वस्तुएँ कैसे कार्य करती हैं? – कक्षा 4 EVS Unit 4: हमारे आस-पास की वस्तुएँ (Vastuayein Kaise Kaarya Karti Hain? Class 4 EVS)
पाठ का सारांश
यह अध्याय बच्चों को उनके आस-पास की वस्तुओं की कार्यप्रणाली से परिचित कराता है। मीरा और ध्रुव की खोज के माध्यम से बच्चे घूर्णन (spinning), तैरना और डूबना (floating and sinking) जैसी अवधारणाओं को समझते हैं। वे चकरी (spinning top) बनाकर और उसे घुमाकर देखते हैं कि केंद्र में छेद वाली चकरी सबसे अच्छी घूमती है। वे एल्युमिनियम पत्रक के साथ प्रयोग करके समझते हैं कि आकार बदलने से वस्तु तैर सकती है या डूब सकती है (गेंद बनाने पर डूबती है, कप/नाव बनाने पर तैरती है)। वे कागज की नाव बनाकर तैरने-डूबने का अवलोकन करते हैं। पाठ में लट्टू (भारत का पारंपरिक घूमने वाला खिलौना) और चरखे (महात्मा गांधी द्वारा उपयोग) का भी उल्लेख है। यह अध्याय बच्चों में वैज्ञानिक सोच, अवलोकन और प्रयोग की क्षमता विकसित करता है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- घूर्णन (spinning) की अवधारणा को समझ पाएँगे
- तैरने और डूबने के बीच अंतर कर पाएँगे
- चकरी (spinning top) बनाकर उसे घुमा पाएँगे
- वस्तुओं के आकार का उनके तैरने/डूबने पर प्रभाव को समझ पाएँगे
- एल्युमिनियम पत्रक के साथ प्रयोग कर पाएँगे
- पूर्वानुमान (prediction) और अवलोकन (observation) में अंतर कर पाएँगे
- कागज की नाव बना पाएँगे
- लट्टू और चरखे के बारे में जान पाएँगे
दिन 1 – पाठ का परिचय, घूर्णन एवं चकरी
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “क्या आपने कभी सिक्का घुमाया है? लट्टू क्या होता है? क्या आपने चकरी खेली है?”
- प्रश्न: “कौन-कौन सी चीज़ें घूमती हैं?” (पंखा, चक्की, चरखा, साइकिल का पहिया, लट्टू, चूड़ी)
- प्रश्न: “क्या सभी चीज़ें समान रूप से घूमती हैं?”
- परिचय: “आज हम ‘वस्तुएँ कैसे कार्य करती हैं?’ पाठ पढ़ेंगे, जिसमें हम सीखेंगे कि चीज़ें कैसे घूमती हैं, क्यों कुछ चीज़ें तैरती हैं और कुछ डूबती हैं।”
- पृष्ठ 120-121 के चित्र दिखाएँ – सिक्का घुमाते बच्चे, चकरी, लट्टू।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पाठ का वाचन (पृष्ठ 120-124):
- शिक्षक मीरा और ध्रुव की कहानी पढ़कर सुनाएँ।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- घूर्णन (Spinning) = किसी वस्तु का अपनी धुरी पर घूमना
- चकरी (Spinning top) = एक खिलौना जो घूमता है
- केंद्र (Centre) = बीच का बिंदु
- संतुलन (Balance) = सीधा खड़ा रहना
- गतिविधि – सिक्का/चूड़ी घुमाना (पृष्ठ 120-121):
- विद्यार्थी एक सिक्का लें और उसे घुमाएँ – अवलोकन करें।
- तालिका पूर्ति (पृष्ठ 121):वस्तुएँमैं अवलोकन करता हूँमैं आश्चर्यचकित हूँमुझे लगता हैसिक्काजैसे ही गति धीमी होती है, यह डोलने लगता हैयह डोलने क्यों लगता है?क्योंकि घर्षण/हवाचूड़ीजैसे-जैसे समय बीतता है, इसकी ध्वनि बदलती हैक्यों?…पेंसिलघूमती नहींक्यों?…पत्थरघूमता नहीं……लट्टूअच्छे से घूमता है……
- गतिविधि – चकरी बनाना (पृष्ठ 122-124):
- सामग्री: गत्ता, टूथपिक, बॉल पॉइंट पेन की खाली ट्यूब
- विधि: गत्ते पर वृत्त बनाएँ, काटें, बीच में छेद करें, टूथपिक/खाली ट्यूब डालें।
- तालिका पूर्ति (पृष्ठ 123):चकरी में परिवर्तनक्या चकरी घूमती है?अन्य अवलोकनकेंद्र में टूथपिकहाँसीधी घूमती हैकेंद्र से दूर टूथपिकनहीं/कमडोलती हैवर्गाकार चकरीनहीं/कमसंतुलित नहींवृत्ताकार चिह्न अंकितहाँरंग मिलते हैं
- चर्चा (पृष्ठ 124):
- (क) “कौन सी चकरी ठीक से नहीं घूमी? कारण?” (केंद्र से दूर छेद – असंतुलन, वर्गाकार – सममित नहीं)
- (ख) “छेद की स्थिति से क्या अंतर आया?” (केंद्र में छेद वाली सबसे अच्छी घूमी)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “चकरी को अच्छे से घूमने के लिए क्या चाहिए?” (केंद्र में छेद, संतुलन, वृत्ताकार)
- गृहकार्य: “घर पर एक चकरी बनाएँ और उसे घुमाकर देखें – क्या वह अच्छी घूमती है?”
दिन 2 – तैरना और डूबना, कागज की नाव
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “चकरी कैसे काम करती है?”
- प्रश्न: “क्या आपने कभी कागज की नाव बनाई है? क्या वह पानी पर तैरती है?”
- प्रश्न: “कौन-कौन सी चीज़ें पानी पर तैरती हैं? कौन-सी डूबती हैं?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पाठ का वाचन – तैरना और डूबना (पृष्ठ 125-126):
- शिक्षक मीरा और ध्रुव की कागज की नाव वाली कहानी पढ़ें।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- तैरना (Float) = पानी की सतह पर रहना
- डूबना (Sink) = पानी में नीचे चला जाना
- पूर्वानुमान (Prediction) = पहले से अनुमान लगाना
- गतिविधि – कागज की नाव बनाना (पृष्ठ 125-126):
- विद्यार्थी कागज की नाव बनाएँ (शिक्षक दिखाएँ – अकॉर्डियन/सरल नाव)।
- नाव को पानी के कटोरे/बाल्टी में डालें।
- अवलोकन: “क्या नाव तैरती है या पलटती है?” (चित्र 1 – सीधी, चित्र 2 – पलटी)
- कारण: नाव का संतुलन, आकार, पानी पर रखने का तरीका
- गतिविधि – तैरना/डूबना प्रयोग (पृष्ठ 126-127):
- सामग्री: पत्ता, लोहे की कील, खाली प्लास्टिक की बोतल, पत्थर, एल्युमिनियम पत्रक, रबड़, कॉर्क, लकड़ी का टुकड़ा
- विद्यार्थी पूर्वानुमान लगाएँ (तैरेगी/डूबेगी) फिर प्रयोग करें।
- तालिका पूर्ति:वस्तुआपका अनुमानअवलोकनकारणपत्तातैरेगातैराहल्कालोहे की कीलडूबेगीडूबीभारीखाली बोतलतैरेगीतैरीहवा भरीपत्थरडूबेगाडूबाभारीरबड़डूबेगा/तैरेगा……कॉर्कतैरेगातैराहल्का
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “कौन-सी चीज़ें तैरती हैं और कौन-सी डूबती हैं?” (हल्की – तैरती, भारी – डूबती; लेकिन आकार भी मायने रखता है)
- गृहकार्य: “घर पर पाँच ऐसी चीज़ें ढूँढ़ें और उन्हें पानी में डालें – कौन-सी तैरती है, कौन-सी डूबती है?” – एक सूची बनाएँ।
दिन 3 – आकार का प्रभाव, एल्युमिनियम पत्रक प्रयोग
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “तैरने और डूबने वाली वस्तुओं के उदाहरण बताएँ।”
- प्रश्न: “क्या किसी वस्तु का आकार बदलकर उसे तैराया/डुबोया जा सकता है?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- गतिविधि – एल्युमिनियम पत्रक का प्रयोग (पृष्ठ 128):
- सामग्री: एल्युमिनियम पत्रक (फॉयल)
- प्रयोग:
- (क) फैलाएँ – पत्रक को सीधा फैलाकर पानी में डालें → तैरता है (हल्का, चौड़ा)
- (ख) गेंद बनाएँ – पत्रक को कसकर गेंद की तरह दबाएँ → डूबता है (भारी, कम हवा)
- (ग) कप/नाव बनाएँ – पत्रक को कप/नाव के आकार में मोड़ें → तैरता है (हवा भरी)
- तालिका पूर्ति (पृष्ठ 128):आकारअनुमानअवलोकनकारणफैलाया हुआतैरेगातैराहल्का, चौड़ागेंद बनायाडूबेगाडूबाभारी, हवा नहींकप/नाव बनायातैरेगातैराहवा भरी, हल्का
- चर्चा (पृष्ठ 128):
- “क्या हम किसी वस्तु का आकार बदलकर उसे तैरा या डुबो सकते हैं?” (हाँ – एल्युमिनियम पत्रक के साथ)
- “जब एल्युमिनियम पत्रक को फैलाया जाता है या कप के आकार में बनाया जाता है तो वह तैरता है, परंतु गेंद के आकार में डालने पर डूब जाता है – क्यों?” (आकार, हवा, भारीपन)
- ‘क्या आप जानते हैं?’ (पृष्ठ 126):
- चरखा – कपास के रेशों को ऐंठकर धागा बनाना, हाथ से घुमाना
- महात्मा गांधी ने चरखे का उपयोग हाथ से बने कपड़े (खादी) बनाने के लिए किया।
- लट्टू – भारत का पारंपरिक घूमने वाला खिलौना, पुराने समय में चिकनी मिट्टी से, अब लकड़ी से बनता है।
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “आकार बदलने से तैरने-डूबने पर क्या प्रभाव पड़ता है?” (आकार बदलने से वस्तु तैर/डूब सकती है)
- गृहकार्य: “एल्युमिनियम पत्रक की जगह किसी अन्य चीज़ (जैसे – प्लास्टिक शीट, कागज़) से यह प्रयोग करें और अवलोकन लिखें।”
दिन 4 – नाव बनाना, प्रदर्शनी एवं पहेली
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “एल्युमिनियम पत्रक के साथ क्या प्रयोग किया?”
- प्रश्न: “क्या आप कागज़, गत्ता, कुल्फी की डंडी, चिकनी मिट्टी से नाव बना सकते हैं?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- गतिविधि – नाव बनाना (पृष्ठ 129):
- सामग्री: कागज़, गत्ते के डिब्बे, कुल्फी की डंडियाँ, चिकनी मिट्टी, चिपकने वाला टेप
- समूह: 3-4 विद्यार्थियों के समूह
- चरण:
- सोचें कि कैसे नाव बनाएँ
- चित्र बनाएँ
- नाव तैयार करें (प्रत्येक समूह की नाव अलग हो)
- कक्षा में नावों की प्रदर्शनी आयोजित करें
- तालिका पूर्ति – तुलना (पृष्ठ 130):आपकी नाव की विशेषताएँआपकी नाव की कमियाँहल्की, तैरती हैजल्दी पलट जाती हैमजबूतभारी हैसंतुलित…
- चर्चा (पृष्ठ 130):
- “कुछ नावें ठोस होती हैं (टूटना कठिन), कुछ आसानी से टूट सकती हैं।”
- “कुछ नावें आसानी से पलट सकती हैं, कुछ संतुलन बनाए रखती हैं।”
- “आप अपनी नाव को और अच्छा कैसे बना सकते हैं?” (संतुलन, आकार, सामग्री)
- ‘आइए विचार करें’ (पृष्ठ 131):
- (क) “चकरी धीरे-धीरे धीमी होकर रुकती है – रवि अपने शिक्षक से क्या प्रश्न पूछ सकता है?” (जैसे – “चकरी धीमी क्यों होती है? इसे और देर तक घुमाने के लिए क्या करें?”)
- (ख) “किसी वस्तु को संतुलित करने के लिए क्या करना चाहिए?” (भार संतुलन, केंद्र बिंदु)
- (ग) “तैरती वस्तु को डुबोने और डूबती वस्तु को तैराने के लिए क्या करें?” (आकार बदलें, हवा भरें, हल्का करें)
- गतिविधि – वर्गीकरण (पृष्ठ 132):
- विद्यार्थी नीचे दी गई वस्तुओं को तैरने/डूबने के आधार पर वर्गीकृत करें:
- तैरती हैं: मोमबत्ती, कॉर्क, पत्ता, रबड़, कागज़, बर्फ, नींबू
- डूबती हैं: संगमरमर, सिक्का, चम्मच, आलू, लोहे की कील
- विद्यार्थी नीचे दी गई वस्तुओं को तैरने/डूबने के आधार पर वर्गीकृत करें:
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों की नावों की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: “अपनी नाव को और बेहतर बनाने के लिए एक नया डिज़ाइन बनाएँ (चित्र सहित)।”
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पाठ का सामूहिक वाचन (मुख्य बिंदु)।
- विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई नावों का प्रदर्शन।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- चकरी को अच्छे से घुमाने के लिए क्या चाहिए? (केंद्र में छेद, संतुलन)
- चरखा किस काम आता है? (कपास से धागा बनाना)
- एल्युमिनियम पत्रक को गेंद बनाने पर क्या होता है? (डूबता है)
- कागज की नाव क्यों तैरती है? (हल्की, हवा भरी)
- तैरने और डूबने में क्या अंतर है?
- लट्टू किससे बनता है? (लकड़ी/मिट्टी)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) चकरी बनाने के लिए आप किन-किन सामग्रियों का उपयोग करेंगे?
- (ख) किसी वस्तु को अच्छे से घूमने के लिए क्या-क्या चाहिए? (कोई दो)
- (ग) तीन ऐसी वस्तुओं के नाम लिखिए जो पानी पर तैरती हैं।
- (घ) तीन ऐसी वस्तुओं के नाम लिखिए जो पानी में डूब जाती हैं।
- (ङ) एल्युमिनियम पत्रक के साथ किए गए प्रयोग से आपने क्या सीखा? (आकार बदलने से तैरने/डूबने में अंतर)
- (च) एक तैरती वस्तु को डुबोने के लिए आप क्या करेंगे?
- समूह चर्चा:
- “हमारे आस-पास कौन-सी चीज़ें घूमती हैं?” (पंखा, पहिया, चरखा, लट्टू, चक्री)
- “नाव क्यों तैरती है?” (उसका आकार, हवा, हल्का होना)
- “क्या हम किसी भी चीज़ को तैरा सकते हैं?” (हाँ – आकार/भार बदलकर)
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “‘वस्तुएँ कैसे कार्य करती हैं?’ पाठ ने हमें सिखाया कि चीज़ें कैसे घूमती हैं, क्यों कुछ चीज़ें तैरती हैं और कुछ डूबती हैं। चकरी – केंद्र में छेद और संतुलन होने पर अच्छी घूमती है। एल्युमिनियम पत्रक – आकार बदलने पर तैर/डूब सकता है – फैलाने पर तैरता, गेंद बनाने पर डूबता, कप/नाव बनाने पर तैरता। कागज की नाव – हल्की और हवा भरी होने पर तैरती है। लट्टू और चरखा – भारत के पारंपरिक घूमने वाले यंत्र हैं। यह अध्याय हमें प्रयोग करने, अवलोकन करने और निष्कर्ष निकालने की वैज्ञानिक सोच देता है। सवाल पूछना, खोजबीन करना और प्रयोग करना – यही विज्ञान है! “
- अगले पाठ ‘वस्तुओं का निर्माण’ का संक्षिप्त परिचय – “अब हम सीखेंगे कि कागज़ कैसे बनता है, पुराने कागज़ से नया कागज़ कैसे बनाया जाता है, और हम अपशिष्ट प्रबंधन के 5R नियमों के बारे में जानेंगे।”
शिक्षण सहायक सामग्री
- सिक्का, चूड़ी, पेंसिल, पत्थर, लट्टू (विभिन्न वस्तुएँ)
- गत्ता, टूथपिक, बॉल पॉइंट पेन की खाली ट्यूब (चकरी बनाने के लिए)
- कागज़ (नाव बनाने के लिए)
- पानी की बाल्टी/कटोरी (तैरने-डूबने के प्रयोग के लिए)
- एल्युमिनियम पत्रक (फॉयल)
- विभिन्न वस्तुएँ – पत्ता, लोहे की कील, खाली बोतल, पत्थर, रबड़, कॉर्क, लकड़ी
- रंग, कागज़, पेंसिल (नाव डिज़ाइन के लिए)
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | घूर्णन (spinning) की अवधारणा की समझ | मौखिक/लिखित |
| 2 | चकरी बनाना और उसे घुमाने का कौशल | गतिविधि/अवलोकन |
| 3 | तैरने और डूबने में अंतर की समझ | मौखिक/लिखित |
| 4 | आकार बदलने के प्रभाव (एल्युमिनियम पत्रक) की समझ | प्रयोग/लिखित |
| 5 | पूर्वानुमान और अवलोकन में अंतर | तालिका/मौखिक |
| 6 | कागज की नाव बनाना और उसका अवलोकन | गतिविधि/समूह कार्य |
| 7 | वैज्ञानिक सोच (प्रश्न पूछना, प्रयोग करना) | मौखिक/लिखित |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘चकरी’, ‘लट्टू’, ‘तैरना’, ‘डूबना’, ‘घूमना’ को क्या कहते हैं। प्रयोग – यह अध्याय हाथों-हाथ करके सीखने (hands-on learning) पर आधारित है – जितना अधिक बच्चे प्रयोग करेंगे, उतना अधिक समझेंगे। चकरी – बच्चों को अलग-अलग आकार (चौकोर, त्रिकोण) और छेद की स्थिति (केंद्र, किनारा) की चकरियाँ बनाकर प्रयोग करने को कहें। एल्युमिनियम पत्रक – यदि उपलब्ध न हो तो कागज़/फॉयल पेपर का विकल्प प्रयोग करें। नाव प्रदर्शनी – बच्चों को अपनी नाव पर गर्व करने का अवसर दें और वे दूसरों की नावों से सीख सकें। पूर्वानुमान – बच्चों को अनुमान लगाने और फिर प्रयोग कर देखने की आदत डालने के लिए प्रोत्साहित करें – यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण का आधार है। ‘सवाल पूछना’ – बच्चों को प्रश्न पूछने (जैसे – चक्री धीमी क्यों होती है?) के लिए प्रोत्साहित करें – इससे जिज्ञासा और चिंतन विकसित होता है। लट्टू और चरखा – बच्चों को भारतीय परंपरा से जोड़ने का अवसर है – बताएँ कि चरखा स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक था।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
