वंशगति के आणविक आधार का तात्पर्य यह समझना है कि DNA और RNA किस प्रकार आनुवंशिक सूचना (genetic information) को संचित करते हैं और कैसे वह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित होती है।
मुख्य प्रश्न:
- DNA क्या है?
- DNA की संरचना कैसी है?
- DNA कैसे दोहराया जाता है?
- DNA से प्रोटीन कैसे बनते हैं?
1️⃣ DNA: डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल
A. DNA की खोज
| वर्ष | वैज्ञानिक | योगदान |
|---|---|---|
| 1869 | फ्रेडरिक मिशर | न्यूक्लिएस में एक अम्ल की खोज की (पहली बार “न्यूक्लिन” नाम दिया) |
| 1920 | फिबस लेविन | डीऑक्सीराइबोज शर्करा और नाइट्रोजन क्षारकों की खोज |
| 1944 | ओसवाल्ड एवरी | DNA को आनुवंशिक पदार्थ के रूप में प्रमाणित किया (प्रमाण: transformation experiment) |
| 1950 | चार्गाफ | चार्गाफ के नियम (A=T, G=C) |
| 1953 | वाटसन और क्रिक | DNA की डबल हेलिक्स संरचना |
B. DNA के घटक (Components)
DNA तीन मुख्य घटकों से बना है:
1. डीऑक्सीराइबोज शर्करा (Deoxyribose Sugar)
- 5-कार्बन शर्करा
- कार्बन परमाणु: 1′, 2′, 3′, 4′, 5′
- राइबोज (RNA) से एक ऑक्सीजन कम है
2. फॉस्फेट समूह (Phosphate Group)
- PO₄³⁻ समूह
- DNA की रीढ़ बनाता है
- 3′-5′ फॉस्फोडिएस्टर बंध बनाता है
3. नाइट्रोजन क्षारक (Nitrogenous Bases)
5 प्रकार की क्षारकें हैं:
| क्षारक | प्रकार | सूत्र | DNA में | RNA में |
|---|---|---|---|---|
| एडिनिन (A) | प्यूरीन | C₅H₅N₅ | ✓ | ✓ |
| गुआनिन (G) | प्यूरीन | C₅H₅N₅O | ✓ | ✓ |
| साइटोसिन (C) | पिरिमिडीन | C₄H₅N₃O | ✓ | ✓ |
| थाइमिन (T) | पिरिमिडीन | C₅H₆N₂O₂ | ✓ | – |
| यूरेसिल (U) | पिरिमिडीन | C₄H₄N₂O₂ | – | ✓ |
महत्वपूर्ण अंतर:
- DNA में थाइमिन (T) होता है, RNA में यूरेसिल (U)
- DNA में डीऑक्सीराइबोज होता है, RNA में राइबोज
C. न्यूक्लिओटाइड (Nucleotide)
परिभाषा: डीऑक्सीराइबोज + फॉस्फेट + नाइट्रोजन क्षारक
संरचना:

4 प्रकार के डीऑक्सीन्यूक्लिओटाइड:
- एडिनिलेट
- गुआनिलेट
- साइटिडिलेट
- थाइमिडिलेट
2️⃣ DNA की संरचना
A. डबल हेलिक्स मॉडल (Watson और Crick, 1953)
संरचनात्मक विशेषताएं:

1. द्विगुणित संरचना (Double Stranded)
- दो पॉलिन्यूक्लिओटाइड श्रृंखलाएं (strands)
- एक-दूसरे के समांतर (antiparallel)
- हाइड्रोजन बंधों से जुड़ी हुई
2. प्रतिसमांतर अभिविन्यास (Antiparallel Orientation)

3. हेलिकल संरचना (Helical Structure)
- सर्पिल संरचना (spiral shape)
- मुड़ी हुई संरचना (coiled structure)
- मुड़ाव: दाईं ओर (right-handed)
- प्रति मुड़ाव: 10 क्षारक जोड़ी
4. चार्गाफ के नियम (Chargaff’s Rules)
- A = T (एडिनिन = थाइमिन)
- G = C (गुआनिन = साइटोसिन)
- A + G = T + C (प्यूरीन = पिरिमिडीन)
5. आधार जोड़ी
- A-T: 2 हाइड्रोजन बंध (कमजोर)
- G-C: 3 हाइड्रोजन बंध (मजबूत)
6. रीढ़ की हड्डी (Backbone)
- डीऑक्सीराइबोज-फॉस्फेट की श्रृंखला
- बाहरी: हाइड्रोफिलिक (जलप्रिय)
- आंतरिक: हाइड्रोफोबिक (जल-विरोधी), क्षारकें
B. DNA के स्तर (Levels of Organization)
1. प्राथमिक संरचना (Primary Structure)
- न्यूक्लिओटाइड्स का रैखिक अनुक्रम
- डीऑक्सीराइबोज-फॉस्फेट की रीढ़
- 5′ से 3′ दिशा
2. द्वितीयक संरचना (Secondary Structure)
- डबल हेलिक्स संरचना
- हाइड्रोजन बंधों से जुड़ी हुई
- एंटीपैरेलल व्यवस्था
3. तृतीयक संरचना (Tertiary Structure)
- सुपरकॉइलिंग (supercoiling)
- न्यूक्लिओसोम्स में संगठन
- 30 nm फाइबर
4. चतुर्थ संरचना (Quaternary Structure)
- क्रोमैटिन (chromatin) का संगठन
- गुणसूत्र (chromosome) बनाना
3️⃣ DNA प्रतिकरण (DNA Replication)
A. प्रतिकरण की खोज
मेसेलसन और स्टाहल प्रयोग (1958):
- उद्देश्य: DNA की प्रतिकरण की विधि समझना
- परिणाम: अर्धसंरक्षी प्रतिकरण (semi-conservative replication)
B. अर्धसंरक्षी प्रतिकरण (Semi-conservative Replication)
प्रक्रिया:

C. DNA प्रतिकरण के चरण
1. विमोचन (Unwinding/Denaturation)
- एंजाइम: हेलिकेज़ (helicase)
- दोनों श्रृंखलाओं को अलग करना
- हाइड्रोजन बंधों को तोड़ना
- ऊर्जा: ATP
2. प्राइमर संश्लेषण (Primer Synthesis)
- एंजाइम: प्राइमेज़ (primase)
- RNA प्राइमर (8-10 न्यूक्लिओटाइड्स) की संश्लेषण
- स्थान: प्रत्येक ओकाजाकी खंड की शुरुआत में
3. न्यूक्लिओटाइड्स का जोड़ना (Elongation)
- एंजाइम: DNA पोलीमरेज़ III (prokaryotes में), DNA पोलीमरेज़ α (eukaryotes में)
- 5′ से 3′ दिशा में न्यूक्लिओटाइड्स जोड़ना
- ट्रिफॉस्फेट न्यूक्लिओटाइड्स का उपयोग
- ऊर्जा के लिए 2 फॉस्फेट मुक्त करना
4. लीडिंग स्ट्रैंड (Leading Strand)
- दिशा: 5′ → 3′ (निरंतर)
- संश्लेषण: निरंतर
- एंजाइम: DNA पोलीमरेज़ III
- एक ही दिशा में पूरी श्रृंखला
5. लैगिंग स्ट्रैंड (Lagging Strand)
- दिशा: 3′ → 5′ (मूल)
- संश्लेषण: असंतत (ओकाजाकी खंडों में)
- खंड: 1000-2000 न्यूक्लिओटाइड्स (prokaryotes)
- खंड: 100-200 न्यूक्लिओटाइड्स (eukaryotes)
6. ओकाजाकी खंड (Okazaki Fragments)
- लैगिंग स्ट्रैंड पर छोटे खंड
- RNA प्राइमर से शुरू होते हैं
- अंत में संधारित होते हैं
7. प्राइमर हटाना (Primer Removal)
- एंजाइम: DNA पोलीमरेज़ I (prokaryotes)
- RNA प्राइमर को हटाया जाता है
- नए न्यूक्लिओटाइड्स से भरा जाता है
8. खंडों को जोड़ना (Ligation)
- एंजाइम: DNA लाइगेज़ (ligase)
- फॉस्फोडिएस्टर बंध बनाना
- ओकाजाकी खंडों को जोड़ना
D. DNA प्रतिकरण से संबंधित एंजाइम्स
| एंजाइम | कार्य | स्थान |
|---|---|---|
| हेलिकेज़ | DNA को अलग करना | Replication fork पर |
| प्राइमेज़ | RNA प्राइमर बनाना | Primer synthesis |
| DNA पोलीमरेज़ III | न्यूक्लिओटाइड्स जोड़ना | Elongation |
| DNA पोलीमरेज़ I | प्राइमर हटाना | Prokaryotes में |
| DNA लाइगेज़ | खंडों को जोड़ना | Ligation |
| टोपोइसोमरेज़ | सुपरकॉइलिंग को दूर करना | Unwinding के समय |
4️⃣ प्रतिलिपि त्रुटि और मरम्मत (DNA Repair)
A. प्रतिलिपि त्रुटि (Replication Errors)
त्रुटि दर:
- DNA पोलीमरेज़ के बिना जांच: 10⁻⁵ (प्रति 100,000 में 1)
- DNA पोलीमरेज़ की जांच क्षमता के साथ: 10⁻⁷ (प्रति 10 मिलियन में 1)
B. DNA मरम्मत तंत्र (DNA Repair Mechanisms)
1. प्रूफरीडिंग (3′ to 5′ Exonuclease Activity)
- DNA पोलीमरेज़ द्वारा स्वयं जांच
- गलत न्यूक्लिओटाइड को हटाना
- सही न्यूक्लिओटाइड को जोड़ना
2. मिसमैच मरम्मत (Mismatch Repair)
- एंजाइम: MutS, MutL, MutH (bacteria में)
- गलत जोड़े को खोजना
- पूरे खंड को हटाना और नया संश्लेषण
- क्षमता: 1 त्रुटि प्रति 10 मिलियन
3. एक्सिजन मरम्मत (Excision Repair)
- प्रकार:
- नाभिकीय एक्सिजन मरम्मत (Nucleotide Excision Repair – NER)
- आधार एक्सिजन मरम्मत (Base Excision Repair – BER)
- कारण: UV किरणें, रासायनिक क्षति
4. डबल स्ट्रैंड ब्रेक मरम्मत (Double Strand Break Repair)
- विधियां:
- नॉन-होमोलॉगस एंड जॉइनिंग (NHEJ)
- होमोलॉगस रीकॉम्बिनेशन (HR)
5️⃣ अनुलेखन (Transcription)
A. अनुलेखन क्या है?
परिभाषा: DNA के एक खंड से RNA का संश्लेषण करने की प्रक्रिया।
मुख्य विशेषताएं:
- टेम्पलेट: DNA की एक श्रृंखला
- उत्पाद: RNA (mRNA, tRNA, rRNA)
- एंजाइम: RNA पोलीमरेज़
- प्रोटीन: Transcription factors, sigma factors
B. अनुलेखन के प्रकार
| RNA प्रकार | कार्य | संख्या | अणु साइज |
|---|---|---|---|
| mRNA | प्रोटीन संश्लेषण के लिए संदेश ले जाना | 2% | 500-3000 nucleotides |
| rRNA | राइबोसोम बनाना | 80% | 1500-4500 nucleotides |
| tRNA | अमीनो एसिड को राइबोसोम तक ले जाना | 15% | 75-90 nucleotides |
C. अनुलेखन के चरण
1. शुरुआत (Initiation)
- Prokaryotes में:
- Sigma factor (σ) का RNA पोलीमरेज़ से जुड़ना
- Promoter की पहचान (TATAAT या -10 box, -35 box)
- डीऑक्सीराइबोन्यूक्लियोसाइड ट्रिफॉस्फेट (NTPs) का उपयोग
- Eukaryotes में:
- General transcription factors (TFIID, TFIIB आदि)
- TATA box की पहचान (TATAAA)
- RNA पोलीमरेज़ II
2. लंबाई (Elongation)
- RNA पोलीमरेज़ द्वारा 5′ → 3′ दिशा में RNA संश्लेषण
- DNA की 3′ → 5′ दिशा में अनुलेखन
- RNA-DNA हाइब्रिड बनना
3. समाप्ति (Termination)
- Prokaryotes में:
- Intrinsic termination: rho-independent
- Rho factor द्वारा समाप्ति: rho-dependent
- Eukaryotes में:
- Polyadenylation signal (AAUAAA) की पहचान
- Cleavage और poly-A tail जोड़ना
D. RNA की संरचना
DNA और RNA में अंतर:
| विशेषता | DNA | RNA |
|---|---|---|
| शर्करा | डीऑक्सीराइबोज | राइबोज |
| क्षारकें | A, T, G, C | A, U, G, C |
| संरचना | डबल स्ट्रैंडेड | सिंगल स्ट्रैंडेड (आमतौर पर) |
| स्थिरता | अधिक स्थिर | कम स्थिर |
| कार्य | सूचना भंडारण | सूचना अभिव्यक्ति |
6️⃣ अनुवाद (Translation)
A. अनुवाद क्या है?
परिभाषा: mRNA में निहित आनुवंशिक संदेश को प्रोटीन में परिवर्तित करना।
स्थान: राइबोसोम पर
B. राइबोसोम की संरचना

Prokaryotes में (70S राइबोसोम):
70S = 50S (बड़ा उप-इकाई) + 30S (छोटा उप-इकाई) - 23S rRNA, 5S rRNA, ~30 प्रोटीन - 16S rRNA, ~20 प्रोटीनEukaryotes में (80S राइबोसोम):
80S = 60S (बड़ा उप-इकाई) + 40S (छोटा उप-इकाई) - 28S rRNA, 5.8S rRNA, 5S rRNA, ~50 प्रोटीन - 18S rRNA, ~30 प्रोटीनC. tRNA की संरचना
tRNA (Transfer RNA):
- साइज: 75-90 न्यूक्लिओटाइड्स
- आकार: क्लोवरलीफ (cloverleaf) जैसा
- त्रि-आयामी संरचना: L-shaped
महत्वपूर्ण भाग:
- एंटीकोडन आर्म: mRNA की कोडन से बंधना
- एमिनो एसिड आर्म: अमीनो एसिड से जुड़ना
- डी-आर्म: राइबोसोम से जुड़ना
- TΨC आर्म: राइबोसोम से अंत:क्रिया
D. आनुवंशिक कोड (Genetic Code)
परिभाषा:
mRNA की 3 न्यूक्लिओटाइड्स (कोडन) की एक अमीनो एसिड के लिए कोडिंग।
कोडन के प्रकार:
| कोडन का नाम | संख्या | कार्य |
|---|---|---|
| सेंस कोडन | 61 | अमीनो एसिड को कोड करना |
| स्टॉप कोडन | 3 | अनुवाद को रोकना (UAA, UAG, UGA) |
| स्टार्ट कोडन | 1 | अनुवाद शुरू करना (AUG) |
आनुवंशिक कोड की विशेषताएं:
- ट्रिपलेट: 3 न्यूक्लिओटाइड्स = 1 कोडन
- सार्वभौमिक: सभी जीवों में समान (लगभग)
- अनुक्रमिक: कोडन्स को छोड़ा नहीं जाता
- अध:पतन (Degenerate): एक अमीनो एसिड के कई कोडन
- कोई विराम नहीं: कोडन्स के बीच कोई अंतराल नहीं
सभी 64 कोडन:

E. अनुवाद के चरण
1. शुरुआत (Initiation)
- Prokaryotes में:
- 30S उप-इकाई से शुरुआत
- mRNA का Shine-Dalgarno sequence के साथ बंधन
- N-formyl methionine (fMet) का प्रारंभिक tRNA
- 50S उप-इकाई का जुड़ना
- Eukaryotes में:
- 40S उप-इकाई से शुरुआत
- 5′ cap और poly-A tail से पहचान
- Kozak sequence
- Methionine (Met) का प्रारंभिक tRNA
- 60S उप-इकाई का जुड़ना
2. लंबाई (Elongation)
राइबोसोम के 3 स्थान:
- A स्थान (Aminoacyl site): नए tRNA का आना
- P स्थान (Peptidyl site): पिछला tRNA
- E स्थान (Exit site): पुराना tRNA का निकलना
प्रक्रिया:
- Codon recognition: sRNA का A स्थान में आना
- Peptide bond formation: पिछली और नई श्रृंखला का जुड़ना
- Translocation: राइबोसोम का अगले कोडन तक जाना
3. समाप्ति (Termination)
- Stop codon (UAA, UAG, UGA) की पहचान
- Release factors (RF1, RF2 आदि) का कार्य
- Polypeptide chain का मुक्त होना
- राइबोसोम का अलग होना
F. अनुवाद के दौरान ऊर्जा
ऊर्जा स्रोत: GTP (Guanosine Triphosphate)
- Initiation: 2 GTP
- Elongation (प्रति अमीनो एसिड): 2 GTP
- Termination: 2 GTP
7️⃣ प्रोटीन संश्लेषण का विनियमन
A. जीन अभिव्यक्ति का विनियमन (Gene Expression Regulation)
1. Prokaryotes में (ऑपेरॉन मॉडल)
lac ऑपेरॉन (Lactose Operon):
- खोज: Jacob और Monod (1961)
- कार्य: लैक्टोज के पाचन को नियंत्रित करना
संरचना:

विनियमन:
- लैक्टोज उपस्थित: Repressor अलग होता है → जीन व्यक्त होते हैं
- लैक्टोज अनुपस्थित: Repressor operator को बंद करता है → जीन दबे होते हैं
trp ऑपेरॉन (Tryptophan Operon):
- ट्रिप्टोफैन के संश्लेषण को नियंत्रित करता है
- Attenuation का उदाहरण
2. Eukaryotes में
जीन अभिव्यक्ति का विनियमन:
- Transcriptional level:
- Enhancers, Silencers
- Transcription factors
- Chromatin remodeling
- Post-transcriptional level:
- Alternative splicing
- RNA editing
- miRNA
- Translational level:
- Ribosome selection
- mRNA stability
- Post-translational level:
- Protein modifications
- Protein degradation
8️⃣ उत्परिवर्तन (Mutation) – आणविक स्तर पर
A. बिंदु उत्परिवर्तन (Point Mutations)
1. सन्नিहित उत्परिवर्तन (Transition)
A-T → G-CयाG-C → A-T2. ट्रांसवर्जन उत्परिवर्तन (Transversion)
A-T → T-AयाG-C → C-GB. कोडन स्तर पर उत्परिवर्तन
1. अर्थहीन उत्परिवर्तन (Silent Mutation)
- कोडन में परिवर्तन, लेकिन अमीनो एसिड नहीं बदलता
- कारण: Degeneracy of genetic code
2. मिससेंस उत्परिवर्तन (Missense Mutation)
- कोडन में परिवर्तन, अमीनो एसिड बदलता है
- उदाहरण: Sickle cell anemia (GAG → GTG)
3. नॉनसेंस उत्परिवर्तन (Nonsense Mutation)
- कोडन stop कोडन में बदलता है
- प्रभाव: अधूरी प्रोटीन
4. फ्रेमशिफ्ट उत्परिवर्तन (Frameshift Mutation)
- न्यूक्लिओटाइड्स का insertion या deletion
- प्रभाव: पूरी प्रोटीन बदल जाती है
9️⃣ महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर
🔹 Q1. DNA की डबल हेलिक्स संरचना समझाइए।

उत्तर: DNA की संरचना को डबल हेलिक्स मॉडल कहते हैं, जिसमें:
- दो पॉलिन्यूक्लिओटाइड श्रृंखलाएं हैं जो एक-दूसरे के समांतर हैं (antiparallel)।
- हाइड्रोजन बंध से जुड़ी हुई हैं:
- A-T: 2 हाइड्रोजन बंध
- G-C: 3 हाइड्रोजन बंध
- चार्गाफ के नियम:
- A = T
- G = C
- हेलिकल संरचना: दाईं ओर मुड़ी हुई
- रीढ़: डीऑक्सीराइबोज-फॉस्फेट की श्रृंखला (बाहर)
- क्षारकें: हेलिक्स के अंदर
🔹 Q2. DNA प्रतिकरण की प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर: अर्धसंरक्षी प्रतिकरण (Semi-conservative Replication):
चरण:
- विमोचन: हेलिकेज़ एंजाइम दोनों श्रृंखलाओं को अलग करता है।
- प्राइमर संश्लेषण: प्राइमेज़ RNA प्राइमर बनाता है।
- लीडिंग स्ट्रैंड: निरंतर संश्लेषण (5′ → 3′)
- लैगिंग स्ट्रैंड: असंतत संश्लेषण (ओकाजाकी खंडों में)
- प्राइमर हटाना: DNA पोलीमरेज़ I
- लिगेशन: DNA लाइगेज़ खंडों को जोड़ता है।
परिणाम: दो नई DNA, प्रत्येक में एक पितृ श्रृंखला + एक नई श्रृंखला।
🔹 Q3. अनुलेखन और अनुवाद में अंतर बताइए।
उत्तर:
| विशेषता | अनुलेखन | अनुवाद |
|---|---|---|
| अर्थ | DNA → RNA | mRNA → प्रोटीन |
| स्थान | नाभिक (Prokaryotes: साइटोप्लाज्म) | राइबोसोम |
| एंजाइम | RNA पोलीमरेज़ | राइबोसोम |
| उत्पाद | mRNA, tRNA, rRNA | प्रोटीन |
| टेम्पलेट | DNA की 1 श्रृंखला | mRNA |
🔹 Q4. आनुवंशिक कोड की विशेषताएं लिखिए।
उत्तर:
- ट्रिपलेट: 3 न्यूक्लिओटाइड्स = 1 कोडन
- सार्वभौमिक: लगभग सभी जीवों में समान
- अनुक्रमिक: कोडन्स को छोड़ा नहीं जाता
- अध:पतन: एक अमीनो एसिड के कई कोडन हो सकते हैं
- कोई विराम नहीं: कोडन्स के बीच कोई अंतराल नहीं
- Start कोडन: AUG (मेथिओनिन)
- Stop कोडन: UAA, UAG, UGA
🔹 Q5. lac ऑपेरॉन के विनियमन को समझाइए।
उत्तर: lac ऑपेरॉन: लैक्टोज के पाचन को नियंत्रित करता है
विनियमन:
- लैक्टोज अनुपस्थित:
- Repressor प्रोटीन operator को बंद करता है
- जीन व्यक्त नहीं होते
- लैक्टोज उपस्थित:
- लैक्टोज repressor को allolactose में बांधता है
- Repressor operator से अलग होता है
- जीन व्यक्त होते हैं
परिणाम: केवल जब लैक्टोज उपस्थित हो, तो एंजाइम बनते हैं।
