शिक्षण उद्देश्य:
- छात्र हिमालय, मानसरोवर और वहां के प्राकृतिक दृश्यों की सुंदरता की कल्पना कर सकें।
- छात्र चकवा-चकई और कस्तूरी मृग के माध्यम से जीवन के गूढ़ दार्शनिक अर्थों को समझ सकें।
- छात्र कविता में प्रयुक्त चित्रात्मक भाषा, युग्म शब्दों और उपसर्गों की पहचान कर सकें।
- छात्रों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और प्रेम का भाव विकसित हो सके।
Day 1: कवि परिचय, प्रस्तुति और प्रथम चरण की व्याख्या
- प्रवेश (5 मिनट): कक्षा में हिमालय की ऊँची चोटियों, हंसों और बादलों के चित्र दिखाएं। पूछें: “पहाड़ों पर बादलों का घिरना आपको कैसा लगता है? क्या आपने कभी ऐसा दृश्य देखा है?” छात्रों से उनके अनुभव साझा करवाएं।
- कवि परिचय (10 मिनट): नागार्जुन (वैद्यनाथ मिश्र) का परिचय दें। बताएं कि वे हिंदी और मैथिली के प्रमुख कवि थे, उन्होंने ‘यात्री’ उपनाम से भी लिखा। वे खेतिहर परिवेश से जुड़े थे, इसलिए उनकी कविताओं में प्रकृति और आम जनता की पीड़ा साफ झलकती है। उन्हें 1965 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
- सस्वर वाचन (5 मिनट): शिक्षक द्वारा पूरी कविता का भावपूर्ण वाचन करें। छात्रों को लय के साथ दोहराने को कहें।
- व्याख्या (20 मिनट): पहले चरण की व्याख्या करें:
- “अमल धवलगिरि के शिखरों पर बादल को घिरते देखा है” – बर्फ से ढके सफेद पहाड़ों पर काल बादलों का घिरना।
- “छोटे-छोटे मोती जैसे उसके शीतल तुहिन कणों को” – बादलों से गिरती ओस (तुहिन) की बूंदों को मोती से तुलना करना।
- “मानसरोवर के उन स्वर्णिम कमलों पर” – मानसरोवर झील के सुनहरे कमलों का वर्णन।
- शब्दार्थ: अमल (निर्मल), धवल (श्वेत), शिखर (चोटी), तुहिन (ओस), बालारूण (उगता सूरज)।
- गृहकार्य: कविता के कठिन शब्दों के अर्थ कॉपी में लिखिए और कविता का पहला चरण याद कीजिए।
Day 2: द्वितीय चरण – हंस, चकवा-चकई और बसंत का सुप्रभात
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पिछले दिन की कविता का पाठ करवाएं और गृहकार्य जांचें।
- व्याख्या (25 मिनट):
- “तुंग हिमालय के कंधे पर छोटी-बड़ी कई झीलें हैं” – हिमालय की गोद में बनी झीलों का वर्णन।
- “समतल देशों से आ-आकर पावस की ऊमस से आकुल” – मैदानों से उड़कर आने वाले हंस।
- “तिक्त-मधुर बिसतंतु खोजते हंसों को तिरते देखा है” – हंसों का पानी में तैरकर कीड़े-मकोड़े (बिसतंतु) खोजना।
- बसंत ऋतु का सुप्रभात और मंद-मंद बहती हवा।
- चकवा-चकई का प्रसंग: रात में अलग-अलग रहने वाले चकवा और चकई का क्रंदन बंद होना, सुबह होने पर उनका “प्रणय कलह” (प्रेम-झगड़ा) छिड़ना। यह वियोग और मिलन का चित्रण है।
- भाव स्पष्ट कीजिए: “निशाकाल के चिर-अभिशापित बेबस उन चकवा-चकई का बंद हुआ क्रंदन…” – चकवा-चकई का प्रेम वियोग का प्रतीक है।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 2 और 3 लिखिए (प्रकृति चित्रण और चकवा-चकई के मनोभाव)।
Day 3: तृतीय चरण – कस्तूरी मृग और कविता का सार
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): दूसरे चरण का सारांश सुनाएं।
- व्याख्या (25 मिनट):
- दुर्गम बफानी घाटी: बर्फीली घाटी जहाँ पहुंचना कठिन है।
- कस्तूरी मृग: “अलख नाम से उठने वाले निज के ही उन्मादक परिमल के पीछे धावित हो-होकर” – कस्तूरी मृग अपने ही नाभि से निकलने वाली खुशबू (कस्तूरी) के पीछे भागता है, पर उसे पता नहीं चलता कि वह खुशबू उसके भीतर ही है।
- दार्शनिक अर्थ: कवि ने कस्तूरी मृग के माध्यम से मनुष्य की उस प्रवृत्ति को दिखाया है जहाँ वह बाहर खुशी और सुख खोजता फिरता है, जबकि वह उसके भीतर ही है (अंतर्दृष्टि की कमी)।
- कविता का सार: बादल के घिरने, हंसों के तैरने और कस्तूरी मृग के भागने के माध्यम से कवि ने प्रकृति के विराट रूप और आत्म-खोज की प्रक्रिया को चित्रित किया है।
- गृहकार्य: प्रश्न 4 (कवि ने कस्तूरी मृग का उल्लेख किस संदर्भ में किया है?) लिखिए।
Day 4: भाषा विस्तार और व्याकरण कार्य
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): कविता का सस्वर वाचन।
- भाषा कार्य (25 मिनट):
- युग्म शब्द (श्रुतिसम भिन्नार्थक): कविता में ‘अनिल’ (हवा) और ‘अनल’ (आग) जैसे शब्द आए हैं। पाठ में दिए गए उदाहरण (अंश/अभिराम, अपेक्षा/उपेक्षा) को पढ़कर छात्रों से ऐसे 5-6 और युग्म शब्द खोजने को कहें।
- उपसर्ग: ‘अमल’, ‘समतल’, ‘सुप्रभात’, ‘अभिशापित’, ‘दुर्गम’, ‘उन्मादक’ आदि शब्दों में उपसर्ग पहचानें (अ+मल, सु+प्रभात, दुर्+गम, उत्+मादक) और इन उपसर्गों से 5-5 नए शब्द बनवाएं।
- अलंकार की पहचान: “छोटे-छोटे मोती जैसे” (उपमा अलंकार) और “बादल को घिरते देखा है” (पुनरुक्ति) की पहचान करवाएं।
- गृहकार्य: अपने आसपास की प्रकृति (सुबह का दृश्य) का वर्णन करते हुए एक अनुच्छेद लिखिए (पाठ से आगे प्रश्न 1 का आधार)।
Day 5: अभ्यास, प्रायोजना कार्य और मूल्यांकन
- अभ्यास कार्य (20 मिनट): पाठ्यपुस्तक के “पाठ से” और “पाठ से आगे” के सभी प्रश्नों का सामूहिक अभ्यास करवाएं। प्रश्न 5 के भाव स्पष्ट कीजिए (ऋतु बसंत का सुप्रभात था… / दुर्गम बफानी घाटी में…)।
- गतिविधि / प्रायोजना (15 मिनट):
- पाठ में “सखि वसंत आया” (सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’) और “दूबों के दरबार में” (माखनलाल चतुर्वेदी) के अंश दिए गए हैं। छात्रों से कहें कि वे इन्हें पढ़ें और बसंत ऋतु की प्रकृति पर 5-6 पंक्तियाँ लिखें।
- प्रवासी पक्षियों पर चर्चा: कविता में हंसों का जिक्र है। छात्रों से पूछें कि पक्षी मौसम बदलने पर कहाँ से कहाँ जाते हैं? (भारत में आने वाले प्रवासी पक्षियों जैसे साइबेरियन क्रेन आदि के बारे में चर्चा करें)।
- मूल्यांकन (10 मिनट): कविता के मुख्य शब्दार्थ, ‘कस्तूरी मृग’ का प्रतीकात्मक अर्थ और कविता की केंद्रीय भावना पर 10 अंकों का एक छोटा लिखित परीक्षण लें।
- गृहकार्य: कविता का सुंदर लिखावट में भावार्थ लिखकर लाएं।
(नोट: यह योजना पाठ्यपुस्तक के पाठ ‘बादल को घिरते देखा है’ और उसके अभ्यास प्रश्नों पर आधारित है। आप कक्षा के समय और छात्रों की समझ के अनुसार इसमें बदलाव कर सकते हैं।)

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
