जैव विविधता का अर्थ है पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों (पौधों, जंतुओं और सूक्ष्मजीवों) की विभिन्नता और उनकी आनुवंशिक एवं पारिस्थितिक विविधता।
1. जैव विविधता की अवधारणा और स्तर
एडवर्ड विल्सन के अनुसार, जैव विविधता तीन प्रमुख स्तरों पर होती है:
- आनुवंशिक विविधता: एक ही प्रजाति के भीतर जीन के स्तर पर विविधता (जैसे- भारत में धान की 50,000 से अधिक किस्में)।
- जातीय विविधता: विभिन्न प्रजातियों के बीच अंतर (जैसे- पश्चिमी घाट में उभयचरों की प्रजातियाँ पूर्वी घाट से अधिक हैं)।
- पारिस्थितिक विविधता: परितंत्र के स्तर पर विविधता (जैसे- रेगिस्तान, वर्षावन, और मैंग्रोव)।
2. जैव विविधता के प्रतिरूप (Patterns)
- अक्षांशीय प्रवणता (Latitudinal Gradients): भूमध्य रेखा (Equator) से ध्रुवों (Poles) की ओर जाने पर जैव विविधता घटती है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों (अमेज़न वर्षावन) में सर्वाधिक विविधता पाई जाती है।
- जाति-क्षेत्र संबंध: एलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट के अनुसार, किसी क्षेत्र की खोज बढ़ने के साथ वहाँ की जातीय समृद्धि बढ़ती है, लेकिन केवल एक सीमा तक।
3. जैव विविधता का महत्व
- पारिस्थितिक महत्व: स्थिर पारितंत्र के लिए विविधता आवश्यक है (रिवेट पोपर परिकल्पना)।
- आर्थिक महत्व: भोजन, दवाइयाँ, ईंधन और औद्योगिक उत्पाद।
- नैतिक और सौंदर्य महत्व: सभी जीवों का अपना अस्तित्व मूल्य है।
4. जैव विविधता में क्षति और विलुप्ति (The Evil Quartet)
जैव विविधता के विनाश के चार मुख्य कारण हैं:
- आवास क्षति और विखंडन: वनों को काटना (सबसे प्रमुख कारण)।
- अति-दोहन: समुद्री मछलियों या वन्यजीवों का उनकी पुनरुत्पादन क्षमता से अधिक शिकार करना।
- विदेशी जातियों का आक्रमण: जैसे- जलकुंभी (Eichhornia) और लैंटाना।
- सह-विलुप्ति: जब एक जाति विलुप्त होती है, तो उस पर आश्रित दूसरी जाति भी विलुप्त हो जाती है।
5. जैव विविधता संरक्षण की विधियाँ
- स्व-स्थाने (In-situ): जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में बचाना।
- राष्ट्रीय उद्यान (National Parks): यहाँ मानवीय गतिविधियाँ पूरी तरह प्रतिबंधित हैं (जैसे- कान्हा, जिम कॉर्बेट)।
- अभयारण्य (Sanctuaries): यहाँ कुछ सीमित मानवीय गतिविधियों की अनुमति होती है।
- बायोस्फीयर रिजर्व: विशाल संरक्षित क्षेत्र।
- हॉटस्पॉट (Hotspots): वे ‘गर्म स्थान’ जहाँ जातीय समृद्धि बहुत अधिक है लेकिन खतरा भी अधिक है (जैसे- हिमालय, पश्चिमी घाट)।
- बाह्य-स्थाने (Ex-situ): संकटग्रस्त जीवों को उनके आवास से बाहर निकालकर विशेष स्थान पर रखना।
- जैसे- चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान (Botanical Gardens), और बीज बैंक (Seed Bank)।
6. संकटग्रस्त जीव और रेड डाटा बुक
- IUCN (International Union for Conservation of Nature): यह संस्था विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रहे जीवों की सूची जारी करती है, जिसे ‘रेड डाटा बुक’ (Red Data Book) कहा कहते हैं।
- संकटग्रस्त जीव: वे जातियाँ जिनकी संख्या बहुत कम रह गई है और संरक्षण न मिलने पर विलुप्त हो सकती हैं (जैसे- रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई शेर)।
7. वैश्विक संरक्षण और रामसार साइट
- वैश्विक सम्मेलन: 1992 में रियो डी जेनेरियो में ‘पृथ्वी सम्मेलन’ (Earth Summit) और 2002 में जोहान्सबर्ग में ‘विश्व शिखर सम्मेलन’ आयोजित किए गए।
- रामसार साइट (Ramsar Sites): यह आर्द्रभूमि (Wetlands) के संरक्षण हेतु एक अंतरराष्ट्रीय संधि है। भारत में चिल्का झील, केवलादेव आदि रामसार स्थल हैं।
