हिंदी में पाँच उपभाषाएँ

अपभ्रंश की क्षेत्रीय भाषाएँ, जिनसे हिंदी का उद्भव हुआ:

हिंदी भाषा का विकास प्राचीन अपभ्रंश भाषाओं से हुआ है, जो संस्कृत की प्राकृत शाखाओं के रूप में विकसित हुईं। इन अपभ्रंशों से ही हिंदी के विभिन्न रूपों और बोलियों का जन्म हुआ। अपभ्रंश के प्रमुख रूपों में शौरसेनी अपभ्रंश, मागधी अपभ्रंश, और अर्धमागधी अपभ्रंश शामिल हैं। इन भाषाओं के प्रभाव ने हिंदी को एक समृद्ध भाषाई धरोहर दी, जिसमें कई उपभाषाएँ और बोलियाँ विकसित हुईं।

1. शौरसेनी अपभ्रंश:

शौरसेनी अपभ्रंश मुख्य रूप से मध्य भारत और उत्तर भारत में प्रचलित था और इसका प्रभाव हिंदी के प्रमुख रूपों पर पड़ा। शौरसेनी अपभ्रंश से हिंदी की कई उपभाषाएँ और बोलियाँ विकसित हुईं।

शौरसेनी अपभ्रंश की उपभाषाएँ:

  1. पश्चिमी हिंदी – इस उपभाषा का प्रमुख उदाहरण है राजस्थानी और मारवाड़ी
  2. पूर्वी हिंदी – इसमें मैथिली, बिहारी, और अवधी जैसी बोलियाँ आती हैं।
  3. राजस्थानी – यह राजस्थान और उससे जुड़े क्षेत्रों की प्रमुख बोली है।
  4. पहाड़ी – यह पहाड़ी क्षेत्रों में बोली जाती है, जैसे हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में।
  5. बिहारी – यह बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में प्रचलित है।

शौरसेनी अपभ्रंश की बोलियाँ:

  1. खड़ीबोली (कौरवी) – यह उत्तर भारत में बोली जाने वाली प्रमुख हिंदी बोलियों में से एक है।
  2. ब्रजभाषा – यह उत्तर प्रदेश और मथुरा-वृंदावन क्षेत्र की प्रमुख बोली है।
  3. बुन्देली – बुंदेलखंड क्षेत्र में बोली जाती है।
  4. हरियाणवी (बांगरू) – यह हरियाणा राज्य की प्रमुख बोली है।
  5. कन्नौजी – यह उत्तर प्रदेश के कन्नौज क्षेत्र में बोली जाती है।
  6. अवधी – यह उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बोली जाती है।
  7. बघेली – यह मध्य प्रदेश के बघेलखंड क्षेत्र में प्रचलित है।
  8. छत्तीसगढ़ी – यह छत्तीसगढ़ राज्य की प्रमुख बोली है।
  9. मारवाड़ी – यह राजस्थान, विशेषकर पश्चिमी राजस्थान की प्रमुख बोली है।
  10. जयपुरी – यह जयपुर और आसपास के क्षेत्र की बोली है।
  11. मेवाती – यह हरियाणा और राजस्थान के मेवात क्षेत्र में बोली जाती है।
  12. मालवी – यह मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र की बोली है।
  13. पश्चिमी पहाड़ी – यह पहाड़ी क्षेत्रों में बोली जाती है।
  14. मध्यवर्ती पहाड़ी – यह उत्तर भारत के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में बोली जाती है।
  15. मैथिली – यह बिहार और नेपाल के कुछ हिस्सों में बोली जाती है।
  16. मगही – यह बिहार और झारखंड के कुछ हिस्सों में बोली जाती है।
  17. भोजपुरी – यह बिहार, उत्तर प्रदेश, और नेपाल के कुछ हिस्सों में बोली जाती है।

निष्कर्ष:

इस प्रकार, शौरसेनी अपभ्रंश ने हिंदी की पाँच प्रमुख उपभाषाओं – पश्चिमी हिंदी, पूर्वी हिंदी, राजस्थानी, पहाड़ी, और बिहारी – को जन्म दिया। इन उपभाषाओं में कुल मिलाकर अठारह प्रमुख बोलियाँ विकसित हुईं, जो आज हिंदी भाषी क्षेत्र के विभिन्न भागों में प्रचलित हैं। इन बोलियों का हिंदी साहित्य और भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है।

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