रैदास के पद – रैदास कक्षा 11 हिन्दी पद्य खंड
रैदास के पद जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात ।। रैदास कनक और कंगन माहि जिमि अंतर कुछ नाहि । जैसे ही अंतर नहीं हिन्दुअन तुरकन माहि ।…
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रैदास के पद जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात ।। रैदास कनक और कंगन माहि जिमि अंतर कुछ नाहि । जैसे ही अंतर नहीं हिन्दुअन तुरकन माहि ।…
गज़ल कहाँ तो तय या चिरागों हरेक घर के लिए, कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए। 0 यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है, चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए। न हो कमीज तो पाँवों…
घर की याद आज पानी गिर रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, रात भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, घर नज़र में तिर रहा है, घर कि मुझसे दूर है जो…
चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती मैं जब पढ़ने लगता हूँ वह आ जाती है खड़ी खड़ी चुपचाप सुना करती है। उसे बड़ा अचरज होता है इन काले चीन्हों से कैसे ये सब स्वर निकला करते हैं चंपा सुन्दर की…
वे आँखें अंधकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन, भरा दूर तक उनमें दारुण दैन्य दुख का नीरव रोदना वह स्वाधीन किसान रहा, अभिमान भरा आँखों में इसका, छोड़ उसे मँझधार आज संसार कगार सदृश वह खिसका!…
पथिक प्रतिक्षण नूतन वेश बनाकर रंग-बिरंग निराला । रवि के सम्मुख थिरक रही है नभ में वारिद माला। नीचे नील समुद्र मनोहर ऊपर नील गगन है। धन पर बैठ, बीच में बिच यही चाहता मन है। रत्नाकर गर्जन करता है,…
पद 1 हम लौ एक एक करि जाना। दौड़ कहूँ तिनहीं को दोजग जिन नाहिन पहिचानां || एकै पवन एक ही पानी एकै जोति समाना। एकै खाक गढ़े सब भांडै एकै कोहरा सांनां ।। जैसे बाढ़ी काष्ट ही काटै अगिनि…
सहर्ष स्वीकारा है -गजानन माधव मुक्तिबोध कक्षा 12 हिंदी काव्य खंड गजानन माधव मुक्तिबोध का जीवन परिचय– प्रयोगवादी काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के श्योपुर नामक स्थान पर 1917 ई० में…
मेरी अभिलाषा है कक्षा चौथी विषय हिन्दी पाठ 1-श्री द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी इस कविता में एक बच्चे ने अपने मन की इच्छा प्रकट की है। वह सूरज, चाँद, तारों, जैसा चमकना चाहता है और फूलों जैसा महकना चाहता है। वह…
संत रविदास कक्षा चौथी विषय हिन्दी पाठ 10 भारत के इतिहास में एक समय ऐसा था जब धर्म के नाम पर भारतवासियों पर बहुत अत्याचार हुए। उस समय के शासक निर्दोष जनता को लूटने और सताने को ही अपना कर्त्तव्य…