यह पाठ एक आत्मकथ्य/संस्मरण है, जिसमें लेखक ने अपने बचपन के साहित्यिक वातावरण, स्वतंत्रता संग्राम की घटनाओं और अपने लेखक बनने की यात्रा को बड़े ही सहज और सच्चे तरीके से प्रस्तुत किया है।
पाठ योजना: मैं लेखक कैसे बना (कक्षा – 10वीं)
शिक्षण उद्देश्य:
- छात्र लेखक बनने की प्रक्रिया, संघर्ष और साहित्यिक वातावरण के महत्व को समझ सकें।
- छात्र स्वतंत्रता संग्राम (जलियाँवाला बाग कांड, साइमन कमीशन) जैसी घटनाओं के प्रभाव को समझ सकें।
- छात्र महान लेखकों (निराला, शरतचंद्र) के जीवन-मूल्यों और उनके मार्गदर्शन से प्रेरणा ले सकें।
- छात्र संस्मरण विधा की विशेषताओं तथा मुहावरों के प्रयोग को समझ सकें।
Day 1: लेखक परिचय, पारिवारिक वातावरण और साहित्यिक सान्निध्य
- प्रवेश (5 मिनट): कक्षा में पूछें: “क्या आपको पढ़ना-लिखना पसंद है? क्या घर में अगर कोई किताबें या पत्रिकाएँ आती हों, तो उनका असर आप पर पड़ता है?” छात्रों से उनके पढ़ने के शौक के बारे में चर्चा करें।
- लेखक परिचय (10 मिनट): अमृतलाल नागर का परिचय दें। बताएं कि वे आगरा में पैदा हुए, आधुनिक हिंदी गद्य के महत्वपूर्ण लेखक, उपन्यासकार और कहानीकार थे। उनकी प्रमुख रचनाएँ (नाच्यो बहुत गोपाल, सुहाग के नुपुर, मानस का हंस) और पुरस्कार (सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार) बताएं।
- सस्वर वाचन (5 मिनट): शिक्षक पाठ का पहला भाग (पृष्ठ 144) पढ़ें।
- व्याख्या (20 मिनट):
- घर का साहित्यिक माहौल: घर में ‘सरस्वती’, ‘गृहलक्ष्मी’ और ‘हिंदू-पंच’ जैसी पत्रिकाएँ आती थीं। लेखक बचपन से ही इन्हें पढ़ता था।
- महापुरुषों का सान्निध्य: “उत्तर भारतेंदु काल के सुप्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य लेखक पं. शिवनाथजी शर्मा मेरे घर के पास ही रहते थे।” लेखक के घर पर माधव शुक्ल, आचार्य श्याम सुंदर दास, बृजनारायण चकबस्त जैसे दिग्गज आते थे। लेखक इन महापुरुषों के दर्शनों को अपने लेखक बनने का पुण्य प्रताप मानते हैं।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 3 लिखिए: “इस पाठ में लेखक ने अपने लेखक बनने के पीछे बहुत सारे कारणों को स्वीकार किया है। उन कारणों को लिखिए।” (पहले भाग के आधार पर – घर का वातावरण, महापुरुषों का सान्निध्य)।
Day 2: स्वतंत्रता संग्राम की घटनाएं और पहली कविता
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पिछले दिन के गृहकार्य की जांच करें।
- व्याख्या (25 मिनट): पाठ का मुख्य भाग समझाएं:
- जलियाँवाला बाग कांड: माधव शुक्ल जी खून से रँगी हुई मिट्टी की पुड़िया लाए थे, और तिरंगी तस्वीर दी थी। जब अंग्रेज अफसर दावत में आने वाले थे, तो बाबा ने वह तस्वीर घर से हटवा दी। इससे लेखक को बहुत दुख हुआ (देशभक्ति की भावना का जागरण)।
- साइमन कमीशन का विरोध (सन् 28): लखनऊ में पं. जवाहर लाल नेहरू और गोविंद बल्लभ पंत के नेतृत्व में जुलूस निकला। इस जुलूस में लेखक भी शामिल हुआ। लाठीचार्ज में भीड़ में कुचले जाने से वह बुरी तरह घायल हुए।
- पहली तुकबंदी: “उस दिन घर लौटने पर मानसिक उत्तेजना वश पहली तुकबंदी फूटी। अब उसकी एक ही पंक्ति याद है: ‘कब लौं कहौं लाठी खाया करें, कब लौं कहौं जेल सहा करिए।'”
- पहली रचना का प्रकाशन: वह कविता तीसरे दिन दैनिक आनंद में छपी। “छापे के अक्षरों में अपना नाम देखा तो नशा आ गया। बस में लेखक बन गया।”
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 2 लिखिए: “अमृत लाल नागर ने अपने आत्मकथ्य में अपने युग के आंदोलनों का वर्णन किया है। उन आंदोलनों का लेखक पर क्या असर हुआ?”
Day 3: रचना के नियम, शरत बाबू के चार उपदेश और निराला जी का प्रभाव
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पहली कविता और उसके प्रकाशन पर चर्चा करें।
- व्याख्या (25 मिनट): पाठ का अगला भाग (मार्गदर्शन और सिद्धांत):
- पं. रूपनारायण जी पांडेय ‘कविरन्त’ का सुझाव: “कहानी में एक ही भाव का समावेश करना चाहिए। उसमें अधिक रंग भरने की गुंजाइश नहीं होती।”
- निराला जी से परिचय: सन 1929 में निराला जी से परिचय हुआ और दिनों-दिन गहरा होता गया। निराला के व्यक्तित्व ने उन्हें बहुत प्रभावित किया।
- शरत बाबू (शरतचंद्र चट्टोपाध्याय) के चार प्रमुख उपदेश:
- “पहले यह निश्चय करो कि तुम आजन्म लेखक ही बने रहोगे।”
- “जो लिखना सो अपने अनुभव से लिखना।” (लेखक का मूल मंत्र)
- “रचना लिखकर तुरंत किसी को मत दिखाना, तीन महीने तक दराज में रखो, फिर ठंडे मन से स्वयं सुधार करो।”
- “अपनी कलम से किसी की निंदा मत करो।”
- अंतिम उपदेश: “यदि तुम्हारे पास चार पैसे हों तो तीन बचाओ और एक खर्च करो… उधार की वृत्ति लेखक की आत्मा को हीन और मलीन कर देती है।”
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 1 लिखिए: “लेखक बनने के लिए शरत बाबू के क्या-क्या सुझाव थे?”
Day 4: संघर्ष के दिन, सफलता और अनुवाद का महत्व
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): शरत बाबू के चार उपदेश दोहराएं।
- व्याख्या (25 मिनट): पाठ का अंतिम भाग समझाएं:
- संघर्ष का काल (1930-33): कहानियाँ लिखता, पर छपने भेजने पर गुम हो जाती थीं। हर बार निराशा हाथ लगती थी। लेखक ने इस काल को कठिन बताया, लेकिन हार नहीं मानी।
- पहली कहानी (1933) और प्रोत्साहन (1934): सन 1933 में पहली कहानी छपी। सन 1934 में ‘माधुरी’ पत्रिका ने प्रोत्साहन दिया। फिर बराबर चीजें छपने लगीं।
- निराश न होने की सीख: “किसी नए लेखक की रचना का प्रकाशित न हो पाना बहुधा लेखक के ही दोष के कारण न होकर संपादकों की गैर-जिम्मेदारी के कारण भी होता है।”
- अनुवाद का महत्व (1935-37): गुस्ताव फ्लाबेयर के उपन्यास ‘मादाम बोवेरी’ का अनुवाद किया। अनुवाद से शब्द भंडार बढ़ा और वाक्य गठन निखरा।
- भाषाओं का ज्ञान: देशी साहित्य को जानने के लिए लेखक ने चार भारतीय भाषाएँ सीखीं। वे कहते हैं – “साहित्यिक वातावरण ही में रहनेवाला कथा लेखक घाटे में रहता है। उसे विविध वातावरणों से अपना सीधा संपर्क स्थापित करना ही चाहिए।” (पाठ की अंतिम पंक्ति)।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 4 लिखिए: “‘साहित्य को टके कमाने का साधन कभी नहीं बनाना चाहिए।’ ये कहने के पीछे क्या विचार हैं?”
Day 5: भाषा कार्य, प्रायोजना और मूल्यांकन
- भाषा कार्य (20 मिनट): पाठ्यपुस्तक के “भाषा के बारे में” खंड का अभ्यास कराएं।
- मुहावरे: “छापे के अक्षरों में अपना नाम देखा तो नशा आ गया”, “मन मसोसकर रह जाना”, “गाँठ में बाँधना”, “अमल में लाना” – इन मुहावरों के अर्थ लिखवाकर वाक्य बनवाएं।
- संधि/वाक्य शैली: पाठ में लेखक ने सरल और प्रवाहमयी भाषा का प्रयोग किया है। लेखक के वाक्यों को पढ़कर छात्रों से अपने अनुभव में एक छोटा अनुच्छेद लिखवाएं।
- अभ्यास (15 मिनट): “पाठ से आगे” के प्रश्नों पर चर्चा करें:
- प्रश्न 5 (क और ख): जलियाँवाला बाग कांड की तस्वीर बाबा ने क्यों हटवाई?
- चर्चा: क्या आज के युवा लेखक बनना चाहते हैं? उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
- प्रायोजना कार्य (5 मिनट): छात्रों से कहें कि वे अपने आस-पास के किसी लेखक, कवि या पत्रकार से मिलें और उनसे उनकी लेखन-यात्रा के बारे में साक्षात्कार (Interview) करें। उस अनुभव को कक्षा में सुनाएं।
- मूल्यांकन (5 मिनट): “लेखक की सफलता के पीछे क्या-क्या कारण थे?” “शरत बाबू का कौन सा उपदेश आपको सबसे ज्यादा पसंद आया और क्यों?” – इन प्रश्नों के आधार पर एक छोटा लिखित परीक्षण लें।
- गृहकार्य: पाठ का पूरा सारांश (स्वयं के शब्दों में) लिखकर लाएं।
(नोट: यह पाठ विद्यार्थियों को लेखन के प्रति प्रेरित करने के लिए अत्यंत उपयोगी है। कक्षा में शरत बाबू के उपदेशों को विशेष रूप से रेखांकित करें ताकि छात्र अनुशासन और आत्म-सुधार का महत्व समझ सकें।)

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
