किशोरावस्था: विशेषताएँ, चुनौतियाँ और विकास के सिद्धांत (Adolescence Stage)

किशोरावस्था को “तूफान और तनाव की अवस्था” (A period of storm and stress) किसने कहा है, जो इस चरण की भावनात्मक उथल-पुथल को दर्शाता है?

(A) जीन पियाजे (Jean Piaget)

(B) जी. स्टेनली हॉल (G. Stanley Hall)

(C) एरिक्सन (Erik Erikson)

(D) फ्रायड (Sigmund Freud)

उत्तर: (B)


2. किशोरावस्था (Adolescence) विकास का चरण (विवरण)

किशोरावस्था (Adolescence) लैटिन शब्द ‘Adolescere’ से आया है, जिसका अर्थ है परिपक्वता की ओर बढ़ना (To grow to maturity)

विशेषताविवरण
समय-सीमाआमतौर पर 12 या 13 वर्ष से शुरू होकर 18 या 19 वर्ष की आयु तक। यह आयु सांस्कृतिक और व्यक्तिगत कारकों के आधार पर भिन्न हो सकती है।
शारीरिक विकासयौवनारंभ (Puberty) इस चरण की शुरुआत है। इसमें तीव्र शारीरिक वृद्धि, द्वितीयक लैंगिक विशेषताओं का विकास (जैसे: लड़कियों में मासिक धर्म, लड़कों में आवाज का गहरा होना) और जनन क्षमता का विकास होता है।
संज्ञानात्मक विकासजीन पियाजे के अनुसार, यह औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage) की शुरुआत है। किशोर अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking), परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetical-Deductive Reasoning) और भविष्य के बारे में सोचने की क्षमता विकसित करते हैं।
सामाजिक-संवेगात्मक विकास1. पहचान संकट (Identity Crisis): एरिक्सन के अनुसार, किशोर अपनी पहचान, भूमिका और भविष्य के लक्ष्य को लेकर संघर्ष करते हैं (‘मैं कौन हूँ?’)। 2. स्वतंत्रता की चाह: माता-पिता पर निर्भरता कम होती है और स्वतंत्रता तथा स्वायत्तता की इच्छा बढ़ती है। 3. समूह का महत्व: साथियों के समूह (Peer Group) का प्रभाव चरम पर होता है।
मुख्य चुनौतीभूमिका निर्वाह को लेकर अनिश्चितता, भावनात्मक अस्थिरता, और समायोजन (Adjustment) की समस्याएँ।

3. CTET प्रतियोगी परीक्षा के लिए 5 कठिन MCQs

प्रश्न 1: एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास के सिद्धांत (Erikson’s Psychosocial Development Theory) के अनुसार, किशोरावस्था में व्यक्ति किस मुख्य विकासात्मक चुनौती (Developmental Crisis) का सामना करता है?

(A) स्वायत्तता बनाम शर्म और संदेह (Autonomy vs. Shame and Doubt)

(B) पहचान बनाम भूमिका भ्रम (Identity vs. Role Confusion)

(C) अंतरंगता बनाम अलगाव (Intimacy vs. Isolation)

(D) परिश्रम बनाम हीनता (Industry vs. Inferiority)

Ans.

उत्तर: (B)

स्पष्टीकरण: एरिक्सन के सिद्धांत में, किशोरावस्था (12-18 वर्ष) की केंद्रीय चुनौती अपनी पहचान स्थापित करना है। किशोरों को यह पता लगाना होता है कि वे कौन हैं और समाज में उनकी भूमिका क्या है; यदि वे इसमें विफल रहते हैं, तो भूमिका भ्रम पैदा होता है।


प्रश्न 2: किशोरावस्था में अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking) के विकास का शैक्षिक निहितार्थ (Educational Implication) क्या है?

(A) शिक्षक को अधिक मूर्त (Concrete) शिक्षण सामग्री का उपयोग करना चाहिए।

(B) किशोर अब केवल अनुभवजन्य (Empirical) ज्ञान पर ही निर्भर रहते हैं।

(C) शिक्षक अब गणित, विज्ञान और दर्शनशास्त्र के जटिल, सैद्धांतिक विचारों को प्रस्तुत कर सकते हैं।

(D) किशोरों की तार्किक क्षमता में गिरावट आती है, जिससे रटने पर जोर दिया जाना चाहिए।

Ans.

उत्तर: (C)

स्पष्टीकरण: अमूर्त चिंतन विकसित होने के कारण, किशोर ऐसी अवधारणाओं पर विचार कर सकते हैं जिन्हें इंद्रियों से सीधे नहीं देखा जा सकता (जैसे: न्याय, स्वतंत्रता, बीजगणित के सूत्र)। इसलिए, वे उच्च-स्तरीय, सैद्धांतिक और जटिल विचारों को सीखने के लिए तैयार होते हैं।


प्रश्न 3: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन किशोरावस्था के सामाजिक विकास को सबसे कम दर्शाता है?

(A) माता-पिता से भावनात्मक स्वतंत्रता का प्रयास करना।

(B) समलैंगिक (Same-Sex) साथियों के बजाय विषमलिंगी (Opposite-Sex) साथियों में रुचि बढ़ाना।

(C) मित्र समूह के प्रति अत्यधिक निष्ठा रखना और सामाजिक स्वीकृति प्राप्त करना।

(D) सूक्ष्म गत्यात्मक कौशल (Fine Motor Skills) में तेजी से सुधार करना।

Ans.

उत्तर: (D)

स्पष्टीकरण: सूक्ष्म गत्यात्मक कौशल (जैसे: लिखना, बारीक काम करना) मुख्य रूप से शारीरिक विकास का हिस्सा है और यह बाल्यावस्था में सबसे तेज़ी से विकसित होता है, जबकि किशोरावस्था की पहचान मुख्य रूप से सामाजिक-संवेगात्मक और संज्ञानात्मक परिवर्तनों से होती है।


प्रश्न 4: किशोरावस्था में एक छात्र अक्सर यह तर्क देता है कि “मेरे विचार अद्वितीय हैं और मुझे कोई नहीं समझ सकता”। यह घटना किस संज्ञानात्मक विशेषता का हिस्सा है?

(A) अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking)

(B) किशोर अहंकेंद्रिता (Adolescent Egocentrism)

(C) संरक्षण का अभाव (Lack of Conservation)

(D) अनुकूली तर्क (Adaptive Reasoning)

Ans.

उत्तर: (B)

स्पष्टीकरण: किशोर अहंकेंद्रिता दो प्रकारों में विभाजित है: 1. काल्पनिक दर्शक (Imaginary Audience) (यह महसूस करना कि हर कोई उन्हें देख रहा है) और 2. व्यक्तिगत मिथक (Personal Fable) (यह मानना कि वे अद्वितीय हैं, उनकी भावनाएँ अद्वितीय हैं, और नियम/खतरे उन पर लागू नहीं होते)। दिया गया कथन व्यक्तिगत मिथक का उदाहरण है।


प्रश्न 5: एक शिक्षक को किशोरावस्था के छात्रों के लिए कक्षा में किस प्रकार की शिक्षण पद्धति अपनानी चाहिए?

(A) केवल व्याख्यान विधि (Lecture Method) का उपयोग करना।

(B) बहस, समूह चर्चा और ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देना जो अमूर्त समस्याओं को हल करने पर केंद्रित हों।

(C) उन्हें केवल मूर्त, हस्त-संचालित गतिविधियों में व्यस्त रखना।

(D) उनके साथियों के समूह के साथ सख्त अलगाव सुनिश्चित करना।

Ans.

उत्तर: (B)

स्पष्टीकरण: किशोरावस्था में अमूर्त चिंतन और तार्किक क्षमता विकसित होती है। बहस (Debate) और समूह चर्चा (Group Discussion) उनकी तार्किक शक्ति, सामाजिक कौशल और अमूर्त समस्याओं को विभिन्न दृष्टिकोणों से हल करने की क्षमता को बढ़ावा देती है।

Spread the love

You cannot copy content of this page