हिंदी साहित्य पर राजनैतिक प्रभाव का अत्यधिक गहरा असर पड़ा, विशेषकर मध्यकाल में जब भारत विभिन्न विदेशी आक्रमणों और राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रहा था। इस समय के दौरान भारत की राजनीतिक स्थिति बहुत ही दयनीय हो गई थी, और इसके प्रभाव से साहित्यिक क्षेत्र भी प्रभावित हुआ।
राजनैतिक प्रभाव:
- हर्षवर्धन का साम्राज्य और उसकी समाप्ति: हर्षवर्धन का साम्राज्य 7वीं शताब्दी में एक महाशक्ति था, लेकिन जब उनका साम्राज्य टूट गया और विभिन्न राज्य स्वतंत्र हो गए, तो भारत की राजनीतिक स्थिति कमजोर होने लगी। इसके बाद, विदेशी आक्रमणकारियों के हमलों ने भारत को आंतरिक रूप से कमजोर कर दिया।
- विदेशी आक्रमण: 8वीं से 15वीं शताब्दी तक, भारतीय राजनीति पर इस्लामी शासकों का कब्जा बढ़ने लगा। महमूद गजनवी और शहाबुद्दीन मोहम्मद गौरी के आक्रमणों ने भारत को और भी कमजोर कर दिया। पृथ्वीराज चौहान और शहाबुद्दीन गौरी के बीच तराइन के युद्ध ने भारतीय राजनीति का दिशा निर्धारित की, जिसमें भारतीय साम्राज्य की हार और विदेशी शासकों का सत्ता में प्रवेश हुआ।
- साहित्य पर प्रभाव: विदेशी आक्रमणों और आंतरिक संघर्षों के कारण भारतीय जनता मानसिक रूप से आहत थी। ऐसे समय में साहित्य ने अपनी भूमिका निभाई, जिसमें मानवता की दुख-दर्द को व्यक्त किया गया। धार्मिकता, आस्था, और आत्मसमर्पण की भावना को बढ़ावा दिया गया। साहित्य में शौर्य, वीरता और धार्मिकता के तत्व प्रमुख हुए।
- रासो साहित्य: युद्धों और राजाओं के शौर्य को लेकर रासो साहित्य का विकास हुआ। इसमें आश्रयदाता राजाओं की अतिशयोक्ति पूर्ण प्रशंसा की जाती थी। यह साहित्य राजाओं की वीरता और पराक्रम को दर्शाता था।
- अमीर खुसरो का साहित्य: अमीर खुसरो ने अपनी काव्य रचनाओं में इस युग के संघर्षों और जीवन की कठिनाइयों को चित्रित किया। उनकी प्रसिद्ध कृति “खुसरो की पहेलियाँ” इस समय की दुखों और शारीरिक-आध्यात्मिक संघर्षों को दर्शाती है। जैसे कि एक पहेली में वह कहते हैं:
बाप का उससे नाम जो पूछा, आधा नाम बताया।।
आधा नाम पिता पर प्यारा, बूझ पहेली गौरी।
अमीर खुसरो यो कहे, अपने नाम न बोली निबोरी।।”यह कविता उस समय की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाती है, जिसमें व्यक्तित्व और पहचान के संघर्ष को चित्रित किया गया है। - सामाजिक और आर्थिक स्थिति: इन आक्रमणों के कारण भारत की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर पड़ा। लोगों को अकाल, भुखमरी, और सामाजिक असमानता का सामना करना पड़ा। गुलाम प्रथा और दास प्रथा ने समाज को और अधिक विभाजित किया। महिलाओं की स्थिति और भी दयनीय हो गई, और उनका शोषण बढ़ गया।
- धार्मिकता और आध्यात्मिकता का बढ़ता प्रभाव: युद्धों और आक्रमणों के बीच, जब लोग भौतिक सुखों से वंचित हो गए थे, तब उनका रुझान आध्यात्मिकता और ईश्वर की भक्ति की ओर बढ़ने लगा। इस समय के साहित्य में ईश्वर के प्रति आस्था और धार्मिकता का महत्व बढ़ा, और कवि भौतिक दुखों से मुक्ति पाने के लिए आध्यात्मिक मार्ग का अनुसरण करने लगे।
इस प्रकार, भारतीय राजनीति की अनिश्चित स्थिति और विदेशी आक्रमणों का गहरा प्रभाव हिंदी साहित्य पर पड़ा। यह साहित्य उस समय की कठिनाइयों, शौर्य, और धार्मिक आस्था को प्रतिबिंबित करता है।
