⚙️ प्रक्रिया प्रविधि (Activity / Learning by Doing Method)
(विज्ञान एवं पर्यावरण अध्ययन – CTET / REET / RPSC / TET हेतु महत्वपूर्ण)


🔹 प्रक्रिया प्रविधि का आधार (Learning by Doing)
- इस प्रविधि को क्रिया द्वारा सीखना (Learning by Doing) कहा जाता है।
- शिक्षा में क्रिया को प्रधानता देने वाले प्रथम शिक्षाशास्त्री कॉमेनियस थे।
- उनके अनुसार “क्रिया करना बालक का स्वाभाविक गुण है, अतः शिक्षा क्रिया के द्वारा दी जानी चाहिए।”
- पेस्टालॉजी ने भी क्रिया द्वारा सीखने पर विशेष बल दिया।
- पेस्टालॉजी के शिष्य फ्रोबेल ने किंडरगार्टन विधि का प्रतिपादन किया, जो खेल एवं प्रक्रिया द्वारा शिक्षा देने की विधि है।
🔹 प्रक्रिया प्रविधि की अवधारणा
- प्रक्रिया प्रविधि बालकों के प्रशिक्षण में क्रियाशीलता के सिद्धांत को स्वीकार करती है।
- प्रायोजना विधि, मॉन्टेसरी विधि, किंडरगार्टन विधि आदि इसी सिद्धांत पर आधारित हैं।
- यह प्रविधि जैविक एवं भौतिक पर्यावरण अध्ययन विषय के अध्यापन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।
✅ प्रक्रिया विधि के गुण
- यह एक बाल–केंद्रित विधि है, जिसमें बालक को प्रधानता दी जाती है।
- इस प्रविधि में
- वस्तुओं का संग्रह,
- पर्यटन,
- अवलोकन,
- परीक्षण
जैसे क्रियात्मक पक्षों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
- बालकों में करके सीखने की प्रवृत्ति का विकास होता है।
- रुचि, जिज्ञासा एवं सक्रिय सहभागिता बढ़ती है।
❌ प्रक्रिया विधि के दोष
- स्वतंत्र अध्ययन पर अधिक बल होने से कभी–कभी यथार्थ (वास्तविक) अध्ययन नहीं हो पाता।
- यह विधि विषय–केंद्रित एवं शिक्षक–केंद्रित नहीं है, जबकि प्रभावी शिक्षण में विषय और शिक्षक दोनों की भूमिका आवश्यक होती है।
- समय एवं संसाधनों की अधिक आवश्यकता पड़ सकती है।
📝 परीक्षा हेतु एक नज़र में (One-Liners)
- Learning by Doing → प्रक्रिया प्रविधि
- क्रिया को प्रधानता → कॉमेनियस
- क्रिया आधारित शिक्षा → पेस्टालॉजी
- किंडरगार्टन विधि → फ्रोबेल
- बाल-केंद्रित विधि → प्रक्रिया विधि
- पर्यावरण अध्ययन हेतु उपयुक्त → प्रक्रिया प्रविधि




