पेड़-पौधे और पशु-पक्षी हैं साथ – कक्षा 3 EVS Unit 2: जीवन आस-पास (Ped-Paudhe Aur Pashu-Pakshi Hain Sath Class 3 EVS)
पाठ का सारांश
यह अध्याय बच्चों को पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों के बीच के गहरे संबंध से परिचित कराता है। पाठ में दिखाया गया है कि पशु-पक्षी और कीट पेड़-पौधों पर, उनके आस-पास और नीचे कैसे रहते हैं और एक-दूसरे पर कैसे निर्भर हैं। बच्चे मिट्टी (रंग, बनावट, गंध, जीव-जंतु) के बारे में जानेंगे, पक्षियों की बोली (आवाज़) पहचानेंगे, और पशु-पक्षियों की पेड़-पौधों पर निर्भरता (भोजन, आवास, आराम) को समझेंगे। पाठ में जीव-जंतुओं (इल्ली, तितली, कठफोड़वा, गिलहरी, दर्जिन चिड़िया, चमगादड़, तेंदुआ, आदि) के बारे में भी जानकारी है। यह अध्याय बच्चों में प्रकृति-प्रेम, अवलोकन क्षमता और पारिस्थितिक संतुलन की समझ विकसित करता है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों के बीच संबंध को समझ पाएँगे
- पशु-पक्षी पेड़-पौधों पर कैसे निर्भर हैं (भोजन, आवास, आराम) – यह समझ पाएँगे
- मिट्टी की विशेषताओं (रंग, बनावट, गंध, जीव-जंतु) को पहचान पाएँगे
- पक्षियों की आवाज़ (बोली) को पहचान पाएँगे
- विभिन्न पशु-पक्षियों (हाथी, इल्ली, तितली, मेढक, गिलहरी, कठफोड़वा, दर्जिन चिड़िया, चमगादड़, तेंदुआ) को पहचान पाएँगे
- पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों की आपसी निर्भरता को समझ पाएँगे
- चींटियों की गतिविधियों का अवलोकन कर पाएँगे
- ‘मैं कौन हूँ’ खेल के माध्यम से अभिनय कर पाएँगे
दिन 1 – पाठ का परिचय, पशु-पक्षियों की पहचान एवं वाचन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “क्या आपने कभी किसी पेड़ पर पक्षी, गिलहरी या कीट देखा है? वे वहाँ क्या कर रहे थे?”
- प्रश्न: “क्या पशु-पक्षी और पेड़-पौधे एक-दूसरे के साथ रहते हैं?”
- प्रश्न: “आपके घर या स्कूल के आस-पास कौन-कौन से पशु-पक्षी दिखते हैं?”
- प्रश्न: “क्या आपको पता है कि पशु-पक्षी पेड़-पौधों पर क्यों निर्भर हैं?”
- पृष्ठ 80-81 के चित्र दिखाएँ – हाथी, इल्ली, तितली, मेढक, गिलहरी, कठफोड़वा, दर्जिन चिड़िया, चमगादड़, तेंदुआ।
- परिचय: “आज हम ‘पेड़-पौधे और पशु-पक्षी हैं साथ’ पाठ पढ़ेंगे, जिसमें हम जानेंगे कि पशु-पक्षी और पेड़-पौधे एक-दूसरे के साथ कैसे रहते हैं और एक-दूसरे पर कैसे निर्भर हैं।”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पाठ का वाचन – चित्र अवलोकन (पृष्ठ 80-81):
- शिक्षक पाठ को जिज्ञासा और रुचि के भाव के साथ पढ़कर सुनाएँ।
- विद्यार्थी चित्रों को ध्यान से देखें और पशु-पक्षियों को पहचानें:
- हाथी – घास चरता हुआ
- इल्ली – पत्ती खाती हुई
- तितली – पत्ती पर मंडराती हुई
- मेढक – पत्ती पर आराम करता हुआ
- गिलहरी – पेड़ के कोटर में छिपती/आराम करती
- कठफोड़वा – पेड़ के तने पर बैठा
- दर्जिन चिड़िया – पेड़ पर गाना गाती हुई
- चमगादड़ और तेंदुआ – पेड़ों की शाखाओं पर आराम/आवास
- चर्चा: “आपने इनमें से किन-किन जीवों को पहले देखा है? उन्हें कहाँ देखा?”
- ‘बातचीत के लिए’ प्रश्न (पृष्ठ 82):
- (क) “यदि आपने पेज 80-81 पर दिए गए पशु-पक्षी पहले देखे हैं तो बताइए कि उन्हें कहाँ और कैसे देखा है?”
- (ख) “अपनी अंगुलियों, हाथों और बाजुओं का उपयोग करके बताइए कि ये पशु-पक्षी कितने बड़े या छोटे हैं।”
- (ग) “ये सभी पशु-पक्षी पेड़-पौधों के आस-पास ही क्यों रहना चाहते हैं?” (भोजन, आवास, सुरक्षा, आराम)
- गतिविधि – वर्गीकरण (पृष्ठ 80-81):
- विद्यार्थी पशु-पक्षियों को दो श्रेणियों में विभाजित करें:
- भूमि पर रहने वाले – हाथी, इल्ली, मेढक, साँप (चित्र में नहीं)
- पेड़ों पर रहने वाले – गिलहरी, कठफोड़वा, दर्जिन चिड़िया, चमगादड़, तेंदुआ, तितली
- विद्यार्थी पशु-पक्षियों को दो श्रेणियों में विभाजित करें:
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “पशु-पक्षी पेड़-पौधों पर क्यों निर्भर हैं?” (भोजन, घर, सुरक्षा, आराम के लिए)
- गृहकार्य: “अपने आस-पास पेड़ों पर रहने वाले तीन पशु-पक्षियों के नाम लिखें।”
दिन 2 – मिट्टी में जीवन और मिट्टी का अवलोकन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “पशु-पक्षी पेड़-पौधों पर क्यों रहते हैं?”
- प्रश्न: “क्या आपने कभी मिट्टी को बारीकी से देखा है? मिट्टी में क्या-क्या होता है?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पाठ का वाचन – मिट्टी में जीवन (पृष्ठ 82-83):
- शिक्षक पाठ पढ़ें और मिट्टी के बारे में बताएँ।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- मिट्टी – पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत
- मिट्टी में क्या होता है? – चट्टानों के छोटे-छोटे टुकड़े, सूखी पत्तियाँ, जड़ें, मृत जानवर, कीट
- मिट्टी में रहने वाले जीव – चींटियाँ, दीमक, कॉकरोच, टिड्डे, केंचुए, छोटे कीड़े
- गतिविधि 1 – मिट्टी का अवलोकन (पृष्ठ 82-83):
- विद्यार्थी किसी पेड़ के पास से थोड़ी-सी मिट्टी लें (हाथों से)।
- अवलोकन करें:
- रंग – काली, लाल, भूरी, पीली
- बनावट – सूखी, गीली, खुरदरी, चिकनी, कठोर, दानेदार
- गंध – हल्की, मिट्टी जैसी
- उपस्थिति – पत्तियाँ, कंकड़, कीट
- तालिका पूर्ति (पृष्ठ 82):मेरी मिट्टी छूने में कैसी लगी?मेरी मिट्टी में क्या था?खुरदरी/चिकनी/कठोर/दानेदारपत्तियाँ/छोटे पत्थर/कीट/कुछ नहीं
- चर्चा (पृष्ठ 83):
- “बारिश के एक दिन बाद उसी स्थान से मिट्टी लें – क्या रंग, छूने और गंध में कोई अंतर आया?” (गीली, चिकनी, अलग गंध)
- “पेड़-पौधों से दूर किसी स्थान से मिट्टी लें – क्या यह अलग है?” (हाँ – अधिक खुरदरी, कम जीव)
- ‘क्या आप जानते हैं?’ (पृष्ठ 85):
- पशु-पक्षी और कीट पेड़-पौधों के विभिन्न भागों का उपयोग करते हैं:
- पत्ते – इल्ली खाती है
- कोटर – उल्लू, गिलहरी, बसंत गौरी चिड़िया (घोंसला)
- टहनियाँ – गिलहरी, कौआ (घोंसला)
- फल – बंदर खाते हैं
- फूल – सनबर्ड, तितलियाँ (रस चूसती हैं)
- पत्ते सिलना – दर्जिन चिड़िया (घोंसला)
- पशु-पक्षी और कीट पेड़-पौधों के विभिन्न भागों का उपयोग करते हैं:
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “मिट्टी किस-किस चीज़ से मिलकर बनी होती है?” (चट्टानों के टुकड़े, सूखी पत्तियाँ, जड़ें, मृत जानवर, कीट)
- गृहकार्य: “अपने घर के आस-पास से अलग-अलग जगहों से मिट्टी के नमूने लें – रंग, बनावट, गंध देखें और लिखें।”
दिन 3 – पक्षियों की बोली, अवलोकन एवं विवरण
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “मिट्टी में क्या-क्या होता है?”
- प्रश्न: “क्या आप पक्षियों की आवाज़ पहचान सकते हैं? कौआ, कबूतर, कोयल, गौरैया – इनकी आवाज़ कैसी होती है?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- गतिविधि 3 – पक्षियों की बोली (पृष्ठ 86-87):
- विद्यार्थी अपनी आँखें बंद करें और पक्षियों की बोली सुनने की कोशिश करें।
- चर्चा: “क्या आपको किसी पक्षी की बोली सुनाई दी? कौन-सा पक्षी था?”
- विद्यार्थी तालिका पूर्ति करें (पृष्ठ 87):पक्षी का नामबोलीकबूतरगुटर-गूँकौआकाँव-काँवकोयलकू-कूगौरैयाचीं-चींमोरम्याँउ-म्याँउ (या मयूर ध्वनि)तोतामिट्ठू-मिट्ठू
- चर्चा: “यदि आपको किसी भी पक्षी की आवाज़ नहीं सुनाई पड़ रही है, तो क्या कारण हो सकता है?” (शोर, दूरी, समय, मौसम)
- “आपको पक्षियों की सबसे अधिक आवाज़ कब सुनाई देती है?” (सुबह-सुबह, शाम को)
- गतिविधि – पशु-पक्षी विवरण (पृष्ठ 96):
- विद्यार्थी अपने आस-पास के किसी पशु/पक्षी (जैसे – कुत्ता, बिल्ली, गाय, कबूतर, गौरैया) का अवलोकन करें और विवरण लिखें:
- नाम : ________
- पहली बार कब/कहाँ देखा? : ________
- अकेला/समूह में? : ________
- चलने/उड़ने का तरीका : ________
- आवाज़ : ________
- क्या करता है? (खाना, सोना, बात करना, झगड़ना) : ________
- कोई रोचक बात : ________
- विद्यार्थी अपने आस-पास के किसी पशु/पक्षी (जैसे – कुत्ता, बिल्ली, गाय, कबूतर, गौरैया) का अवलोकन करें और विवरण लिखें:
- गतिविधि – हमेशा व्यस्त चतुर चींटियाँ (पृष्ठ 97):
- सामग्री: मीठा (चीनी/गुड़), तला हुआ (पापड़), उबला/पका (ब्रेड, इडली, चावल, चपाती)
- विधि: तीनों खाद्य पदार्थों को खुले स्थान पर 1 फुट की दूरी पर रखें।
- अनुमान: “इन्हें खाने कौन आएगा? किसको सबसे पहले चींटियाँ आएँगी?”
- अवलोकन: “चींटियाँ किस खाद्य पदार्थ के पास सबसे पहले गईं? वे क्या कर रही हैं?”
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “आपने पक्षियों की कौन-सी आवाज़ें पहचानीं?”
- गृहकार्य: “किसी एक पक्षी (गौरैया, कबूतर, कौआ) की आवाज़ निकालने का अभ्यास करें – कल कक्षा में सुनाएँ।”
दिन 4 – रचनात्मक गतिविधि, खेल एवं ‘मैं कौन हूँ’
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “पक्षियों की आवाज़ कैसे पहचानें?”
- प्रश्न: “क्या आप किसी पशु, पक्षी, कीट या पेड़ की तरह अभिनय कर सकते हैं?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- गतिविधि – ‘मैं कौन हूँ?’ (पृष्ठ 98):
- विधि: विद्यार्थी दो-दो के जोड़े में बैठें।
- एक विद्यार्थी किसी पशु, पक्षी, कीट या पेड़ का नाम सोचे और अपने साथी के कान में धीमे से कहे।
- दूसरा विद्यार्थी उस पशु/पक्षी/पेड़ की तरह अभिनय करे (हाव-भाव, आवाज़)।
- बाकी विद्यार्थी अनुमान लगाएँ कि किसका अभिनय किया जा रहा है।
- उदाहरण:
- “गोपा के मित्र ने ‘मेंढक’ कहा – गोपा ने क्या किया?” (कूदना, टर्र-टर्र करना)
- “सुखिया के मित्र ने ‘पीपल का पेड़’ कहा – सुखिया ने क्या किया?” (हाथ फैलाना, शाखाएँ बनाना)
- विधि: विद्यार्थी दो-दो के जोड़े में बैठें।
- गतिविधि – ‘आइए, मंथन करें!’ – चित्र बनाएँ (पृष्ठ 100):
- विद्यार्थी उन पशुओं, पक्षियों और कीटों के नाम लिखें और चित्र बनाएँ जिनके:
- (क) दो पैर होते हैं – मनुष्य, चिड़िया, मुर्गी, कबूतर
- (ख) चार पैर होते हैं – कुत्ता, बिल्ली, गाय, हाथी, शेर
- (ग) छह पैर होते हैं – चींटी, मक्खी, तितली, टिड्डा, मधुमक्खी
- (घ) आठ पैर होते हैं – मकड़ी
- विद्यार्थी उन पशुओं, पक्षियों और कीटों के नाम लिखें और चित्र बनाएँ जिनके:
- चर्चा (पृष्ठ 91-95):
- (क) “क्या आपने कुछ और पशु, पक्षी और कीट देखे हैं जो चित्रों में नहीं हैं?” – विद्यार्थी नाम बताएँ।
- (ख) “पशु-पक्षी और कीट किस तरह पौधों पर निर्भर हैं?” – चर्चा करें।
- ‘एक सच्ची कहानी’ – प्रे वाग्टेला (पृष्ठ 101):
- स्थान: तमिलनाडु – वल्पराई
- पक्षी: प्रे वाग्टेला (स्थानीय नाम – वालट्टी कुरुवी)
- विशेषता: सर्दियों में पहाड़ी क्षेत्रों से आते हैं; बच्चे और शिक्षक उनके स्वागत में पोस्टर लगाते हैं, मिठाई बाँटते हैं, उत्सव मनाते हैं।
- चर्चा: “आप इस कहानी को क्या शीर्षक देना चाहेंगे?” (जैसे – ‘पक्षियों का स्वागत’, ‘वल्पराई के पक्षी मित्र’)
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के अभिनय की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: “किसी एक पशु/पक्षी की तरह अभिनय करें और उसका चित्र बनाएँ।”
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पाठ का सामूहिक वाचन (मुख्य बिंदु)।
- विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए पशु-पक्षियों के चित्रों का प्रदर्शन।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- पशु-पक्षी पेड़-पौधों पर क्यों रहते हैं? (भोजन, आवास, सुरक्षा, आराम)
- मिट्टी किस-किस चीज़ से मिलकर बनी होती है?
- मिट्टी में कौन-कौन से जीव रहते हैं? (चींटी, दीमक, केंचुआ, कॉकरोच, टिड्डा)
- कबूतर की बोली कैसी होती है? (गुटर-गूँ)
- कोयल की बोली कैसी होती है? (कू-कू)
- किस पक्षी को ‘दर्जिन चिड़िया’ कहते हैं? (जो पत्ते सिलकर घोंसला बनाती है)
- पेड़ के कोटर में कौन-कौन से पक्षी रहते हैं? (उल्लू, गिलहरी, बसंत गौरी)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) पशु-पक्षी पेड़-पौधों से क्या-क्या प्राप्त करते हैं? (कोई तीन)
- (ख) मिट्टी की तीन विशेषताएँ (रंग, बनावट, गंध) लिखिए।
- (ग) किन्हीं चार पक्षियों की बोली (आवाज़) लिखिए।
- (घ) दो पैर, चार पैर, छह पैर और आठ पैर वाले एक-एक जीव का नाम लिखिए।
- (ङ) ‘प्रे वाग्टेला’ पक्षियों के बारे में आपने क्या सीखा?
- समूह चर्चा:
- “हम पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों की देखभाल कैसे कर सकते हैं?” (पेड़ लगाना, पानी देना, कचरा न फेंकना, पक्षियों के लिए पानी रखना)
- “पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और हम सब एक-दूसरे पर कैसे निर्भर हैं?” (सभी आपस में जुड़े हैं)
- गतिविधि (पृष्ठ 99):
- (क) “आपने अपने मित्र पौधे के बारे में जो लिखा था, उसका चित्र बनाएँ और रंग-बिंदुओं से पशु-पक्षियों के स्थान दिखाएँ।”
- (ख) सही क्रम में व्यवस्थित करें (तितली का जीवन चक्र):
- इल्ली ने खाना बंद कर दिया।
- इल्ली ने एक कोकून बना लिया।
- यह कोकून से बाहर आ गई।
- अब यह एक तितली बन गई है।
- यह धीरे-धीरे उड़ गई।
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “‘पेड़-पौधे और पशु-पक्षी हैं साथ’ पाठ ने हमें सिखाया कि पशु-पक्षी और पेड़-पौधे एक-दूसरे के साथ रहते हैं और एक-दूसरे पर निर्भर हैं। पशु-पक्षी पेड़ों से भोजन, आवास, आराम, सुरक्षा पाते हैं। मिट्टी में कई जीव-जंतु रहते हैं – चींटियाँ, दीमक, केंचुए, आदि। पक्षियों की बोली (आवाज़) से हम उन्हें पहचान सकते हैं। ‘मैं कौन हूँ’ खेल से हमने अभिनय के माध्यम से पशु-पक्षियों की विशेषताओं को समझा। प्रे वाग्टेला पक्षियों की कहानी हमें सिखाती है कि हमें प्रकृति और पशु-पक्षियों का स्वागत करना चाहिए और उनकी देखभाल करनी चाहिए। “प्रकृति में सब आपस में जुड़ा है – हमें इस संतुलन को बनाए रखना चाहिए!” “
- अगले पाठ ‘निर्भरता एक-दूसरे पर’ का संक्षिप्त परिचय – “अब हम सीखेंगे कि पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और हम सब एक-दूसरे पर कैसे निर्भर हैं और हमें प्रकृति की देखभाल क्यों करनी चाहिए।”
शिक्षण सहायक सामग्री
- विभिन्न पशु-पक्षियों के चित्र/पोस्टर (पृष्ठ 80-81, 85)
- मिट्टी के नमूने (अलग-अलग स्थानों से)
- चीनी/गुड़, पापड़, ब्रेड (चींटी गतिविधि के लिए)
- पक्षियों की आवाज़ (ऑडियो, यदि उपलब्ध हो)
- रंग, कागज़, पेंसिल (चित्रकला के लिए)
- पशु-पक्षियों के कार्ड (‘मैं कौन हूँ’ खेल के लिए)
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों के बीच संबंध की समझ | मौखिक/लिखित प्रश्न |
| 2 | मिट्टी की विशेषताओं (रंग, बनावट, गंध, जीव-जंतु) की पहचान | गतिविधि/मौखिक |
| 3 | पक्षियों की बोली (आवाज़) की पहचान | मौखिक/तालिका |
| 4 | विभिन्न पशु-पक्षियों के पैरों की संख्या की समझ | लिखित |
| 5 | पशु-पक्षियों की पेड़-पौधों पर निर्भरता (भोजन, आवास) की समझ | मौखिक/लिखित |
| 6 | रचनात्मक अभिव्यक्ति (अभिनय, चित्रकला) | समूह गतिविधि/कला |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘गिलहरी’, ‘कठफोड़वा’, ‘मिट्टी’, ‘कोकून’, ‘तितली’ को क्या कहते हैं। मिट्टी का अवलोकन – बच्चों को प्रकृति से सीधा जुड़ाव का अनुभव दें – मिट्टी को छूना, सूँघना, उसमें जीव-जंतुओं को ढूँढना। पक्षियों की बोली – बच्चों को श्रवण कौशल (listening skills) विकसित करने का अवसर दें – वे पक्षियों की आवाज़ पहचानना सीखेंगे। ‘मैं कौन हूँ’ खेल – बच्चों को अभिनय और अभिव्यक्ति का अवसर देता है – यह बहुत रुचिकर और शिक्षाप्रद है। प्रे वाग्टेला – बच्चों को पक्षी-प्रेम और पर्यावरण जागरूकता का अनुभव कराएँ – यह कहानी दिखाती है कि कैसे लोग पक्षियों का स्वागत करते हैं। तितली का जीवन चक्र – बच्चों को रूपांतरण (metamorphosis) की प्रक्रिया से परिचित कराएँ – इल्ली → कोकून → तितली। “प्रकृति में सब आपस में जुड़ा है – हमें इस संतुलन को बनाए रखना चाहिए!” – इस संदेश को बार-बार दोहराएँ।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
