भाग – 1: शील के बरवै छंद (कक्षा 10, इकाई 5)
शिक्षण उद्देश्य: छात्र छत्तीसगढ़ी के ‘बरवै छंद’ की विशेषताओं से परिचित हो सकें, नारी के विदाई और ससुराल के मनोभावों को समझ सकें, तथा अनुप्रास और रूपक अलंकार को पहचान सकें।
Day 1: कवि परिचय, छंद परिचय और बिदाई का गीत
- प्रवेश (5 मिनट): “विवाह के बाद बेटी की विदाई (बिदा) के समय घर का माहौल कैसा होता है? मायके और ससुराल की यादों में क्या फर्क है?” छात्रों से चर्चा करें।
- कवि परिचय (10 मिनट): शेषनाथ शर्मा ‘शील’ का जीवन परिचय दें। बताएं कि उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा में ‘बरवै छंद’ को प्रतिष्ठित किया।
- छंद परिचय (5 मिनट): ‘बरवै छंद’ अर्धसम मात्रिक छंद है (प्रत्येक चरण में क्रमशः 12 और 7 मात्राएँ होती हैं)।
- व्याख्या (20 मिनट): पहला पद “बिदा के बेरा” पढ़ें।
- “सुसकत आवत होही, भद्या मोर…” (बहन विदा होते समय रो रही है)। “तुलसी चौरा म देव, सालिग राम” (तुलसी के चौरे में देव और साले राम की पूजा हो रही है)। “तिया जनम के पोथी, म दुई पान” (स्त्री जीवन की पोथी में दो पन्ने हैं – मायका और ससुराल)।
- गृहकार्य: “बिदा के बेरा” कविता याद कीजिए और शब्दार्थ (सुसकत, छहहा, अगोर) लिखिए।
Day 2: ससुराल की सुरता और मायके की यादें
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पिछले दिन का गृहकार्य जांचें।
- व्याख्या (25 मिनट): “ससुरार म मद्दके के सुरता” और “महके म ससुराल के सुरता” पद पढ़ें।
- मायके में: “हहाँ परे हे आज, राउत हाट…” (आज बाजार का दिन है), “मद्या आइस कुलकत, राँघे खीर…” (मायके में खीर बन रही है, विधाता से धैर्य रखने को कहती है)।
- ससुराल में: “तन एती मन ओंती” (शरीर यहाँ, मन वहाँ), “मुँह के कौरा काबर उगला जाय” (खाना गले से नहीं उतरता)।
- भाव स्पष्ट कीजिए: ‘मन-मछरी’ का प्रतीक बताइए (मायके की ओर बहती नदी में तैरती मछली की तरह मन वापस भागता है)।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 2 और 3 लिखिए (मायका एवं ससुराल के बीच की स्थिति, बहन को लेने आई भाई का मन)।
Day 3: अभ्यास प्रश्न
- अभ्यास (25 मिनट): “पाठ से” के प्रश्न 1 (उस दुल्हन की मनोदशा) और प्रश्न 4 (नायिका अपने पति के कष्ट की कल्पना करके दुखी क्यों होती है?) का सामूहिक अभ्यास करें।
- चर्चा (15 मिनट): “विवाह के बाद लड़कियों का ससुराल जाना वैवाहिक जीवन का एक अंग है।” इस विषय पर नैतिक चर्चा करें।
- गृहकार्य: पाठ से आगे प्रश्न 6 (बहन/बेटी के घर का अन्न-जल ग्रहण न करना) पर अपने विचार लिखिए।
Day 4: भाषा और अलंकार
- भाषा कार्य (25 मिनट): बरवै छंद की मात्रा गणना (12, 7, 19) कॉपी में कराएं।
- अनुप्रास अलंकार खोजिए (जैसे – “रो-रो खोजत होही”, “सुरर-सुरर झन”)।
- रूपक अलंकार पहचानिए (जैसे – “तिया जनम के पोथी”)।
- चर्चा (10 मिनट): छत्तीसगढ़ी की विभक्तियों का हिंदी में अनुवाद कराएं।
- गृहकार्य: “भाषा के बारे में” प्रश्न 1 और 2 को हल करें।
Day 5: प्रायोजना और मूल्यांकन
- प्रायोजना (20 मिनट): छत्तीसगढ़ी के विवाह गीतों का संकलन कर कक्षा में सस्वर गायन करें। अपने क्षेत्र में प्रचलित विवाह की रस्मों पर एक लेख लिखें।
- मूल्यांकन (15 मिनट): बरवै छंद की विशेषताएँ, नायिका के मनोभावों पर आधारित एक लघु प्रश्नोत्तरी लें।
भाग – 2: जीवन का झरना (कक्षा 10, इकाई 6)
शिक्षण उद्देश्य: छात्र जीवन की गतिशीलता, संघर्ष और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा को समझ सकें; मानवीकरण अलंकार को पहचान सकें और प्रतीकों के माध्यम से जीवन दर्शन को आत्मसात कर सकें।
Day 1: कवि परिचय और प्रारंभ
- प्रवेश (5 मिनट): “पहाड़ी से निकलने वाला झरना आगे कैसे बढ़ता है? क्या वह रुकता है?” छात्रों से झरने के स्वभाव पर चर्चा करें।
- कवि परिचय (10 मिनट): आरसी प्रसाद सिंह का परिचय दें। उन्हें ‘जीवन और यौवन का कवि’ कहा जाता है।
- सस्वर वाचन (5 मिनट): कविता का पहला चरण पढ़ें।
- व्याख्या (20 मिनट): “यह जीवन क्या है? निर्झर है…” (जीवन एक झरना है, जिसका पानी मस्ती है)। “सुख-दुख के दोनों तीरों से, चल रहा राह मनमानी है” (जीवन सुख-दुख दोनों के बीच बहता है)।
- गृहकार्य: शब्दार्थ (निर्झर, यौवन, गिरि, कूल) लिखिए।
Day 2: गति और यौवन का महत्व
- व्याख्या (25 मिनट): दूसरे चरण को पढ़ें और समझाएं।
- “बाधा के रोड़ों से लड़ता, वन के पेड़ों से टकराता” (जीवन में रुकावटें आती हैं, लेकिन उनसे लड़कर आगे बढ़ना चाहिए)।
- “निर्झर में गति है, जीवन है, रुक जाएगी यह गति जिस दिन। उस दिन मर जाएगा मानव…” (रुकना ही मृत्यु है)।
- भाव स्पष्ट कीजिए: कवि ने ‘सुख-दुख के दोनों तीरों’ से क्या आशय व्यक्त किया है? (प्रश्न 2)।
- गृहकार्य: प्रश्न 5 लिखिए: “जीवन का झरना कविता में मानव का मृत हो जाना क्यों और कब बताया गया है?”
Day 3: निरंतर चलते रहने का संदेश
- व्याख्या (25 मिनट): अंतिम चरण। “मर जाना है रुक जाना ही, निर्झर यह झरकर कहता है” (जीवन का सार है चलना। रुकना मौत है)।
- “चलना है केवल चलना है” पंक्ति का जीवन में महत्व बताएं।
- गतिविधि (15 मिनट): छात्रों से पूछें कि उन्होंने अपने जीवन में कौन सी बाधाएँ पार की हैं और आगे बढ़ने के लिए क्या प्रेरणा ली।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 3 और 4 लिखिए।
Day 4: भाषा और अलंकार
- भाषा कार्य (25 मिनट): कविता में मानवीकरण अलंकार की पहचान कराएं (निर्झर में गति, यौवन, उसका गाना, बढ़ना)।
- प्रतीकों को समझाएं (झरना = जीवन, बाधा के रोड़े = संघर्ष)।
- रचनात्मक लेखन (15 मिनट): दिए गए शब्दों (यौवन, मदमाता, अंचल, गति, झरना) का प्रयोग करते हुए एक कविता या अनुच्छेद लिखें।
- गृहकार्य: भाषा के बारे में प्रश्न 2 और 3 हल करें।
Day 5: प्रायोजना और मूल्यांकन
- प्रायोजना (20 मिनट): प्रकृति में बहने वाले किसी झरने के बारे में जानकारी इकट्ठा करें। जीवन में आशावादी भावों का संचार करने वाली अन्य कविताओं को खोजकर पढ़ें।
- मूल्यांकन (15 मिनट): “निर्झर में गति है, रुक जाएगी यह गति जिस दिन उस दिन मर जाएगा मानव” – इस पंक्ति का भावार्थ लिखिए। मानवीकरण अलंकार का एक उदाहरण लिखिए।
- गृहकार्य: कविता का भावार्थ लिखकर लाएं।
(नोट: दोनों पाठों को कुल 10 दिनों में पूरा करने के लिए यह योजना बनाई गई है। आप कक्षा की आवश्यकता के अनुसार दिनों को घटा या बढ़ा सकते हैं।)

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
