सजीवों में उत्सर्जन कक्षा 7 विज्ञान पाठ 14
1. उत्सर्जन क्या है?
सजीवों के शरीर में निरंतर कई रासायनिक और जैविक क्रियाएं चलती रहती हैं। इन क्रियाओं के परिणामस्वरूप कुछ ऐसे पदार्थ बनते हैं जो शरीर के लिए हानिकारक या अनुपयोगी होते हैं।
- अपशिष्ट पदार्थ (Waste Products): जैविक क्रियाओं के फलस्वरूप शरीर में बने अनुपयोगी और हानिकारक पदार्थों को अपशिष्ट पदार्थ कहते हैं। (जैसे- कार्बन डाइऑक्साइड, यूरिया, पसीना आदि)।
- उत्सर्जन (Excretion): शरीर से इन विषैले और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया को ‘उत्सर्जन’ कहते हैं।
2. मानव उत्सर्जन तंत्र (Human Excretory System)
मनुष्यों में अपशिष्ट पदार्थों (मुख्य रूप से यूरिया) को रक्त से अलग करके बाहर निकालने के लिए एक विकसित तंत्र होता है।
उत्सर्जन तंत्र के मुख्य अंग:
मानव उत्सर्जन तंत्र निम्नलिखित चार अंगों से मिलकर बना होता है:
- वृक्क (Kidney): यह मुख्य उत्सर्जन अंग है।
- मूत्रवाहिनी (Ureter): वृक्क से मूत्राशय तक मूत्र ले जाने वाली नली।
- मूत्राशय (Urinary Bladder): जहाँ मूत्र जमा होता है।
- मूत्रमार्ग (Urethra): जिसके द्वारा मूत्र शरीर से बाहर निकलता है।
कार्यप्रणाली (Process):
- यकृत (Liver) की भूमिका: शरीर की कोशिकाओं में बनने वाली विषैली अमोनिया को यकृत कम हानिकारक पदार्थ यूरिया में बदल देता है। यह यूरिया रक्त में मिल जाता है।
- छानने की प्रक्रिया: जब यह रक्त वृक्क (Kidney) में पहुंचता है, तो वृक्क उसमें से अपशिष्ट पदार्थों (यूरिया आदि) को छानने का कार्य करता है।
- उपयोगी पदार्थ वापस रक्त में अवशोषित हो जाते हैं और हानिकारक पदार्थ पानी के साथ मिलकर ‘मूत्र’ (Urine) का निर्माण करते हैं।

3. विभिन्न जंतुओं में उत्सर्जन (Excretion in Animals)
अलग-अलग जंतुओं में उत्सर्जन की विधियां उनके रहन-सहन और वातावरण पर निर्भर करती हैं।
| जंतु का प्रकार | उत्सर्जन विधि/विशेषता |
| सरल सूक्ष्म जीव (जैसे- अमीबा) | इनमें कोई विशेष अंग नहीं होता। उत्सर्जन कोशिकाओं की सतह से विसरण (Diffusion) विधि द्वारा सीधे पानी में होता है। |
| शुष्क वातावरण वाले जीव (पक्षी, छिपकली, सांप) | पानी की बचत करने के लिए, ये जीव यूरिक अम्ल का उत्सर्जन ठोस या गाढ़े सफेद रंग के रूप में करते हैं। |
| जलीय जंतु (मछलियाँ) | ये अमोनिया का उत्सर्जन सीधे जल में करती हैं। |
4. पौधों में उत्सर्जन (Excretion in Plants)
पौधों में जंतुओं की तरह उत्सर्जन के लिए कोई विशेष अंग या तंत्र नहीं होता है, फिर भी वे अपने अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालते हैं या संग्रहित करते हैं।
पौधों द्वारा अपनाई जाने वाली विधियां:
- संग्रहण (Storage): कुछ पौधों में अपशिष्ट पदार्थ उनकी पत्तियों, छाल तथा तने आदि में संग्रहित हो जाते हैं। जब पत्तियां पीली होकर गिरती हैं या छाल उतरती है, तो ये पदार्थ भी अलग हो जाते हैं।
- स्राव (Secretion): कुछ पौधे अपशिष्ट पदार्थों को गोंद (Gum), रेजिन (Resin) या लेटेक्स के रूप में बाहर निकालते हैं। (ये मानव के लिए उपयोगी भी होते हैं)।
- गैसीय उत्सर्जन: प्रकाश संश्लेषण और श्वसन के दौरान बनी ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड रंध्रों (Stomata) के माध्यम से बाहर निकलती है।
सारांश (Quick Recap)
- शरीर की सफाई के लिए उत्सर्जन आवश्यक है।
- मानव में वृक्क (Kidney) रक्त को छानने का मुख्य कार्य करता है।
- यकृत (Liver) अमोनिया को यूरिया में बदलता है।
- सूक्ष्म जीव सतह से विसरण द्वारा उत्सर्जन करते हैं।
- पौधे अपनी छाल और पत्तियों में अपशिष्ट जमा करते हैं।




















