हिंदी में अठारह बोलियाँ

यहाँ पर हिंदी की कुछ प्रमुख उपभाषाएँ और बोलियाँ दी गई हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में बोली जाती हैं:

खड़ीबोली – पश्चिमी हिंदी की प्रमुख बोली, जिसे कौरवी भी कहा जाता है। यह दिल्ली, गाजियाबाद, मुरादाबाद, सहारनपुर आदि क्षेत्रों में बोली जाती है। खड़ीबोली का वर्तमान रूप हिन्दी काव्य की मुख्य बोली बन गई है।

हरियाणवी – हरियाणा प्रदेश में बोली जाने वाली बोली, जो चंडीगढ़, हिसार, रोहतक आदि क्षेत्रों में प्रचलित है। इसमें पंजाबी भाषा का भी प्रभाव देखा जाता है।

कन्नौजी – यह बोली कानपुर, इटावा, शाहजहाँपुर, हरदोई आदि क्षेत्रों में बोली जाती है। कन्नौजी को ब्रज भाषा के समान माना जाता है, लेकिन यह उससे भिन्न है।

ब्रजभाषा – मथुरा, वृन्दावन और आसपास के क्षेत्र की प्रमुख बोली। यह शौरसेनी अपभ्रंश का मध्यवर्ती रूप है और हिंदी साहित्य में प्रसिद्ध काव्य रचनाओं की बोली है।

बुन्देली – बुन्देलखंड क्षेत्र की बोली, जो ओरछा, झाँसी, छतरपुर, सागर आदि क्षेत्रों में बोली जाती है। इसका साहित्य “आल्हा खण्ड” के रूप में प्रसिद्ध है।

अवधी – यह अयोध्या और आसपास के क्षेत्र की बोली है। तुलसीदास की ‘रामचरितमानस’ और जायसी की ‘पदमावत’ जैसी कृतियाँ अवधी में रची गई हैं।

बघेली – रीवां क्षेत्र में बोली जाने वाली बोली, जिसे बघेल खण्ड के नाम से भी जाना जाता है। यह रींवा, सतना, मेहर, जबलपुर आदि क्षेत्रों में बोली जाती है।

छत्तीसगढ़ी – छत्तीसगढ़ राज्य की बोली, जो रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग आदि क्षेत्रों में बोली जाती है।

मारवाड़ी – राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र की बोली, जो जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, सिरोही आदि क्षेत्रों में बोली जाती है।

जयपुरी – राजस्थान के पूर्वी भाग की बोली, जिसे ढूंढाड़ी भी कहा जाता है। जयपुर, टोंक, किशनगढ़ आदि क्षेत्रों में यह बोली जाती है।

मेवाती – उत्तरी राजस्थान और मेवात क्षेत्र में बोली जाती है। इसका प्रभाव अलवर, भरतपुर, गुड़गाँव आदि क्षेत्रों में है।

मालवी – यह राजस्थान और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र की बोली है, जिसे मालवा क्षेत्र में बोला जाता है। इसका प्रसार इन्दौर, रतलाम, भोपाल, देवास आदि क्षेत्रों में है।

भोजपुरी – बिहार के भोजपुर क्षेत्र की बोली, जो बनारस, शाहाबाद, गोरखपुर, बलिया, मिर्जापुर आदि क्षेत्रों में बोली जाती है।

मगही – बिहार के मगध क्षेत्र की बोली, जो पटना, भागलपुर, गया, पलामू आदि क्षेत्रों में बोली जाती है।

मैथिली – बिहार के मिथला क्षेत्र की बोली, जो दरभंगा, पूर्णिया, मुंगेर, मुजफ्फरपुर आदि क्षेत्रों में बोली जाती है। यह वाणी की मधुरता के लिए प्रसिद्ध है।

पश्चिमी पहाड़ी – हिमाचल प्रदेश के शिमला, मण्डी, धर्मशाला, अम्बाला आदि क्षेत्रों में बोली जाने वाली बोली।

मध्यवर्ती पहाड़ी (गढ़वाली, कुमाऊँनी) – गढ़वाल और कुमाऊँ क्षेत्र में बोली जाती है। कुमाऊँनी बोली नैनीताल, अल्मोड़ा, रानीखेत आदि क्षेत्रों में बोली जाती है।

इन उपभाषाओं और बोलियों का क्षेत्रीय महत्व है और हिंदी भाषा की विविधता को दर्शाती हैं। प्रत्येक बोली का अपना साहित्य, संस्कृति और पहचान है, जो भारतीय समाज की भाषिक समृद्धि को प्रमाणित करती हैं।

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