मिठाइयों का सम्मेलन – कक्षा 4 हिंदी (Mithaiyon Ka Sammelan Class 4 Hindi)
पाठ का सारांश
यह एक रोचक और कल्पनाशील पाठ है, जिसमें मिठाइयाँ स्वयं एक सम्मेलन (बैठक) करती हैं। छगनलाल हलवाई की दुकान बंद होने पर सभी मिठाइयाँ – लड्डू, बर्फी, जलेबी, रसगुल्ला, गुलाबजामुन, पेड़ा, मैसूरपाक, सोनपापड़ी, रबड़ी, कलाकंद, काजूकतली, शक्करपारा, बालूशाही, गुझिया, रसमलाई – एक सम्मेलन करती हैं। वे इस बात पर चर्चा करती हैं कि डॉक्टर लोगों को मिठाई खाने से क्यों रोक रहे हैं। अंत में लड्डू दादा (अध्यक्ष) बताते हैं कि “जहाँ अति होती है, वहाँ क्षति होती है” – अधिक मिठाई खाने से शरीर में शक्कर की मात्रा बढ़ती है, इसलिए नियंत्रित मात्रा में मिठाई खानी चाहिए, नियमित शारीरिक श्रम करना चाहिए और संतुलित आहार लेना चाहिए। यह पाठ बच्चों को संतुलित भोजन, स्वास्थ्य, नियंत्रण और ‘अति सर्वत्र वर्जयेत्’ (अति कहीं भी अच्छी नहीं) का महत्व समझाता है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- पाठ को सही उच्चारण, भाव और हास्य के साथ पढ़ पाएँगे
- “अति” (अधिकता) के नुकसान और नियंत्रण के महत्व को समझ पाएँगे
- विभिन्न मिठाइयों के नाम पहचान पाएँगे
- एकवचन-बहुवचन (मिठाई-मिठाइयाँ) का सही प्रयोग कर पाएँगे
- मुहावरों (“मन में लड्डू फूटना”, “अंगूर खट्टे हैं”) का अर्थ समझकर प्रयोग कर पाएँगे
- दो शब्दों से बनी मिठाइयों (रसमलाई, गुलाबजामुन, काजूकतली, सोनपापड़ी, आदि) का निर्माण समझ पाएँगे
- भारत के विभिन्न प्रदेशों की मिठाइयों के बारे में जान पाएँगे
- स्वास्थ्य और संतुलित आहार पर अपने विचार व्यक्त कर पाएँगे
- रचनात्मक लेखन (साग-भाजियों का संवाद, स्वास्थ्य पर निबंध) कर पाएँगे
- चटपटी चाट बनाने की विधि समझ पाएँगे (व्यावहारिक गतिविधि)
दिन 1 – पाठ का परिचय एवं वाचन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “आपको कौन-सी मिठाई सबसे अधिक पसंद है और क्यों?”
- प्रश्न: “आपके घर में मिठाई कब-कब बनाई और बाँटी जाती है?” (त्योहार, खुशी, मेहमान, शादी)
- प्रश्न: “क्या आपको पता है कि अधिक मिठाई खाने से क्या होता है?” (दाँत खराब, मोटापा, शक्कर बढ़ना, बीमारी)
- प्रश्न: “अगर मिठाइयाँ आपस में बात करें, तो वे क्या कहेंगी?”
- पृष्ठ 129 का चित्र दिखाएँ – मिठाइयों की दुकान, बंद दुकान में सम्मेलन।
- परिचय: “आज हम एक बहुत मज़ेदार पाठ पढ़ेंगे – ‘मिठाइयों का सम्मेलन’ – जिसमें मिठाइयाँ अपनी एक बैठक करती हैं और अपने भविष्य पर चर्चा करती हैं!”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पाठ का सस्वर वाचन – शिक्षक पृष्ठ 129-130 को विभिन्न आवाज़ों में (लड्डू दादा – गंभीर, जलेबी – तेज़, रसगुल्ला – धीमा) पढ़कर सुनाएँ।
- सामूहिक वाचन – विद्यार्थी बारी-बारी से पैराग्राफ और संवाद पढ़ें।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- सम्मेलन = बैठक/सभा (Conference/Meeting)
- हलवाई = मिठाई बनाने वाला (Confectioner/Sweet-maker)
- श्रोता = सुनने वाले (Audience)
- अति = बहुत अधिक (Excess)
- क्षति = नुकसान (Loss/Damage)
- उपेक्षा = अवहेलना/ध्यान न देना (Neglect)
- प्रथा = परंपरा/रिवाज (Tradition)
- नियंत्रण = नियंत्रण/संयम (Control)
- अध्यक्ष = सभापति (Chairperson)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “मिठाइयों का सम्मेलन किसने बुलाया?” (लड्डू दादा – अध्यक्ष)
- गृहकार्य: पाठ को एक बार और पढ़ें और मिठाइयों के नाम (लड्डू, जलेबी, रसगुल्ला, आदि) याद करें।
दिन 2 – पाठ की गहन समझ एवं चर्चा
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – पाठ का सामूहिक वाचन।
- “सम्मेलन में कौन-कौन सी मिठाइयाँ थीं?” – विद्यार्थी नाम बताएँ।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ‘बातचीत के लिए’ प्रश्न (पृष्ठ 131):
- “आपको कौन-सी मिठाई सबसे अधिक पसंद है और क्यों?” (अपनी पसंद बताएँ – जलेबी, रसगुल्ला, लड्डू, आदि)
- “आपके घर में मिठाई कब-कब बनाई और बाँटी जाती है?” (त्योहार, शादी, जन्मदिन, मेहमान, खुशी)
- “घर से विद्यालय तक जाते समय आपको किन-किन वस्तुओं की दुकानें मिलती हैं?” (सब्जी, किराना, कपड़े, मिठाई, स्टेशनरी)
- “अगर आप अपनी कक्षा में बालसभा का आयोजन करते तो किन-किन बातों पर चर्चा करते?” (पढ़ाई, खेल, स्वच्छता, त्योहार, भोजन)
- ‘पाठ के भीतर’ प्रश्न (पृष्ठ 131-132):
- (क) “रसगुल्ला भाई के अनुसार मिठाइयों की उपेक्षा का क्या कारण है?” – उनकी अति मिठास (अधिक शक्कर) ही उनकी उपेक्षा का कारण है।
- (ख) “लड्डू दादा ने क्या-क्या सुझाव दिए?” – मिठाइयों में शक्कर की मात्रा कम करनी चाहिए; लोगों को नियंत्रित मात्रा में मिठाई खानी चाहिए; शारीरिक श्रम करना चाहिए और स्वस्थ रहना चाहिए।
- (ग) “गुलाबजामुन ने ऐसा क्यों कहा – ‘फिर हमें मिठाई कौन कहेगा?'” – क्योंकि अगर शक्कर कम हो जाएगी तो उनका स्वाद बदल जाएगा और लोग उन्हें मिठाई कहना बंद कर देंगे।
- (घ) “इस पाठ में जीभ पर नियंत्रण रखने की बात क्यों कही गई है?” – क्योंकि अधिक मिठाई खाने से स्वास्थ्य खराब होता है, इसलिए अपनी जीभ (खाने की इच्छा) पर नियंत्रण रखना चाहिए।
- मिठाइयों को नाम दें (पृष्ठ 132):
- विद्यार्थी मिठाइयों को अपनी पसंद के नाम दें और चित्र बनाएँ:
- गुलाबजामुन – “गुलाबजामुन मामा”
- काजूकतली – “कतली बहन”
- गुझिया – “गुझिया दीदी”
- मैसूरपाक – “मैसूर भाई”
- (शिक्षक बच्चों को चित्र बनाने और रंग भरने को प्रोत्साहित करें)
- विद्यार्थी मिठाइयों को अपनी पसंद के नाम दें और चित्र बनाएँ:
समापन (5 मिनट)
- “मिठाई खाना चाहिए या नहीं?” (हाँ, पर सीमित मात्रा में)
- गृहकार्य: ‘हमारी मिठास’ (पृष्ठ 133) – भारत के विभिन्न प्रदेशों में बनाई जाने वाली मिठाइयों के बारे में पता करें और लिखें।
दिन 3 – अभ्यास एवं भाषा कौशल (व्याकरण)
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पाठ का सामूहिक वाचन (विभिन्न आवाज़ों में)।
- पिछले दिन के गृहकार्य (प्रदेशों की मिठाइयाँ) साझा करें:
- पंजाब – पिन्नी, गुड़ वाला गजक, फिरनी
- बंगाल – रसगुल्ला, संदेश, मिष्टी दोई, चमचम
- गुजरात – बासुंदी, मोहनथाल, घेवर
- राजस्थान – गुलाबजामुन, मावा कचौरी, बालूशाही
- महाराष्ट्र – पुरण पोळी, श्रीखंड, मोदक
- केरल – पायसम, अडा प्रधमन, उन्नियप्पम
- उत्तर प्रदेश – पेड़ा, इमरती, मलाई गिलौरी
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पढ़िए, समझिए और लिखिए (पृष्ठ 133):
- विद्यार्थी रिक्त स्थान भरें (शिक्षक मार्गदर्शन करें):
- (क) “मिठाई खाने से खुशी आती है, पर अधिक खाने से हानि होती है।”
- (ख) “डॉक्टर मीठा खाने से मना करते हैं क्योंकि इससे शक्कर बढ़ती है।”
- (ग) “लड्डू दादा ने नियंत्रित मात्रा में मिठाई खाने की सलाह दी।”
- विद्यार्थी रिक्त स्थान भरें (शिक्षक मार्गदर्शन करें):
- तालिका पूर्ति (पृष्ठ 134):
- विद्यार्थी अध्यापक/अभिभावक की सहायता से तालिका पूरी करें:मिठाईअनाजफल/फूलसूखे मेवेदलहनतिलहनसाग-भाजीबर्फीगेहूँ/चावलनारियल/केसरकाजू/बादाम/पिस्ताचना/मूंगतिललौकी/कद्दूरसगुल्ला—————— (शिक्षक बताएँ)गुलाबजामुनखोया/मावा—————मोदकचावलनारियल————
- मुहावरे (पृष्ठ 134):
- (क) अंगूर खट्टे हैं – जब मनचाही चीज़ न मिले तो उसकी बुराई करना
- वाक्य: “राम को पुरस्कार नहीं मिला, तो उसने कहा – अंगूर खट्टे हैं।”
- (ख) मन में लड्डू फूटना – बहुत खुश होना
- वाक्य: “जब ज्योति को लाल किला जाने का अवसर मिला, तो उसके मन में लड्डू फूटने लगे।”
- (ग) मुँह में पानी आना – खाने की इच्छा होना
- वाक्य: “जलेबी देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया।”
- (घ) मीठी-मीठी बातें करना – चापलूसी या प्यार भरी बातें करना
- वाक्य: “लड्डू दादा ने सबको मीठी-मीठी बातें कहकर सम्मेलन समाप्त किया।”
- (क) अंगूर खट्टे हैं – जब मनचाही चीज़ न मिले तो उसकी बुराई करना
- बहुवचन (पृष्ठ 135):
- मिठाई → मिठाइयाँ
- जलेबी → जलेबियाँ
- रसगुल्ला → रसगुल्ले (या रसगुल्ले? रसगुल्ला के बहुवचन ‘रसगुल्ले’ होते हैं)
- इमरती → इमरतियाँ
- पेड़ा → पेड़े
- दो शब्दों से बनी मिठाइयाँ (पृष्ठ 135):
- (क) “रस” + “मलाई” = रसमलाई
- (ख) “गुलाब” + “जामुन” = गुलाबजामुन
- (ग) “शाही” + “टुकड़ा” = शाही टुकड़ा (पाठ में ‘बालूशाही’ भी है)
- (घ) “मोहन” + “थाल” = मोहनथाल
- (ङ) “कद” + “पेठा” = कद्दू पेठा (या ‘कद’ + ‘पेठा’ = कदपेठा)
- (च) “काजू” + “कतली” = काजूकतली
- (छ) “पापड़ी” + “मीठी” = पापड़ी (पाठ में ‘सोनपापड़ी’ – सोन + पापड़ी)
- (ज) “अंगूरी” + “जामुन” = अंगूरी गुलाबजामुन? (शिक्षक मार्गदर्शन करें)
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के अभ्यास कार्यों की जाँच।
- गृहकार्य: ‘साग-भाजियों का सम्मेलन’ (पृष्ठ 136) – आलू, बैंगन, टमाटर, प्याज, आदि के बीच संवाद पूरा करें।
दिन 4 – रचनात्मक लेखन, स्वास्थ्य एवं व्यावहारिक गतिविधि
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (साग-भाजियों का संवाद) साझा करें – 3-4 विद्यार्थी पढ़ें।
- पाठ का संक्षिप्त पुनर्वाचन।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- साग-भाजियों का संवाद (पृष्ठ 136) – विद्यार्थियों के उत्तर:
- टमाटर – “मैं लाल और रसीला हूँ। मेरे बिना सब्जी अधूरी है।”
- प्याज – “मैं हर सब्जी में स्वाद बढ़ाता हूँ। मुझे कोई नहीं भूल सकता।”
- मिर्च – “मैं तीखापन देती हूँ। मेरे बिना खाना बेस्वाद है।”
- भिंडी – “मैं पतली-लंबी हूँ, पर मुझसे बना व्यंजन सबको पसंद है।”
- गोभी – “मैं गोल-गोल हूँ, पर मुझमें पोषण भरपूर है।”
- करेला – “मैं कड़वी हूँ, पर मुझे खाने से स्वास्थ्य सुधरता है।”
- पालक – “मैं हरी-हरी हूँ, मुझमें लोहा (आयरन) है। मुझे खाने से खून बढ़ता है।”
- लौकी – “मैं हल्की-पतली हूँ, पर मुझसे बनी सब्जी बहुत पौष्टिक है।”
- ‘हम और हमारा स्वास्थ्य’ (पृष्ठ 137):
- (क) “स्वस्थ रहने के लिए आप क्या-क्या करते हैं? पाँच वाक्य लिखिए।”
- उदाहरण: “मैं रोज़ाना सुबह जल्दी उठता हूँ। मैं नियमित व्यायाम/खेल करता हूँ। मैं संतुलित और पौष्टिक भोजन खाता हूँ। मैं ताजे फल और सब्जियाँ खाता हूँ। मैं सीमित मात्रा में मिठाई खाता हूँ।”
- (ख) “‘जहाँ अति होती है, वहाँ क्षति होती है’ – अपने अनुभव साझा करें।” – बच्चे अनुभव साझा करें (ज्यादा मिठाई खाने से पेट खराब होना, ज्यादा खेलने से थकान, आदि)।
- (क) “स्वस्थ रहने के लिए आप क्या-क्या करते हैं? पाँच वाक्य लिखिए।”
- भूल-भुलैया (पृष्ठ 137):
- विद्यार्थी जलेबी भूल-भुलैया से बाहर निकलने में सहायता करें (चित्र में रास्ता खोजें)।
- चटपटी चाट बनाना (पृष्ठ 138 – व्यावहारिक गतिविधि):
- शिक्षक सामग्री दिखाएँ और विधि समझाएँ:
- सामग्री: अंकुरित चने, मूँग, प्याज, टमाटर, खीरा, उबले आलू, हरी मिर्च, हरा धनिया, काला नमक, चाट मसाला, नींबू, भुना जीरा पाउडर
- विधि: सबको मिलाकर चाट तैयार करें।
- चर्चा: “यह चाट स्वास्थ्यवर्धक है क्योंकि इसमें ताजी सब्जियाँ और अंकुरित अनाज हैं – यह पौष्टिक है, मिठाई की तुलना में बेहतर है।”
- (यदि संभव हो तो कक्षा में बनाकर चखाएँ)
- शिक्षक सामग्री दिखाएँ और विधि समझाएँ:
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के संवाद और स्वास्थ्य-संबंधी विचारों की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: “मिठाई खाने के लाभ और हानि” – 5-6 वाक्य लिखें।
दिन 5 – पुनरावृत्ति, अतिरिक्त पठन एवं मूल्यांकन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पाठ का सामूहिक वाचन (विभिन्न आवाज़ों में)।
- पिछले दिन के गृहकार्य (मिठाई – लाभ/हानि) साझा करें – 3-4 विद्यार्थी पढ़ें।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ‘जलेबी’ कविता (पृष्ठ 139 – अतिरिक्त पठन):
- शिक्षक ‘जलेबी’ कविता पढ़कर सुनाएँ।
- विद्यार्थी मिलकर कविता पढ़ें:
- “गोल-गोल जलेबी रानी, देख के मूँह में आता पानी…”
- चर्चा: “जलेबी की कौन-सी विशेषताएँ कविता में बताई गई हैं?” (गोल, पीली, मीठी, रसीली, कुरकुरी)
- ‘सुन, इमली के दाने सुन!’ (पृष्ठ 140 – अतिरिक्त पठन):
- शिक्षक यह कविता भी पढ़कर सुनाएँ (यह वैकल्पिक है)।
- ‘ठहाके’ (पृष्ठ 141 – अतिरिक्त पठन):
- विद्यार्थी चुटकुले पढ़ें और हँसें:
- बिमला – मीता, तुम आकाश के तारे गिन सकती हो? मीता – अभी तो अँधेरा है, दिन की रोशनी में गिनकर बता दूँगी।
- संदीप – प्रमोद, तुम चींटियों के पीछे क्यों जा रहे हो? प्रमोद – यह देखने के लिए कि माँ ने मिठाई कहाँ छिपाकर रखी है।
- विद्यार्थी चुटकुले पढ़ें और हँसें:
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- मिठाइयों के सम्मेलन का अध्यक्ष कौन था? (लड्डू दादा)
- लोगों को मिठाई क्यों नहीं खानी चाहिए? (अधिक शक्कर से स्वास्थ्य खराब होता है)
- लड्डू दादा ने क्या सुझाव दिया? (कम शक्कर, नियंत्रित मात्रा, शारीरिक श्रम)
- “जहाँ अति होती है, वहाँ क्षति होती है” – किसने कहा? (रबड़ी जी ने)
- ‘मन में लड्डू फूटना’ मुहावरे का अर्थ क्या है? (बहुत खुश होना)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) ‘मिठाइयों का सम्मेलन’ पाठ में मिठाइयों ने क्या चर्चा की?
- (ख) लड्डू दादा के कोई दो सुझाव लिखिए।
- (ग) ‘मन में लड्डू फूटना’ मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
- (घ) नीचे दिए गए शब्दों के बहुवचन लिखिए:
- मिठाई → ________ (मिठाइयाँ)
- जलेबी → ________ (जलेबियाँ)
- रसगुल्ला → ________ (रसगुल्ले)
- (ङ) दो शब्दों से बनी दो मिठाइयों के नाम लिखिए। (रसमलाई, गुलाबजामुन, काजूकतली, सोनपापड़ी – कोई दो)
- समूह चर्चा:
- “मिठाई हमेशा खराब होती है?” (नहीं – सीमित मात्रा में खाने से अच्छी है)
- “हमें किन चीज़ों में ‘अति’ से बचना चाहिए?” (खाना, खेलना, टीवी/मोबाइल, पढ़ाई, आदि)
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “‘मिठाइयों का सम्मेलन’ पाठ हमें सिखाता है कि ‘जहाँ अति होती है, वहाँ क्षति होती है’। मिठाई अच्छी है, पर अधिक मिठाई स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। हमें शक्कर की मात्रा को नियंत्रित करना चाहिए, संतुलित आहार लेना चाहिए और शारीरिक श्रम करना चाहिए। जीवन के हर पहलू में संयम (moderation) बहुत ज़रूरी है। मीठा खाना चाहिए, पर सीमित मात्रा में – तभी हम स्वस्थ और प्रसन्न रह सकते हैं।”
- अगले पाठ (अतिरिक्त पठन) ‘कविता का कमाल’ का संक्षिप्त परिचय – “अब हम एक ऐसी कहानी पढ़ेंगे जिसमें एक गरीब लड़के की कविता राजा का खजाना बचा लेती है!”
शिक्षण सहायक सामग्री
- विभिन्न मिठाइयों के चित्र/वास्तविक नमूने (लड्डू, जलेबी, रसगुल्ला, गुलाबजामुन, बर्फी, आदि)
- पाठ का चार्ट (मिठाइयों के पात्र और उनके संवाद)
- शब्दार्थ कार्ड (सम्मेलन, अति, क्षति, उपेक्षा, नियंत्रण, अध्यक्ष)
- मुहावरा कार्ड (मन में लड्डू फूटना, अंगूर खट्टे हैं, मुँह में पानी आना)
- एकवचन-बहुवचन कार्ड
- भारत के मानचित्र पर विभिन्न प्रदेशों की मिठाइयाँ दिखाने के लिए
- चटपटी चाट बनाने की सामग्री (यदि व्यावहारिक गतिविधि कर रहे हैं)
- रंग, कागज़, पेंसिल
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | पाठ का सस्वर, भावपूर्ण एवं पात्र-निर्वहन सहित वाचन | अवलोकन/मौखिक प्रस्तुति |
| 2 | पाठ की समझ (अति, संयम, स्वास्थ्य, मिठाइयों की चर्चा) | मौखिक/लिखित प्रश्न |
| 3 | मुहावरों का अर्थ एवं वाक्य प्रयोग | लिखित अभ्यास/मौखिक |
| 4 | एकवचन-बहुवचन, दो-शब्दीय मिठाइयाँ | लिखित अभ्यास |
| 5 | संतुलित आहार एवं स्वास्थ्य की समझ | रचनात्मक लेखन/समूह चर्चा |
| 6 | रचनात्मक अभिव्यक्ति (साग-भाजी संवाद, चित्रकला) | लिखित/कला कार्य |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘मिठाई’, ‘लड्डू’, ‘जलेबी’, ‘रसगुल्ला’ को क्या कहते हैं। “अति” की अवधारणा को बच्चों के जीवन से जोड़ें – अधिक मिठाई, अधिक खेलना (थकान), अधिक टीवी (आँखें), अधिक पढ़ना (तनाव) – सभी में संयम आवश्यक है। स्वास्थ्य पर ज़ोर दें – बच्चों को बताएँ कि मिठाई त्योहारों और खुशी में खाई जा सकती है, पर रोज़ाना और अधिक मात्रा में नहीं। व्यावहारिक गतिविधि (चटपटी चाट) बच्चों को स्वास्थ्यवर्धक भोजन के प्रति आकर्षित करेगी और उन्हें पौष्टिक खाने की आदत डालने में सहायक होगी। साग-भाजियों का संवाद बच्चों की रचनात्मकता और भाषा-कौशल को बढ़ाएगा। मुहावरों का अभ्यास करवाने से भाषा समृद्ध होगी।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
