कक्षा 12 जीव विज्ञान – पुष्पी पादपों में लैंगिक प्रजनन
- लैंगिक प्रजनन पुष्पी पादपों में पुरुष और स्त्री युग्मकों के संलयन से नया जीव उत्पन्न होने की क्रिया है।
- पुष्प, लैंगिक प्रजनन का प्राथमिक अंग है जिसमें नर और मादा प्रजनन संरचनाएँ होती हैं।
2. पुष्प की संरचना
पुष्प में चार मुख्य चक्र (whorls) होते हैं:
A. बाह्य चक्र: पुष्पासन
- बाहरी आवरण
- सुरक्षात्मक भूमिका
B. द्वितीय चक्र: दलपुंज
- रंगीन पंखुड़ियाँ
- परागणकों को आकर्षित करती हैं
C. पुमंग: नर जननांग

रचना:
- पुंतंतु (Filament) – लंबा, पतला डंठल
- परागकोष (Anther) – द्विखंडी संरचना
- द्विथीकी (Dithecous) – प्रत्येक खंड में दो थीकी होते हैं
- चतुष्कोणीय (Tetragonal) – अनुप्रस्थ काट में चतुष्कोणीय दिखाई देता है
- 4 सूक्ष्मबीजाणुधानियाँ (Microsporangia) – छोरों पर स्थित होती हैं
परागकोष की दीवार की परतें:
- बह्यत्वचा (Epidermis) – सबसे बाहरी परत
- अंतस्थीसियम (Endothecium) – मध्य परत, स्फुटन में सहायक
- मध्य परत (Middle layers)
- टेपीटम (Tapetum) – आंतरिक परत, परागकणों का पोषण करती है
D. जायांग: मादा जननांग

रचना:
- वर्तिकाग्र (Stigma) – परागकण ग्रहण करने का स्थान
- वर्तिका (Style) – लंबी, पतली नलिका
- अंडाशय (Ovary) – स्फीत भाग, अंडाणु धारण करता है
अंडाशय में:
- अंडाणु (Ovule) – बीजाणुधानी
- गर्भकोश (Embryo sac) – स्त्री युग्मकोद्भिद
अंडाणु की रचना:
- डंठली (Funicle) – अंडाणु की डंठल
- हाइलम (Hilum) – डंठल का जुड़ाव बिंदु
- प्रावरणी (Integuments) – आवरण स्तर
- सूक्ष्मरंध्र (Micropyle) – छोटा छिद्र
- चैलेजा (Chalaza) – आधारीय भाग
- न्यूसेलस (Nucellus) – केन्द्रकीय ऊतक
3. सूक्ष्मबीजाणुजनन (Microsporogenesis)
परिभाषा:
परागकोष में पराग मातृ कोशिका (PMC) से अर्धसूत्री विभाजन द्वारा सूक्ष्मबीजाणु बनने की प्रक्रिया।

प्रक्रिया:
- बीजाणुजन ऊतक (Sporogenous tissue) की प्रत्येक कोशिका → पराग मातृ कोशिका (PMC)
- PMC → अर्धसूत्री विभाजन → 4 सूक्ष्मबीजाणु
- संरचना नामकरण → सूक्ष्मबीजाणु चतुष्क
- परिपक्वता पर → हजारों परागकण बनते हैं
- परागकोष के स्फुटन (Dehiscence) पर मुक्त होते हैं
परागकण की संरचना:
- बहिःस्तर (Exine) – बाहरी कठोर परत, स्पोरोपोलेनिन से बना
- अंतरस्तर (Intine) – आंतरिक नरम परत, सेल्यूलोज और पेक्टिन से बना
परिपक्व परागकण:
- 2 कोशिकाएँ:
- वनस्पति कोशिका (Vegetative cell) – बड़ी कोशिका
- जनन कोशिका (Generative cell) – छोटी कोशिका
4. गुरुबीजाणुजनन (Megasporogenesis)
परिभाषा:
गुरुबीजाणु मातृ कोशिका (MMC) से गुरुबीजाणु बनने की प्रक्रिया।
प्रक्रिया:
- सूक्ष्मरंध्र क्षेत्र में → गुरुबीजाणु मातृ कोशिका (MMC)
- MMC (2n) → अर्धसूत्री विभाजन → 4 गुरुबीजाणु (n)
- 3 गुरुबीजाणु → नष्ट हो जाते हैं
- 1 गुरुबीजाणु → क्रियाशील रहता है
- क्रियाशील गुरुबीजाणु → 3 बार सूत्री विभाजन → 8 केन्द्रकीय गर्भकोश
गर्भकोश की रचना:
7 कोशिकाएँ, 8 केन्द्रक:
- माइक्रोपाइलर सिरा:
- 1 अंड कोशिका (Egg cell)
- 2 सहायक कोशिकाएँ (Synergids)
- मध्य क्षेत्र:
- 2 ध्रुवीय केन्द्रक (Polar nuclei)
- चैलेजल सिरा:
- 3 प्रतिपादक कोशिकाएँ (Antipodals)
5. परागण (Pollination)
परिभाषा:
परागकोष से परागकणों का वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण।
परागण के प्रकार:
A. स्वपरागण (Autogamy)
- परिभाषा: एक ही पुष्प में परागण
- शर्तें:
- बाइसेक्सुअल पुष्प
- समकालिक परिपक्वता
- परागकोष और वर्तिकाग्र का निकट स्थित होना
B. समपुष्प परागण (Geitonogamy)
- परिभाषा: एक ही पौधे के भिन्न पुष्पों में परागण
- उदाहरण: मक्का
C. विपरागण (Xenogamy)
- परिभाषा: विभिन्न पौधों के पुष्पों के बीच परागण
- लाभ: आनुवंशिक विविधता बढ़ती है
परागण के माध्यम:
अजैविक कारक:
- वायु (Anemophily) – उदा.: घास, मक्का
- जल (Hydrophily) – उदा.: वैलिसनेरिया
जैविक कारक:
- कीट (Entomophily) – उदा.: गुलाब, सूरजमुखी
- पक्षी (Ornithophily) – उदा.: बूटिया
- चमगादड़ (Chiropterophily) – उदा.: कैक्टस
- स्तनधारी (Zoophily) – उदा.: मक्की फल
6. निषेचन (Fertilization)
द्वि-निषेचन (Double Fertilization)
प्रक्रिया:
- परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होता है
- पराग नलिका बनती है, वर्तिका से होकर सूक्ष्मरंध्र तक पहुँचती है
- एक सहायक कोशिका में प्रवेश करती है
- दो पुरुष युग्मक मुक्त होते हैं
दो प्रकार के संलयन:
A. युग्मक संलयन (Syngamy):
- एक पुरुष युग्मक + अंड कोशिका → युग्मनज (Zygote)
- युग्मनज → द्विगुणित (2n)
B. त्रिसंलयन (Triple Fusion):
- दूसरा पुरुष युग्मक + 2 ध्रुवीय केन्द्रक → प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (PEN)
- PEN → त्रिगुणित (3n)
7. निषेचनोत्तर परिवर्तन
A. भ्रूण विकास
- युग्मनज → माइटोसिस विभाजन
- अधोवर्ती कोशिका (Suspensor cell) और भ्रूण कोशिका
- ग्लोबुलर अवस्था → हृदयाकार अवस्था → परिपक्व भ्रूण
परिपक्व भ्रूण में: The text above was truncated for length. Here is the continuation:
परिपक्व भ्रूण में:
- मूलांकुर (Radicle) – मूल बनता है
- अंकुर (Plumule) – प्ररोह बनता है
- बीजपत्र (Cotyledons) – पोषक भंडारण
B. भ्रूणपोष (Endosperm) विकास

- प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (3n) → बार-बार विभाजन
- भ्रूणपोष ऊतक → बनता है
- भ्रूण का पोषण करता है
भ्रूणपोष के प्रकार:
- परम न्यूक्लीय भ्रूणपोष – कोशिका विभाजन बिना कोशिका भित्ति निर्माण
- कोशिकीय भ्रूणपोष – हर विभाजन के साथ कोशिका भित्ति निर्माण
- हेलोबियल भ्रूणपोष – दोनों प्रकारों का मिश्रण
C. बीज और फल निर्माण
बीज:
- परिपक्व अंडाणु → बीज
- बीजावरण (Seed coat) – अंडाणु अखंडों से बनता है
- भ्रूण + भ्रूणपोष → बीज के अंदर
फल:
- परिपक्व अंडाशय → फल
- भित्तिमय फलभित्ति (Pericarp) – अंडाशय भित्ति से बनता है
फल के प्रकार:
- सत्य फल – केवल अंडाशय से विकसित, उदा.: आम, टमाटर
- असत्य फल – पुष्प के अन्य भागों से विकसित, उदा.: सेब, आड़ू
9. महत्वपूर्ण शब्दावली
| हिंदी | अंग्रेज़ी | परिभाषा |
|---|---|---|
| परागण | Pollination | परागकणों का वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण |
| निषेचन | Fertilization | युग्मकों का संलयन |
| सूक्ष्मबीजाणुजनन | Microsporogenesis | परागकणों का निर्माण |
| गुरुबीजाणुजनन | Megasporogenesis | गर्भकोश का निर्माण |
| द्वि-निषेचन | Double Fertilization | दो प्रकार के संलयन |
| युग्मक संलयन | Syngamy | पुरुष युग्मक + अंड कोशिका |
| त्रिसंलयन | Triple Fusion | पुरुष युग्मक + ध्रुवीय केन्द्रक |
| भ्रूणपोष | Endosperm | पोषक ऊतक |
| बीजावरण | Seed coat | बीज का बाह्य आवरण |
10. महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर
Q1. द्वि-निषेचन क्या है? संक्षेप में समझाइए।
उत्तर: द्वि-निषेचन आवृतबीजी पादपों में होने वाली एक विशिष्ट प्रक्रिया है जिसमें दो प्रकार के संलयन होते हैं:
- युग्मक संलयन (Syngamy): एक पुरुष युग्मक अंड कोशिका से मिलकर द्विगुणित युग्मनज बनाता है।
- त्रिसंलयन (Triple Fusion): दूसरा पुरुष युग्मक दो ध्रुवीय केन्द्रकों से मिलकर त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक बनाता है।
Q2. गुरुबीजाणुजनन और सूक्ष्मबीजाणुजनन में अंतर बताइए।
उत्तर:
| सूक्ष्मबीजाणुजनन | गुरुबीजाणुजनन |
|---|---|
| परागकोष में होता है | अंडाणु में होता है |
| पराग मातृ कोशिका से शुरू | गुरुबीजाणु मातृ कोशिका से शुरू |
| 4 क्रियाशील सूक्ष्मबीजाणु | 1 क्रियाशील गुरुबीजाणु |
| परागकण बनते हैं | गर्भकोश बनता है |
| नर युग्मकोद्भिद | स्त्री युग्मकोद्भिद |
11. प्रयोग और व्यावहारिक
प्रयोग 1: परागकोष की अस्थायी स्लाइड बनाना
सामग्री:
- पुष्प की कली
- सुई
- स्लाइड और कवर स्लिप
- सैफ्रेनिन या आयोडीन
विधि:
- पुष्प से परागकोष निकालें
- स्लाइड पर रखें
- स्टेन लगाएँ
- कवर स्लिप लगाएँ
- माइक्रोस्कोप में देखें
प्रयोग 2: अंडाणु का अध्ययन
सामग्री:
- अंडाशय
- ब्लेड
- माइक्रोस्कोप
विधि:
- अंडाशय का अनुप्रस्थ काट लें
- स्लाइड पर रखें
- अंडाणु की संरचना देखें
12. NCERT से महत्वपूर्ण तथ्य
- परागकण दीर्घायु: कुछ परागकण सैकड़ों वर्ष तक जीवित रह सकते हैं
- अंडाणु प्रकार: एनाट्रोपस, हेमिएनाट्रोपस, कैम्पाइलोट्रोपस
- भ्रूणपोष प्रकार: तीन प्रकार के होते हैं
- बीज प्रकार: एंडोस्पर्मिक और नॉन-एंडोस्पर्मिक
13. टिप्पणियाँ और अध्ययन सुझाव
- आरेख महत्वपूर्ण: सभी आरेख अच्छी तरह से याद करें
- प्रक्रिया क्रम: सभी प्रक्रियाओं का क्रम समझें
- शब्दावली: सभी शब्दों के हिंदी और अंग्रेज़ी नाम याद रखें
- NCERT पढ़ें: NCERT के सभी उदाहरण और अभ्यास प्रश्न हल करें
नोट: ये नोट्स CBSE कक्षा 12 जीव विज्ञान पाठ्यक्रम 2026-27 के अनुसार तैयार किए गए हैं। सभी जानकारी NCERT पाठ्यपुस्तक और CBSE पाठ्यक्रम के अनुरूप है।
तैयारी टिप्स:
- प्रतिदिन इस अध्याय का 30 मिनट अध्ययन करें
- सभी आरेख स्वयं बनाने का अभ्यास करें
- महत्वपूर्ण तथ्यों का चार्ट बनाएँ
- नियमित रूप से पिछले वर्ष के प्रश्न पत्र हल करें

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।

