वीर साहिबज्जादे – कक्षा 3 हिंदी Unit 5: हमारा देश (Veer Sahibzade Class 3 Hindi)
पाठ का सारांश
यह पाठ दसवें सिख गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के दो छोटे पुत्रों – साहिबजादा बाबा जोरावर सिंह जी (9 वर्ष) और साहिबजादा बाबा फतेह सिंह जी (6 वर्ष) – की अदम्य साहस और बलिदान की गाथा है।
सन् 1704 में मुगलों के विश्वासघात के कारण गुरु गोबिंद सिंह जी को आनंदपुर साहिब का किला छोड़ना पड़ा। सिरसा नदी पार करते समय परिवार बिछड़ गया। छोटे साहिबजादे और उनकी दादी माता गुजरी जी उनके पूर्व नौकर गंगू के गाँव पहुँचे। गंगू ने धन के लालच में माता गुजरी और बच्चों को मुगलों को सौंप दिया।
नवाब वजीर खाँ ने उन्हें ठंडे बुर्ज में कैद कर भूखा रखा। भाई मोतीराम मेहरा ने जान जोखिम में डालकर उन तक दूध पहुँचाया, जिसके कारण उनके पूरे परिवार को मौत के घाट उतार दिया गया। कचहरी में साहिबजादों ने नवाब को सिर झुकाने और इस्लाम धर्म अपनाने से स्पष्ट इनकार कर दिया। उन्होंने अपने धर्म, सिद्धांत और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए मुस्कुराते हुए सर्वोच्च बलिदान स्वीकार किया।
यह पाठ बच्चों को साहस, धर्मनिष्ठा, आत्मसम्मान और बलिदान की प्रेरणा देता है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- कहानी को सही उच्चारण, भाव और गति के साथ पढ़ पाएँगे
- साहिबजादों के बलिदान की घटना को समझ पाएँगे
- साहस, धर्मनिष्ठा, आत्मसम्मान और बलिदान के मूल्यों को समझ पाएँगे
- गुरु गोबिंद सिंह जी और सिख धर्म के बारे में बुनियादी जानकारी प्राप्त कर पाएँगे
- मुहावरों (“जान जोखिम में डालना”, “मौत के घाट उतारना”) का अर्थ समझकर वाक्यों में प्रयोग कर पाएँगे
- शब्दों का सही चयन कर रिक्त स्थान भर पाएँगे
- सही जोड़ी (मिलान) बना पाएँगे
- वीरता और बलिदान पर अपने विचार व्यक्त कर पाएँगे
दिन 1 – कहानी का परिचय एवं वाचन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “आपको कौन से वीरों के बारे में पता है? वीर किसे कहते हैं?”
- “क्या आपने कभी किसी ऐसे बच्चे के बारे में सुना है जिसने बहुत बहादुरी दिखाई हो?”
- परिचय: “आज हम दो बहादुर बालकों – साहिबजादों – की कहानी पढ़ेंगे, जिन्होंने 9 और 6 साल की उम्र में अपने धर्म और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया।”
- पृष्ठ 175 का चित्र दिखाएँ – गुरु गोबिंद सिंह और साहिबजादों के बारे में बताएँ।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- कहानी का सस्वर वाचन – शिक्षक पृष्ठ 175-177 तक की कहानी को गंभीर, भावपूर्ण और प्रेरणादायक स्वर में पढ़कर सुनाएँ।
- सामूहिक वाचन – विद्यार्थी बारी-बारी से अनुच्छेद पढ़ें।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या (पृष्ठ 178):
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “इस कहानी में मुख्य पात्र कौन हैं?” (गुरु गोबिंद सिंह जी, साहिबजादे, माता गुजरी, वजीर खाँ, गंगू, भाई मोतीराम)
- गृहकार्य: कहानी को एक बार और पढ़ें और ‘साहिबजादा’ शब्द का अर्थ घर पर किसी को बताएँ।
दिन 2 – कहानी की गहन समझ एवं चर्चा
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – कहानी का सामूहिक वाचन।
- “कहानी में किस-किस ने साहिबजादों के साथ विश्वासघात किया?” (गंगू – धन के लालच में)
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ‘बातचीत के लिए’ प्रश्न (पृष्ठ 178):
- “गुरु गोबिंद सिंह कौन थे?” – सिख धर्म के दसवें गुरु, महान योद्धा, कवि और धर्मगुरु, जिन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की।
- “इस पाठ का नाम ‘वीर साहिबजादे’ क्यों रखा गया है?” – क्योंकि इसमें गुरु गोबिंद सिंह के साहसिक और वीर पुत्रों की कहानी है, जिन्होंने अपने धर्म की रक्षा के लिए बहादुरी दिखाई।
- “इस पाठ को आप क्या नाम देना चाहेंगे?” – “साहस और बलिदान की कहानी”, “बहादुर बालक”, “धर्म की रक्षा” – विद्यार्थी अपने विचार साझा करें।
- ‘सोचिए और लिखिए’ (पृष्ठ 178):
- (प्रश्न 1) “श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के नाम लिखिए?”
- (प्रश्न 2) “नवाब वज़ीर खाँ ने कचहरी में छोटे साहिबजादों को क्या कहा?” – उन्हें इस्लाम धर्म कबूल करने के लिए कहा और महल, रेशमी वस्त्र, नौकर-चाकर देने का लालच दिया।
- (प्रश्न 3) “गंगू ने बच्चों और माता गुजरी जी के बारे में थाने में जाकर सूचना क्यों दी?” – धन के लालच में, क्योंकि वज़ीर खाँ गुरु गोबिंद सिंह को पकड़ने के लिए इनाम दे रहा था।
- (प्रश्न 4) “भाई मोतीराम मेहरा के परिवार को मौत के घाट क्यों उतार दिया गया?” – क्योंकि उन्होंने जान जोखिम में डालकर ठंडे बुर्ज में कैद माता गुजरी और साहिबजादों तक दूध पहुँचाया।
- चर्चा – साहिबजादों का साहस:
समापन (5 मिनट)
- “साहिबजादों की उम्र क्या थी?” (जोरावर सिंह – 9 वर्ष, फतेह सिंह – 6 वर्ष)
- गृहकार्य: “यदि आप साहिबजादों की जगह होते तो क्या करते?” – 3-4 वाक्य लिखिए।
दिन 3 – अभ्यास एवं भाषा कौशल (व्याकरण)
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (साहिबजादों की जगह) साझा करें – 3-4 विद्यार्थी अपना उत्तर पढ़ें।
- कहानी का संक्षिप्त पुनर्वाचन।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- शब्दार्थ – वाक्य प्रयोग (पृष्ठ 178):
- रिक्त स्थान पूर्ति (पृष्ठ 179 – शब्दों का चयन करके):
- (1) बाबा फतेह सिंह की आयु 6 वर्ष और बाबा जोरावर सिंह की आयु 9 वर्ष थी।
- (2) गुरु जी का परिवार सिरसा नदी पर बिछड़ गया।
- (3) वज़ीर खाँ ने माता गुजरी और साहिबजादों को बुर्ज में कैद कर रखा था।
- (4) साहिबजादों को इस्लाम धर्म कबूल करने को कहा गया।
- (5) माता गुजरी साहिबजादों की दादी थी।
- (6) शेर मोहम्मद मलेरकोटले का नवाब था।
- सही जोड़ी (मिलान) (पृष्ठ 179):
- धर्मयुद्ध ↔ 1704
- बाबा जुझारू सिंह ↔ 16 वर्ष
- दादी ↔ माता गुजरी
- गंगू ↔ खेड़ी गाँव
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के अभ्यास कार्यों की जाँच।
- गृहकार्य: ‘भाषा की बात’ (पृष्ठ 178) – शब्दार्थ सूची से कोई दो और शब्द लेकर वाक्य बनाएँ।
दिन 4 – मुहावरे, रचनात्मक लेखन एवं विस्तार
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (शब्द-वाक्य) साझा करें।
- “क्या आपको पता है कि 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है? यह साहिबजादों की शहादत की याद में मनाया जाता है।”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मुहावरों का अर्थ और वाक्य प्रयोग (पृष्ठ 179):
- (क) जान जोखिम में डालना:
- अर्थ: अपनी जान को खतरे में डालना
- वाक्य: “भाई मोतीराम मेहरा ने जान जोखिम में डालकर साहिबजादों तक दूध पहुँचाया।”
- (ख) मौत के घाट उतारना:
- अर्थ: मार डालना
- वाक्य: “वज़ीर खाँ ने भाई मोतीराम के पूरे परिवार को मौत के घाट उतार दिया।”
- (ग) बलिदान:
- अर्थ: अपने प्राणों की आहुति देना
- वाक्य: “साहिबजादों ने धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया।”
- (घ) विश्वासघात:
- अर्थ: धोखा देना
- वाक्य: “गंगू ने अपने मालिकों के साथ विश्वासघात किया।”
- (ङ) अडिग:
- अर्थ: अपने फैसले पर दृढ़ रहने वाला
- वाक्य: “साहिबजादे अपने धर्म पर अडिग रहे।”
- (च) वीरगति को प्राप्त होना:
- अर्थ: वीरों की तरह मरना/शहीद होना
- वाक्य: “बड़े साहिबजादे चमकौर की लड़ाई में वीरगति को प्राप्त हुए。”
- (क) जान जोखिम में डालना:
- रचनात्मक लेखन:
- “साहिबजादों की वीरता से आपने क्या प्रेरणा ली?” – 5-6 वाक्य लिखें:
- उदाहरण: “साहिबजादों ने बहुत छोटी उम्र में बहादुरी दिखाई। उन्होंने धर्म और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपनी जान दे दी। मैंने उनसे सीखा कि हमें अपने सिद्धांतों पर अडिग रहना चाहिए। हमें कभी गलत काम के लिए नहीं झुकना चाहिए।”
- “साहिबजादों की वीरता से आपने क्या प्रेरणा ली?” – 5-6 वाक्य लिखें:
- समूह चर्चा:
- “हम अपने जीवन में कहाँ-कहाँ साहस दिखा सकते हैं?” (सच बोलना, गलत काम का विरोध करना, दूसरों की मदद करना)
- “साहिबजादों की कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?” (सत्य, धर्म, आत्मसम्मान की रक्षा करना)
समापन (5 मिनट)
- “26 दिसंबर को क्या मनाया जाता है?” (वीर बाल दिवस – साहिबजादों की शहादत की याद में)
- गृहकार्य: “साहिबजादों की वीरता” विषय पर एक अनुच्छेद (6-8 पंक्तियाँ) लिखें।
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (अनुच्छेद) साझा करें – 3-4 विद्यार्थी पढ़ें।
- कहानी का सामूहिक वाचन (गंभीर और प्रेरणादायक स्वर में)।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- गुरु गोबिंद सिंह सिख धर्म के कौन-से गुरु थे? (दसवें)
- छोटे साहिबजादों के नाम क्या थे? (जोरावर सिंह और फतेह सिंह)
- उनकी उम्र क्या थी? (9 और 6 वर्ष)
- वज़ीर खाँ ने साहिबजादों को क्या लालच दिया? (महल, रेशमी वस्त्र, नौकर-चाकर)
- साहिबजादों ने क्या कहा? (हम गुरु और परमात्मा के अलावा किसी के आगे सिर नहीं झुकाएँगे)
- भाई मोतीराम मेहरा ने क्या किया? (जान जोखिम में डालकर दूध पहुँचाया)
- 26 दिसंबर को कौन-सा दिवस मनाया जाता है? (वीर बाल दिवस)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) ‘वीर साहिबजादे’ कहानी के दो मुख्य पात्रों के नाम लिखिए। (बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह – कोई दो)
- (ख) साहिबजादों ने वज़ीर खाँ के सामने सिर क्यों नहीं झुकाया? (क्योंकि वे गुरु और परमात्मा के अलावा किसी के आगे सिर नहीं झुकाते थे)
- (ग) ‘जान जोखिम में डालना’ मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए। (“भाई मोतीराम ने साहिबजादों की मदद के लिए जान जोखिम में डाली।”)
- (घ) नीचे दिए गए शब्दों का सही मिलान कीजिए:
- (ङ) ‘वीर साहिबजादे’ कहानी से आपने क्या सीखा? (कोई भी एक बात – “हमें अपने धर्म और सिद्धांतों पर अडिग रहना चाहिए”, “सच्चाई और साहस की हमेशा जीत होती है”)
- समूह चर्चा (पृष्ठ 178):
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “यह पाठ हमें सिखाता है कि साहस, सत्य और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए कितनी भी मुश्किल क्यों न हो, हमें डटकर सामना करना चाहिए। साहिबजादों ने महज 6 और 9 साल की उम्र में ऐसा बलिदान दिया, जो आज भी हम सब को प्रेरित करता है। 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाकर हम उनके साहस को याद करते हैं और उनसे प्रेरणा लेते हैं कि हमें हमेशा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। जय हो वीर साहिबजादों की! “
शिक्षण सहायक सामग्री
- गुरु गोबिंद सिंह और साहिबजादों के चित्र
- कहानी का चार्ट
- शब्दार्थ कार्ड (साहिबजादा, हुक्मरान, बुर्ज, शहादत, सिमरन)
- मुहावरा कार्ड (“जान जोखिम में डालना”, “मौत के घाट उतारना”, “बलिदान”, “विश्वासघात”, “अडिग”, “वीरगति को प्राप्त होना”)
- भारत का मानचित्र – आनंदपुर साहिब, सरहिंद, चमकौर दिखाने के लिए
- वीर बाल दिवस (26 दिसंबर) के बारे में जानकारी
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | कहानी का सस्वर, भावपूर्ण एवं गंभीर वाचन | अवलोकन/मौखिक प्रस्तुति |
| 2 | कहानी की समझ (पात्र, घटनाएँ, बलिदान) | मौखिक/लिखित प्रश्न |
| 3 | साहस, धर्मनिष्ठा, आत्मसम्मान और बलिदान के मूल्यों की समझ | समूह चर्चा/लिखित |
| 4 | नए शब्दों (साहिबजादा, हुक्मरान, बुर्ज, शहादत) का ज्ञान | लिखित अभ्यास/वाक्य प्रयोग |
| 5 | मुहावरों का अर्थ एवं वाक्य प्रयोग | लिखित अभ्यास |
| 6 | सही जोड़ी (मिलान) एवं रिक्त स्थान पूर्ति | लिखित कार्य |
| 7 | रचनात्मक लेखन (साहिबजादों की वीरता पर अनुच्छेद) | लिखित अभिव्यक्ति |
नोट: यह पाठ भारतीय इतिहास और बलिदान की भावना से जुड़ा है। बच्चों को सहिष्णुता, धैर्य और आत्मसम्मान का पाठ पढ़ाएँ। साहिबजादों के बलिदान को बच्चों की समझ के अनुसार सरल शब्दों में समझाएँ। वीर बाल दिवस (26 दिसंबर) का उल्लेख करें ताकि बच्चे इस दिन के महत्व को जान सकें। इस कहानी को पढ़ाते समय भावनात्मक और प्रेरणादायक स्वर बनाए रखें, लेकिन बच्चों को डराने वाला न बनाएँ – बल्कि साहस और आत्मबल की प्रेरणा दें। बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘वीर’, ‘बलिदान’, ‘साहस’, ‘आत्मसम्मान’ को क्या कहते हैं।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
