सहर्ष स्वीकारा है -गजानन माधव मुक्तिबोध कक्षा 12 हिंदी काव्य खंड

सहर्ष स्वीकारा है -गजानन माधव मुक्तिबोध कक्षा 12 हिंदी काव्य खंड

गजानन माधव मुक्तिबोध का जीवन परिचय–

प्रयोगवादी काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के श्योपुर नामक स्थान पर 1917 ई० में हुआ था। इनके पिता पुलिस विभाग में थे। अत: निरंतर होने वाले स्थानांतरण के कारण इनकी पढ़ाई नियमित व व्यवस्थित रूप से नहीं हो पाई। 1954 ई. में इन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से एम०ए० (हिंदी) करने के बाद राजनादगाँव के डिग्री कॉलेज में अध्यापन कार्य आरंभ किया। इन्होंने अध्यापन, लेखन एवं पत्रकारिता सभी क्षेत्रों में अपनी योग्यता, प्रतिभा एवं कार्यक्षमता का परिचय दिया। मुक्तिबोध को जीवनपर्यत संघर्ष करना पड़ा और संघर्षशीलता ने इन्हें चिंतनशील एवं जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने को प्रेरित किया। 1964 ई० में यह महान चिंतक, दार्शनिक, पत्रकार एवं सजग लेखक तथा कवि इस संसार से चल बसा।

रचनाएँ-

 गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ की रचनाएँ निम्नलिखित हैं
(i) कविता-संग्रह- चाँद का मुँह टेढ़ा है, भूरी-भूरी खाक-धूल।
(ii) कथा-साहित्य- काठ का सपना, विपात्र, सतह से उठता आदमी।
(iii) आलोचना- कामायनी-एक पुनर्विचार, नई कविता का आत्मसंघर्ष, नए साहित्य का सौंदर्यशास्त्र, समीक्षा की समस्याएँ एक साहित्यिक की डायरी।
(iv) भारत-इतिहास और संस्कृति।

काव्यगत विशेषताएँ- 

मुक्तिबोध प्रयोगवादी काव्यधारा के प्रमुख सूत्रधारों में थे। इन्होंने राजनीतिक विषयों, अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य तथा देश की आर्थिक समस्याओं पर लगातार लिखा है।

भाषा-शैली- 

इनकी भाषा उत्कृष्ट है। भावों के अनुरूप शब्द गढ़ना और उसका परिष्कार करके उसे भाषा में प्रयुक्त करना भाषा-सौंदर्य की अद्भुत विशेषता है। इन्होंने तत्सम शब्दों के साथ-साथ उर्दू, अरबी और फ़ारसी के शब्दों का भी प्रयोग किया है।

सहर्ष स्वीकारा है

जिंदगी में जो कुछ हैं, जो भी है
इसलिए कि जो कुछ भी मेरा हैं
वह तुम्हें प्यारा हैं।
गरबीली गरीबी यह, ये गंभीर अनुभव सब
यह विचार-वैभव सब

द्वढ़ता यह, भीतर की सरिता यह अभिनव सब
मौलिक है, मौलिक है
इसलिए कि पल-पल में
जो कुछ भी जाग्रत हैं अपलक हैं-
संवेदन तुम्हारा हैं !!

शब्दार्थ –

सहर्ष- खुशी के साथ। स्वीकारा- मन से माना। गरबीली– स्वाभिमानिनी। गांभीर– गहरा। अनुभव– व्यावहारिक ज्ञान। विचार-वैभव– भरे-पूरे विचार। दूढ़ता– मजबूती। सरिता– नदी। भीतर की सरिता – भावनाओं की नदी। अभिनव– नया। मौलिक– वास्तविक। जाग्रत– जागा हुआ। अयलक–निरंतर। संवेदन– अनुभूति।

प्रसंग –

प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आरोह, भाग-2’ में संकलित कविता ‘सहर्ष स्वीकारा है’ से उद्धृत है। इसके रचयिता गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ हैं। इस कविता में कवि ने जीवन में दुख-सुख, संघर्ष-अवसाद, उठा-पटक को सम्यक भाव से अंगीकार करने की प्रेरणा दी है।

व्याख्या

कवि कहता है कि मेरी जिंदगी में जो कुछ है, जैसा भी है, उसे मैं खुशी से स्वीकार करता हूँ। इसलिए मेरा जो कुछ भी है, वह उसको (माँ या प्रिया) अच्छा लगता है। मेरी स्वाभिमानयुक्त गरीबी, जीवन के गंभीर अनुभव, विचारों का वैभव, व्यक्तित्व की दृढ़ता, मन में बहती भावनाओं की नदी-ये सब मौलिक हैं तथा नए हैं। इनकी मौलिकता का कारण यह है कि मेरे जीवन में हर क्षण जो कुछ घटता है, जो कुछ जाग्रत है, उपलब्धि है, वह सब कुछ तुम्हारी प्रेरणा से हुआ है।

विशेष-

(i) कवि अपनी हर उपलब्धि का श्रेय उसको (माँ या प्रिया) देता है।
(ii) संबोधन शैली है।
(iii) ‘मौलिक है’ की आवृत्ति प्रभावी बन पड़ी है।
(iv) ‘विचार-वैभव’ और ‘भीतर की सरिता’ में रूपक अलंकार तथा ‘पल-पल’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
(v) ‘सहर्ष स्वीकारा’, ‘गरबीली गरीबी’, ‘विचार-वैभव’ में अनुप्रास अलंकार की छटा है।
(vi) खड़ी बोली है।
(vi) काव्य की रचना मुक्तक छंद में है, जिसमें ‘गरबीली’, ‘गंभीर’ आदि विशेषणों का सुंदर प्रयोग है।

प्रश्न

(क) कवि जीवन की प्रत्यक परिस्थिति को सहर्ष स्वीकार क्यों करता हैं?
(ख) गरीबी के लिए प्रयुक्त विशेषण का औचित्य और सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
(ग) कवि किन्हें नवीन और मौलिक मानता है तथा क्यों?
(घ) ‘जो कुछ भी मरा हैं वह तुम्हें प्यारा हैं’—इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-

(क) कवि को अपने जीवन की हर उपलब्धि व स्थिति इसलिए सहर्ष स्वीकार है क्योंकि यह सब कुछ उसकी माँ या प्रेयसी को प्रिय लगता है; क्योंकि उसे कवि की हर उपलब्धि पसंद है।
(ख) गरीबी के लिए प्रयुक्त विशेषण है-गरबीली। इसका औचित्य यह है कि कवि इस दशा में भी अंपना स्वाभिमान बनाए हुए है। वह गरीबी को बोझ न मानकर उस स्थिति में भी प्रसन्नता महसूस कर रहा है।
(ग) कवि स्वाभिमानयुक्त गरीबी, जीवन के गंभीर अनुभव, वैचारिक चिंतन, व्यक्तित्व की दृढ़ता और अंत:करण की भावनाओं को मौलिक मानता है। इसका कारण यह है कि ये सब उसके यथार्थ के प्रतिफल हैं और इन पर किसी का प्रभाव नहीं है।
(घ) ‘जो कुछ भी मेरा है वह तुम्हें प्यारा है’-कथन का आशय यह है कि कवि के पास जो कुछ उपलब्धियाँ हैं वह उसे (अभीष्ट महिला) को प्रिय हैं। इन उपलब्धियों में वह अपनी प्रियतता (माँ या प्रिया) का समर्थन महसूस करता है।

2.

जाने क्या रिश्ता हैं, जाने क्या नाता हैं
जितना भी ऊँड़ेलता हूँ भर-भर फिर आता हैं
दिल में क्या झरना है?
मीठे पानी का सोता हैं

भीतर वह, ऊपर तुम
मुसकता चाँद ज्यों धरती पर रात-भर
मुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा हैं! (पृष्ठ-30)

शब्दार्थ-

रिश्ता– रक्त संबंध। नाता– संबंध। ऊँड़ेलना- बाहर निकालना। सोता–झरना।


प्रसंग-

इस कविता में कवि ने जीवन में दुख-सुख संघर्ष-अवसाद, उठा-पटक सम्यक भाव से अंगीकार करने की प्रेरणा दी है।

व्याख्या-

कवि कहता है कि तुम्हारे साथ न जाने कौन-सा संबंध है या न जाने कैसा नाता है कि मैं अपने भीतर समाये हुए तुम्हारे स्नेह रूपी जल को जितना बाहर निकालता हूँ, वह फिर-फिर चारों ओर से सिमटकर चला आता है और मेरे हृदय में भर जाता है। ऐसा लगता है मानो दिल में कोई झरना बह रहा है। वह स्नेह मीठे पानी के स्रोत के समान है जो मेरे अंतर्मन को तृप्त करता रहता है। इधर मन में प्रेम है और उधर तुम्हारा चाँद जैसा मुस्कराता हुआ चेहरा अपने अद्भुत सौंदर्य के प्रकाश से मुझे नहलाता रहता है। कवि का आंतरिक व बाहय जगत-दोनों उसी स्नेह से युक्त स्वरूप से संचालित होते हैं।

विशेष-

(i) कवि अपने प्रिय के स्नेह से पूर्णत: आच्छादित है।
(ii) ‘दिल में क्या झरना है’ में प्रश्न अलंकार है।
(iii) ‘भर-भर’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है,’जितना भी उँड़ेलता हूँ भर-भर फिर आता है’ में विरोधाभास अलंकार है, ‘मीठे पानी का सोता है’ में रूपक अलंकार है, प्रिय के मुख की चाँद के साथ समानता के कारण उपमा अलंकार है।
(iv) मुक्तक छंद है।
(v) खड़ी बोली युक्त भाषा में लाक्षणिकता है।

प्रश्न

(क) कवि अपने उस प्रिय सबधी के साथ अपने संबध कैसे बताता हैं?
(ख) कवि अपने दिल की तुलना किससे करता है तथा क्यों?
(ग) कवि प्रिय को अपने जीवन में किस प्रकार अनुभव करता है?
(घ) कवि ने प्रिय की तुलना किससे की है और क्यों ?

उत्तर-

(क) कवि का अपने उस प्रिय के साथ गहरा संबंध है। उसके स्नेह से वह अंदर व बाहर से पूर्णत: आच्छादित है और उसका स्नेह उसे भिगोता रहता है।
(ख) कवि अपने दिल की तुलना मीठे पानी के झरने से करता है। वह इसमें से जितना भी प्रेम बाहर ऊँड़ेलता है, उतना ही यह फिर भर जाता है।
(ग) कवि प्रिय को अपने जीवन पर इस प्रकार आच्छादित अनुभव करता है जैसे धरती पर सदा चाँद मुस्कराता रहता है। कवि के जीवन पर सदा उसके प्रिय का मुस्कराता हुआ चेहरा जगमगाता रहता है।
(घ) कवि ने अपने प्रिय की तुलना चाँद से इसलिए की है क्योंकि जिस प्रकार आकाश में हँसता चाँद अपने प्रकाश से पूर्वक नाहता रहाता है।उस प्रकरकवक अपने प्रिय का मुस्कराता चेहरा अपने अद्भुत सौंदर्य से नहलाता रहता हैं।

3.

सचमुच मुझे दंड दो कि भूलूँ मैं भूलूँ मैं
तुम्हें भूल जाने की
दक्षिण ध्रुवी अंधकार-अमावस्या
शरीर पर, चेहरे पर, अंतर में पा लूँ मैं
झेलूँ मैं, उसी में नहा लूँ मैं
इसलिए कि तुमसे ही परिवेटित आच्छादित
रहने का रमणीय यह उजेला अब
सहा नहीं जाता हैं।
नहीं सहा जाता है।
ममता के बदल की माँडराती कोमलता
भीतर पिरती है
कमज़ोर और अक्षम अब हो गई है आत्मा यह
छटपटाती छाती को भवित व्यता डराती है
बहलाती – सहलाती आत्मीयता बरदाश्त नहीं होती है !

शब्दार्थ-

दंड– सजा। दक्षिण ध्रुवी अंधकार- दक्षिण ध्रुव पर छाने वाला गहरा औधेरा। अमावस्या- चंद्रमाविहीन काली रात। अंतर- हृदय, अंत:करण। परिवेटित- चारों ओर से घिरा हुआ। आच्छादित- छाया हुआ, ढका हुआ। रमणीय- मनोरम। उजेला- प्रकाश। ममता- अपनापन, स्नेह। माँडराती- छाई हुई। पिराता- दर्द करना। अक्षम- अशक्त। भवितव्यता- भविष्य की आशंका। बहलाती- मन को प्रसन्न करती। सहलाती- दर्द को कम करती हुई। आत्मीयता- अपनापन।

प्रसंग-

इसके रचयिता गजानन माधव ‘मुक्तिबध’ हैं । इस कविता में कवि ने जीवन में दुख-सुख संघर्ष-अवसाद, उठा-पटक सम्यक भाव से अंगीकार करने की प्रेरणा दी है।

व्याख्या-

कवि अपने प्रिय स्वरूपा को भूलना चाहता है। वह चाहता है कि प्रिय उसे भूलने का दंड दे। वह इस दंड को भी सहर्ष स्वीकार करने के लिए तैयार है। प्रिय को भूलने का अंधकार कवि के लिए दक्षिणी ध्रुव पर होने वाली छह मास की रात्रि के समान होगा। वह उस अंधकार में लीन हो जाना चाहता है। वह उस अंधकार को अपने शरीर, हृदय पर झेलना चाहता है। इसका कारण यह है कि प्रिय के स्नेह के उजाले ने उसे घेर लिया है। यह उजाला अब उसके लिए असहनीय हो गया है। प्रिय की ममता या स्नेह रूपी बादल की कोमलता सदैव उसके भीतर मैंडराती रहती है। यही कोमल ममता उसके हृदय को पीड़ा पहुँचाती है। इसके कारण उसकी आत्मा बहुत कमजोर और असमर्थ हो गई है। उसे भविष्य में होने वाली अनहोनी से डर लगने लगा है। उसे भीतर-ही-भीतर यह डर लगने लगा है कि कभी उसे अपनी प्रियतमा (माँ या प्रिया) प्रभाव से अलग होना पड़ा तो वह अपना अस्तित्व कैसे बचाए रख सकेगा। अब उसे उसका बहलाना, सहलाना और रह-रहकर अपनापन जताना सहन नहीं होता। वह आत्मनिर्भर बनना चाहता है।

विशेष-

(i) कवि अत्यधिक मोह से अलग होना चाहता है।
(ii) संबोधन शैली है।
(iii) खड़ी बोली में सशक्त अभिव्यक्ति है, जिसमें तत्सम शब्दों की बहुलता है।
(iv) अंधकार-अमावस्या निराशा के प्रतीक हैं।
(v) ‘ममता के बादल’, ‘दक्षिण ध्रुव अंधकार-अमावस्या’ में रूपक अलंकार,’छटपटाती छाती’ में अनुप्रास अलंकार, तथा ‘बहलाती-सहलाती’ में स्वर मैत्री अलंकार है।
(vi) कोमलता व आत्मीयता का मानवीकरण किया गया है।
(vii) ‘सहा नहीं जाता है’ की पुनरुक्ति से दर्द की गहराई का पता चलता है।

प्रश्न

(क) कवि क्या दंड चाहता हैं और क्यों ?
(ख) कवि अपने जीवन में क्या चाहता है ?
(ग) कवि को क्या सहन नहीं होता?
(घ) कवि की आत्मा कैसे हो गई है तथा क्यों ?

उत्तर-

(क) कवि अपनी प्रियतमा (सबसे प्यारी स्त्री)को भूलने का दंड चाहता है क्योंकि उसके अत्यधिक स्नेह के कारण उसकी आत्मा कमजोर हो गई है। उसका अपराधबोध से दबा मन यह प्रेम सहन नहीं कर पा रहा है। उसका मन आत्मग्लानि से भर उठता है।
(ख) कवि चाहता है कि उसके जीवन में अमावस्या और दक्षिणी ध्रुव के समान गहरा अंधकार छा जाए। वस्तुत: वह अपने प्रिय को भूलना चाहता है तथा उसके विस्मरण को शरीर, मुख और हृदय में बसाकर उसमें डूब जाना चाहता है।
(ग) कवि की प्रियतमा (यानी सबसे प्रिय स्त्री) के स्नेह का उजाला अत्यंत रमणीय है। कवि का व्यक्तित्व चारों ओर से उसके स्नेह से घिर गया है। इस अद्भुत, निश्छल और उज्ज्वल प्रेम के प्रकाश को उसका मन सहन नहीं कर पा रहा है।
(घ) कवि की आत्मा अत्यंत कमजोर हो गई है क्योंकि वह अपनी प्यारी स्त्री के अत्यधिक स्नेह के कारण पराश्रित हो गया है। यह स्नेह उसके मन को अंदर-ही-अंदर पीड़ित कर रहा है। दुख से छटपटाता किसी अनहोनी की कल्पना मात्र से ही उसका मन काँप उठता है।

4.

सचमुच मुझे दंड दो कि हो जाऊँ
पाताली अँधेरे की गुहाओं में विवरों में
धुएँ के बादलों में
बिलकुल मैं लापता
लापता कि वहाँ भी तो तुम्हारा ही सहारा है !!
इसलिए कि जो कुछ भी मेरा है
या मेरा जो होता-सा लगता हैं, होता-सा संभव हैं
सभी वह तुम्हारे ही कारण के कार्यों का घेरा है, कार्यों का वैभव है
अब तक तो जिंदगी में जो कुछ था, जो कुछ है
सहर्ष स्वीकार है
इसलिए कि जो कुछ भी मेरा है
वह तुम्हें प्यारा हैं।

शब्दार्थ–

पाताली आँधेरा- धरती की गहराई में पाई जाने वाली धुंध। गुहा- गुफा। विवर- बिल। लापता- गायब। कारण- मूल प्रेरणा। घेरा- फैलाव। वैभव-समृद्ध।

प्रसंग-

इस कविता में कवि ने जीवन में दुख-सुख, संघर्ष-अवसाद, उठा-पटक सम्यक भाव से अंगीकार करने की प्रेरणा दी है।
व्याख्या- कवि कहता है कि मैं अपनी प्रियतमा (सबसे प्यारी स्त्री) के स्नेह से दूर होना चाहता हूँ। वह उसी से दंड की याचना करता है। वह ऐसा दंड चाहता है कि प्रियतमा के न होने से वह पाताल की अँधेरी गुफाओं व सुरंगों में खो जाए। ऐसी जगहों पर स्वयं का अस्तित्व भी अनुभव नहीं होता या फिर वह धुएँ के बादलों के समान गहन अंधकार में लापता हो जाए जो उसके न होने से बना हो। ऐसी जगहों पर भी उसे अपने सर्वाधिक प्रिय स्त्री का ही सहारा है। उसके जीवन में जो कुछ भी है या जो कुछ उसे अपना-सा लगता है, वह सब उसके कारण है। उसकी सत्ता, स्थितियाँ भविष्य की उन्नति या अवनति की सभी संभावनाएँ प्रियतमा के कारण हैं। कवि का हर्ष-विषाद, उन्नति-अवनति सदा उससे ही संबंधित हैं। कवि ने हर सुख-दुख, सफलता-असफलता को प्रसन्नतापूर्वक इसलिए स्वीकार किया है क्योंकि प्रियतमा ने उन सबको अपना माना है। वे कवि के जीवन से पूरी तरह जुड़ी हुई हैं।

विशेष-

(i) कवि ने अपने व्यक्तित्व के निर्माण में प्रियतमा के योगदान को स्वीकार किया है।
(ii) ‘पाताली औधेरे’ व ‘धुएँ के बादल’ आदि उपमान विस्मृति के लिए प्रयुक्त हुए हैं।
(iii) ‘दंड दो’ में अनुप्रास अलंकार है।
(iv) ‘लापता कि . सहारा है!’ में विरोधाभास अलंकार है।
(v) काव्यांश में खड़ी बोली का प्रयोग है।
(vi) मुक्तक छंद है।

प्रश्न

(क) कवि दड पाने की इच्छा क्यों रखता हैं?
(ख) कवि दड-स्वरूप कहाँ जाना चाहता हैं और क्यों?
(ग) प्रियतमा के बारे में कवि क्या अनुभव करता है?
(घ) कवि को जीवन की हर दशा सहर्ष क्यों स्वीकार है?

उत्तर-

(क) कवि अपनी प्रियतमा के बिना अकेला रहना सीखना चाहता है। वह गुमनामी के अँधेरे में खोना चाहता है। प्रिया के अत्यधिक स्नेह ने कवि को भीतर से कमजोर बना दिया है। कवि स्वयं को अपनी प्रियतमा का दोषी मानता है, अत: वह दंड पाना चाहता है।
(ख) कवि दंड स्वरूप गहन अंधकार वाली गुफाओं, सुरंगों या धुएँ के बादलों में छिप जाना चाहता है। इससे वह अपनी प्रियतमा से दूर रह पाएगा और अकेला रहना सीख सकेगा।
(ग) कवि को अपनी प्रियतमा के बारे में यह अनुभव है कि उसके जीवन की हर गतिविधि पर उसका प्रभाव है। उसके जीवन में जो कुछ घटित होने वाला है, उन सब पर उसकी प्रियतमा की अदृश्य छाया है।
(घ) कवि ने अपने जीवन के सुख-दुख, सफलताएँ-असफलताएँ सभी कुछ खुशी-खुशी अपनाया है क्योंकि ये उसकी प्रियतमा को अच्छे लगते हैं और उन्हें अस्वीकार करना कवि के लिए असंभव है।

https://www.youtube.com/watch?v=RMjWb67EZ1o
गजानन माधव मुक्तिबोध : सहर्ष स्वीकारा है

पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न

कविता के साथ

1. टिपण्णी कीजिए : गरबीली गरबी, भीतर की सरिता, बहलाती – सहलाती आत्मीयता, ममता के बादल। 

उत्तर-
गरबीली गरीबी-इससे तात्पर्य है कि गरीबी में भी स्वाभिमान को बचाए रखना, किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना। अपने को दीन रूप में प्रस्तुत न करना। अपने कर्म पर विश्वास करना। भीतर की सरिता-से अभिप्राय मानवीय संवेदना से है। जिस व्यक्ति के मन में संवेदनाओं की नदी नहीं होगी वह मानव हो ही नहीं सकता। वह तो स्वार्थी और अहंकारी होगा। बहलाती सहलाती आत्मीयता-कवि कहता है कि सर्वहारा वर्ग के प्रति मेरी सहानुभूति ही मुझे बहलाती और सहलाती है कि मैं स्वार्थी न बनें। इसी सहानुभूति ने मुझे इस वर्ग से जोड़ रखा है। ममता के बादल-इससे कवि का तात्पर्य है कि मेरे मन में ममता रूपी बादल उँमड़ते रहते हैं। इन्हीं के कारण मेरा मन सर्वहारा वर्ग से जुड़े रहना चाहता है। कवि कहता है कि ममता के बादलों ने ही मुझे इस वर्ग से रिश्ता बनाए रखने को प्रेरित किया।

2. इस कविता में और भी टिप्पणी-योग्य पद-प्रयोग है। एसे किसी एक प्रयोग का अपनी ओर से उल्लेख करके उस पर टिप्पणी करें।

उत्तर-

इस कविता में अनेक पद टिप्पणी योग्य हैं। ऐसा ही एक पद है-दिल में क्या झरना है?-इसका अर्थ यह है कि जिस प्रकार झरने में चारों तरफ की पहाड़ियों से पानी इकट्ठा हो जाता है, उसे आप जितना चाहे खाली करने का प्रयास करें, वह खाली नहीं होता यह झरना पर्वत या पहाड़ी के दिल के पानी से बनता है, उसी प्रकार कवि के हृदय में भी प्रियतमा के प्रति स्नेह उमड़ता है। वह बार-बार अपनी भावनाएँ व्यक्त करता है, परंतु भावनाएँ कम होने की बजाय और अधिक उमड़कर आ जाती हैं। कवि कहना चाहता है कि उसके मन में प्रियतमा के प्रति अत्यधिक प्रेम है। वह झरने के समान है, जो कभी समाप्त नहीं होता।

3. व्याख्या कीजिए :

जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है
जितना भी उँडेलता हूँ, भर-भर फिर आता है।
दिल में क्या झरना है?
मीठे पानी का सोता है
भीतर वह, ऊपर तुम
मुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा हैं!

उपर्युक्त पंक्तियों की व्याख्या करते हुए यह बताइए कि यहाँ चाँद की तरह आत्मा पर झुका चेहरा भूलकर अंधकार- अमावस्या में नहाने की बात क्यों की गई है ?

उत्तर-
कवि सर्वहारा वर्ग के दुख देख देखकर परेशान हो गया है। उनके अंतहीन दुख उसे अब दुख देते हैं। इस कारण वह
चाहता है कि किसी तरह इनसे मुक्ति पा ली जाए। वह इन दुखों को उसी तरह भूल जाना चाहता है जिस प्रकार दक्षिण ध्रुवी अमावस्या में चाँद दिखाई नहीं देता। कवि कहता है कि चाँद भी तभी दिखाई देना बंद करता है जब वह बादलों से
ढक जाए। इसी तरह मैं भी तभी इस वर्ग से दूर होऊँगा जब मैं स्वार्थी बन जाऊँगा।

4.

तुम्हें भूल जाने की
दक्षिण ध्रुवी अधिकार-अमावस्या
शरीर पर, चेहरे पर, अंतर में पा लूँ मैं
झेलूँ मैं, उसी में नहा लूँ मैं
इसलिए की तुमसे ही परिवेष्टित आच्छादित
रहने का रमणीय यह उजेला अब
सहा नहीं जाता है ।

(क) यहाँ अंधकार-अमावस्या के लिए क्या विशेषण इस्तेमाल किया गया है और उससे विशेष्य में क्या अर्थ जुड़ता हैं ।
(ख) कवि ने व्यक्तिगत संदर्भ में किस स्थिति को अमावस्या कहा हैं?
(ग) इस स्थिति से ठीक  वाले शब्द का व्याख्यापूवक उल्लेख करें
(घ) कवि अपने संबोध्य (जिसको कविता संबोधित हैं कविता का ‘तुम) को पूरी तरह भूल जाना चाहता है। इस बात को प्रभावी तरीके से व्यक्त करने के लिए कवि ने क्या युक्ति अपनाई हैं? रेखांकित अंशों को ध्यान में रखकर उत्तर दें।

उत्तर-

(क) यहाँ ‘अंधकार-अमावस्या’ के लिए ‘दक्षिण ध्रुवी’ विशेषण का इस्तेमाल किया गया है। इसके प्रयोग से अंधकार का घनत्व और अधिक बढ़ जाता है।
(ख) कवि व्यक्तिगत संदर्भ में अंधकार को अपने शरीर व हृदय में बसा लेना चाहता है ताकि वह प्रियतमा के स्नेह से स्वयं को दूर कर सके। वह एकाकी जीवन जीना चाहता है। इसे ही उसने अमावस्या कहा है।
(ग) इस स्थिति से ठीक विपरीत ठहरने वाली स्थिति निम्नलिखित है ‘तुमसे ही परिवेष्टित आच्छादित रहने का रमणीय यह उजेला’ कवि ने प्रियतमा की आभा से सदैव घिरे रहने की स्थिति को उजाले के रूप में व्यक्त किया है। उजाला मनुष्य को मार्ग दिखाता है। इसी तरह प्रिया का स्नेह रूपी उजाला उसे जीवन-पथ पर चलने के लिए प्रोत्साहित करता है।
(घ) कवि अपने संबोध्य को पूरी तरह भूल जाना चाहता है। अपनी बात को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने के लिए वह प्रियतमा को भूल जाने, उसके प्रभाव को शरीर और हृदय में उतार लेने, झेलने और नहा लेने की युक्ति अपनाता है। वह अंधकार में इस प्रकार लीन होना चाहता है कि प्रियतमा की स्मृति रूपी प्रकाश की किरण उसे छू न सके।

5. ‘बहलाती-सहलाती आत्मीयता बरदाश्ता नहीं होती है और कविता के’ शीर्षक ‘सहर्ष स्वीकारा है ‘  में आप कैसे अंतर्विरोध पाते हैं। चर्चा कीजिए।

उत्तर-
एक ओर तो कवि सर्वहारा वर्ग के दुखों के प्रति सहानुभूति जताता है। वह कहता है कि उनके यही दुख मुझे बहला लेते हैं और सहला लेते हैं। लेकिन दूसरी ओर वह यह कहता है कि मैंने अपने जीवन के सभी दुखों को सहर्ष स्वीकार किया है। वास्तव में यह अंतर्विरोध दुखों की अधिकता के कारण है। जब दुखों ने कवि को ज्यादा दुखी कर दिया तो वह उससे उकता गया।

कविता के आस-पास

1अतिशय मोह भी क्या त्रास का कारक हैं? माँ का दूध छूटने का कष्ट जैसे एक जरूरी कष्ट हैं, वैसे ही कुछ और जरूरी कष्टों की सूची बनाएँ।
उत्तर-
वास्तव में कई कष्ट मानव को झेलने जरूरी होते हैं। मनुष्य संवेदना के कारण ये कष्ट झेलता है। जब किसी से आत्मीय लगाव हो जाए तो इस प्रकार के कष्ट होने स्वाभाविक हैं। हमारा संबंध कईयों से होता है। प्रत्येक व्यक्ति एक ही समय में कई रिश्तों को निभाता है इसलिए वह इन ज़रूरी कष्टों को भोगता है। ऐसे कष्टों की सूची इस प्रकार है

  • बेटी की विदाई का कष्ट
  • माँ-बाप के बिछुड़ने का कष्ट
  • भाई, बेटा-बेटी के बिछुड़ने का कष्ट
  • स्कूल जाने के कारण परिवार वालों से दूर होने का कष्ट।
  • अध्यापक/अध्यापिका द्वारा पीटे जाने का कष्ट।

3. ‘ भय ‘ शब्द पर सोचिए । सोचिए  की मन में किन-किन चीज़ों का भय बैठ है । उससे निपटने के लिए आप क्या करते हैं और कवि की मनःस्थिति से अपनी मनःस्थिति की  तुलना कीजिए।
उत्तर-
मेरे मन में केवल इस चीज़ का भय है कि शोषक लोग कब तक शोषण करते रहेंगे? क्या इनका यह क्रूर चक्र कभी चलना बंद होगा? इस भय को दूर करने के लिए मेरी सहानुभूति उन लोगों के साथ हमेशा रही है जो शोषण सहते हैं।

उन्हें किसी न किसी तरीके से इस शोषण से मुक्ति दिलाने का प्रयास करता हूँ। कवि की मन:स्थिति मेरी ही मन:स्थिति है। जो कुछ कवि सोचता है ठीक मैं भी वैसा ही सोचता हूँ। कवि कहता है कि किसी तरह सर्वहारा वर्ग के कष्ट दूर हो जाएँ, वे भी अपने कष्टों से मुक्त हो जाएँ। उन्हें पूँजीपति तंग न करें। मेरी सोच भी कवि की तरह है।

Leave a Comment

fixbetfixbet girişfixbet güncel girişsahabetsahabet girişbetvolebetvole girişvegabetgobahisgobahisbekabetvegabetbetkaregobahisaresbetbahibompalacebetdamabetbetasusroketbetslotoromabetbetasuscasibomaresbetbahiscasinobahiscasinograndpashabetgrandpashabet girişgrandpashabet güncelbetkarearesbetgrandpashacasinofastcasinofast giriştaraftarium24justin tvcanlı maç izlebekabetaresbettipobettürk ifşatürk ifşa izletürk ifşa telegramtürk ifşatelegram ifşatürk ifşa izlearesbetcasibomcasibomcasibomcasibombekabetbekabetmeritkingmeritking girişmeritking güncel girişbetturkeysahabetsahabetbahiscasinobahiscasinotaraftarium24justin tvcanlı maç izlebetcoolmarsbahiscanlı maç izlejustin tvtaraftarium24canlı maç izletaraftarium24taraftarium24selçuksportsselcuksportshiltonbethiltonbetbetsmovebetsmovekavbetkavbetbetciobetciobahiscasinobahiscasinopusulabetpusulabet girişgalabetjojobetjojobet girişdinamobet güncel girişjojobet güncel girişjustin tvcanlı maç izlemaç izlekulisbetkulisbetbahiscasinotaraftarium24canlı maç izlejustin tvtaraftarium24taraftarium24canlı maç izletaraftarium24winxbetwinxbetbahiscasinokulisbetkulisbetselcuksportswinxbetsekabet güncel girişganobetganobet girişdizipaldizipalextrabetextrabet girişextrabet güncel girişextrabetextrabet girişsahabetsahabet girişsahabet güncel girişmatbetmatbet girişonwinonwin girişonwin güncel girişonwinonwin girişonwin güncel girişsahabetsahabet girişsahabet güncel girişsahabetsahabet girişsahabet güncel girişholiganbet girişholiganbet güncel girişholiganbetsekabettaraftarium24matbetmatbet girişmatbetmatbet girişholiganbet , holiganbet giriş , holiganbet güncel girişholiganbet , holiganbet giriş , holiganbet güncel girişholiganbet , holiganbet giriş , holiganbet güncel girişholiganbetholiganbet güncel girişholiganbet girişEnjoybetEnjoybet GirişEnjoybet Güncel Girişhititbethititbet girişhititbethititbet girişvaycasinovaycasino girişvaycasino güncel1xbet1xbet giriş1xbet güncelsahabet girişngsbahisngsbahis girişnerobetnerobet girişgoldenbahisgoldenbahis girişmillibahis girişgonebet girişvizebet girişluxbet girişefesbetcasinotrendbettrendbet giriişzaferbet girişortakbet girişenbet girişbetbigobetbigo1xbet1xbet giriş1xbet güncelholiganbetholiganbet girişholiganbet güncel girişbetebetbetebet girişbetebet güncel adresperabetperabet girişperabet yeni adresonwin telegramkulisbetkulisbet girişbetturkeybetturkey girişbetturkey güncel girişCasibomCasibom GirişCasibom Güncel GirişCasibomCasibom GirişCasibomCasibom Girişsahabet 2026jokerbetjokerbet girişjokerbet güncel girişholiganbetholiganbet girişholiganbet güncel girişmarsbahishititbethititbet girişhititbethititbet girişbetorderbetorder girişbetorderbetorder girişimajbetimajbet girişimajbetimajbet girişperabetperabet girişholiganbet , holiganbet giriş , holiganbet güncel girişholiganbet , holiganbet giriş , holiganbet güncel girişholiganbet , holiganbet giriş , holiganbet güncel girişholiganbet , holiganbet giriş , holiganbet güncel giriştaraftarium24justin tvcanlı maç izletaraftarium24justin tvcanlı maç izlesahabetgiftcardmall/mygiftjojobetjojobet girişjojobet güncel girişmarsbahis girişvdcasino girişmeritkinghititbethititbet girişhititbethititbet girişbetorderbetorder girişbetorderbetorder girişbetvolebetvole girişbetvolebetvole girişbetvolebetvole girişrestbetrestbet girişrestbetrestbet girişbetpasbetpas girişbetpasbetpas girişelexbetelexbet girişelexbetelexbet girişbetcupbetcup giriştipobettipobet giriştipobettipobet giriştipobettipobet girişjojobetmatadorbetonwinimajbetimajbet girişimajbetimajbet girişperabetperabet girişsahabet güncel girişsahabet girişsahabetromabetromabetromabetromabetromabetromabetromabetromabetromabetsahabetsahabet güncel girişsahabet girişesbetesbet girişesbet güncelesbetesbet girişesbet güncelromabetromabetromabetjojobetjojobet girişbetpasbetpas girişbetpasbetpas giriştipobettipobet girişstarzbetstarzbet girisstarzbetstarzbet girişking-royalking-royal girişking-royal güncel girişbullbahis girişbetebetbetebet girişbetebet yeni adresbetebetbetpas girişbetturkey girişvdcasino girişmarsbahis girişcasibom girişgrandpashabet girişbetebetbetebet girişbetebetbetebet girişimajbetimajbet girişimajbetimajbet girişrestbetrestbet girişrestbetrestbet girişbetpasbetpas girişbetpasbetpas girişvaycasinovaycasino girişCasibomCasibom Girişgrandpashabet girişbetlikebetlikebetlikebullbahis girişbullbahisbullbahis girişcasibom girişyakabet girişromabetromabet girişbetsmovebetsmove güncel girişbetsmove girişbullbahisbullbahis girişsahabet girişsahabet güncel girişsahabetbullbahissahabet girişsahabet güncel girişsahabetesbetesbet girişbetlikebetlikebetlikeesbetesbet girişromabetromabet girişgalabetgalabet girişmilanobet girişAlobetAlobet GirişAlobet Güncel GirişAresbetAresbet GirişAresbet Güncel Girişİkimisliİkimisli Girişİkimisli Güncel Girişcasibom girişgrandpashabet girişistanbul escortescort istanbulmecidiyeköy escortjojobetjojobet girişjojobet güncel girişultrabet , ultrabet giriş , ultrabet güncel girişultrabet , ultrabet giriş , ultrabet güncel girişultrabet , ultrabet giriş , ultrabet güncel girişultrabet , ultrabet giriş , ultrabet güncel girişultrabet , ultrabet giriş , ultrabet güncel girişultrabet , ultrabet giriş , ultrabet güncel girişking girişking güncelking güncel girişson-bahisson-bahis girişson-bahis güncel girişibizabetibizabet girişibizabet güncel girişenbetenbet girişenbet güncel girişroyalroyal girişroyal güncel girişbetmarinobetmarino girişbetmarino güncel girişbahiscasino girişbetpasgrandpashabet girişdarkbetkralbetkralbet girişjupiterbahisimajbetbetvolebetvole girişBahiscasinoBahiscasino GirişBahiscasino Güncel Girişvegabetbetvole girişjojobet güncel girişkralbetkralbet girişKulisbetonwinonwin girişbetturkeykralbetkralbetİkimisliYakabetgalabetgalabet girişkralbetkralbet girişonwincasibomjojobetjojobetjojobetbetturkeybetturkeybetlike girişbetlike girişbetlike giriştrendbetkulisbetbetciotipobettipobet giriştrendbettipobettipobet girişdinamobetdinamobetmeritcasinomeritcasinocasino apicasino apicasibomcasibom girişbetwinner girişmadridbetjojobetsekabetsekabetbetlikebetlikebetlikebetlikebetlikebetlikemadridbetmcgift giftcardmallmadridbetmadridbetmadridbetvaycasinovaycasino girişvaycasinovaycasino girişvaycasinovaycasino girişvaycasinovaycasino girişvaycasinovaycasino girişperabetperabet girişperabet güncel adresibetcupbetcup girişrestbetrestbet girişbetpasbetpasbetpasjojobetjojobet girişjojobetjojobet girişparmabetnorabahissekabet girişsekabetbetcio1king girişmarsbahisdizipalbetciobetcio girişkulisbetkulisbet girişholiganbetnesinecasinonesinecasino girişholiganbetholiganbet girişİkimisliİkimisli Girişİkimisli Güncel Girişroketbetroketbetikimisli girişjojobetjojobet girişjojobet güncel girişjojobetjojobet girişjojobet güncel girişjojobetjojobet girişbahiscasino girişbetlikebetlikebetlikejojobetjojobet girişjojobet güncel girişholiganbetholiganbet girişholiganbet güncel girişbetgaranti girişwbahis girişistanbul escortescort istanbulmecidiyeköy escortngsbahisngsbahis girişngsbahis güncel adresingsbahisngsbahis girişngsbahis güncel girişperabetperabet resmi adresiperabet girişperabetperabet girişperabet güncel giriştaraftarium24padişahbetromabetbetlikebetlike girişbetlike girişBetlikeBetlike girişsekabetsekabet girişkavbet giriş , kavbet güncelkavbet giriş , kavbet güncelbetsmovebetsmove girişbetsmove güncel girişkavbetkavbettophillbettophillbet giriştophillbet güncel girişsekabetsekabet girişsekabet girişsekabetrealbahisrealbahis girişdinamobetdinamobet girişdinamobet güncel girişbetzulabetzulamarsbahismarsbahisbetzulabetzulaselcuksportscanlı maç izlemaç izletaraftarium24patronsporpatron sporjupiterbahis7slots giriş7slotspusulabetpusulabet girişpusulabet güncel girişholiganbetholiganbet girişholiganbet güncel girişholiganbetholiganbet girişholiganbet güncel girişgrandpashabet girişbetebetbetebet girişbetebet güncel girişcasibomcasibom giriştaraftarium24timebettimebetjojobetjojobet girişjojobet güncel girişmarsbahismarsbahisstarzbet girişbetorder giriştambettambet giriştambet güncelcasinoroyalcasinoroyallinebet giriştambettambet giriştambet güncelvizebetvizebet girişCasibomCasibom GirişCasibom Giriş Güncelgrandpashabetciocio girişcio güncel girişmadridbetmadridbetromabetromabet girişnesinecasinonesinecasino girişenbetenbet girişbahiscasinobahiscasino girişbetciobetcio girişpadişahbetpadişahbet girişpadişahbetpadişahbet girişpadişahbetpadişahbet girişrekorbetrekorbet girişrekorbet güncel girişrekorbetrekorbet girişrekorbet güncel girişinter-bahisinter-bahis girişinter-bahis güncel girişimajbet girişimajbetpadişahbetpadişahbet güncelgizabetgizabet güncelUltrabetUltrabet girişHiltonbetHiltonbet girişcasibomcasibom girişelexbetelexbet girişelexbet güncel girişrestbetrestbet girişrestbet güncel girişimajbetimajbet girişimajbet güncel adresbetebetbetebet girişbetebet güncel adresigalabetgalabet girişgalabet güncel girişholiganbetholiganbet girişcashwin girişbetbey girişgrandbettinggrandbetting güncelBetcioBetcio girişBetcioBetcio girişBetcioBetcio girişdinamobet güncel girişpadişahbetpadişahbet girişpadişahbet güncel girişcasibomcasibomholiganbetholiganbet girişholiganbetholiganbet girişikimisliikimisli girişgrandpashabetgrandpashabet girişgrandpashabetgrandpashabet girişgrandpashabetgrandpashabet girişgrandpashabetgrandpashabet girişgrandpashabetgrandpashabet girişjojobetjojobetjojobetjojobetjojobetrestbetrestbet girişrestbet güncel girişextrabetextrabet girişbetofficerestbetdinamobetbetsalvador girişmarsbahissonbahis giriştempobet girişstarzbet girişbetasusvdcasinovdcasino girişvdcasinovdcasino girişgalabetgalabet girişultrabetbetzulakralbetkralbet giriştipobettipobet girişextrabetbahiscasino girişhiltonbetbetgit girişcasinoroyalkralbetkralbet girişmarsbahisbetpuan girişpiabellacasinojojobetjojobet girişbetvolebetvole girişesbet girişcasinolevant girişnesinecasino girişBetraBetra girişBetra güncel girişnesinecasinovevobahisvevobahis girişimajbetimajbet girişimajbet güncel girişpusulabetpusulabet girişpusulabet güncel girişmarsbahismarsbahis girişmarsbahis güncel girişvdcasinovdcasino girişvdcasino güncel girişcratosroyalbet girişpadişahbetpadişahbet girişpadişahbet güncelgoldenbahisgoldenbahis girişbetgarbetgar girişbetgar güncelGrandpashabetGrandpashabet instagramGrandpashabet güncel girişimajbetimajbet girişgrandpashabetgrandpashabet girişromabetromabet girişpadişahbetpadişahbet girişbahiscombahiscom girişQueenbetQueenbet girişEnbetEnbet girişMedusabahisMedusabahis girişBetmaniBetmani GirişBetmani Güncel GirişKulisbetKulisbet GirişKulisbet Güncel Girişbetebetbetebet girişbetebet güncel girişbetebetbetebet girişGrandpashabetCratosroyalbetgrandpashabetcratosroyalbetbetwoonPalacebetradissonbetBetwoonBetsalvadorcratosroyalbetSpincoPashagamingDedebetVerabetMaxwinSuperbetRoyalbetBetwildBahibomDamabetRamadabetBetasusPalazzobetBetsinSlotdayLeograndbetrealbahisrealbahis girişinterbahisinterbahis girişganobetganobet girişganobet güncel girişligobet girişsupertotobet girişbetasusbetpuanbetpuaninter-bahisinter-bahis girişinter-bahis güncel girişcapitolbetcasivalcasival girişroyalbetroyalbet girişkingroyalkingroyal girişcasinoroyal, casinoroyal girişholiganbetholiganbet girişholiganbetholiganbet girişkingroyal, kingroyal girişjojobet, jojobet girişrestbetrestbet girişrestbet güncel girişinterbahisinterbahis girişinterbahis güncel girişmilanobetmilanobet girişmilanobet güncel girişbetpasbetpas girişrestbetrestbet girişrestbet güncel girişbetixirGrandpashabetgGrandpashabetBetwoonbetzulaceltabetceltabetceltabetceltabet girişceltabet giriştaksimbetbelugabahisbelugabahis girişbelugabahis güncel girişbetebetbetebet girişbetebet güncel girişbetebetbetebet girişbetebet güncel girişbetebetbetebet girişbetebet güncel girişgorabetgorabet girişgorabet güncel girişpiabellacasinomatbetmatbet girişmatbet güncel girişromabetromabet girişromabet güncel girişpalacebetpalacebet girişpalacebet güncel girişgrandbettinggrandbettingbetexperbetofficebetoffice girişbetoffice güncel girişperabetperabet girişcasibombetebetperabetalobetalobet girişsahabetsahabet girişsahabetsahabet girişnakitbahisnakitbahis girişartemisbetartemisbet girişlimanbetlimabet girişjojobetjojobet girişonwinonwin girişonwinjojobetcasinoroyalbetebetbetebet girişimajbetimajbet girişbetmoonbetmoon girişultrabetimajbetimajbet girişimajbet güncellunabetvaycasinovaycasino girişvaycasino güncel girişlunabetlunabet girişlunabet güncel girişenbetenbet girişvaycasinonakitbahisbetsmovejojobetcasibombetciobetcio girişbetciobetcio girişvdcasinovdcasino girişroyalroyal girişroyal güncel girişimajbetimajbet girişimajbet güncel adresdinamobetdinamobet girişdinamobet güncel girişenbetenbet giriş