रसखान और अन्य कृष्ण भक्त कवि

रसखान: कृष्ण प्रेम के रससिक्त कवि

रसखान हिंदी साहित्य के अत्यंत लोकप्रिय कृष्ण भक्त कवि थे, जिन्होंने अपनी रचनाओं में प्रेम, भक्ति और शृंगार का अनुपम समन्वय किया। उनके जन्म, शिक्षा-दीक्षा और जीवन-परिचय के विषय में कोई निश्चित प्रमाण उपलब्ध नहीं है, किंतु ‘दो सौ बावन वैष्णवन की वार्ता’ के अनुसार, वे प्रारंभ में लौकिक प्रेम में आसक्त थे, लेकिन बाद में कृष्ण भक्ति में लीन हो गए।

काव्य विशेषताएँ

  1. सवैया छंद पर अद्भुत अधिकार – रसखान ने कृष्ण की लीलाओं का वर्णन मुख्य रूप से सवैया छंद में किया है। उनके सवैये सहज, प्रवाहमय और भावप्रवण हैं।
  2. भक्ति और शृंगार का संतुलन – वे सूफी भाव लिए हुए भक्त कवि थे, जिनके काव्य में कृष्ण के प्रति प्रेम का उत्कट भाव दिखता है।
  3. ब्रजभाषा की मधुरता – उनकी भाषा ब्रजभाषा की सहज प्रवाहमयता लिए हुए है, जिससे उनके काव्य में संगीतात्मकता आ जाती है।
  4. प्रकृति और दृश्य चित्रण – उनके काव्य में कृष्ण की बाल लीलाएँ, रासलीलाएँ और गोपियों के साथ प्रेमपूर्ण संवादों का सजीव चित्रण मिलता है।

प्रमुख रचनाएँ

  1. सुजान रसखान
  2. प्रेमवाटिका (1614 ई.) – इसमें भक्ति और प्रेम की पराकाष्ठा का चित्रण किया गया है।
  3. दानलीला – इसमें गोवर्धन पूजा के समय गोपियों द्वारा किए गए दान का मनोहारी वर्णन है।

उनकी प्रसिद्ध पंक्तियाँ –
“प्रान वही जु रहैं, रिझि वापर रूप वहीं लिहिं वाहि रिझाओ।
सीस वही जिन वे परसे पद अंक वही जिन वा परसायो।।”


अन्य प्रमुख कृष्ण भक्त कवि

1. स्वामी हरिदास (16वीं शती)

  • तानसेन के गुरु और राग के महान साधक।
  • केलि माला और अन्य रचनाओं में कृष्ण की लीलाओं का वर्णन।

2. हरिराम व्यास (16वीं शती)

  • कृष्ण की भक्ति के गहरे साधक।
  • उनके पदों में गोपी भाव की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति मिलती है।

3. सुखदास (17वीं शती)

  • कृष्ण के वात्सल्य रूप का सुंदर चित्रण।

4. लालचदास (16वीं शती)

  • भक्ति साहित्य में महत्त्वपूर्ण स्थान।

5. नरोत्तमदास (16वीं शती)

  • सुदामा चरित्र के रचयिता।
  • इसमें सुदामा की दीनता, संतोष और कृष्ण की मित्रता का हृदयग्राही चित्रण है।

6. रहीम (16वीं शती)

  • नीति और भक्ति के कवि।
  • ब्रज और अवधी दोनों में काव्य रचना की।
  • उनके नीति दोहे आज भी लोकप्रिय हैं –
    “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय।
    टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय।।”

निष्कर्ष

रसखान अपने काव्य में कृष्ण भक्ति, प्रेम और माधुर्य रस की त्रिवेणी प्रवाहित करने वाले अद्वितीय कवि थे। उनके साथ अन्य कृष्ण भक्त कवियों ने भी हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। उनके काव्य में प्रेम और भक्ति का जो गहन और सरल प्रवाह है, वह आज भी पाठकों को मोह लेता है।

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