हम अनेक किंतु एक – कक्षा 3 हिंदी Unit 5: हमारा देश (Hum Anek Kintu Ek Class 3 Hindi)
पाठ का सारांश
यह एक सुंदर देशभक्ति कविता है, जो ‘विविधता में एकता’ (Unity in Diversity) का संदेश देती है। कविता कहती है कि हमारे देश में अनेक प्रदेश हैं, हज़ारों बोलियाँ हैं, विभिन्न रंग-रूप और वेश-भूषा है, किंतु हम सब एक देश (भारत) के नागरिक हैं। हमारी मातृभूमि और पितृभूमि एक है। हम सब मिलकर एक लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। कविता बार-बार दोहराती है – “हम अनेक किंतु एक”।
इस कविता के माध्यम से बच्चों को भाषाई, सांस्कृतिक, वैश्विक विविधता और राष्ट्रीय एकता की अवधारणा से परिचित कराया गया है। कविता के साथ विभिन्न राज्यों के बच्चों (मणिपुर, पंजाब, तमिलनाडु) के उदाहरण दिए गए हैं, जो अलग-अलग भाषा, खान-पान और वेशभूषा रखते हुए भी एक हैं। यह पाठ बच्चों में स्वीकारोक्ति, सम्मान और राष्ट्रीय गौरव की भावना विकसित करता है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- कविता को सही लय, भाव और उच्चारण के साथ पढ़/गा पाएँगे
- ‘विविधता में एकता’ की अवधारणा को समझ पाएँगे
- विभिन्न राज्यों, भाषाओं, वेशभूषा और खान-पान की विविधता को पहचान पाएँगे
- समान ध्वनि वाले शब्दों (तुकांत) को ढूँढ़ पाएँगे
- ‘भूमि’ शब्द जोड़कर नए शब्द बना पाएँगे (मातृभूमि, पितृभूमि, जन्मभूमि, कर्मभूमि)
- अनेकार्थी/समानार्थी शब्दों की पहचान कर पाएँगे
- चित्र-आधारित प्रश्नों के उत्तर दे पाएँगे
- सभी भारतीयों की एकता को उदाहरणों द्वारा समझा पाएँगे
- विभिन्न राज्यों के खान-पान, भाषा, वेशभूषा के बारे में जान पाएँगे
दिन 1 – कविता का परिचय एवं वाचन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “हमारे देश का क्या नाम है? हम कितने राज्यों में रहते हैं?” (28 राज्य + 8 केंद्रशासित प्रदेश)
- “क्या आपको पता है कि भारत में कितनी भाषाएँ बोली जाती हैं?” (हज़ारों – 22 आधिकारिक भाषाएँ)
- “क्या आपके सहपाठी अलग-अलग राज्यों से हैं? क्या वे अलग भाषा बोलते हैं? फिर भी हम सब साथ में क्यों रहते हैं?” – बच्चों को सोचने के लिए प्रेरित करें।
- पृष्ठ 167 का चित्र दिखाएँ – विभिन्न वेशभूषा, रंग, झंडा, नक्शा – पूछें – “चित्र में क्या दिख रहा है?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- कविता का सस्वर वाचन – शिक्षक कविता को गर्व, एकता और सामूहिकता के भाव के साथ पढ़कर सुनाएँ (पृष्ठ 167)।
- सामूहिक वाचन – विद्यार्थी मिलकर कविता पढ़ें – “हम अनेक किंतु एक” पंक्ति को ज़ोर से बोलें।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- प्रदेश = राज्य (State)
- विविध = अनेक प्रकार के (Diverse)
- वेश = पहनावा (Costume/Attire)
- बोलियाँ = भाषाएँ, स्थानीय भाषा (Dialects)
- टोलियाँ = समूह (Groups)
- कंठ = गला (Throat) – यहाँ गाने के स्वर/आवाज़
- राग = संगीत के स्वर (Melody/Raga)
- मातृभूमि = जन्म देने वाली भूमि (Motherland)
- पितृभूमि = पूर्वजों की भूमि (Fatherland)
- समक्ष = सामने (In front of)
- किंतु = लेकिन (But)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “कविता में कितनी बार ‘हम अनेक किंतु एक’ आया है?” (4 बार)
- गृहकार्य: कविता को एक बार और पढ़ें और ‘हम अनेक किंतु एक’ का अर्थ घर पर किसी से पूछें।
दिन 2 – कविता की गहन समझ एवं चर्चा
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – कविता का सामूहिक वाचन (हाथों को ऊपर उठाकर, एकता के इशारे से)।
- विद्यार्थियों ने ‘हम अनेक किंतु एक’ के बारे में जो समझा, उसे साझा करें।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ‘बातचीत के लिए’ प्रश्न (पृष्ठ 168):
- आप किस देश में रहते हैं? आपका प्रदेश कौन-सा है? (भारत, [विद्यार्थी का राज्य])
- आपके घर में कौन-सी भाषा बोली जाती है? (हिंदी, क्षेत्रीय भाषा, मातृभाषा)
- आपके घर के आस-पास के लोग कौन-सी भाषा बोलते हैं? (स्थानीय भाषा/हिंदी)
- सभी प्रदेश अलग हैं, लेकिन सबका देश एक है। आपके मित्रों की टोली में कौन-कौन हैं? (विभिन्न राज्यों/भाषाओं/धर्मों के मित्र)
- ‘सोचिए और लिखिए’ (पृष्ठ 168):
- “‘हम अनेक हैं किंतु एक हैं’ – उदाहरण देकर इस बात को समझाइए।”
- उदाहरण: “भारत में अलग-अलग राज्य हैं, अलग-अलग भाषाएँ बोली जाती हैं, अलग-अलग पहनावे हैं, लेकिन सब भारतीय हैं। हम सब एक राष्ट्र के नागरिक हैं। हम सब मिलकर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस मनाते हैं।”
- “कविता में भारत के विविध रूप-रंग के बारे में बताया गया है। ‘विविध रूप-रंग’ का क्या अर्थ है?” (अलग-अलग प्रकार के रूप और रंग – यानी विभिन्न प्रकार की वेशभूषा, रंग-रूप, भाषाएँ, संस्कृतियाँ)
- “‘चल रहे मिला कदम’ – इस पंक्ति में किनके कदम मिलाकर चलने की बात कही गई है?” (सभी भारतीयों की – चाहे वे किसी भी राज्य, भाषा, धर्म, जाति के हों, सब मिलकर देश को आगे बढ़ा रहे हैं)
- “‘हम अनेक हैं किंतु एक हैं’ – उदाहरण देकर इस बात को समझाइए।”
- व्यावहारिक उदाहरण:
- शिक्षक विद्यार्थियों से पूछें – “क्या आपके स्कूल में अलग-अलग राज्यों से आए बच्चे हैं? वे क्या-क्या अलग करते हैं? (भाषा, खाना, त्योहार) फिर भी वे आपके मित्र कैसे हैं?” – बच्चों को विविधता का अनुभव साझा करने को कहें।
समापन (5 मिनट)
- “भारत की विविधता हमें क्या सिखाती है?” (सहनशीलता, एकता, सम्मान)
- गृहकार्य: ‘शब्दों का खेल’ (पृष्ठ 168) – समान ध्वनि वाले शब्द छाँटें और लिखें – प्रदेश ↔ देश, रंग ↔ संग, बोलियाँ ↔ टोलियाँ, हम ↔ कदम? (शिक्षक सही जोड़ी बनाने में मदद करें)
दिन 3 – अभ्यास एवं भाषा कौशल (व्याकरण)
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (तुकांत शब्द) की चर्चा:
- प्रदेश ↔ देश
- हम ↔ कम? वास्तविक पुस्तक (पृष्ठ 168) में दिया है – प्रदेश, देश; हम, कम; रंग, संग; बोलियाँ, टोलियाँ।
- कविता का सामूहिक वाचन।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- समान ध्वनि वाले शब्द (तुकांत) (पृष्ठ 168):
- विद्यार्थी कविता से तुक वाले शब्द छाँटें:
- प्रदेश – देश
- हम – कम? नहीं, ‘हम’ का तुक ‘कम’ (पाठ में ‘कम’ नहीं है, लेकिन ‘किंतु’ से नहीं) – वास्तव में ‘रंग’ का तुक ‘संग’ और ‘बोलियाँ’ का तुक ‘टोलियाँ’ – शिक्षक बोर्ड पर लिखें:
- रंग ↔ संग
- बोलियाँ ↔ टोलियाँ
- एक ↔ लेक? (नहीं, कविता में ‘एक’ का प्रयोग अंत में हुआ है)
- विद्यार्थी अपने मन से 3-4 जोड़ियाँ लिखें – जैसे: ‘भारत’ ↔ ‘प्राचीन’, ‘नदी’ ↔ ‘बड़ी’, ‘गाँव’ ↔ ‘पाँव’ आदि।
- विद्यार्थी कविता से तुक वाले शब्द छाँटें:
- ‘भूमि’ शब्द जोड़कर नए शब्द (पृष्ठ 169):
- मातृभूमि = जन्म देने वाली भूमि (Motherland)
- पितृभूमि = पूर्वजों की भूमि (Fatherland)
- जन्मभूमि = जन्म स्थान (Birthplace)
- कर्मभूमि = काम करने की भूमि (Workplace/Field of action)
- पुण्यभूमि = पवित्र भूमि (Holy land)
- विद्यार्थी इन शब्दों का वाक्यों में प्रयोग करें – “भारत हमारी मातृभूमि और पितृभूमि है।”
- समानार्थी/अनेकार्थी – कंठ और वेश (पृष्ठ 170):
- कंठ = गला (Throat) – पर्यायवाची: गला, कंठी?
- वेश = पहनावा (Costume) – पर्यायवाची: पोशाक, वस्त्र, परिधान
- विविध = अनेक प्रकार के (Various) – पर्यायवाची: अनेक, विभिन्न, नाना
- समक्ष = सामने (In front) – पर्यायवाची: सामने, आगे, मुख्यतः
- सही अर्थ वाले वाक्य पर ✓ (पृष्ठ 170):
- (क) ‘भारतीय वेश एक’ का अर्थ है –
- ☐ सभी भारतीयों का एक ही पहनावा है। (गलत)
- ✅ भारत में अनेक प्रकार की वेश-भूषा है, लेकिन सभी भारतीय एक हैं। (सही)
- (ख) ‘बोलियाँ हजार हैं’ में ‘हजार’ का अर्थ है –
- ✅ बहुत सारी बोलियाँ हैं। (सही)
- ☐ हजार बोलियाँ हैं। (गलत – यह शाब्दिक अर्थ है, पर ‘हजार’ यहाँ बहुत अधिक मात्रा के लिए)
- (क) ‘भारतीय वेश एक’ का अर्थ है –
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के अभ्यास कार्यों की जाँच।
- गृहकार्य: ‘समझिए और लिखिए’ (पृष्ठ 169) – कविता की पंक्तियाँ पूरी करें:
- “हैं कई प्रदेश के, किंतु एक देश के”
- “बोलियाँ हजार हैं, टोलियाँ हजार हैं”
- “एक मातृभूमि है, एक पितृभूमि है”
- “हम अनेक किंतु एक” – सभी पंक्तियाँ पूरी करें (बच्चों से पूरा करवाएँ)।
दिन 4 – चित्र आधारित जानकारी, रचनात्मक लेखन एवं विस्तार
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (पंक्ति पूर्ति) साझा करें।
- “आज हम तीन बच्चों के बारे में जानेंगे – एक मणिपुर से, एक पंजाब से और एक तमिलनाडु से। वे क्या खाते हैं, क्या बोलते हैं?” – पृष्ठ 171 के चित्र दिखाएँ।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ‘पहचान और जानिए’ (चित्र आधारित) (पृष्ठ 171-172):
- अथोइबी – मणिपुर की रहने वाली – उसे खाने में एरोम्बा पसंद है।
- गुरप्रीत – अमृतसर (पंजाब) का – वह बोल नहीं सकता, संकेत भाषा में बात करता है – उसे मक्के की रोटी और सरसों का साग पसंद है।
- वेंकट – तमिलनाडु का – वह तमिल भाषा बोलता है – उसे इडली सांभर पसंद है।
- चित्र आधारित प्रश्न (पृष्ठ 172):
- “मणिपुर की अथोइबी को खाने में क्या पसंद है?” → एरोम्बा
- (अन्य प्रश्न स्वयं बनाएँ) – “गुरप्रीत कहाँ रहता है?” (अमृतसर) – “वेंकट कौन-सी भाषा बोलता है?” (तमिल)
- समूह चर्चा (बहुभाषिकता/बहुसांस्कृतिकता):
- “आपके स्कूल में क्या कोई बच्चा है जो अलग भाषा बोलता है या अलग खाना खाता है?” – बच्चे अनुभव साझा करें।
- “क्या आपने कभी किसी दिव्यांग (विकलांग) व्यक्ति को देखा है? उन्हें कैसे सम्मान देना चाहिए?” – गुरप्रीत (बोल नहीं सकता, संकेत भाषा) के माध्यम से समावेश का पाठ पढ़ाएँ।
- रचनात्मक लेखन:
- “हम सब भारतीय हैं, लेकिन अलग-अलग हैं।” इस विषय पर 5-6 वाक्य लिखें:
- उदाहरण: “हम सब भारत में रहते हैं। हम अलग-अलग राज्यों से हैं। हम अलग-अलग भाषाएँ बोलते हैं, अलग-अलग पहनावे पहनते हैं, अलग-अलग खाना खाते हैं। लेकिन हम सब एक हैं। हम सब मिलकर राष्ट्रीय त्योहार मनाते हैं। यही हमारी विविधता में एकता है।”
- “हम सब भारतीय हैं, लेकिन अलग-अलग हैं।” इस विषय पर 5-6 वाक्य लिखें:
- मिलकर गाइए – “हिंद देश के निवासी” (पृष्ठ 174 – अतिरिक्त पठन):
- यदि समय हो तो शिक्षक इस कविता को भी पढ़कर सुनाएँ – “हिंद देश के निवासी सभी जन एक हैं, रंग, रूप, वेश, भाषा चाहे अनेक हैं।” – इससे ‘हम अनेक किंतु एक’ का भाव और गहरा होता है।
समापन (5 मिनट)
- “भारत की विविधता ही इसकी शोभा है। हमें सभी को सम्मान देना चाहिए।”
- गृहकार्य: किसी एक राज्य (जहाँ आप नहीं रहते) के खाने, भाषा, पहनावे के बारे में जानकारी लिखकर लाएँ (घर के बड़ों से पूछें या किताब देखें)।
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न राज्यों की जानकारी साझा करें।
- कविता का सामूहिक वाचन (प्रत्येक बार ‘हम अनेक किंतु एक’ पर ज़ोर देते हुए)।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- कविता का शीर्षक क्या है? (हम अनेक किंतु एक)
- ‘हम अनेक हैं किंतु एक हैं’ – इसका क्या अर्थ है? (हम अलग-अलग हैं पर एक देश के नागरिक हैं)
- कविता में कौन-कौन सी चीज़ें अनेक बताई गई हैं? (प्रदेश, बोलियाँ, टोलियाँ, कंठ, राग, रूप-रंग, वेश)
- कौन-सी चीज़ें एक हैं? (देश, मातृभूमि, पितृभूमि, हम सब)
- अथोइबी किस राज्य से है? (मणिपुर)
- गुरप्रीत को क्या पसंद है? (मक्के की रोटी और सरसों का साग)
- वेंकट क्या बोलता है? (तमिल)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) ‘हम अनेक किंतु एक’ कविता की कोई चार पंक्तियाँ लिखिए।
- (ख) ‘विविध रूप-रंग’ का अर्थ अपने शब्दों में लिखिए। (भारत में अलग-अलग प्रकार के रंग-रूप, पहनावे, भाषाएँ हैं)
- (ग) ‘मातृभूमि’ और ‘पितृभूमि’ शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए। (भारत हमारी मातृभूमि और पितृभूमि है।)
- (घ) नीचे दिए गए शब्दों के समान ध्वनि वाले शब्द (तुक) लिखिए:
- रंग → ______ (संग)
- बोलियाँ → ______ (टोलियाँ)
- देश → ______ (वेश? नहीं, प्रदेश – शिक्षक ‘प्रदेश’ लिखवाएँ या बच्चों से पूछें)
- (ङ) चित्र-आधारित – “मणिपुर की अथोइबी को क्या खाना पसंद है?” (एरोम्बा)
- (च) “आपके विचार से भारत की विविधता अच्छी क्यों है?” (रचनात्मक उत्तर – “इससे हम एक-दूसरे की संस्कृति सीखते हैं, हम सब मिल-जुलकर रहते हैं, यह हमें मजबूत बनाती है।”)
- समूह गतिविधि/चित्रकला:
- विद्यार्थी भारत के मानचित्र पर किसी एक राज्य को रंग भरें और उस राज्य का नाम, भाषा, प्रसिद्ध व्यंजन लिखें।
- या सभी मिलकर तिरंगा बनाएँ और उस पर ‘हम अनेक किंतु एक’ लिखें।
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “यह कविता हमें सिखाती है कि भारत विविधताओं का देश है, लेकिन यह विविधता ही हमारी ताकत है। हम अलग-अलग भाषा बोलते हैं, अलग-अलग खाते-पहनते हैं, फिर भी हम सब एक हैं – भारतीय। हमें अपने देश की विविधता पर गर्व होना चाहिए और सभी का सम्मान करना चाहिए। जैसे कविता में कहा गया है – ‘हम अनेक किंतु एक’ – यही हमारी पहचान है।”
- अगले पाठ (Unit 5) ‘वीर साहिबज्जादे’ का संक्षिप्त परिचय – “अब हम दो बहादुर बालकों की कहानी पढ़ेंगे, जिन्होंने अपने धर्म और देश के लिए बलिदान दिया।”
शिक्षण सहायक सामग्री
- कविता का चार्ट (बड़े अक्षरों में)
- भारत का मानचित्र – विभिन्न राज्यों को दिखाने के लिए
- विभिन्न राज्यों (मणिपुर, पंजाब, तमिलनाडु) के बच्चों के चित्र
- विभिन्न राज्यों की वेशभूषा, खान-पान, भाषा के चित्र
- समान ध्वनि वाले शब्द कार्ड
- ‘भूमि’ शब्द से बने शब्द कार्ड
- रंग, कागज़, कैंची, गोंद (तिरंगा/मानचित्र गतिविधि के लिए)
- भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों के चित्र (झंडा, गान, आदि)
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | कविता का सस्वर, भावपूर्ण एवं लयबद्ध वाचन | अवलोकन/मौखिक प्रस्तुति |
| 2 | ‘विविधता में एकता’ की अवधारणा की समझ | मौखिक/लिखित प्रश्न |
| 3 | विभिन्न राज्यों की भाषा, खान-पान, वेशभूषा की पहचान | चित्र-आधारित/मौखिक |
| 4 | समान ध्वनि वाले शब्द (तुकांत), ‘भूमि’ से नए शब्द | लिखित अभ्यास |
| 5 | समानार्थी/अनेकार्थी शब्दों की समझ | लिखित/मौखिक |
| 6 | रचनात्मक लेखन (विविधता पर अपने विचार) | लिखित अभिव्यक्ति |
| 7 | राष्ट्रीय एकता एवं समावेश (गुरप्रीत – संकेत भाषा) की भावना | समूह चर्चा/अवलोकन |
नोट: बहुभाषिकता और बहुसांस्कृतिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि वे अपनी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘देश’, ‘मातृभूमि’, ‘एकता’ को क्या कहते हैं। विभिन्न राज्यों के नाम, उनकी भाषाओं, त्योहारों और व्यंजनों की चर्चा करें – इससे बच्चों में सहिष्णुता और सम्मान की भावना विकसित होती है। ‘गुरप्रीत’ (जो बोल नहीं सकता) के माध्यम से दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान का संदेश दें। विद्यार्थियों को ‘हम अनेक हैं किंतु एक हैं’ – इस पंक्ति को याद करने और उसे अपने जीवन में उतारने के लिए प्रेरित करें। कविता को सामूहिक रूप से गाने का अभ्यास करवाएँ, जिससे एकता का अनुभव हो।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
