शिक्षण उद्देश्य:
- छात्र अमरकंटक के भौगोलिक महत्व (विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमाला) से परिचित हो सकें।
- छात्र नर्मदा और सोन नदियों के उद्गम स्थल और उनसे जुड़ी लोककथाओं को समझ सकें।
- छात्रों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना।
- गद्य में प्रयुक्त विशेषण और निपातों (तो, भी, ही) का प्रयोग सिखाना।
Day 1: परिचय, लेखक परिचय और पहाड़ों का वर्णन
- प्रवेश (5 मिनट): कक्षा में भारत के नक्शे पर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा दिखाएं। पूछें: “अमरकंटक का नाम किसने सुना है? वहाँ कौन सी नदी निकलती है?” कुछ तस्वीरें (नर्मदा कुंड, झरने, पहाड़) दिखाएं।
- लेखक परिचय (10 मिनट): डॉ. श्रीराम परिहार का जीवन परिचय पढ़कर सुनाएं। बताएं कि वे मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं, उन्होंने इतिहास और हिंदी साहित्य में काम किया है और उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है।
- सस्वर वाचन (5 मिनट): शिक्षक द्वारा पाठ का पहला भाग (लेखक की यात्रा की शुरुआत) पढ़ें।
- व्याख्या (20 मिनट):
- “आषाढ़ शुक्ल प्रथम दिवस” का महत्व।
- पेंड्रारोड से अमरकंटक की यात्रा और बारिश का दृश्य।
- सरई के ऊँचे-ऊँचे पेड़ों और बादलों का वर्णन।
- विंध्य और सतपुड़ा को “मेकल” पर्वत की दाईं और बाईं भुजा क्यों कहा गया? (पाठ के अनुसार दोनों पर्वत नर्मदा की अँजुरी बनाते हैं)।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 1 लिखिए: “विंध्य और सतपुड़ा को लेखक ने किस रूप में चित्रित किया है?”
Day 2: नर्मदा कुंड, सोन नदी और लोककथाएं
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पिछले दिन के गृहकार्य की जांच करें और बताएं कि मेकल पर्वत कैसे दिखता है।
- व्याख्या (25 मिनट):
- पाठ का मुख्य भाग: “माई की बगिया” और वहाँ से निकलती पतली नर्मदा धारा। इसके बाद नर्मदा कुंड का वर्णन।
- सोनमुढ़ा से निकलने वाली सोन नदी और उसका प्रपात (झरना)।
- लोककथा: सोन और नर्मदा की कथा। लोक में कैसे नर्मदा को ‘माई’ और सोन को पुत्र कहा जाता है।
- जुहिला नदी की कथा (जो ईर्ष्या में सोन के साथ विवाह करने जाती है)।
- कपिल धारा और दूध धारा (झरनों) का वर्णन।
- शिक्षण सहायता: नर्मदा कुंड और सोनमुढ़ा के झरनों के चित्र/वीडियो दिखाएं।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 4: “अमरकंटक ने अपनी आत्मा से नर्मदा को जन्म दिया है” पाठ के अनुसार स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न 7 – टिप्पणी लिखिए: सोनमुढ़ा, माई की बिगया)।
Day 3: पर्यावरण, खनन और लेखक की चिंता
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): नर्मदा और सोन की कहानी को दोबारा सुनाएं।
- व्याख्या (25 मिनट):
- लेखक अमरकंटक के आसपास के लोगों के जीवन (वनवासी महिलाएं, आम के ढेर) का वर्णन करते हैं।
- मुख्य संदेश: नर्मदा नदी के सूखने की चिंता। वनवासी स्त्री की बात – “नर्मदा सूख जायेगी तो हम लोग कैसे बच सकेंगे?”
- पाठ के अंत में लेखक की चिंता – अंधाधुंध खनन (मैंगनीज, बॉक्साइट) और पेड़ों की कटाई से प्रकृति का विनाश। बांस के भीड़े से निकलने वाली नदी अब कंक्रीट के कुंड में बंद हो गई है।
- भाषा के बारे में (10 मिनट): पाठ में आए गुणवाचक विशेषणों की पहचान करें (जैसे – ऊँचे-ऊँचे पेड़, रक्ताभ छवि, पतली जलधार)।
- गृहकार्य: “पाठ से आगे” प्रश्न 4 (अविवेकपूर्ण खनन से प्राकृतिक पर्यावरण को किस प्रकार का नुकसान हो रहा है? इस पर जानकारी जुटाकर लिखिए)।
Day 4: अभ्यास कार्य और चर्चा
- अभ्यास (25 मिनट):
- “पाठ से” के सभी प्रश्नों (प्रश्न 2, 3, 5, 6) का सामूहिक उत्तर लिखवाएं।
- विशेष रूप से प्रश्न 5 के भाव स्पष्ट कीजिए: “दूर से दृष्टि पड़ती है कि कोई रजत धार आकाश से झर रही है…” इस पंक्ति का वर्णन छात्र अपने शब्दों में करें।
- चर्चा करें: क्या नदियों को कंक्रीट के कुंड में बंद करना उचित है?
- भाषा व्याकरण (15 मिनट):
- निपात (Nipat): “तो”, “भी”, “ही” शब्दों के प्रयोग पर ध्यान दें। जैसे: “अमरकंटक तो पहले भी जाना हुआ था”, “वह भी विरह सन्तप्त होकर”, “अमरेश्वर के कंठ से ही नर्मदा निकली है।” समझाएं कि ये शब्द वाक्य में बल (emphasis) लाते हैं। छात्रों से दो-दो वाक्य बनवाएं।
- गृहकार्य: कक्षा में चर्चा किए गए वाक्यों को कॉपी में लिखें।
Day 5: प्रायोजना कार्य और मूल्यांकन
- प्रायोजना कार्य (20 मिनट):
- पाठ में शोण (सोन) और नर्मदा की लोक कथा है। छात्रों को निर्देश दें: अपने आस-पास की किसी भी नदी से जुड़ी कोई एक लोककथा खोजकर लाएं और शिक्षक से चर्चा करें।
- भारत के नक्शे में अमरकंटक (मध्य प्रदेश) और नर्मदा नदी का मार्ग चिन्हित करवाएं।
- मूल्यांकन (25 मिनट):
- 10 अंकों की एक छोटी प्रश्नोत्तरी लें (जिसमें नर्मदा कुंड, कपिल धारा, विंध्य-सतपुड़ा, पर्यावरण संकट से संबंधित प्रश्न हों)।
- लेखक की भाषा शैली पर एक अनुच्छेद लिखवाएं।
- गृहकार्य: पाठ को ध्यान से पढ़कर “नर्मदा का उद्गम : अमरकंटक” पाठ के आधार पर एक यात्रा-वृत्तांत (अपने किसी यात्रा स्थल का वर्णन) तैयार करें।
(नोट: यह पाठ योजना पाठ्यपुस्तक के अनुसार बनाई गई है। कक्षा के स्तर और समय के अनुसार आप इसमें गतिविधियाँ घटा या बढ़ा सकते हैं।)

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
