शिक्षण उद्देश्य:
- छात्र व्यंग्य विधा के स्वरूप और उसकी विशेषताओं को समझ सकें।
- छात्र समाज में व्याप्त “वास्तविक दुख” (अभाव) और “छद्म दुख” (आडंबर) के बीच के अंतर को पहचान सकें।
- छात्र व्यंग्य के माध्यम से लेखक द्वारा प्रस्तुत सामाजिक विडंबनाओं और मानवीय प्रवृत्तियों पर विचार कर सकें।
- छात्र पाठ में प्रयुक्त मुहावरों, कथनों और गहरे व्यंग्यात्मक अर्थों को समझ सकें।
Day 1: पाठ परिचय, लेखक परिचय और शुरुआत
- प्रवेश (5 मिनट): कक्षा में पूछें: “क्या आपने कभी किसी को यह कहते सुना है कि ‘मैं तो टैक्स के मारे मर रहा हूँ’? जबकि वो व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ और सम्पन्न हो। जो लोग सचमुच भूखे हैं, वे क्या कहते हैं?” छात्रों से विचार-विमर्श करें।
- पाठ और लेखक परिचय (10 मिनट): हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय दें। बताएं कि वे हिंदी साहित्य के शिखर व्यंग्यकार हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ (हँसते हैं रोते हैं, रानी नागफनी की कहानी, सदाचार का ताबीज, विकलांग श्रद्धा का दौर) बताएं और समझाएं कि व्यंग्य का उद्देश्य केवल हँसाना नहीं, बल्कि समाज की खामियों को उजागर करना है।
- सस्वर वाचन (5 मिनट): शिक्षक द्वारा पाठ का पहला भाग (पृष्ठ 42-43) पढ़ें।
- व्याख्या (20 मिनट):
- “चंदा माँगने आए थे” – चंदा माँगने वालों और देने वालों की पहचान (गंध से पहचानना) पर लेखक का कटाक्ष।
- टैक्स की बीमारी का व्यंग्य: “बीमारियाँ बहुत देखी हैं – निमोनिया, कालरा, कैंसर; जिनसे लोग मरते हैं। मगर यह टैक्स की कैसी बीमारी है जिससे वे मर रहे थे!” – टैक्स देने वाले लोग उसे बीमारी बताकर अपनी सम्पन्नता का रोना रोते हैं, जबकि असली बीमारी भूख है।
- “टैक्स की बीमारी की विशेषता यह है कि जिसे लग जाए वह कहता है – हाय, हम टैक्स से मर रहे हैं। और जिसे न लगे वह कहता है – हाय, हमें टैक्स की बीमारी ही नहीं लगती।” – यह बीमारी किसी को प्यारी लगती है। लेखक के मन में इच्छा होती है कि वे उसे यह बीमारी दे दें।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 1 (बीमारी शब्द को लेखक ने किन-किन संदर्भों में प्रयोग किया है?) और प्रश्न 2 (पाठ में दिया गया शोक समाचार “बड़ी प्रसन्नता की बात है…” से क्यों शुरू हुआ है?) लिखिए।
Day 2: बेईमानी की बीमारी और गांधीजी का प्रसंग
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पिछले दिन के प्रश्नों की जांच करें और टैक्स की बीमारी के व्यंग्य पर चर्चा करें।
- व्याख्या (25 मिनट):
- “मेरे पास एक आदमी आता था जो दूसरों की बेईमानी की बीमारी से मरा जाता था।” – वह आदमी गांधीजी के नाम पर चलने वाले प्रतिष्ठान में काम करता था।
- “गांधीजी के नाम पर चलने वाले किसी प्रतिष्ठान में काम करता था।” – वह आदर्शवादी था, इसलिए वहाँ हो रही बेईमानी उसे अच्छी नहीं लगती थी।
- लेखक का तर्क: “गांधीजी दुकान खोलने का आदेश तो मरते-मरते दे नहीं गए थे।” और “गांधीजी ने उसकी जिंदगी बरबाद की थी। गांधीजी विनोबा जैसों की जिंदगी बरबाद कर गए।”
- लेखक का व्यंग्य: आदर्शवादी लोगों को दूसरों की बेईमानी से दुख होता है, लेकिन बेईमानी करने वाले स्वस्थ और सम्पन्न रहते हैं।
- शिक्षण सहायता: कक्षा में चर्चा करें: “क्या आज के समय में नैतिकता और बेईमानी का यह अंतर सही है?”
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 3 (उसके दुख का वर्णन करता है। वह आदमी मुझसे क्यों मिलता था? और वह किस बीमारी से पीड़ित था?) का उत्तर लिखिए।
Day 3: दुखों का गणित – बिजली बिल, मकान, किताबें और मोनो मशीन
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): बेईमानी की बीमारी और आदर्शवाद के मुद्दे पर संक्षेप में बात करें।
- व्याख्या (25 मिनट): पाठ के अंतिम भाग की व्याख्या:
- लेखक का असली दुख: “मेरा दुख यह है कि मुझे बिजली का 40 रुपये का बिल जमा करना है और मेरे पास इतने रुपये नहीं हैं।”
- “एक बंधु का दुख है कि उसके 8 कमरों का मकान बनाते समय 6 कमरे ही बन पाए, अब पैसे की तंगी है।”
- “पुस्तक-विक्रेता का दुख: पिछले साल 50 हजार की किताबें बिकीं, इस साल सिर्फ 40 हजार की बिकीं।”
- “रोटरी मशीन वाले का दुख: अब मोनो मशीन नहीं आ पा रही है।”
- गहरा व्यंग्य (समस्या का सार): “एक जीवित रहने का संघर्ष है और एक संपन्नता का संघर्ष है। एक न्यूनतम जीवन-स्तर न कर पाने का दुख है, एक पर्याप्त संपन्नता न होने का दुख है।”
- लेखक का अंतिम निष्कर्ष: लेखक अपने 40 रुपये के दुख को भूलकर उन सबके “छद्म दुखों” में शामिल होने का दिखावा करता है (“मैं दुखी हो जाता हूँ…”) ताकि वे प्रसन्न हो जाएँ।
- भाषा के बारे में (10 मिनट): पाठ में प्रयुक्त मुहावरों की पहचान करें: “दुख से दुखी होना”, “मन मसोसकर रह जाना”, “दिमाग चकराने लगना”, “गाँठ बाँधना”।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 4 (तीसरे बंधु की रोटरी मशीन आ गई… अंततः मुझे लगता है कि अपने बिजली के बिल को भूलकर मुझे इन सबके दुख में दुखी हो जाना चाहिए।” आशय स्पष्ट कीजिए) लिखिए।
Day 4: भाषा शैली, कथन और अभ्यास
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पिछले दिन की चर्चा का सारांश।
- भाषा कार्य (25 मिनट): पाठ के “भाषा के बारे में” खंड का अभ्यास कराएं।
- व्यंग्य की भाषा: इस पाठ में परसाई जी ने सीधे कटाक्ष नहीं किया है, बल्कि तुलना, विरोधाभास और अतिशयोक्ति के माध्यम से हास्य उत्पन्न करते हुए गंभीर संदेश दिया है। (उदाहरण: टैक्स की बीमारी की तुलना निमोनिया से करना)।
- वाक्यों की संरचना: पाठ के सामान्य (वाच्यार्थ) और व्यंग्यात्मक (लक्ष्यार्थ) वाक्यों की पहचान करवाएं।
- पाठ से दिए गए प्रश्नों का अभ्यास: “इस पाठ से ऐसे अंश ढूँढिए जिनके सामान्य अर्थ और समझे जाने वाले वाक्य अर्थ में अंतर है।” (व्यंग्य के अंश)।
- चर्चा (10 मिनट): “क्या आपके अनुसार अपनी आर्थिक स्थिति छिपाकर टैक्स से मरने का दिखावा करना सही है? क्या इस तरह की प्रवृत्ति समाज के लिए हानिकारक है?”
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 5 और 6 लिखिए (टैक्स से मरने की बात की विडंबना क्या है? और अंतिम पंक्ति “मुझे अंततः किसी ओछी बीमारी से ही मरना होगा” का क्या आशय है?**)।
Day 5: प्रायोजना, सारांश और मूल्यांकन
- प्रायोजना कार्य (15 मिनट): पाठ में टैक्स का जिक्र है। छात्रों को सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) के शिक्षक के सहयोग से टैक्स क्या होता है, यह क्यों लगाया जाता है, और एक सामान्य व्यक्ति को कौन-कौन से टैक्स अदा करने पड़ते हैं, इस पर जानकारी इकट्ठा करने का कार्य दें। साथ ही, अपने आसपास प्रचलित लोकोक्तियों (कहावतों) का संकलन करने के लिए कहें।
- अभ्यास (15 मिनट): पाठ के सभी प्रश्नों का सामूहिक अभ्यास करें। विशेष रूप से “पाठ से आगे” वाले प्रश्नों पर ध्यान दें (जैसे: “अपने आस-पास व्याप्त ऐसी ही किसी एक समस्या पर साथियों से चर्चा कर प्राप्त विचारों को लिखिए”)।
- मूल्यांकन (10 मिनट):
- व्यंग्य विधा किसे कहते हैं?
- लेखक ने ‘टैक्स की बीमारी’ को किस रूप में प्रस्तुत किया है?
- “पर्याप्त संपन्नता न होने का दुख” किस ओर संकेत करता है?
- इन प्रश्नों के आधार पर एक लघु लिखित परीक्षण लें।
- गृहकार्य: कक्षा में हुई चर्चा के आधार पर “वास्तविक दुख बनाम आडंबर” विषय पर एक अनुच्छेद लिखकर लाएं।
(नोट: यह योजना दी गई पाठ्यपुस्तक की सामग्री और अभ्यास प्रश्नों पर आधारित है। छात्रों की समझ के अनुसार आप आवश्यक बदलाव कर सकते हैं।)

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
