दशमः पाठः – विश्वबन्धुत्वम्
दशमः पाठः विश्वबन्धुत्वम् विश्वस्य सर्वान् जनान् प्रति बन्धुत्वस्य भावः एव विश्वबन्धुत्वम् इति कथ्यते। शान्तिमयाय जीवनाय विश्वबन्धुत्वस्य भावना नितरां महत्त्वं भजते।
दशमः पाठः विश्वबन्धुत्वम् विश्वस्य सर्वान् जनान् प्रति बन्धुत्वस्य भावः एव विश्वबन्धुत्वम् इति कथ्यते। शान्तिमयाय जीवनाय विश्वबन्धुत्वस्य भावना नितरां महत्त्वं भजते।
महाकवि कालिदासकृत महाकाव्य ‘रघुवंशम्’ के प्रथम सर्ग से यह पाठ लिया गया है। इस काव्य में राजा दिलीप से लेकर
सन्तश्रीगहिरागुरु: श्रीगहिरागुरु: महान् समाजसुधारक: दार्शनिक: तपस्वी च आसीत्। तस्य जन्म पञ्चाधिकएकोनविंशतिशततमे (1905) खीस्ताब्दे रायगढ़मण्डलान्तर्गते गहिराग्रामेऽभवत्। तत्रभवतः पिता श्री बुडकीकँवरमहोदयः सम्पन्नो
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⏳ इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत – कक्षा 6 SST अध्याय 4 (नोट्स) I. ऐतिहासिक समय की गणना II.
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