शिक्षण उद्देश्य:
- छात्र समाज के वंचित और गरीब वर्ग की जीवन-संघर्ष की कहानी को समझ सकें।
- छात्र भोजन, जीविका (रोजी) और जमीन के महत्व के बीच के अंतर को समझ सकें।
- छात्र मातृभूमि/मिट्टी के प्रति लगाव और आत्मसम्मान की भावना विकसित कर सकें।
- छात्र पाठ में प्रयुक्त ग्रामीण शब्दों, मुहावरों और स्त्रीलिंग प्रत्ययों की पहचान कर सकें।
Day 1: पाठ परिचय, लेखक परिचय और माटीवाली की जीवनशैली
- प्रवेश (5 मिनट): कक्षा में एक गाँव/मोहल्ले की तस्वीर दिखाएं जिसमें कोई महिला कंधे पर मिट्टी का कंटर लादे हुए हो। पूछें: “मिट्टी कौन बेचता है? मिट्टी बेचकर जीवन कैसे चलता है?” विद्यार्थियों से चर्चा करें।
- पाठ और लेखक परिचय (10 मिनट): विद्यासागर नौटियाल का जीवन परिचय दें। बताएं कि वे छत्तीसगढ़ (अब छत्तीसगढ़/मध्य प्रदेश) के प्रसिद्ध साहित्यकार हैं, जिन्होंने ‘मोहन गाता जाएगा’ और ‘यमुना के बागी बेटे’ जैसी कृतियाँ लिखी हैं। उनकी कहानियाँ अक्सर वंचित और पीड़ित लोगों के जीवन को दर्शाती हैं।
- सस्वर वाचन (5 मिनट): शिक्षक द्वारा कहानी का पहला भाग पढ़ें।
- व्याख्या (20 मिनट):
- तप्पड़ मोहल्ले का परिचय: शहर के बाहर, झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोग। कंटर (कंटेनर) में मिट्टी भरकर लाना।
- माटीवाली की पहचान: शहर के घर-घर जाकर मिट्टी बेचना (चूल्हे-चौके लीपने के लिए)। गाँव से तीन किलोमीटर दूर आना।
- जीवन का संघर्ष: “मैं मेहनतकश मजदूर हूँ” – रोज सुबह निकलना, पूरा दिन मिट्टी खोदना, और रात होने से पहले घर पहुँचना। उसकी झोपड़ी किसी और की जमीन पर बनी है।
- गृहकार्य: पाठ से कठिन शब्दों (कंटर, माटी, तप्पड़, ठकुराइन, दामाद) के अर्थ लिखिए और प्रश्न 1 का उत्तर दीजिए: “माटीवाली के किना टिहरी शहर के कई घरों में चूल्हों तक का जलना क्यों मुश्किल हो जाता था?”
Day 2: अमीर और गरीब की दुनिया का टकराव
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पिछले दिन के गृहकार्य की जांच करें और माटीवाली की दिनचर्या का वर्णन पूछें।
- व्याख्या (25 मिनट):
- चाय और संवाद: माटीवाली ठकुराइन के घर में चाय पीते समय की बातचीत।
- पीतल के गिलास का महत्व: ठकुराइन अपने पुराने पीतल के गिलासों को संभालकर रखती हैं। वे बताती हैं कि बाजार में इनकी कीमत बहुत ज्यादा है, लेकिन उनके पति ने जीभ पर स्वाद रखने के बजाय मन मसोसकर पैसे बचाकर ये खरीदे थे।
- माटीवाली का विनम्र संवाद: “भूख तो अपने में एक साग होती है ठकुराइनजी। भूख मीठी कि भोजन मीठा?” (भूख लगने पर साग और चावल में कोई अंतर नहीं रहता)।
- माटीवाली का दुख: “मैं सोचती हूँ मेरा क्या होगा! मेरी तरफ देखने वाला तो कोई भी नहीं।” – उसका बुढ़ा पति घर पर बीमार है।
- भाव स्पष्ट कीजिए: ठकुराइन की अपनी साख (विरासत) के प्रति मोह और माटीवाली की रोजी-रोटी की चिंता में क्या फर्क है?
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 4 लिखिए: “घर की मालकिन ने पीतल के गिलासों को अभी तक संभालकर क्यों रखा था?”
Day 3: रोटी, बीमार पति और पुल का निर्माण (कहानी का क्लाइमेक्स)
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पिछली कक्षा में हुए संवाद का सारांश सुनाएं।
- व्याख्या (25 मिनट):
- पति के लिए रोटी: माटीवाली को कई घरों से रोटियाँ मिलती हैं, जिन्हें वह अपने बीमार पति के लिए ले जाती है। वह सोचती है कि आज उसे अच्छी कमाई हुई है, इसलिए वह प्याज खरीदेगी (ताकि पति को स्वाद मिले)।
- बुढ़े का भोजन: घर पहुँचकर पति को रोटियाँ देना, और पूछना “साग तो कुछ है नहीं अभी।” और पति का उत्तर – “भूख मीठी कि भोजन मीठा?”
- पुल (बाँध) बनने का समाचार: माटीवाली को पता चलता है कि सरकार ने पुल बनाने का फैसला किया है, जिसके लिए शहर में आसपास का इलाका खाली करना पड़ेगा।
- मुख्य संवाद (कहानी की आत्मा):
- “मुझे जमीन का कागज चाहिए, रोजी का नहीं।” (उसे पैसे नहीं, उसकी जमीन चाहिए, जहाँ वह अपना जीवन जी सके)।
- “बाँध बनने के बाद मैं खाऊँगी क्या साब?” (पुल बनने के बाद अगर जमीन नहीं रहेगी, तो वह किसानी कैसे करेगी? वह क्या खाएगी?)
- “गरीब आदमी का श्मशान नहीं उजड़ना चाहिए।” (गरीब का जीवन दांव पर लगा है, उसे बेघर न करें)।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 3 लिखिए: “माटीवाली का एक रोटी दिपा देना उसकी किस मनःस्थिति की ओर संकेत करता है?”
Day 4: भाषा अध्ययन (प्रत्यय) और मुहावरे
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): कहानी के अंतिम हिस्से को दोबारा पढ़ें और पुल की समस्या पर चर्चा करें।
- भाषा कार्य (25 मिनट): पाठ्यपुस्तक के “भाषा के बारे में” खंड का अभ्यास कराएं।
- स्त्रीलिंग प्रत्यय (‘ई’, ‘इन’, ‘आइन’): बोर्ड पर लिखें और उदाहरण दें:
- ‘ई’ प्रत्यय: लड़की, मालकिन (अपवाद), बुढ़िया
- ‘इन’ प्रत्यय: मालकिन, सेठान (सेठ+आन), युवती
- ‘आइन’ प्रत्यय: पंडिताइन, ब्राह्मणाइन
- छात्रों से इन प्रत्ययों से 5-5 नए शब्द बनवाएं।
- मुहावरे: पाठ से मुहावरे ढूँढ़ें और उनका अर्थ लिखें:
- “दिल गवाही नहीं देना” (मन न मानना)।
- “मन मसोसकर रह जाना” (दुखी होकर चुप हो जाना)।
- “कातर नज़रों से देखना” (डरकर देखना)।
- “चेहरा खिल उठना” (खुश हो जाना)।
- स्त्रीलिंग प्रत्यय (‘ई’, ‘इन’, ‘आइन’): बोर्ड पर लिखें और उदाहरण दें:
- अभ्यास (10 मिनट): “पाठ से” प्रश्न 5 और 6 (कहानी के अंत में लोग अपने घरों को छोड़कर क्यों जाने लगे थे?) का सामूहिक उत्तर दें।
- गृहकार्य: पाठ में आए मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग करें।
Day 5: अभ्यास, प्रायोजना कार्य और मूल्यांकन
- अभ्यास कार्य (20 मिनट): “पाठ से आगे” वाले प्रश्नों पर चर्चा और अभ्यास करें:
- प्रश्न 1 (क) और (ख): बाँध या सड़क बनने से स्थानीय लोगों को किस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है? विकास कार्यों के लाभ क्या हैं?
- प्रश्न 4: माटीवाली की तरह पेट भरने के लिए अपनी जगह नहीं छोड़ने वाले लोगों के लिए सरकार को क्या करना चाहिए?
- गतिविधि / प्रायोजना कार्य (15 मिनट):
- “माटी” (मिट्टी) से बने बर्तन और मूर्तियाँ बनाने वाले कारीगरों (कुम्हारों) के बारे में जानकारी इकट्ठा करें।
- छात्रों को अपने आस-पास के ऐसे व्यक्ति से साक्षात्कार करने को कहें जो कुम्हार हो या मिट्टी का काम करता हो। उन्हें पूछना है: कच्ची सामग्री कहाँ से आती है? बर्तन कैसे बनते हैं? उन्हें कौन सी समस्याएँ होती हैं?
- मूल्यांकन (10 मिनट): कहानी के केंद्रीय भाव (जमीन बनाम रोजी) और चरित्र-चित्रण (माटीवाली की आत्मसम्मान) पर आधारित एक छोटा लिखित परीक्षण लें।
- गृहकार्य: कक्षा में की गई चर्चा के आधार पर “गरीब आदमी का श्मशान नहीं उजड़ना चाहिए” का अर्थ लिखकर लाएं।
(नोट: यह योजना पाठ्यपुस्तक की सामग्री और उसके अभ्यास प्रश्नों पर आधारित है। कक्षा की गति और छात्रों की समझ के अनुसार आप इसमें बदलाव कर सकते हैं।)

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
