पारितंत्र प्रकृति की एक कार्यात्मक इकाई है जहाँ जीव आपस में और अपने भौतिक पर्यावरण के साथ क्रिया करते हैं।
1. पारितंत्र: संरचना एवं घटक
पारितंत्र के दो मुख्य घटक होते हैं:
- अजैविक घटक (Abiotic): प्रकाश, तापमान, जल, मिट्टी और हवा।
- जैविक घटक (Biotic): उत्पादक (पौधे), उपभोक्ता (जंतु) और अपघटक (सूक्ष्मजीव)।
2. महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं
- उत्पादकता (Productivity): प्रकाश संश्लेषण द्वारा प्रति इकाई क्षेत्र में कार्बनिक पदार्थ बनाने की दर।
- अपघटन (Decomposition): कवक और बैक्टीरिया द्वारा मृत कार्बनिक पदार्थों (Detritus) को सरल अकार्बनिक तत्वों में तोड़ना। इसमें विखंडन, निक्षालन और ह्यूमिफिकेशन शामिल हैं।
- ऊर्जा प्रवाह (Energy Flow): पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा एकदिशीय (Unidirectional) होता है। सूर्य ऊर्जा का एकमात्र स्रोत है। ऊर्जा का ’10 प्रतिशत नियम’ बताता है कि केवल 10% ऊर्जा ही अगले पोषण स्तर तक पहुँचती है।
3. पारिस्थितिक पिरामिड (Ecological Pyramids)
खाद्य श्रृंखला के विभिन्न स्तरों को चित्र के रूप में दर्शाना पिरामिड कहलाता है:
- संख्या का पिरामिड: जीवों की संख्या को दर्शाता है। (अक्सर सीधा, लेकिन बड़े पेड़ पर उल्टा हो सकता है)।
- बायोमास (जैवभार) का पिरामिड: जीवों के सूखे भार को दर्शाता है। (समुद्र में यह अक्सर उल्टा होता है)।
- ऊर्जा का पिरामिड: यह हमेशा सीधा (Always Upright) होता है क्योंकि ऊर्जा का प्रवाह होने पर कुछ ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाती है।
4. पोषक चक्रण (Nutrient Cycling)
पारितंत्र में पोषक तत्वों का बार-बार उपयोग ‘गैसीय’ या ‘अवसादी’ चक्रों द्वारा होता है:
- कार्बन चक्र (Carbon Cycle): वायुमंडल, महासागर और जीवों के बीच कार्बन का आदान-प्रदान। श्वसन और जीवाश्म ईंधन का जलना मुख्य स्रोत हैं।
- फास्फोरस चक्र (Phosphorus Cycle): यह एक अवसादी चक्र है। फास्फोरस मुख्य रूप से चट्टानों में पाया जाता है और मिट्टी के माध्यम से पौधों तक पहुँचता है।
5. पारितंत्र उत्तराधिकार (Ecological Succession)
किसी क्षेत्र की प्रजाति संरचना में समय के साथ होने वाला क्रमिक और पूर्वानुमेय परिवर्तन।
- प्राथमिक उत्तराधिकार: जहाँ पहले कभी जीवन नहीं था (जैसे नग्न चट्टान)।
- द्वितीयक उत्तराधिकार: जहाँ पहले जीवन था पर नष्ट हो गया (जैसे जला हुआ जंगल)। यह प्रक्रिया तेज होती है।
6. पारितंत्र सेवाएँ (Ecosystem Services) – सारांश
पारितंत्र द्वारा हमें मिलने वाले नि:शुल्क लाभों को पारितंत्र सेवाएँ कहते हैं:
- वायु शोधन और ऑक्सीजन विमुक्ति: पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से।
- कार्बन स्थिरीकरण (Carbon Fixation): वायुमंडलीय $CO_2$ को कार्बनिक पदार्थों में बदलना।
- परागण (Pollination): कीटों और पक्षियों द्वारा फसलों के प्रजनन में सहायता।
- बीज वितरण: पौधों के प्रसार में मदद करना।
- मृदा निर्माण और जल चक्र का नियमन।
