पाठ का सारांश
यह पाठ श्रीमती थिमक्का की प्रेरणादायक जीवनी है, जिन्हें ‘अम्मा’ और ‘वृक्षमाता’ के नाम से भी जाना जाता है। थिमक्का का जन्म कर्नाटक के तुमकुर जिले में हुआ था। पिछले 80 वर्षों से वे सड़कों के किनारे पेड़ लगा रही हैं। पैसे की कमी के कारण उन्होंने आरंभ में एक खान में श्रमिक के रूप में काम किया था।
थिमक्का को ‘सालूमरदा थिमक्का’ भी कहा जाता है – ‘सालूमरदा’ का अर्थ कन्नड़ भाषा में “पेड़ों की पंक्ति” है। उन्होंने हुलिकल और कुदुर के बीच 45 किलोमीटर लंबे राजमार्ग पर लगभग 385 बरगद के पेड़ लगाए। इसके अतिरिक्त उन्होंने 8000 से अधिक पेड़ लगाए हैं। इस कार्य में उनके पति ने भी पूरा सहयोग दिया।
उनके इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2019 में पद्मश्री से सम्मानित किया। 107 वर्ष की आयु में भी वे सक्रिय हैं। यह पाठ बच्चों को पर्यावरण प्रेम, निष्ठा, कठिनाइयों के बावजूद हार न मानने और समाज के लिए उपयोगी कार्य करने की प्रेरणा देता है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- थिमक्का के जीवन, संघर्ष और योगदान को समझ पाएँगे
- पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के महत्व को समझ पाएँगे
- द्वित्व व्यंजन (जैसे – क्का) वाले शब्दों को पहचान पाएँगे
- विभिन्न भाषाओं में ‘पेड़’ शब्द के पर्यायवाची शब्द जान पाएँगे
- संयुक्त अक्षरों (क्ष, त्र, ज्ञ, श्र) की पहचान कर पाएँगे
- रचनात्मक लेखन (थिमक्का को पत्र) कर पाएँगे
- पेड़ों से मिलने वाली वस्तुओं का वर्गीकरण कर पाएँगे
दिन 1 – पाठ का परिचय एवं वाचन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “पेड़ हमारे किस-किस काम आते हैं?” (ऑक्सीजन, छाया, फल, दवाइयाँ, कागज़, फर्नीचर, आदि)
- “क्या आपने कभी कोई पौधा लगाया है या उसकी देखभाल की है?”
- परिचय: “आज हम एक ऐसी महान महिला के बारे में पढ़ेंगे, जिन्होंने हज़ारों पेड़ लगाए और जिन्हें ‘पेड़ों की अम्मा’ कहा जाता है।”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पाठ का सस्वर वाचन – शिक्षक पृष्ठ 108-109 को भावपूर्ण ढंग से, थिमक्का के प्रति श्रद्धा और सम्मान के साथ पढ़कर सुनाएँ।
- सामूहिक वाचन – विद्यार्थी बारी-बारी से अनुच्छेद पढ़ें।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- अम्मा = माँ (कन्नड़/तेलुगु भाषा में)
- वृक्षमाता = पेड़ों की माँ
- सालूमरदा = कन्नड़ भाषा में “पेड़ों की पंक्ति”
- बरगद = एक विशाल वृक्ष (Banyan tree)
- राजमार्ग = बड़ी सड़क/हाईवे (Highway)
- पद्मश्री = भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान
- वनीकरण = पेड़ लगाने का कार्य
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “थिमक्का को किस नाम से जाना जाता है?” (‘अम्मा’, ‘वृक्षमाता’, ‘सालूमरदा थिमक्का’)
- गृहकार्य: पाठ को एक बार और पढ़ें और थिमक्का के बारे में घर पर किसी को बताएँ।
दिन 2 – पाठ की गहन समझ एवं चर्चा
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ‘बातचीत के लिए’ प्रश्न (पृष्ठ 110):
- पेड़ हमारे किस-किस काम आते हैं? (ऑक्सीजन, छाया, फल-फूल, दवाइयाँ, कागज़, लकड़ी, फर्नीचर, गोंद, आदि)
- क्या आपने कभी किसी पौधे की देखभाल की है? कैसे? (पानी देना, खाद डालना, धूप में रखना)
- यदि आपको समाज के लिए उपयोगी काम करने का अवसर मिले तो आप कौन-सा काम करेंगे? (पेड़ लगाना, गरीबों की मदद करना, सफाई करना, आदि)
- ‘सोचिए और लिखिए’ (पृष्ठ 110):
- थिमक्का अपने किस काम के कारण प्रसिद्ध हुई? (पिछले 80 वर्षों से सड़कों के किनारे पेड़ लगाने के कारण)
- थिमक्का को और किस-किस नाम से जाना जाता है? (‘अम्मा’, ‘वृक्षमाता’, ‘सालूमरदा थिमक्का’)
- अम्मा ने बरगद के पौधे लगाने क्यों शुरू किए थे? (पर्यावरण को हरा-भरा बनाने के लिए)
- इतने सारे पेड़ लगाने के लिए अम्मा को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा होगा? (पैसे की कमी, मेहनत, गर्मी, सूखा, आदि)
समापन (5 मिनट)
- “थिमक्का ने कौन-सा सम्मान प्राप्त किया?” (पद्मश्री – वर्ष 2019 में)
- गृहकार्य: “यदि आपको थिमक्का अम्मा का परिचय देना हो तो आप कैसे देंगे?” (पृष्ठ 110) – 4-5 वाक्य लिखें।
दिन 3 – अभ्यास एवं भाषा कौशल (व्याकरण)
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (थिमक्का का परिचय) साझा करें।
- पाठ का संक्षिप्त पुनर्वाचन।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- द्वित्व व्यंजन (दोहरे व्यंजन) (पृष्ठ 111):
- ‘थिमक्का’ में ‘क्का’ द्वित्व व्यंजन है।
- विद्यार्थी ऐसे और शब्द सोचकर लिखें:
- पक्का, अक्का, छक्का, सुबक्का, सक्का (व्यंजन के दोहरे प्रयोग वाले शब्द)
- (शिक्षक समझाएँ – जब कोई व्यंजन दो बार आए, तो उसे द्वित्व व्यंजन कहते हैं।)
- विभिन्न भाषाओं में ‘पेड़’ शब्द (पृष्ठ 111):
- विद्यार्थी बताएँ कि विभिन्न भाषाओं में पेड़ को क्या कहते हैं:
- हिंदी – पेड़ / वृक्ष
- कन्नड़ – मरदा / वृक्ष
- संस्कृत – वृक्ष / तरु
- अंग्रेज़ी – Tree
- उर्दू – दरख़्त
- मराठी – झाड़
- बंगाली – গাছ (गाछ)
- तेलुगु – చెట్టు (चेट्टु)
- विद्यार्थी बताएँ कि विभिन्न भाषाओं में पेड़ को क्या कहते हैं:
- संयुक्त अक्षर – पहचान (पृष्ठ 112):
- शिक्षक संयुक्त अक्षर समझाएँ:
- क्ष = क् + ष (जैसे – क्षेत्र, रक्षा, क्षमा)
- त्र = त् + र (जैसे – पत्र, मित्र, त्रिशूल)
- ज्ञ = ज् + ञ (जैसे – ज्ञान, विज्ञान, अज्ञात)
- श्र = श् + र (जैसे – श्रम, श्री, श्रद्धा)
- विद्यार्थी चित्र देखकर संयुक्त अक्षर से बने शब्द पूरे करें (पृष्ठ 112):
- (चित्र – विद्यालय → विद्यालय में ‘द्य’ संयुक्त नहीं, लेकिन शिक्षक मार्गदर्शन करें)
- (चित्र – क्षत्रिय? वास्तविक पुस्तक के अनुसार अभ्यास करवाएँ)
- शिक्षक संयुक्त अक्षर समझाएँ:
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के अभ्यास कार्यों की जाँच।
- गृहकार्य: ‘थिमक्का को एक पत्र लिखें’ (पृष्ठ 113) – 4-5 वाक्य लिखें।
दिन 4 – रचनात्मक लेखन, वर्गीकरण एवं कला
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (थिमक्का को पत्र) साझा करें – कुछ विद्यार्थी अपना पत्र पढ़कर सुनाएँ।
- “थिमक्का हमारे लिए किस प्रकार आदर्श हैं?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पेड़ों से मिलने वाली वस्तुएँ (पृष्ठ 113):
- विद्यार्थी चित्र देखें और उन वस्तुओं पर गोला बनाएँ जो हमें पेड़ों से मिलती हैं:
- पेड़ों से मिलने वाली वस्तुएँ – फल, फूल, लकड़ी, कागज़, दवाइयाँ, गोंद, रबड़, छाया, ऑक्सीजन
- नहीं मिलने वाली – प्लास्टिक, धातु, काँच (शिक्षक मार्गदर्शन करें)
- विद्यार्थी चित्र देखें और उन वस्तुओं पर गोला बनाएँ जो हमें पेड़ों से मिलती हैं:
- पत्र लेखन – थिमक्का को पत्र (पृष्ठ 113):
- विद्यार्थी थिमक्का को एक पत्र लिखें:
- प्रारूप: “प्रिय थिमक्का अम्मा, नमस्ते!”
- मुख्य भाग: उनके काम की प्रशंसा, प्रेरणा, और अपनी भावनाएँ
- समापन: “आपकी प्रशंसक/आपका प्रशंसक, [नाम]”
- उदाहरण: “प्रिय थिमक्का अम्मा, आपने 8000 से अधिक पेड़ लगाकर हमें प्रेरित किया है। आपकी मेहनत और लगन देखकर मुझे बहुत खुशी होती है। मैं भी अपने विद्यालय में पेड़ लगाऊँगा और उनकी देखभाल करूँगा।”
- विद्यार्थी थिमक्का को एक पत्र लिखें:
- समूह चर्चा:
- “हम थिमक्का अम्मा के काम में कैसे सहायता कर सकते हैं?” (पेड़ लगाकर, पानी देकर, दूसरों को प्रेरित करके)
- “पर्यावरण को बचाने के लिए हम और क्या कर सकते हैं?” (कूड़ा न फैलाना, पानी बचाना, प्लास्टिक कम उपयोग करना)
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के पत्रों और चित्रों की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: अपने घर/विद्यालय के आस-पास किसी एक पेड़ का चित्र बनाएँ और उसके बारे में 3 वाक्य लिखें।
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए पेड़ के चित्रों का प्रदर्शन।
- पाठ का सामूहिक वाचन (सम्मान और प्रेरणा के साथ)।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- थिमक्का को किस नाम से जाना जाता है? (‘अम्मा’, ‘वृक्षमाता’, ‘सालूमरदा थिमक्का’)
- थिमक्का का जन्म कहाँ हुआ था? (कर्नाटक के तुमकुर जिले में)
- थिमक्का ने कितने बरगद के पेड़ लगाए? (लगभग 385)
- उन्होंने कितने किलोमीटर के राजमार्ग पर पेड़ लगाए? (45 किलोमीटर)
- उन्हें कौन-सा सम्मान मिला? (पद्मश्री – 2019 में)
- ‘सालूमरदा’ का क्या अर्थ है? (पेड़ों की पंक्ति)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) ‘पेड़ों की अम्मा थिमक्का’ पाठ के आधार पर थिमक्का के बारे में चार वाक्य लिखिए।
- (ख) थिमक्का को ‘वृक्षमाता’ क्यों कहा जाता है? (क्योंकि उन्होंने हज़ारों पेड़ लगाए हैं और पर्यावरण की रक्षा की है)
- (ग) द्वित्व व्यंजन वाले तीन शब्द लिखिए। (थिमक्का, पक्का, अक्का – या कोई अन्य)
- (घ) ‘संयुक्त अक्षर’ से दो शब्द लिखिए:
- ‘त्र’ से → ________, ________ (मित्र, पत्र)
- ‘क्ष’ से → ________, ________ (क्षमा, रक्षा)
- (ङ) पेड़ हमें क्या-क्या देते हैं? (कोई तीन – ऑक्सीजन, छाया, फल, लकड़ी, कागज़, दवाइयाँ)
- समूह गतिविधि:
- “थिमक्का अम्मा के जीवन से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?” – विद्यार्थी अपने विचार साझा करें।
- “हम अपने विद्यालय/घर में कौन-से पेड़ लगा सकते हैं?” – सूची बनाएँ।
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “थिमक्का अम्मा ने हमें दिखाया कि कठिनाइयों के बावजूद अगर हमारे अंदर जुनून और निष्ठा हो, तो हम बड़े से बड़ा काम कर सकते हैं। उन्होंने 8000 से अधिक पेड़ लगाकर पर्यावरण को बचाया। हमें भी अपने आस-पास पेड़ लगाने चाहिए और पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए।”
- अगले पाठ ‘किसान की होशियारी’ का संक्षिप्त परिचय।
शिक्षण सहायक सामग्री
- थिमक्का का चित्र/पोस्टर
- पेड़ों और पर्यावरण से संबंधित चित्र
- कर्नाटक का मानचित्र (तुमकुर, हुलिकल, कुदुर दिखाने के लिए)
- द्वित्व व्यंजन और संयुक्त अक्षर कार्ड
- विभिन्न भाषाओं में ‘पेड़’ शब्द का चार्ट
- पत्र लेखन प्रारूप
- चित्रकला सामग्री – रंग, कागज़, पेंसिल
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | पाठ का सस्वर एवं सार्थक वाचन | अवलोकन/मौखिक प्रस्तुति |
| 2 | थिमक्का के जीवन, संघर्ष एवं योगदान की समझ | मौखिक/लिखित प्रश्न |
| 3 | पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण के महत्व की समझ | समूह चर्चा/लिखित |
| 4 | द्वित्व व्यंजन एवं संयुक्त अक्षरों की पहचान | लिखित अभ्यास |
| 5 | रचनात्मक पत्र लेखन | लिखित अभिव्यक्ति |
| 6 | पेड़ों से मिलने वाली वस्तुओं का वर्गीकरण | चित्र-गतिविधि |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘पेड़’, ‘अम्मा’, ‘बरगद’ को क्या कहते हैं। थिमक्का की कहानी बच्चों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है – उन्हें बताएँ कि उम्र, पैसा या संसाधन बड़े काम करने में बाधा नहीं हैं। बच्चों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करें और यदि संभव हो तो कक्षा/विद्यालय में एक पौधा लगाने का कार्यक्रम आयोजित करें। ‘पेड़ों की अम्मा’ की कहानी बच्चों में पर्यावरण के प्रति प्रेम और समाज-सेवा की भावना विकसित करती है।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
