वंशागति वह प्रक्रम है जिससे लक्षण जनक (Parents) से संतति (Offspring) में जाते हैं। विविधता वह अंतर है जो संतति को अपने जनकों से अलग बनाती है।
1. मेण्डल की वंशागति (Mendelian Inheritance)
ग्रेगर जॉन मेण्डल ने मटर के पौधे (Pisum sativum) पर 7 वर्षों तक प्रयोग किए।
- प्रभाविता का नियम: जब दो विपरीत लक्षणों वाले पौधों में संकरण कराया जाता है, तो प्रथम पीढ़ी ($F_1$) में केवल प्रभावी लक्षण दिखाई देता है।
- विसंयोजन का नियम (Law of Segregation): युग्मक निर्माण के समय कारकों के जोड़े अलग हो जाते हैं और प्रत्येक युग्मक को एक ही कारक मिलता है।
- स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम: दो जोड़ी लक्षणों की वंशागति एक-दूसरे से स्वतंत्र होती है।
2. मेण्डलवाद से विचलन (Deviations from Mendelism)
कुछ मामलों में $F_1$ का फेनोटाइप मेण्डलीय अनुपात का पालन नहीं करता:
- अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete Dominance): इसमें $F_1$ पीढ़ी का लक्षण दोनों जनकों के बीच का होता है।
- उदाहरण: स्नैपड्रैगन (Antirrhinum) में लाल और सफेद फूलों के संकरण से गुलाबी फूल प्राप्त होना।
- सहप्रभाविता (Co-dominance): इसमें $F_1$ पीढ़ी में दोनों जनकों के लक्षण समान रूप से प्रकट होते हैं।
- उदाहरण: मानव में ABO रक्त समूह।
- बहुयुग्म विकल्पी (Multiple Allelism): जब एक ही लक्षण को दो से अधिक एलील नियंत्रित करते हैं। जैसे रक्त समूह के लिए $I^A$, $I^B$ और $i$ एलील।
3. वंशागति का क्रोमोसोमवाद (Chromosomal Theory of Inheritance)
सटन और बोवेरी ने प्रतिपादित किया कि जीन गुणसूत्रों (Chromosomes) पर स्थित होते हैं। जैसे मेण्डल के कारक अलग होते हैं, वैसे ही कोशिका विभाजन के समय गुणसूत्र भी अलग होते हैं।
4. लिंग निर्धारण (Sex Determination)
- मानव: XY प्रकार (नर XY, मादा XX)।
- पक्षी: ZW प्रकार (नर ZZ, मादा ZW)। यहाँ मादा विषमयुग्मकी होती है।
- मधुमक्खी: अगुणित-द्विगुणित (Haplodiploid) प्रणाली। नर (Drone) अगुणित ($n$) होते हैं और मादा (Queen/Worker) द्विगुणित ($2n$) होती हैं।
5. लिंकेज तथा क्रॉसिंग ओवर (Linkage and Crossing Over)
- लिंकेज (सहलग्नता): एक ही गुणसूत्र पर स्थित जीनों का साथ-साथ वंशागत होने की प्रवृत्ति।
- क्रॉसिंग ओवर: अर्धसूत्री विभाजन के दौरान समजात गुणसूत्रों के बीच आनुवंशिक पदार्थ का आदान-प्रदान, जिससे विविधता आती है।

6. आनुवंशिक विकार (Genetic Disorders)
क. मेण्डलीय विकार (Mendelian Disorders)
ये एकल जीन के उत्परिवर्तन से होते हैं:
- हीमोफीलिया: रक्त का थक्का नहीं जमता। यह एक ‘लिंग सहलग्न अप्रभावी’ रोग है।
- वर्णान्धता (Color Blindness): लाल और हरे रंग में अंतर न कर पाना।
- थैलीसीमिया: हीमोग्लोबिन की श्रृंखला का कम निर्माण होना, जिससे गंभीर एनीमिया होता है।
ख. क्रोमोसोमीय विकार (Chromosomal Disorders)
ये गुणसूत्रों की संख्या में परिवर्तन के कारण होते हैं:
- डाउन सिंड्रोम (Down’s Syndrome): 21वें गुणसूत्र की त्रिसूत्रता (Trisomy 21)। इसमें चेहरा मंगोलियाई जैसा और मानसिक विकास धीमा होता है।

- क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter’s Syndrome): नर में एक अतिरिक्त X गुणसूत्र (44+XXY)। नर में मादा के लक्षण (जैसे स्तन वृद्धि) विकसित हो जाते हैं।
- टर्नर सिंड्रोम (Turner’s Syndrome): मादा में एक X गुणसूत्र की कमी (44+X0)। ऐसी स्त्रियाँ बाँझ (Sterile) होती हैं।
बहुजीनी वंशागति (Polygenic Inheritance): जब एक लक्षण कई जीनों द्वारा नियंत्रित होता है, जैसे मानव की त्वचा का रंग या लंबाई। इसमें लक्षणों का प्रभाव संचयी (Additive) होता है।
