अपना-अपना काम – कक्षा 3 हिंदी Unit 4: अपना-अपना काम (Apna-Apna Kaam Class 3 Hindi)
पाठ का सारांश
यह एक प्रेरक कहानी है जिसमें सिमरन नाम की बच्ची स्कूल का काम करते-करते थक जाती है और सोचती है कि कितना अच्छा होता अगर उसे पढ़ना न पड़ता। वह मधुमक्खी, पेड़ और चिड़िया बनने की इच्छा व्यक्त करती है। लेकिन प्रत्येक जीव उसे बताता है कि उन्हें भी बहुत परिश्रम करना पड़ता है – मधुमक्खी को दिनभर उड़कर रस इकट्ठा करना पड़ता है, पेड़ को जड़ों से पानी खींचना और पत्तों से भोजन बनाना पड़ता है, और चिड़िया को दाना ढूँढ़ने और घोंसला बनाने के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है। अंत में सिमरन को समझ आता है कि परिश्रम से ही सब जीते हैं और वह मन लगाकर पढ़ने बैठ जाती है। यह कहानी बच्चों को मेहनत, लग्न और अपने कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदारी की सीख देती है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- कहानी को सही उच्चारण, भाव और गति के साथ पढ़ पाएँगे
- श्रम/परिश्रम के महत्व को समझ पाएँगे
- विभिन्न जीवों (मधुमक्खी, पेड़, चिड़िया) के कार्यों को जान पाएँगे
- संज्ञा (नाम वाले शब्द) को पहचान पाएँगे और वाक्यों में प्रयोग कर पाएँगे
- घर/विद्यालय में होने वाले विभिन्न कार्यों का वर्गीकरण (किसके द्वारा किया जाता है) कर पाएँगे
- रचनात्मक लेखन (कल्पना – “यदि मैं एक दिन के लिए… बनता”) कर पाएँगे
- शहद के उपयोग (गुण) के बारे में जान पाएँगे
दिन 1 – कहानी का परिचय एवं वाचन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “क्या आपको पढ़ाई करना पसंद है? क्या आप कभी थक जाते हैं?”
- “अगर आपको कोई भी बनने का मौका मिले तो क्या बनना चाहेंगे?” (चिड़िया, तितली, पेड़, मछली, आदि)
- पृष्ठ 120 का चित्र दिखाएँ और पूछें – “चित्र में बच्ची क्या कर रही है?” (किताब पढ़ रही है) और “वह क्या सोच रही होगी?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- कहानी का सस्वर वाचन – शिक्षक पृष्ठ 120-122 तक की कहानी को भावपूर्ण ढंग से, सिमरन की उदासी, आश्चर्य और अंत में समझ को दिखाते हुए पढ़कर सुनाएँ।
- सामूहिक वाचन – विद्यार्थी बारी-बारी से अनुच्छेद पढ़ें।
- नए शब्दों/भावों की व्याख्या:
- आनंदपूर्वक = खुशी के साथ
- अचंभित = हैरान/आश्चर्यचकित
- परिश्रम = मेहनत
- जड़ें = पेड़ की वे भाग जो ज़मीन के अंदर होते हैं (roots)
- उपरांत = बाद में
- सार्थक = अर्थपूर्ण
- मधुमक्खी = शहद बनाने वाला कीड़ा (bee)
- फुर्ती = चपलता/तेज़ी
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “कहानी में मुख्य पात्र कौन है?” (सिमरन)
- गृहकार्य: कहानी को एक बार और पढ़ें और बताएँ कि सिमरन को कौन-कौन से जीव मिले।
दिन 2 – कहानी की गहन समझ एवं चर्चा
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – कहानी का सामूहिक वाचन।
- विद्यार्थियों से पूछें कि सिमरन को कौन-कौन से जीव मिले।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ‘बातचीत के लिए’ प्रश्न (पृष्ठ 123):
- आप क्या-क्या काम करते हैं? (पढ़ना, खेलना, घर में मदद करना)
- आपको कौन-कौन से काम बहुत अच्छे लगते हैं? (चित्र बनाना, गाना, खाना बनाने में मदद, बागवानी)
- इस कहानी में आपको किसका काम अच्छा लगा और क्यों? (मधुमक्खी – मेहनती; पेड़ – सबको फल देता है; चिड़िया – घोंसला बनाती है)
- ‘सोचिए और लिखिए’ (पृष्ठ 123):
- सिमरन क्यों थक गई थी? (बहुत सारा लिखने-पढ़ने का काम करके)
- सिमरन मधुमक्खी क्यों बनना चाहती थी? (क्योंकि उसे लगा कि मधुमक्खी डाल-डाल, फूल-फूल उड़ती है, और उसे कोई परेशानी नहीं है)
- पेड़ क्या-क्या काम करते हैं? (जड़ें पानी खींचती हैं, पत्ते भोजन बनाते हैं, फल हमें देते हैं)
- सिमरन को चिड़िया का काम सरल क्यों लगा? (उसे लगा कि चिड़िया मौज से दाना खाती है, लेकिन चिड़िया ने बताया कि उसे दाना ढूँढ़ने में बहुत परिश्रम करना पड़ता है)
- सिमरन अंत में पुस्तकें उठाकर काम क्यों करने लगी? (उसे समझ आ गया कि हर किसी को परिश्रम करना पड़ता है, इसलिए उसे भी मन लगाकर पढ़ना चाहिए)
समापन (5 मिनट)
- “इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?” (हर किसी को परिश्रम करना पड़ता है, हमें अपने काम से भागना नहीं चाहिए)
- गृहकार्य: “आप पूरे दिन में क्या-क्या काम करते हैं?” – सूची बनाएँ (पृष्ठ 123)।
दिन 3 – अभ्यास एवं भाषा कौशल (व्याकरण)
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (दिनभर के कामों की सूची) साझा करें।
- कहानी का संक्षिप्त पुनर्वाचन।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- घर में काम करने वालों की सूची (पृष्ठ 124):
- विद्यार्थी तालिका पूरी करें:क्रमांककामकरने वाला1.पेड़-पौधों को पानी देनामाँ/पिताजी/माली2.खाना बनानामाँ/दादी3.बर्तन धोनामाँ/भाई/बहन4.कपड़े धोनामाँ/धोबी5.स्कूल जानामैं/बच्चे
- संज्ञा (नाम वाले शब्द) पहचान (पृष्ठ 126):
- कहानी में से संज्ञा शब्द ढूँढ़ें:
- व्यक्तियों के नाम – सिमरन, चाचाजी, प्रिया (पिछली कहानी से), पिताजी
- जीवों के नाम – मधुमक्खी, चिड़िया, पेड़
- स्थानों के नाम – बाग, स्कूल, घर
- वस्तुओं के नाम – पुस्तकें, फूल, दाना, घोंसला
- कहानी में से संज्ञा शब्द ढूँढ़ें:
- कहानी से वाक्य पूर्ति (पृष्ठ 125):
- (क) “उसने देखा कि मधुमक्खियाँ आनंदपूर्वक एक फूल से दूसरे फूल तक उड़ रही थीं।”
- (ख) “मेरे शरीर का तो हर अंग दिन-रात काम करता है।”
- (ग) “…जड़ें मिट्टी से पानी खींचती हैं, पत्ते दिनभर खाना बनाते हैं और इतने परिश्रम के पश्चात जो फल उगते हैं, वे भी हम तुम्हें दे देते हैं।”
- (घ) “उसने अपनी पुस्तकें उठाईं और उत्साह से स्कूल का काम करने बैठ गई।”
- शहद के उपयोग (पृष्ठ 125):
- विद्यार्थी बताएँ – “शहद हमारे किस-किस काम आता है?”
- दूध को मीठा करने के लिए
- औषधि/दवा के रूप में (खाँसी-जुकाम में)
- त्वचा के लिए (निखार)
- ऊर्जा/ताकत के लिए
- पके हुए भोजन में स्वाद बढ़ाने के लिए
- विद्यार्थी बताएँ – “शहद हमारे किस-किस काम आता है?”
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के अभ्यास कार्यों की जाँच।
- गृहकार्य: “सिमरन और मधुमक्खी की बात को आगे बढ़ाइए” (पृष्ठ 124) – 4-5 वाक्य लिखें।
दिन 4 – रचनात्मक लेखन, कल्पना एवं चित्रकला
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (संवाद आगे बढ़ाना) साझा करें।
- कहानी का संक्षिप्त पुनर्वाचन (मुख्य बिंदु)।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- कल्पना विस्तार – “यदि मैं एक दिन के लिए बनता…” (पृष्ठ 126):
- विद्यार्थी सोचें और लिखें – “यदि आप अपनी इच्छा से एक दिन के लिए कुछ भी बन सकते, तो आप क्या बनते?”
- उदाहरण उत्तर: “यदि मैं एक दिन के लिए कुछ भी बन सकती, तो मैं एक तितली बनना चाहूंगी। मैं रंग-बिरंगे फूलों पर बैठूंगी, उनका रस पीऊंगी और खूब उड़ूंगी। मैं सारे बगीचे में घूमूंगी और बच्चों को खुश करूंगी।”
- विद्यार्थी अपनी पसंदीदा चीज़/जीव बनने के कारण भी लिखें।
- चित्रकला – फलदार पेड़ (पृष्ठ 127):
- विद्यार्थी एक फलदार पेड़ (जैसे – आम, अमरूद, नीम, आदि) का सुंदर चित्र बनाएँ और रंग भरें।
- चित्र के नीचे 2-3 वाक्य लिखें – “यह आम का पेड़ है। यह हमें मीठे आम देता है। इसकी देखभाल करनी चाहिए।”
- समूह चर्चा:
- “परिश्रम से जीवन में क्या-क्या मिलता है?” (सफलता, खुशी, सम्मान, अच्छा फल)
- “क्या आप अपने घर के कामों में मदद करते हैं?” – बच्चे अनुभव साझा करें।
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के चित्रों और कल्पना लेखन की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: घर में आप किन-किन कामों में मदद करते हैं? – एक सूची बनाएँ और अगली कक्षा में सुनाएँ।
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए फलदार पेड़ के चित्रों का प्रदर्शन।
- विद्यार्थियों ने घर में जिन कामों की सूची बनाई, उसे साझा करें।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- सिमरन को कौन-कौन से जीव मिले? (मधुमक्खी, पेड़, चिड़िया)
- मधुमक्खियाँ क्या-क्या करती हैं? (एक फूल से दूसरे फूल तक उड़ती हैं, रस इकट्ठा करती हैं)
- पेड़ के कौन-कौन से अंग काम करते हैं? (जड़ें, पत्ते, तना, शाखाएँ)
- सिमरन ने अंत में क्या सीखा? (परिश्रम से ही सब जीते हैं, उसे भी मन लगाकर पढ़ना चाहिए)
- शहद किससे बनता है? (मधुमक्खियों द्वारा फूलों के रस से)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) सिमरन क्यों थक गई थी? (बहुत सारा लिखने-पढ़ने का काम करके)
- (ख) सिमरन ने पेड़ से क्या सीखा? (पेड़ के हर अंग को काम करना पड़ता है – जड़ें पानी खींचती हैं, पत्ते खाना बनाते हैं)
- (ग) ‘अपना-अपना काम’ कहानी से आपने क्या सीखा? (कोई भी बात – “हमें अपने काम से भागना नहीं चाहिए”, “परिश्रम करना चाहिए”)
- (घ) नीचे दिए गए शब्दों में से संज्ञा (नाम वाले शब्द) छाँटकर लिखिए:
- (सिमरन, पढ़ना, मधुमक्खी, उड़ना, पेड़, घोंसला, फल)
- उत्तर: सिमरन, मधुमक्खी, पेड़, घोंसला, फल
- (ङ) “यदि मैं एक दिन के लिए एक चिड़िया बनती तो…” – एक वाक्य लिखिए। (रचनात्मक उत्तर)
- समूह चर्चा (पृष्ठ 123):
- “आपको कौन-कौन से काम बहुत अच्छे लगते हैं?” – विद्यार्थी अपने पसंदीदा कामों (चित्रकारी, गाना, खेलना, बागवानी, खाना बनाने में मदद) के बारे में बताएँ।
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “‘अपना-अपना काम’ कहानी हमें सिखाती है कि हर व्यक्ति और हर जीव को परिश्रम करना पड़ता है। हमें अपने कर्तव्यों (पढ़ाई, घर के काम) को नहीं टालना चाहिए। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।”
- अगले पाठ ‘पेड़ों की अम्मा ‘थिमक्का” का संक्षिप्त परिचय – “अब हम एक ऐसी महान महिला के बारे में पढ़ेंगे, जिन्होंने हज़ारों पेड़ लगाए और जिन्हें ‘वृक्षमाता’ कहा जाता है।”
शिक्षण सहायक सामग्री
- कहानी का चार्ट
- मधुमक्खी, पेड़, चिड़िया के चित्र
- पेड़ के अंगों (जड़, तना, पत्ते, फल) को दर्शाता चार्ट
- शहद का नमूना (यदि संभव हो) और शहद के उपयोग बताने वाले चित्र
- शब्दार्थ कार्ड (परिश्रम, मधुमक्खी, अचंभित, आनंदपूर्वक, जड़ें)
- संज्ञा (नाम वाले शब्द) कार्ड
- चित्रकला सामग्री – रंग, कागज़, पेंसिल
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | कहानी का सस्वर एवं सार्थक वाचन | अवलोकन/मौखिक प्रस्तुति |
| 2 | कहानी की समझ (पात्र, घटनाएँ, शिक्षा) | मौखिक/लिखित प्रश्न |
| 3 | परिश्रम/श्रम के महत्व की समझ | समूह चर्चा/लिखित |
| 4 | संज्ञा (नाम वाले शब्द) की पहचान | छाँटकर लिखना |
| 5 | रचनात्मक लेखन (कल्पना – “यदि मैं बनता”) | लिखित अभिव्यक्ति |
| 6 | फलदार पेड़ का चित्रण | कला गतिविधि |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘मधुमक्खी’, ‘पेड़’, ‘चिड़िया’, ‘परिश्रम’ को क्या कहते हैं। ‘परिश्रम’ के महत्व को बच्चों के जीवन से जोड़ें – उन्हें बताएँ कि खेलना, पढ़ना, घर के काम में मदद करना – सभी प्रकार के परिश्रम उन्हें मजबूत और सफल बनाते हैं। ‘अच्छे काम’ की पहचान और सराहना करना भी इस पाठ का महत्वपूर्ण पहलू है।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
