शिक्षण उद्देश्य:
- छात्र मजदूर वर्ग के सभ्यता और संस्कृति के निर्माण में योगदान को समझ सकें।
- छात्र मजदूरों के शोषण, बेगारी और अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता विकसित कर सकें।
- छात्र अभिधा (वाच्यार्थ) और लक्षणा (लक्ष्यार्थ) शब्द शक्ति का अंतर समझ सकें।
- छात्रों में सामाजिक समरसता और श्रम की प्रतिष्ठा के प्रति सम्मान का भाव जागृत हो सके।
Day 1: परिचय, लेखक परिचय और मजदूर की आत्मकथा का प्रारंभ
- प्रवेश (5 मिनट): कक्षा में एक चित्र दिखाएं (मेहनत करते हुए मजदूर का)। पूछें: “मकान कौन बनाता है? पुल कौन बनाता है? सड़कें कौन बनाता है? लेकिन उन्हें क्या मिलता है?” छात्रों से विचार साझा करवाएं।
- पाठ और लेखक परिचय (10 मिनट): डॉ. भगवत शरण उपाध्याय का परिचय दें। बताएं कि उन्होंने हिन्दी, संस्कृत, इतिहास आदि कई विषयों में अध्ययन किया। उनकी प्रमुख रचनाएँ (विश्व साहित्य की रूपरेखा, आदि) बताएं। साथ ही बताएं कि यह रचना ‘आत्मकथात्मक शैली’ में लिखी गई है।
- सस्वर वाचन (5 मिनट): शिक्षक पाठ का पहला भाग (पृष्ठ 29-30) पढ़ें।
- व्याख्या (20 मिनट):
- “मैं मजदूर हूँ, जीवनबद्ध श्रम शक्ति की इकाई।” – मजदूर की पहचान।
- “मैंने मेहनतकश मजदूर हूँ। आदमी के बने-बनाए से लेकर आज की शिष्ट सभ्यता तक की सीढ़ियों पर मेरे हाथों की बोट है।” – मजदूर के ऐतिहासिक योगदान की व्याख्या।
- मिस्र के पिरामिड, गीज़ा और सिंधु घाटी के उदाहरण।
- “प्राचीन काल से ही मेरी संज्ञा घर के मवेशियों की थी” – मजदूर को जानवरों की तरह बेचे जाने और उसकी निरीहता का वर्णन।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 4 लिखिए: “पाठ में से उन पंक्तियों को छाँटकर लिखिए जिनमें मजदूरों की विवशता दिखाई देती है?” (पहले तीन पैराग्राफ से)।
Day 2: प्राचीन शोषण, खनन और कोलोसियम की कहानी
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पिछले दिन के प्रश्नों की जांच करें और “मजदूर की विवशता” के बिंदु पूछें।
- व्याख्या (25 मिनट):
- “दिन सोता था… मैंने पहाड़ काटा, चट्टानें खोदकर ताँबा निकाला, सोना, चाँदी, लोहा, कोयला, हीरा।” – मजदूरों की कड़ी मेहनत से निकाले गए खनिज।
- “रोम का वह कोलोसियम, मैंने अपने हाथों खड़ा किया” और “कश्मीर का नाम लेते ही दिल की धड़कन…” – कश्मीर की सुंदरता और वहाँ किए गए अद्भुत निर्माण।
- मानवीय विडंबना: “बाबा आदम के वनों को काट मैंने पत्थर की ज़मीन खोदकर नरम कर डाली… जिसने मुझे जोतने के लिए हल दिया… मगर मेरी ही सारी उपज के बीच भी भूखा रहकर।”
- अफ्रीका के जंगलों में डाके, चोरी और साजिश के द्वारा उसे समुद्र पार ले जाया जाना (गुलामी का व्यापार)।
- शिक्षण सहायता: गीज़ा के पिरामिड, कोलोसियम (रोम), और कोलार (भारत की सोने की खान) के चित्र दिखाएं।
- गृहकार्य: प्रश्न 2 (पाठ से): “निर्माण के प्रति मजदूरों की निरंतर प्रतिबद्धता किन-किन बातों में जाहिर होती है?” लिखिए।
Day 3: मशीनी युग, कारखाने और दुर्घटनाएं
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): चर्चा करें कि प्राचीन काल में मजदूर के साथ कैसा व्यवहार होता था?
- व्याख्या (25 मिनट):
- “जंगल काटकर मैंने गाँव खड़े किए… फिर धीरे-धीरे मैंने विशाल जनसंकुल नगर बनाए जिनमें कारखानों-मिलों का दैत्य कोलाहल के साथ धुआँ उगलने लगा।” – औद्योगिक क्रांति में मजदूर की भूमिका।
- “जब मशीन की चपेट में आकर मैं अपाहिज हो जाता, मेरा नाम रजिस्टर से खारिज कर दिया जाता।” – कारखानों में सुरक्षा का अभाव और बेरोजगारी।
- “मेरी मृत्यु की जवाबदेही किसी की न थी, न मेरे बाल-बच्चों के प्रति, न मालिकों की। मॉन्टेस्क्यू और मिल लिखते ही रह गए।” – लेखक का व्यंग्य कि जिन दार्शनिकों ने आज़ादी की बात लिखी, वे मजदूरों की दयनीय दशा नहीं बदल सके।
- बेलगाड़ी से रेल, रेल से मोटर-रेल, और हवाई जहाज – मजदूर ने कैसे दुनिया बदल दी, लेकिन उसकी ज़िंदगी नहीं बदली।
- गृहकार्य: प्रश्न 3 (पाठ से आगे): “फैक्ट्री में काम करते हुए घायल/दुर्घटनाग्रस्त (दिव्यांग) मजदूरों के प्रति मालिकों की क्या-क्या जिम्मेदारियाँ होनी चाहिए?” लिखिए।
Day 4: युद्ध का विरोध, अभिधा और लक्षणा का ज्ञान
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): कारखानों में होने वाली दुर्घटनाओं और मजदूरों की बेबसी पर चर्चा करें।
- व्याख्या (20 मिनट):
- “पिस्सू-खटमल की चोट पर घबरा उठनेवाला मैं आज दानव की भाँति दिन-रात चलती मशीनों से संहार के साधन सिरजता जा रहा हूँ… मेरा कारखाना हथियारों का है, तोप-बंदूकों का, गोले-बारूद का, बम का।”
- मजदूर की यह विडंबना कि वह रोटी के लिए मशीन चलाता है, लेकिन वही मशीनें मानव विनाश के हथियार बन जाती हैं।
- “मुझे तोली का बैल बाँध नहीं, मुझे कभी भी नाबद नहीं, चलती ही जाऊँगी, उन्हीं मशीनों की तरह जिन्हें चलाने वालों के इशारों पर चलना होता है।” – मजदूर की मजबूरी की अंतिम पंक्ति।
- भाषा के बारे में (15 मिनट):
- अभिधा (वाच्यार्थ): “मैं मेहनतकश मजदूर हूँ” (सीधा साधारण अर्थ)।
- लक्षणा (लक्ष्यार्थ): “मैंने वहाँ भी गोरी दुनिया का पेट भरा” – यहाँ ‘गोरी दुनिया’ का अर्थ गोरे लोगों की दुनिया अर्थात् यूरोप है (शाब्दिक अर्थ ‘सफेद दुनिया’ नहीं)।
- पाठ के आधार पर अभिधा और लक्षणा के 5-5 वाक्यों की पहचान करवाएं। (जैसे: “मोहन बैल है” – लक्षणा है क्योंकि वह बैल की तरह जिद्दी है)।
- गृहकार्य: पाठ में आए शब्दों (कोलोसियम, मॉन्टेस्क्यू, मिल, कणाद) के बारे में जानकारी इकट्ठा करना।
Day 5: अभ्यास, प्रायोजना कार्य और मूल्यांकन
- अभ्यास कार्य (20 मिनट): पाठ्यपुस्तक के “पाठ से” और “पाठ से आगे” (प्रश्न 1, 5, 6) का सामूहिक अभ्यास करवाएं।
- प्रश्न 5: “प्राचीन काल में गृहिणियों को ऋषियों द्वारा दी जाने वाली हिदायत ‘साम्राजी द्विपदश्चतुष्पदः’ में मजदूरों (इंसानों) की साम्यता पशुओं से करना क्या सही था?” – इस पर बहस कराएं।
- प्रश्न 6 (क) और (ख): हथियारों के कारखानों की समस्या और उसके समाधान पर चर्चा।
- प्रायोजना कार्य (10 मिनट): छात्रों को अपने आसपास रहने वाले किसी भी मजदूर से बातचीत करने और उनकी दिनचर्या (Daily Routine) के बारे में जानकारी जुटाने का कार्य दें।
- योग्यता विस्तार (10 मिनट): गीज़ा के पिरामिड सहित विश्व के सात अजूबों के नाम बतवाएं। कक्षा में इस बात पर चर्चा करें कि सरकार ने मजदूरों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए कौन-कौन सी योजनाएँ (मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना आदि) बनाई हैं।
- मूल्यांकन (5 मिनट): “मजदूर नहीं होते तो हमारी दुनिया के विकास कार्यों का क्या होता?” इस विषय पर 5 पंक्तियों का अनुच्छेद लिखवाकर कक्षा समाप्त करें।
(नोट: यह योजना पाठ्यपुस्तक की सामग्री और अभ्यास प्रश्नों के आधार पर बनाई गई है। कक्षा की गति और छात्रों की समझ के अनुसार आप दिनों को कम या ज्यादा कर सकते हैं।)

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
