यह निबंध जीवन की वास्तविक गहराई को समझाता है – लचीलापन और दृढ़ता का सही संतुलन।
पाठ योजना: एक था पेड़ और एक था ठूँठ (कक्षा – 10वीं)
शिक्षण उद्देश्य:
- छात्र जीवन में लचीलेपन (समन्वय) और दृढ़ता (सिद्धांतों पर अडिग रहना) के बीच के अंतर को समझ सकें।
- छात्र ‘देह’ (शरीर) की परिस्थितियों के अनुसार बदलने और ‘आत्मा’ (मूल्यों) के स्थिर रहने के दर्शन को आत्मसात कर सकें।
- छात्र अधिनायकवाद (तानाशाही) और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण के मूल्यों की तुलना कर सकें।
- छात्र निपात और अविकारी शब्दों (अव्ययों) का सही प्रयोग समझ सकें।
Day 1: लेखक परिचय, प्रारंभिक दृश्य और उलझन की शुरुआत
- प्रवेश (5 मिनट): कक्षा में पूछें: “क्या आपने कभी सोचा है कि पेड़ हवा में झुकता है, पर जड़ स्थिर रहती है। अगर कोई इंसान अपनी जिद पर अड़ा रहे, तो क्या उसे वीर कहा जाएगा या जिद्दी?” छात्रों से चर्चा करें।
- लेखक परिचय (10 मिनट): कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर का परिचय दें। बताएं कि वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, प्रकृति प्रेमी और जीवन दर्शन के सशक्त लेखक थे। उनकी प्रमुख रचनाएँ (जिंदगी मुस्कार, माटी हो गई सोना, दीप जले शब्द जले) बताएं।
- सस्वर वाचन (5 मिनट): शिक्षक द्वारा पाठ का पहला भाग (पहला और दूसरा पैराग्राफ) पढ़ें।
- व्याख्या (20 मिनट):
- खिड़की के सामने का दृश्य: एक ओर हवा में झूलता-झुकता हरा-भरा बरगद का पेड़ (जीवन का प्रतीक) और दूसरी ओर एक सूखा, न हिलने वाला ठूँठ (मृत्यु/जड़ता का प्रतीक)।
- लेखक का प्रश्न: “न हिलना, न झुकना” को आमतौर पर वीरता की पहचान माना जाता है, लेकिन यहाँ तो मरा हुआ ठूँठ नहीं हिल रहा है, जबकि जीवित पेड़ हिल रहा है। तो क्या स्थिरता मृत्यु की निशानी है?
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 4 लिखिए: “दृढ़ता और जड़ता में फर्क को पाठ में किस प्रकार से बताया गया है? उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।”
Day 2: दार्शनिक उलझन और समन्वय का महत्व
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पिछले दिन के गृहकार्य की जांच करें।
- व्याख्या (25 मिनट): पाठ का मध्य भाग (हिटलर, स्टालिन, रावण का उदाहरण) समझाएं:
- समझौता और समन्वय: “हिलना और झुकना, अर्थात परिस्थितियों से समझौता। जिस जीवन में समझौता नहीं, समन्वय नहीं, सामंजस्य नहीं, वह जीवन कहाँ है?”
- लेखक बताते हैं कि जो लोग हठधर्मी होते हैं (जैसे रावण, हिरण्यकश्यप, और आधुनिक समय में हिटलर, स्टालिन), वे केवल अपने मत को सही मानते हैं। यह ‘अधिनायकता’ (डिक्टेटरशिप) है, जो जीवन की जड़ता है।
- विश्व की भाषा: “दे, ले; कह, सुन; मान, मना” – विश्व में जीवित रहने के लिए लेन-देन, सुनना-सुनाना, मानना-मनाना जरूरी है। जो ऐसा नहीं करता, वह कुल्हाड़ी और कुदाल का शिकार बनता है।
- भाव स्पष्ट कीजिए: “विश्व की भाषा है – दे, ले। विश्व की जीवन-प्रणाली है – कह, सुन।” (प्रश्न 5) – इसका अर्थ है कि जीवन में तालमेल (Adjustment) बेहद जरूरी है।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 2 लिखिए: “हमारे विचार लचीले और समन्वयवादी क्यों होने चाहिए? स्पष्ट कीजिए।”
Day 3: वृक्ष की जड़ और निष्कर्ष (कहानी का समाधान)
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पिछली चर्चा को दोहराएं।
- व्याख्या (25 मिनट): पाठ के अंतिम भाग की व्याख्या करें:
- तेज हवा का झोंका और जड़: “हवा का झोंका आता है तो टहनियाँ हिलती हैं, तना भी झूमता है पर अपनी जगह जमी रहती है उसकी जड़। हवा का झोंका हल्का हो या तेज, वह न झुकती है न झूमती है।”
- जीवन की पूर्ण कृतार्थता: मनुष्य का जीवन भी पेड़ की तरह होना चाहिए। कुछ भाग (देह/व्यवहार) लचीला होना चाहिए (दुनिया के साथ तालमेल बिठाना), और कुछ भाग (आत्मा/सिद्धांत) अटल होना चाहिए।
- अंतिम संदेश: “जीवन में देह है, जीवन में आत्मा है। देह है नाशशील और आत्मा है शाश्वत, तो आत्मा को हिलना-झुकना नहीं है और देह को निरंतर हिलना-झुकना ही है… हम दृढ़ हों, जड़ नहीं।”
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 1 और 3 लिखिए: “बाँझ के हरे-भरे पेड़ और दूँठ के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?” और “बाँझ के हरे भरे पेड़ और दूँठ किस मानवीय भाव को प्रकट करते हैं?”
Day 4: भाषा अध्ययन (निपात, अविकारी शब्द) और अभ्यास
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): “हम दृढ़ हों, जड़ नहीं” – इस पंक्ति का अर्थ पूछें।
- भाषा कार्य (25 मिनट): पाठ्यपुस्तक के “भाषा के बारे में” खंड का अभ्यास कराएं।
- निपात (Nipat): “सामने ही सड़क दिख रही थी” और “सामने सड़क दिख ही रही थी”। बताएं कि ‘ही’ शब्द वाक्य में बल (जोर) लाता है। पाठ से ‘न’, ‘नहीं’, ‘तो’, ‘तक’, ‘केवल’ जैसे निपात खोजकर वाक्य बनवाएं।
- अविकारी शब्द (Indeclinables): किंतु, नित्य, हे, अरे, काफी, धीरे-धीरे आदि अविकारी शब्दों (जिनके रूप नहीं बदलते) की पहचान करवाएं और उनके भेद (क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक) समझाएं।
- क्रिया पद: ‘दे’, ‘ले’, ‘कह’, ‘सुन’, ‘मान’, ‘मना’ जैसे क्रिया पदों का स्वतंत्र वाक्यों में प्रयोग करवाएं।
- अभ्यास (10 मिनट): “पाठ से” के शेष प्रश्नों (प्रश्न 5) का सामूहिक उत्तर दें।
- गृहकार्य: पाठ से आगे प्रश्न 2 लिखिए: “आज की परिस्थितियों में एक आदर्श व्यक्ति के जीवन की विशेषताएँ क्या-क्या हो सकती हैं? इस पर समाज के विभिन्न आयु वर्ग के लोगों से वार्ता कर एक आलेख तैयार कीजिए।”
Day 5: प्रायोजना कार्य, चर्चा और मूल्यांकन
- प्रायोजना कार्य (20 मिनट):
- छात्रों को उनके आस-पास के ऐसे लोगों का उदाहरण देने को कहें जो अपने आदर्शों पर दृढ़ हैं और वे लोग भी जो परिस्थितियों के अनुसार बदल जाते हैं।
- चर्चा: “तानाशाही क्या है? तानाशाह की जीवन शैली कैसी होती है?” (पाठ से आगे प्रश्न 4)। लोकतंत्र में सुनना-सुनाना कैसे जरूरी है, इस पर चर्चा कराएं।
- छात्रों को बताएं कि यह निबंध स्वतंत्रता सेनानी (लेखक) के जीवन के अनुभवों से निकला है।
- मूल्यांकन (15 मिनट):
- “वृक्ष की जड़ और तने में क्या अंतर है?”
- “हम दृढ़ हों, जड़ नहीं।” का जीवन में क्या महत्व है?
- अविकारी शब्दों के 5 उदाहरण लिखिए।
- इन प्रश्नों के आधार पर एक लघु लिखित परीक्षण लें।
- गृहकार्य: इस निबंध से प्रेरणा लेते हुए, “लचीलापन और दृढ़ता” विषय पर एक अनुच्छेद लिखकर लाएं।
(नोट: यह योजना छत्तीसगढ़ बोर्ड की पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों पर आधारित है। कक्षा की गति के अनुसार आप दिनों को समायोजित कर सकते हैं।)

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
