यह कहानी एक ऐसी सामाजिक कुरीति (मृत्युभोज) पर गहरा प्रहार करती है, जो एक गरीब किसान परिवार को बर्बाद कर देती है। कहानी में छत्तीसगढ़ी भाषा की सहजता और मार्मिकता उभरकर सामने आती है।
पाठ योजना: मरिया (कक्षा – 10वीं)
शिक्षण उद्देश्य:
- छात्र “मरिया” (मृत्युभोज) जैसी सामाजिक कुरीतियों से होने वाले आर्थिक नुकसान को समझ सकें।
- छात्र अंधविश्वास और सामाजिक दबाव से टूटते किसान जीवन की संघर्ष कथा को ग्रहण कर सकें।
- छात्र मेहनत, ईमानदारी और आत्मसम्मान का महत्व समझ सकें।
- छात्र छत्तीसगढ़ी भाषा के शब्दों, लोकोक्तियों और ध्वन्यात्मक शब्दों से परिचित हो सकें।
Day 1: लेखक परिचय, कहानी का प्रारंभ और पिता की बीमारी
- प्रवेश (5 मिनट): कक्षा में पूछें: “गाँव में किसी की मृत्यु होने पर लोग क्या करते हैं? क्या आपने कभी ऐसा देखा है कि मरने वाले के परिवार को सैकड़ों लोगों को खाना खिलाना पड़ता हो, जिससे परिवार कंगाल हो जाता है?” विद्यार्थियों से चर्चा करें।
- लेखक परिचय (10 मिनट): डॉ. परदेशी राम वर्मा का परिचय दें। बताएं कि वे छत्तीसगढ़ी और हिंदी के सशक्त कहानीकार हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन और सामाजिक समस्याओं को अपनी कहानियों (आरू फूल, आंचलिक उपन्यास ‘आवा’) में बखूबी उतारा है। उन्हें मध्यप्रदेश शासन द्वारा ‘आरू फूल’ के लिए माधवराव सप्रे सम्मान प्राप्त हुआ।
- सस्वर वाचन (5 मिनट): शिक्षक कहानी का पहला भाग छत्तीसगढ़ी लहजे में पढ़ें।
- व्याख्या (20 मिनट):
- पात्रों का परिचय: सिकुमार (मुख्य पात्र, किसान), उसके बाप रामचरण, और उसकी माई। साँड़ी (गाय-भैंस चराने वाला) निगुर ला डीलर बेटा – रामचरण का चरित्र।
- रामचरण की बीमारी: रामचरण को लकवा (अधरंग) मार गया। सिकुमार अस्पताल (रामसर मंडल किहिस) ले गया, लेकिन “अस्पताल म जर मरे गेल तुम अंगरेजी दवा के मारे। जाही डोकर हा बघेरा। गोली खाही अउ तेल लगाही तहाँ ठेल कुवदला मारही।” (अस्पताल में अंग्रेजी दवा से जान जा सकती है)।
- वैद्य का अंधविश्वास: अंधविश्वासी वैद्य (काले कबूतर के खून की मालिश) का इलाज, जिससे रामचरण की मृत्यु हो जाती है।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 1 लिखिए: “रामचरण के लकवे का इलाज अस्पताल की जगह वैद्य के द्वारा क्यों कराना पड़ा?”
Day 2: मृत्यु, मरिया का दबाव और आर्थिक बर्बादी
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पिछले दिन के गृहकार्य की जांच करें।
- व्याख्या (25 मिनट): कहानी का क्लाइमेक्स और संघर्ष:
- रामचरण की मृत्यु और ‘मरिया’ की मांग: गाँव वाले सिकुमार के घर पर टूट पड़ते हैं। कहते हैं: “मरिया खिलाय बर हम सब जरूरी हे। मरिया खिलाय बर हम सब बड़ा बोझा हे। हमर सामाज म मरिया भात ल बंद करब किये सब होही।” (मरिया खिलाना सामाजिक बोझ है, लेकिन लोग मरिया खिलाने पर अड़े हैं)।
- परिवार का बिखराव: सिकुमार की माँ कहती है “मोर संग म मरिया भात ल बंद करब किये सब होही।” सिकुमार को बेचैनी होती है।
- साँड़ी बेचना: पैसों के लिए सिकुमार को अपनी गाय-बैल (साँड़ी) बेचनी पड़ती है। “साँटी बेचागे। बाई किहिस मोर सों साँटी बाँचे हे। ले जाव। बेच लव।”
- किसान से मजदूर बनना: मरिया के खर्चे से सिकुमार की ज़मीन और बैल चले जाते हैं। वह अब किसान नहीं रहा, मजदूर बन जाता है। यह कहानी की सबसे मार्मिक और महत्वपूर्ण घटना है।
- भाव स्पष्ट कीजिए: “गरीब बर सबके चलथे, घर वाला और बाहिरी सब गरीबहा ल ठठाथें।” – गरीब पर हर कोई हँसता है (प्रश्न 6)।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 2 और 4 लिखिए: “सिकुमार ने बैठक में क्या विनती की?” और “सिकुमार किसान से मजदूर कैसे बन गया?”
Day 3: पुलिस बनने की चाह, भूखन और धोखा
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): सिकुमार के किसान से मजदूर बनने की कहानी दोहराएं।
- व्याख्या (25 मिनट):
- मजदूरी का जीवन: मजदूर बनने के बाद भी सिकुमार का जीवन कठिन था। तभी गाँव का चालाक आदमी भूखन उसे मिलता है।
- भूखन का प्रलोभन: “तोर बर मौका हे। मैय रोज जाधंव भेलई। उहाँ हे रामनगीना सिंह। हमर दोस। ओकर पुलुस कंपनी हे। पाँच सौ रुपिया लागही। ओला देबे त ओ हा तोला पुलुस बना दिही।” (500 रुपये देने पर पुलिस की नौकरी दिलवा देगा)।
- माँ के गहने बेचना: सिकुमार की माँ आर्थिक संकट से परेशान होकर अपने गहने (साँटी) बेचने को तैयार हो जाती है।
- रामनगीना से भेंट: रामनगीना सिंह सिकुमार को भरती (recruitment) के लिए ले जाता है। सिकुमार अपने को जवान, मजबूत समझता है।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 3 लिखिए: “‘दुब्बर बर दू असाइ होगे’ का क्या मतलब है?”
Day 4: धोखे का अनुभव और अंतिम संकल्प
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पुलिस बनने की कहानी का हिस्सा दोहराएं।
- व्याख्या (25 मिनट): कहानी का अंतिम भाग:
- पुलिस की नौकरी का सच: सिकुमार को काम पर ले जाया जाता है। वहाँ उसे ‘तोड़फोड़’ करने वाले साहेब की गाड़ी में बैठाया जाता है और भैंसों को पकड़ने का काम दिया जाता है।
- मार और अपमान: पकड़े जाने पर भैंस मालिक सिकुमार की बुरी तरह पिटाई करता है (“गजब बजेडिन अउ छोड दिन, मूड़ी कान फूट गे सिकुमार के।”) और उसे वहाँ से भगा दिया जाता है।
- रामनगीना का व्यवहार: नौकरी छूट जाती है। रामनगीना कहता है, “मार खाय बर कहाँ भेज दे रहेव।” सिकुमार को एहसास होता है कि उसके पैसे चले गए और वह ठगा गया है।
- अंतिम संकल्प: सिकुमार समझ जाता है कि “मोर खेती-बारी फेर सेना होगे। मैं तो किसान ले मजदूर होगेंव। बिनहार होगेंव।” – असली काम खेती और मेहनत ही है। वह फिर से अपनी जड़ों की ओर लौटने का फैसला करता है।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 7 लिखिए: “‘मरिया’ प्रथा ने सिकुमार की जिंदगी को किस तरह बदल दिया?”
Day 5: भाषा अध्ययन, लोकोक्तियाँ और मूल्यांकन
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): कहानी का संपूर्ण सारांश सुनाएं।
- भाषा कार्य (20 मिनट): पाठ्यपुस्तक के “भाषा के बारे में” खंड का अभ्यास कराएं।
- लोकोक्तियाँ (कहावतें): पाठ में प्रयुक्त लोकोक्तियाँ खोजें और समझाएं:
- “दुब्बर बर दो असाढ़ होगे” (दुखी व्यक्ति पर और विपत्ति आना)।
- “चढ़ौ तिवारी चढ़ौ पाण्डेय, घोड़वा गइस पराय” (अवसर गँवाने वालों को पछताना पड़ता है)।
- “बिन नईये लत्ता, जाय बर कलकत्ता” (पास में कुछ न होना, बाहर जाने की इच्छा होना)।
- ध्वन्यात्मक शब्द: कहानी में ‘मुच ले’ (मुँह बनाकर), ‘दम्म ले’ (धड़ाम से) जैसे शब्दों का प्रयोग हुआ है जो क्रिया की ध्वन्यात्मकता को प्रकट करते हैं। इस तरह के 5-6 शब्द खोजकर वाक्य बनवाएं।
- लोकोक्तियाँ (कहावतें): पाठ में प्रयुक्त लोकोक्तियाँ खोजें और समझाएं:
- अभ्यास (15 मिनट): पाठ के “पाठ से आगे” प्रश्नों पर चर्चा करें:
- प्रश्न 2: अंधविश्वास (काले कबूतर का खून) की सूची बनाएं और उनसे होने वाले नुकसान पर चर्चा करें।
- प्रश्न 3: “सिकुमार को भूखन ने पुलिस की नौकरी करने की सलाह दी ताकि वो ठाठ से रह सकें।” क्या आज के दौर में भी ऐसा होता है?
- मूल्यांकन (10 मिनट): कहानी का मुख्य उद्देश्य (मरिया प्रथा की समाप्ति पर जोर), सिकुमार के चरित्र की विशेषताएँ, और मरिया प्रथा के कारण हुए आर्थिक नुकसान पर आधारित एक छोटा लिखित परीक्षण लें।
- गृहकार्य: कहानी के आधार पर लिखिए: “सिकुमार की तरह मरिया प्रथा के कारण बर्बाद हुए किसानों को बचाने के लिए समाज और सरकार को क्या-क्या कदम उठाने चाहिए?” (निबंध लेखन)।
(नोट: कहानी में छत्तीसगढ़ी शब्दों (जैसे – किहिस, किहिस, भेलई, होगेंव) का बहुतायत से प्रयोग है। कक्षा में इन शब्दों के हिंदी अर्थ बताना आवश्यक है ताकि छात्र कहानी का मर्म समझ सकें। साथ ही, ‘मरिया’ की सामाजिक बुराई को संवेदनशीलता से समझाना होगा।)

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
