कक्षा 7 विज्ञान: मिट्टी (मृदा) – स्मरणीय तथ्य
1. मृदा का महत्व और संगठन
- जीवन का आधार: मृदा (मिट्टी) जीवन का एक आधारीय घटक है, जिस पर सभी पौधे और परोक्ष रूप से जंतु निर्भर करते हैं।
- मृदा का संघटन (Composition): मिट्टी में निम्नलिखित घटक पाए जाते हैं:
- खनिज (Minerals): 45%
- वायु (Air): 25%
- जल (Water): 25%
- ह्यूमस (Humus): 5%
- सरंध्रता (Porosity): मिट्टी में छोटे-छोटे छिद्र या सरंध्रता पाई जाती है, जिसके कारण इसमें वायु और जल समाहित होते हैं। यह पौधों और जंतुओं के जीवन के लिए विशेष महत्व रखता है।
2. मृदा निर्माण (Soil Formation)
- अपक्षय (Weathering): पृथ्वी पर चट्टानें भौतिक, रासायनिक और जैविक कारकों के कारण छोटे-छोटे टुकड़ों में, और अंततः बारीक कणों में टूट जाती हैं। चट्टानों के छोटे कणों में टूटना अपक्षय कहलाता है।
- निर्माण: इसी अपक्षय की प्रक्रिया से मिट्टी का निर्माण होता है।
3. मृदा परिच्छेदिका (Soil Profile) और संस्तर
मृदा की खड़ी काट (Vertical Section) को मृदा परिच्छेदिका कहते हैं, जो विभिन्न परतों (संस्तरों) में व्यवस्थित होती है।
- मृदा संस्तर (Soil Horizons): मिट्टी चार मुख्य संस्तरों में व्यवस्थित होती है:
- O संस्तर (कार्बनिक): सबसे ऊपरी कार्बनिक संस्तर।
- A संस्तर (ह्यूमस संस्तर): यह सबसे ऊपरी परत है, जो ह्यूमस और खनिजों से भरपूर होती है। यह उपजाऊ होती है।
- B संस्तर (मध्य परत): यह कठोर और अधिक खनिज वाला होता है, इसमें ह्यूमस कम होता है।
- C संस्तर (आधार परत): इसमें चट्टान के छोटे कण (टूटी हुई चट्टान) होते हैं।
- R संस्तर (मूल चट्टान): सबसे निचली, अखंड चट्टान।

4. मिट्टी के कण और प्रकार
- मिट्टी में कणों के प्रकार: मिट्टी में कणों के आकार के आधार पर चार प्रकार होते हैं:
- बजरी या कंकड़ (Gravel): कण आकार में सबसे बड़े होते हैं।
- रेत (Sand)
- गाद (Silt)
- क्ले (Clay): कण आकार में सबसे छोटे होते हैं।
- मिट्टी के प्रकार (कणों के मिश्रण पर आधारित):
- रेतीली मिट्टी (Sandy Soil): इसमें रेत की मात्रा अधिक होती है। जलधारण क्षमता कम होती है।
- चिकनी मिट्टी (Clayey Soil): इसमें क्ले (क्ले कण) की मात्रा अधिक होती है। जलधारण क्षमता सबसे अधिक होती है।
- दोमट मिट्टी (Loamy Soil): यह चिकनी मिट्टी, रेत और ह्यूमस के लगभग समान मिश्रण से मिलकर बनती है। यह खेती के लिए सबसे उपयुक्त होती है।
5. मृदा अपरदन और प्रदूषण
- मृदा अपरदन (Soil Erosion): मिट्टी की उपजाऊ ऊपरी परत का नुकसान (हटना) मिट्टी का अपरदन कहलाता है।
- अपरदन के कारण (बढ़ावा देने वाले कारक):
- तेज हवा और बहता पानी।
- जंगलों को काटना (वनोन्मूलन)।
- पशुओं का अत्यधिक चरना।
- अत्यधिक कृषि और भूमि की खुदाई।
- नोट: पेड़-पौधे मिट्टी का संरक्षण करते हैं, अपरदन को बढ़ावा नहीं देते।
- मृदा प्रदूषण (Soil Pollution):
- कूड़े-करकट और वाहित मल (सीवेज) का अनुचित निपटान।
- कीटनाशी, कवकनाशी और उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी प्रदूषित होती है।
- खारा जल (Saline Water): यह मिट्टी में लवणों की मात्रा को बढ़ा देता है, जिससे मिट्टी खेती योग्य नहीं रहती और प्रदूषित हो जाती है।




