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