रामभक्ति काव्य धारा

रामभक्ति काव्य धारा: परिचय और विकास

राम भारतीय संस्कृति के भाव-नायक और लोकनायक हैं। उनकी कथा वैदिक काल से आधुनिक समय तक काल और परंपराओं के अनुसार परिवर्तित होती रही है। रामभक्ति काव्य धारा में राम को पुराण पुरुष, मिथक नायक, और सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में स्थापित किया गया है।


रामकथा का प्राचीन विकास

  1. वैदिक एवं प्राचीन वाचिक परंपरा:
    • रामकथा की शुरुआत वाचिक परंपरा में छठी शताब्दी ई. पू. के आसपास मानी जाती है।
    • वाल्मीकि कृत रामायण को प्राचीनतम उपलब्ध रामकाव्य और आदिकाव्य माना गया।
  2. बौद्ध और जैन साहित्य में रामकथा:
    • बौद्ध साहित्य में राम को बोधिसत्त्व के रूप में प्रस्तुत किया गया।
    • जैन कवि विमलसूरी ने प्राकृत भाषा में पउमचरिय लिखकर रामकथा को जैन परंपरा में ढाला।
  3. संस्कृत साहित्य में रामकथा:
    • कालिदास के रघुवंश और भवभूति के महावीरचरित्र तथा उत्तररामचरित्र में रामकथा को भावनात्मक गहराई और करुणा के रस के साथ प्रस्तुत किया गया।
  4. दक्षिण भारत की रामकथा परंपरा:
    • कम्बन कृत तमिल रामायण दक्षिण भारत में रामकथा का प्राचीनतम ग्रंथ है।

रामभक्ति परंपरा का प्रसार

  1. रामानंद का योगदान:
    • रामानंद को रामभक्ति परंपरा का आधारस्तंभ माना जाता है।
    • उन्होंने लोकभाषा में रचना करने की प्रेरणा दी और भक्ति को संकीर्णताओं से मुक्त किया।
    • उनके प्रमुख विचार:
      • राम एकमात्र कर्ता, पालक और संहर्ता हैं।
      • सीता, राम की आद्याशक्ति और सहचरी हैं।
      • भक्ति का मुख्य रूप दास्य भाव है।
  2. समाज सुधार:
    • रामानंद ने जाति-पांति, कर्मकांड, और वर्णव्यवस्था का विरोध किया।
    • भक्ति को व्यापक बनाते हुए सभी वर्गों, जातियों, और धर्मों के लिए इसे सुलभ बनाया।

हिंदी रामभक्ति शाखा

तुलसीदास इस शाखा के अग्रदूत हैं। उनके माध्यम से रामकथा को व्यापक लोकस्वीकृति और लोकप्रियता मिली।

  • तुलसीदास की रचना:
    • रामचरितमानस
    • इसमें राम की मानवता, आदर्श, और लोककल्याणकारी रूप को प्रस्तुत किया गया।
    • मानस में राम को शील, शक्ति और सौंदर्य का प्रतीक बनाया गया।

तुलसी से पहले और बाद के कवि:

  • तुलसीदास से पूर्व और पश्चात कई कवियों ने रामकथा पर आधारित काव्य लिखा, जिनमें प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं:
कविकृतियाँविशेषताएँ
भूषणरामभूषणवीर रस में राम का चित्रण।
कृष्णदासरामायणसरल शैली और लोकभाषा का प्रयोग।
कृतिवासकृतिवासीय रामायणबंगाली भाषा में रामकथा।
कम्बनकम्बन रामायणतमिल भाषा में भक्ति और काव्य सौंदर्य।
भवभूतिउत्तररामचरित्रकरुण रस का प्रमुख स्वर।

रामभक्ति काव्य की विशेषताएँ

  1. राम का आदर्शवादी चित्रण:
    • राम को शील, शक्ति, और सौंदर्य के आदर्श रूप में प्रस्तुत किया गया।
  2. भक्ति का प्रचार:
    • भक्ति के माध्यम से सामाजिक समरसता का संदेश।
    • जाति, धर्म, और संप्रदाय से परे जाकर राम के प्रति निष्ठा।
  3. लोकभाषा का प्रयोग:
    • लोकभाषा में काव्य रचना कर भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया।
  4. करुण और दास्य भाव की प्रधानता:
    • रामभक्ति में करुण रस और दास्य भाव प्रमुख रूप से दिखता है।

निष्कर्ष

रामभक्ति काव्य धारा ने भारतीय साहित्य और समाज को गहरे स्तर पर प्रभावित किया। रामानंद और तुलसीदास जैसे संतों ने इसे लोकभाषा में प्रस्तुत कर इसे व्यापक जनसमूह का काव्य बनाया। रामभक्ति न केवल धार्मिक साधना है, बल्कि यह सामाजिक सुधार, सांस्कृतिक समरसता, और मानवीय मूल्यों का प्रतीक भी है।